ज्ञान मुद्रा कैसे करे इसके क्या लाभ हैं

हमारे हाथों में जो अंगूठा होता है वो अग्नि तत्व का प्रतीक होता है और तर्जनी अंगुली वायु तत्व की प्रतीक होती है ज्योतिष के अनुसार हमारा अंगूठा मंगल ग्रह का प्रतीक ओर तर्जनी अंगुली बृहस्पति का प्रतीक होता है जब यह दोनों तत्व आपस में मिलने से वायु तत्व में वुद्धि होती है जिससे कारण बृहस्पति का प्रभाव बढ़ता है और यही कारण है कि योग आसन करने से हमारी बुद्धि का विकास होता है-जब भी हम ज्ञान मुद्रा(Gyan Mudra)में योग करते हैं तो हमारी बुद्धि तेज होती है इसलिए इस योग को करने के लिए ध्यान लगाना बहुत ही आवश्यक है ताकि इसका हमें अधिक फायदा हो-

ज्ञान मुद्रा कैसे करे इसके क्या लाभ हैं

अंगूठे एवं तर्जनी अंगुली के स्पर्श से जो मुद्रा बनती है उसे ज्ञान-मुद्रा(Gyan Mudra)कहते हैं ज्ञान मुद्रा के लिए आप सबसे पहले पदमासन या सुखासन में बैठ जाएँ फिर आप अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें तथा अंगूठे के पास वाली अंगुली(तर्जनी)के उपर के पोर को अंगूठे के ऊपर वाले पोर से स्पर्श कराएँ तथा हाँथ की बाकि अंगुलिया सीधी व एक साथ मिलाकर रखें-

ज्ञान-मुद्रा(Gyan Mudra)में सावधानियां-


ज्ञान मुद्रा से सम्पूर्ण लाभ पाने के लिए आपको को चाहिए कि आप  सादा प्राकृतिक भोजन करे आप भूल कर भी मांस मछली, अंडा,शराब,धुम्रपान,तम्बाकू,चाय,काफ़ी कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन न करें तथा उर्जा का अपव्यय से बचने के लिए अनर्गल वार्तालाप,बात करते हुए या सामान्य स्थिति में भी अपने पैरों या अन्य अंगों को हिलाना, ईर्ष्या, अहंकार आदि से दूर रहें-इससे प्राप्त उर्जा का अपव्यय होता है-

भोजन करने के तुरंत बाद एवं चाय, कॉफी पीने के तुरंत बाद हमें कोई भी मुद्रा नहीं करनी चाहिए ऐसे करने से हमें फायदे की बजाय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है मुद्रा करते समय किसी प्रकार की असहजता या किसी प्रकार का कोई कष्ट हो तो हमें मुद्रा बीच में हो छोड़ देनी चाहिए-

ज्ञान मुद्रा(Gyan Mudra)करने का समय व अवधि-


प्रतिदिन प्रातः दोपहर एवं सांयकाल इस ज्ञान मुद्रा को किया जा सकता है प्रतिदिन 48 मिनट या फिर अपनी सुविधानुसार इससे अधिक समय तक ज्ञान मुद्रा को किया जा सकता है लेकिन यदि एक बार में 48 मिनट करना संभव न हो तो तीनों समय 16-16 मिनट तक कर सकते हैं लेकिन पूरे दिन में पूर्ण लाभ के लिए प्रतिदिन कम से कम 48 मिनट ज्ञान मुद्रा को अवश्य ही करना चाहिए-

ज्ञान मुद्रा(Gyan Mudra)से होने वाले लाभ-


1- ज्ञान मुद्रा में ध्यान का अभ्यास करने से एकाग्रता बढ़ती है जिससे आपका ध्यान परिपक्व होकर आपकी आध्यात्मिक प्रगति होती है-ज्ञानमुद्रा इसलिए शक्तिशाली कही गई है ‍क्योंकि यह आपकी तंद्रा को तोड़ती है हाथों की ग्रंथियों का संबंध हमारे मस्तिष्क से होता है दाएँ हाथ का संबंध बाएँ और बाएँ हाथ का संबंध दाएँ मस्तिष्क से माना गया है ज्ञानमुद्रा से मस्तिष्क के सोए हुए तंतु जाग्रत होकर मानव के होश को बढ़ाते हैं-

2- ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से आपके अंदर दया,निडरता,मैत्री,शान्ति जैसे भाव जाग्रत होते हैं-

3- ज्ञान मुद्रा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी मुद्रा है इसके अभ्यास से विद्यार्थियों बुद्धि का विकास होता है तथा स्मरण शक्ति व एकाग्रता बढती है एवं पढ़ाई में मन लगने लगता है-

4- ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से अनिद्रा,सिरदर्द, क्रोध, चिड़चिड़ापन, तनाव,बेसब्री, एवं चिंता नष्ट हो जाती है-

5- ज्ञान मुद्रा करने से हिस्टीरिया रोग समाप्त हो जाता है और ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से स्नायु मंडल मजबूत होता है-

6- नियमित रूप से ज्ञान मुद्रा करने से मानसिक विकारों एवं नशा करने की लत से छुटकारा मिल जाता है तथा इस मुद्रा को करने से संकल्प शक्ति में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है-

7- इस मुद्रा के अभ्यास से आमाशयिक शक्ति बढ़ती है जिससे पाचन सम्बन्धी रोगों में लाभ मिलता है-

8- शरीर में रोग प्रतिकार की शक्ति बढ़ती है ज्ञान मुद्रा करने से हमें जो तनाव के कारण रोग होते हैं जैसे कि उच्च रक्तचाप, हाई ब्लडप्रेशर, ह्रदय रोग का खतरा नहीं होता है-

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