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4 अप्रैल 2017

समारोह में खाना-खाने की गलत प्रथा का प्रचलन बढ़ रहा है

आधुनिकता प्रगति के लिए आवश्यक है लेकिन कुछ बातें जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो ऐसी बातों को लेकर हम प्रगतिशील बने ये बिलकुल भी आवश्यक नहीं है आज समाज में हर समारोह में प्लेट में खाने का प्रचलन तेजी से बढ़ गया है लेकिन शरीर तो आपका है कभी सोचा है कि आप समारोह में इस प्रचलन को मान्यता क्यों दे रहें है-

समारोह में खाना-खाने की गलत प्रथा का प्रचलन बढ़ रहा है

हाँ ये भी सत्य है कि भला ये सब बाते सोचनें की फुर्सत भला आपको क्यों होगी आपका सारा ध्यान तो बस धन कमाने में चला जाता है और जो थोडा बहुत समय बचा तो फेसबुक चैटिंग और राजनीती की चर्चा में निकल जाता है फिर आपको क्या पड़ी है कि आप अपना दिमाक खराब करें-

तो भाई मेरा भी क्या जाता है खाते रहो और आधुनिकता की शैली में जीते रहो-आपका शरीर है जैसे मर्जी रक्खो इसे-लेकिन बाद में अनेक बीमारियों की दवा भी आपको ही खोजनी होगी-और आज डॉक्टर भगवान् नहीं रहा व्यापारी हो गया है तो जो आपने कमाया है उसके लिए तैयार रखिये?

आज से पचास साल पहले आपके बुजुर्ग आपको बताते होगे कि पत्तल और दोने में खाने का प्रचलन था आज उसकी जगह प्लेट और चम्मच ने ले लिया तो आपको पता है कि आज जो लोग पत्तल में खाने पर हमारे बुजुर्गो को मुर्ख समझते है जबकि वास्तविकता इसका विपरीत है पत्तल और दोने में खाना कितना शुद्ध होता था आप जान कर आश्चर्य करेगे-

वनस्पति की विभिन्न जातियों से पत्तल और दोनों का निर्माण किया था पत्तल और दोनों का निर्माण अधिकतर पलास के पत्ते से होता था और पलाश की महिमा क्या है आप मेरी इस पोस्ट में पढ़ सकते है- 

"टेसू यानि पलास के अदभुत प्रयोग"

प्राचीन ग्रंथों मे केले की पत्तियो पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियो का यह प्रयोग होने लगा है केरला में ये प्रथा आज भी है -

अब सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हम जब खड़े -खड़े खाते है जबकि ये खाने का विधान बिलकुल भी नहीं है क्युकि इससे हमारे हाथ की नस पे विपरीत प्रभाव पड़ता है और दूसरी बात अगर ध्यान दें तो आपका पेट भी नहीं भरता है और तीसरी बात ये है कि किस व्यक्ति को क्या रोग है इसका कोई पता आपको भी नहीं होता है और एक ही डोंगे से बार-बार भोजन को निकाल कर आप अपनी झूठी प्लेट में डालना-अब आप समझ गए होगे कि ये अग्रेजी फैसन हमें कहाँ ले आया है और हम रोग ग्रस्त हो रहे है लेकिन आँखों के कपाट बंद है और आगे भी शायद यही होने वाला है-

इस बार आप जब किसी समारोह में खाना खाने जाएँ तो थोडा वक्त निकाल कर आपको देखना चाहिए कि जहाँ ये खाने की प्लेट साफ़ की जाती है एक टब में झूठे बर्तन या प्लेटे डाल दूसरे टब में सादे पानी में डुबो कर वापस फिर सजा दिया जाता है बस हो गया आपके खाने का बर्तन साफ़- बाकी आप समझ ही सकते है कि अगर किसी को अस्थमा या टी बी जैसा घातक रोग है तो उसके जीवाणु आप तक फिर क्यों नहीं पहुँच सकते है- 

ध्यान से सोचों आखिर ये अंग्रेजी प्रथा हमें कहाँ ले के जा रही है और रोग क्यों बढ़ रहे है फिर भी हम आज की आधुनिकता की चकाचौंध में खोये हुए खुद को बहुत बड़ा स्मार्ट समझ रहे है और अपने दादा-दादी ,नाना-नानी के बताये जाने वाले ज्ञान को बैकफुट पे रख रहे है अरे भाई उनकी उम्र तो कुछ दिन बची है लेकिन आप क्यों असमय बुढ़ापे की ओर अग्रसर हो रहे है-

आखिर आप क्या करें-

जब भी आपको किसी समारोह का निमन्त्रण प्राप्त होता है पहला सवाल निमंत्रण देने वाले से यही करें कि क्या पत्तल-दोने का कार्यक्रम नहीं हो सकता है मेरा मानना है कि इसका पूर्ण रूप से सामजिक बहिस्कार किया जाना चाहिए जी हाँ सुविधाओ का उपयोग करना ठीक है लेकिन जहाँ आपकी सेहत से प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला है वहां हमें इस प्रकार की पार्टी का बहिस्कार करना चाहिए आप कहेगें सामने वाला नहीं करना चाहता है तो मित्रों आप खुद से शुरू तो करिए-धीरे-धीरे ये अग्रेजी प्रथा अपने आप समाप्त हो जायेगी-

कौन से पत्तल-दोने में खाने के क्या गुण है- 

आइये आज हम आपको बता देते है कि पलाश के पत्तल में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है जो शायद आपको पता ही नहीं होगा फिर भी स्मार्ट हैं-

केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है-

रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है और इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासीर(पाइल्स)के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है-

जोडो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है-

लकवा(पैरालिसिस)होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलो को उपयोगी माना जाता है-अब आप समझ ही गए होगे कि दावत खाने के चक्कर में हम रोगों के वाइरस को खुद ही अपने घर ला रहे है-

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