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17 फ़रवरी 2017

जीवन की गाडी कैसे ड्राइव करे

परिवार एक ऐसी गाड़ी की तरह है जिसमें पति-पत्नी के रूप में दो पहिए होते हैं जिसे दोनों को मिलकर खींचना होता है अगर इन दोनों पहियों में से अगर एक भी खराब होता है तो गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है शादी के बाद दाम्पत्य जीवन(Married life)में प्यार और सुख शांति बनाए रखने के लिए पति और पत्नी को मिलकर ही परिवार में सामंजस्य बिठाना होता है तभी आपके परिवार में सुख-शांति बनी रह सकती है और जहां सुख-शांति है वहीं धन और खुशहाली का भी निवास होता है लक्ष्मी की बरकत भी वही होती है-

जीवन की गाडी कैसे ड्राइव करे

जिम्मेदारी(Responsibility)कैसे निभायें-


1- समृद्ध और खुशहाल परिवार बनाने के लिए पत्नियों की तरह पतियों की भी बहुत अहम भूमिका होती है पति या पत्नी में से कोई भी परिवार में अपनी भूमिका से पीछे नहीं हट सकता है क्योंकि दोनों का कार्य क्षेत्र अलग-अलग है पति को परिवार के अंदर भी कुछ जिम्मेदारियों(Responsibilities)को निभाना पड़ता है-

2- चूँकि शादी के बाद पत्नी का जो सबसे बड़ा सहारा होता है वह उसका पति ही होता है क्योंकि नई दुल्हन आपकी पत्नी बनने के बाद वह अपने मायके में अपना सब कुछ छोड़कर उसके पास आती है इसलिए पति का भी फर्ज बनता है कि वह अपनी पत्नी की अच्छी तरह से देखभाल(Care)करे-

3- परिवार के अंदर पत्नी का कार्य क्षेत्र परिवार के अंदर आता है तो पति का कार्य क्षेत्र परिवार के बाहर का है लेकिन सामूहिक रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में दिए गए दोनों का सहयोग का फल मिलकर सामने आता है इसलिए पति और पत्नी दोनों को ही मिलकर अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए काम करते रहना चाहिए-

4- अधिकतर यही देखा जाता है कि शादी के बाद सास और बहू के छोटे-मोटे झगड़े तो होते ही रहते हैं ऐसे में पति अपने कार्य क्षेत्र से घर में आने पर उसकी मां झगड़े की बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताती है और फिर चाहे गलती खुद की ही क्यों न हो फिर भी सारा इल्जाम(fault)अपनी बहू पर लगा देती है पति भी अपनी मां की बात सुनकर सारा गुस्सा अपनी पत्नी पर निकाल देता है और कई बार तो उसे पीटने पर भी आ जाता है ऐसा होने पर पत्नी सिर्फ आंसू ही बहा सकती है और कुछ नहीं कर सकती है -

5- शादी के बाद पत्नियां पति को परमेश्वर इसीलिए कहती है क्योंकि जिस प्रकार से परमेश्वर सबकी रक्षा करता है वैसे ही पति भी परमेश्वर की तरह उसकी ऱक्षा करें-उसे हर तरह के दुख और तकलीफ से बचाकर रखें-

6- हम यहाँ ये नहीं कहेगे कि माँ का दर्जा कुछ भी नहीं है माँ का कर्ज तो बेटा जीवन भर नहीं चुका सकता है लेकिन पति को इस बात का पूरा ख्याल रखना चाहिए कि उसकी पत्नी उसकी वजह से ही इस घर में आई है तो फिर पत्नी पर अगर किसी तरह की परेशानी आती है तो वह सबसे पहले अपने पति से ही कहती है क्योंकि वह ही उसके लिए सबसे बड़ा सहारा होता है इसलिए पति का फर्ज बनता है कि पत्नी के मान-सम्मान की पूरी तरह से रक्षा करे और माँ को पत्नी के साथ सामंजस्य बिठाने की युक्ति पे विचार करे न कि प्रताड़ना(Harassment)दे पति बात को पूरी तरह दोनों पक्ष की सुने और अपने विवेक द्वारा उसमे से निष्कर्ष निकाले तथा जिसकी गलती हो तो प्यार से समझाए-प्यार से तो सब कुछ मनवाया जा सकता है माँ को भी हमेशा ये अवस्य बताये यदि हम आपके बेटे है तो ये अब आपकी बेटी है इसे बेटी मानकर ही डांटे-

7- पत्नी को भी माँ से सामंजस्य बिठाने को कहे और सास को अपनी माँ की तरह ही समझने को प्रेरित करे भूल से भी आप अपनी पत्नी की खामियों(Mistakes)को अपने घर वालो के सामने व्यक्त न करे न ही उसको अनायास ही मजाक(joke)का पात्र बनाए जो बात आपको बुरी लगती है क्या वो बात दूसरे को बुरी नहीं लगेगी इसलिए आप जरा सोचे और अपने परिवार को टूटने में अपना योगदान करे-

8- मजाक एक हद तक ही सही होता है यदि मजाक हो भी रहा है तो उस समय पति का फर्ज तो यही बनता है कि अपनी पत्नी का साथ दे क्योंकि जब सब लोग एक साथ मिलकर उसकी पत्नी का मजाक उड़ा रहे हैं तो कोई पत्नी के साथ भी तो होना चाहिए-पत्नी को ऐसा कभी भी एहसास नहीं होना चाहिए कि वह अकेली है बल्कि उसे तो ऐसा लगना चाहिए कि आप तो उसके साथ है-ऐसा मजाक भी न करे और न ही किसी को करने दे जो सामने वाले को रोने पर मजबूर कर दे-


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