बच्चों के सूखा रोग के लिए आयुर्वेदिक उपचार

हम पहले की पोस्ट में लिख चुके हैं कि यह सूखा रोग(Rickets)असाध्य होता है जिस घर में यह बच्चों को लग जाता है उसमें क्षयरोग की भाँति बच्चों की जाने जाती हैं यह प्राण नाशक रोग बालक की जीवन लीला समाप्त करके ही पीछा छोड़ता है पिछली पोस्ट में हमने लक्षण और कारण के बारे में बताया था "बच्चों में सूखा रोग या कुपोषण क्या है" इस पोस्ट में हम इसके उपचार की व्याख्या करेगे और इस रोग से बचने के उपाय भी आपको बताएगें-

बच्चों के सूखा रोग के लिए आयुर्वेदिक उपचार

सर्वप्रथम यदि बच्चे को माता के दूध की खराबी से सूखा रोग हुआ हो तो आपको पहले माता के दूध को शुद्ध कराने को चिकित्सा करानी चाहिये और उसकी माता का दूध पिलाना बन्द कराकर उत्तम गाय या बकरी का विधिपूर्वक औटाया हुआ शुद्ध दूध पिलाना चाहिये और यदि बालक शुद्ध दूध और यदि वह अन्न खाने लगा हो तो अन्य खाने-पीने की वस्तु का ठीक प्रबन्ध करना चाहिये-

इस सूखा रोग को चिकित्सा में ढील डालना या टालम-टोल करना अच्छा नहीं क्योंकि बहुत बढ़ जाने पर यह अच्छा होता ही नहीं है ऐसा भी देखा गया है-

आयुर्वेदिक उपचार-


1- सूखा रोग(Rickets)से पीड़ित बालक को सितोपलादि चूर्ण(योग्य वैद्यों के यहाँ सदा मिलता है)में आप स्वर्णभस्म अथवा मोती भस्म अथवा मूँगा की भस्म मिलाकर दिन-रात में चार बार नित्य समान भाग मधु घृत में मिलाकर खिलावें-

2- च्यवनप्राश अवलेह में दस माशे में स्वर्ण या मोती-मूँगा की भस्म मिलाकर दूध में घोलकर दिन-रात्रि में सवेरे, दोपहर, शाम-तीन बार खिलावें-

3- अतीस, काकड़ा सींगीं, छोटी पीपल और नागरमोथा इन चारों को उत्तम(अतीस घुनी न हो)लेकर कूटकर चूर्ण बनावें फिर इस चूर्ण की मात्रा बालकों के लिए एक रत्ती से चार रत्ती तक की है-इस चूर्ण में दो चावल स्वर्ण भस्म और आधी रत्ती मोती या मूँगा की भस्म मिला कर मधु (छोटी मक्खी का असली शहद) से मिलाकर दिन रात्रि में दो बार से चार बार तक खिलावें-

4- बच्चे के शरीर में “महालाक्षादि तैल” या “बृहच्छतावरी तैल” अथवा “अश्वगन्धादि तैल” की नित्य मालिश करें और साथ ही ऊपर लिखी औषधियों में से कोई औषधि खिलावें-औषधियों के सेवन के समय बच्चे को सिर्फ दूध ही पिलाना चाहिये और कुछ नहीं देना है इस प्रकार बालक की चिकित्सा करानी चाहिये-

एक अन्य प्रयोग-


सामग्री-

सितोपलादि चूर्ण(Sitopladi Churan)- 20 ग्राम
प्रवाल पिष्टी(Prawal Pishti)- 10 ग्राम
अमृता सत(Amrita Sata)- 10 ग्राम
गोदन्ती भस्म( Godanti Bhasma )- 5 ग्राम
मंडूर भस्म(Mandoor Bhasma)- 5 ग्राम
मुक्ता पिष्टी(Mukta Pisti)- 4 ग्राम
कुमारकल्याण रस(Kumar Kalyan Rasa)- 1 ग्राम

आप इन सभी आयुर्वेदिक औषधियों को आपस में मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें तथा इस मिश्रण की बच्चे की उम्र के अनुसार 120 या 90 या 60 पुड़ियाँ बना कर किसी डिब्बे में रख दें अब रोजाना दिन में दो बार सुबह और शाम के समय एक पुडिया शहद के साथ या माँ के दूध के साथ दें-इस प्रकार के प्रयोग से बच्चो में होने वाले सूखे रोग(Rickets)से निजात मिल जाती है-

नोट-यह उपाय और दवा सिर्फ जानकारी के लिए है आप उपचार हेतु आप किसी अच्छे चिकित्सक से संपर्क करके ही दवा ले क्योकि सभी बच्चों को एक जैसी दवा नहीं दे सकते हैं-

आप डायरेक्ट पोस्ट प्राप्त करें-

Whatsup No- 7905277017


Upcharऔर प्रयोग-

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