दैवीय चमत्कारिक शक्तियां क्या हैं

अलौकिक दिव्य और चमत्कारिक शक्तियाँ हर मनुष्य के मन के अन्दर ही छुपी होती है मगर आप इन चमत्कारिक शक्तियों(Divine Wondrous Powers)से आप अज्ञान है क्युकि सच ये है कि आपने कभी आजतक इन Powers पर सोचने की आवश्यकता ही नहीं समझी है-

दैवीय चमत्कारिक शक्तियां क्या हैं

ईश्वर ने मनुष्य जीवन के साथ-साथ आपको आपके अंदर कुछ ईश्वरीय शक्ति भी दी है लेकिन आपको जीवन के माया-मोह-तेरा-मेरा से फुर्सत ही नहीं मिली है तो आपको-फिर कैसे आपको इन शक्तियों(Powers)की अनुभूति होगी-

दैवीय चमत्कारिक शक्तियां(Divine Powers)क्या हैं-


आपका बाह्यमन जब सुप्तावस्था  में होता है तब अंर्तमन सक्रिय होने लगता है और इसी अवस्था को ध्यान कहा जाता है मन को बेलगाम घोड़े की संज्ञा दी गई है क्योंकि मन कभी एक जगह स्थिर नही रहता तथा शरीर की समस्त इद्रियों को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश करता है

मन हर समय नई -नई इच्छओं को उत्पन्न करता है यही हम सबके अंर्तमन का स्वभाव है शांत निर्मल और पवित्र जो मनुष्य को हमेशा अच्छे कार्यो के लिए प्रेरित करता है एक इच्छा पूरी नही हुई कि दुसरी इच्छा जागृत हो जाती है और मनुष्य उन्ही इच्छाओं की पुर्ति की चेष्टा करता रहता है-जिसके लिए मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय, पीड़ा इत्यादि से गुजरना पड़ता है इसके बावजुद भी जब मनुष्य की इच्छाओं की पूर्ति नही हो पाती है-तब मन में क्लेश तथा दुख होने लगता है-

यदि मन को किसी तरह अपने वश में कर एकाग्रचित कर लिया जाय तब मनुष्य की आत्मोन्नति होने लगती है तथा समस्त प्रकार के विषय विकारों से उपर उठने लगता है और अंर्तमन में छुपे हुये उर्जा के भंडार को जागृत कर अलौकिक सिद्धियों का स्वामी बन सकता है मन को नियंत्रित करना थोड़ा कठिन है परंतु कुछ प्रयासो के बाद मन पर पूर्ण रूप से नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है मन को साधने के लिए शास्त्रों में अनेकों प्रकार के उपाय हैं जिसमे से सबसे आसान तरीका है-

ध्यान साधना-


ध्यान के माध्यम से कुछ ही दिनों या महिनो के प्रयास से साधक अपने मन पर पूरी तरह नियंत्रण रखने में समर्थ हो सकता है त्राटक(Trataka)साधना से मन की एकाग्रता धीरे-धीरे बढ़ने लगती है और मनुष्य के शरीर की सुप्त शक्तियाँ(Powers)जागृत होने से शरीर पूर्णतः पवित्र निर्मल तथा निरोग हो जाता है तथा त्राटक(Trataka)के द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है-

इससे विचार संप्रेषण, दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना,सम्मोहन(Hypnosis), आकर्षण(Attraction), अदृश्य वस्तु को देखना, दूरस्थ दृश्यों को जाना जा सकता है ये मेरा स्वयं का किया गया प्रयोग है और आज से छब्बीस साल पहले किया था-यकीन माने आपको कोई हानि नहीं होगी आपको जीवन में घटित घटनाएं भी दिख सकती है और कभी -कभी भविष्य में होने वाली घटनाएं भी दिख जाती है लेकिन जब वो बाद में सामने आती है तब महसूस होता है-

क्या लाभ है-


1- किसी भी विशिस्ट व्यक्ति या अधिकारी से उसकी नजरो में देख कर आप अपना मन चाहा कार्य करा सकते है बस आप मन के संकल्प से उसकी नजरो में देखते हुए उसे आदेश दे कि ये मेरा काम करो वास्तविकता ये है कि अगर आपने अपनी साधना के चरम स्तर को छू लिया है तो वह व्यक्ति आपको चाह कर भी मना नहीं कर पायेगा और आपका कार्य करने पर मजबूर हो जाएगा लेकिन एक बार अवश्य बता देना उचित समझता हूँ कि यदि आप अपने मन में किसी का किसी भी प्रकार अहित सोच कर इस योग साधना का प्रयोग करना चाहते है तो सफलता मुश्किल है तथा साधना सिद्ध होने के बाद भी इसका दुरूपयोग करते है तो ये दैवीय शक्ति आपसे जाती रहेगी-

2- इससे वशीकरण भी किया जा सकता है मगर अनुपयुक्त कार्य करने से इसकी शक्ति जाती रहती है तथा इस प्रकार के कु-कृत्य का परिणाम भी भोगना पड़ता है-

3- आप नियमित प्रयोग करके आप अपने जीवन को सफल कर सकते है और उन्नति भी कर सकते है अगर आप व्यापारी या नौकरी पेशा है तो इसका जादा लाभ आपको मिल सकता है-

4- पढाई में मन लगाना या कार्य में मन लगाना रोजगार में रोजी रोटी के संसाधन मिलने में ये योग साधना आपके लिए सहायक है-जीवन की सफलता के लिए जो लोग परेशान रहते है वो सफल हो सकते है मैने आज कल के युवा वर्ग की परेशानी को देखते हुए ये प्रयोग लिखा है जो विद्यार्थी पढ़ लिख कर भी रोजगार के लिए परेशान रहते है उसमे भी सहायक है-

5- आप किसी रूठे व्यक्ति को मनाना जैसे कार्य आप आसानी से करा सकते है-जीवन में एक बार इस प्रयोग को करे और लाभ ले यदि सही तरीके से आप इस त्राटक योग साधना को कर लेते है तो आपको फिर अंदर आत्मा से मुझे धन्यवाद देना आपका फर्ज है अन्यथा लाभ न हो तो मुझे आप ढोगी या बेवकूफ जेसे संबोधन प्रयोग कर सकते है-जबकि मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है न ही किसी को मार्ग से भटकाना है-

6- सूर्य त्राटक के चरण इसलिए नहीं लिखें है कि लोग अहित की भावना से गलत कार्य कर बैठते है क्युकि तलवार सिर्फ सच्चे साधक को ही देना उपयुक्त होता है-

Upcharऔर प्रयोग-

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