27 अक्तूबर 2018

जीवन की समस्या का अमोध उपाय

Perfect Solution of Life Problem


जीवन में समस्यायें सभी को है किसी को कम समस्या है किसी को जादा समस्या (Problem) है कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से सुखी नहीं है और जब आपके पास कोई भी उपाय शेष नहीं रह गया है और चारो तरफ अन्धकार है आपकी कोई भी सहायता नहीं कर पा रहा है तो यदि आपको हम पर पूर्ण विश्वास है तो आप विश्वास के साथ बताये गए प्रयोग को कर लें और समस्याओं से मुक्ति पायें-

जीवन की समस्या का अमोध उपाय

ये प्रयोग करने से पहले इस बात को समझ लेना अति आवश्यक है कि आपको एक मजबूत संकल्प ही बनाना होगा बस ये सोच कर आप बिलकुल न करें कि आपको इसे सिर्फ आजमाना है वैसे तो इसका विधान और साधना प्रक्रिया बहुत कठिन है लेकिन आज हम आपको एक साधारण और नित्य की जाने वाली साधना से आपको अवगत करा रहे है तथा इसके जीवन में क्या-क्या लाभ होंगे इससे भी आपको अवगत करायेगें ये बहुत ही विशिष्ठ साधना है अत:थोड़ी सावधानी की आवश्यकता भी अवश्य होगी जिसका आप ध्यान रक्खें-

आज के युग में समय न होने के कारण विस्तृत साधना करना हर व्यक्ति के लिए सम्भब नहीं है लेकिन यदि आप गृहस्थ जीवन जी रहे है और समस्याएं आप का पीछा कर रही है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही है तो फिर आप इसका प्रयोग अवश्य करें- 

इस प्रयोग से यदि आपके व्यापार पर किसी की बुरी नजर लग गई है या आपका व्यापार नहीं चल रहा अथवा आपकी पत्नी रूठ गई है या फिर पति किसी और स्त्री के जाल में फंस गया है या किसी दुश्मन ने आपको अनायास ही परेशान करना शुरू कर दिया है अथवा आपको आपके घर में आपसी विवाद या कलह होता नजर आ रहा है या आप नौकरी में किसी बॉस से परेशानी में पड़ गए है वो आपको सताता है या आपके आफिस में कोई कर्मचारी बेवजह आपकी चुगली करके आपकी नौकरी पर डांका डालना चाहता है या आपके घर में किसी अद्रश्य शक्तियों का प्रवेश हो गया है या फिर किसी और प्रकार की समस्या है तो इसे अवश्य आजमायें-

यदि इस बगुलामुखी (Bagalamukhi) मंत्र को कोई भी पत्नी या पति अर्थात जो भी पीड़ित है दुःखी है विधानपूर्वक स्नान करके, शुद्ध पीले वस्त्र धारण कर, रात्रि 9 बजे के पश्चात्, दक्षिण दिशा में बैठ कर 108 बार पाठ करे तो निश्चित ही पारिवारिक शत्रुता, झगड़े, वैमनस्य समाप्त हो जाते हैं यह मेरा अनुभव रहा है कि कोई पत्नी या पति अपने जीवन साथी से दुःखी हो या उसकी आदतों से परेशान हो, घर में नित्य झगड़े होते हों उसके समाधान के लिए यह प्रयोग विश्वास के साथ नियम से कर लें-

एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा अनायास ही आप इसका प्रयोग किसी से नाजायज प्रेम या वशीकरण आदि के लिए करेगें तो आपको निश्चित रूप से हानि की सम्भावना है बस इस साधना का उद्देश्य सात्विक और परोकार अथवा गृहस्थ जीवन के सुख के लिए करना ही उपयुक्त है पराई स्त्री, महिला या अनायास किसी को दंड देने पर आपको माँ भगवती बगुलामुखी की प्रताड़ना भी झेलनी पड़ सकती है इसलिए सावधान करना मेरा नैतिक कर्तव्य है आगे आप खुद समझदार हैं-

कैसे करे आप इस प्रयोग को-


सर्वप्रथम पीत (पीला) वस्त्र बिछा कर उस पर पीले चावल की ढेरी बनावें और सामने पीतांबरा देवी (बगुलामुखी) का चित्र रख कर या फिर जिन लोगों के पास देवी का चित्र उपलब्ध नहीं है तो आप चावल की ढेरी को पीतांबरा देवी मान कर उसकी विधिवत पंचमोपचार (धूप दीप फूल फल नैवेध्य) से पूजा करें इसमें आप पीले पुष्प, पीले चावल आदि का उपयोग करें तथा घी, या तेल का दीपक जला कर सर्वप्रथम गुरु पूजा, फिर पीतांबरा देवी की पूजा करें-

इसके पश्चात् आप संकल्प करें कि मैं अपनी अमुक समस्या (आपकी जो भी समस्या हो) के समाधान हेतु (समस्याः पारिवारिक कष्ट, पति, या पत्नी के अत्याचार से दुःखी हों आदि) बगुलामुखी (Bagalamukhi) मंत्र का 108 बार जप कर रहा हूँ या कर रही हूँ और माता मुझे शीघ्रातिशीघ्र इस समस्या से मुक्ति दिलावें-

इसके पश्चात गंगाजल से छिड़काव कर (स्वयं पर) यह मंत्र पढें-

"अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाङ्गतोऽपिवा, य: स्मरेत, पुण्डरी काक्षं स बाह्य अभ्यांतर: शुचि:।"

उसके बाद इस मंत्र से दाहिने हाथ से आचमन करें-

ऊं केशवाय नम:
ऊं नारायणाय नम:
ऊं माधवाय नम:

अन्त में

ऊं हृषीकेशाय नम: " (कह के हाथ धो लेना चाहिये)

अब माता का ध्यान करें, याद रहे सारी पूजा में हल्दी और पीला पुष्प अनिवार्य रूप से होना चाहिए-हाथ में पीले पुष्प लेकर उपरोक्त ध्यान का शुद्ध उच्चारण करते हुए माता का ध्यान करे-

बगुलामुखी (Bagalamukhi) देवी का ध्यान मन्त्र-


मध्ये सुधाब्धि मणि मण्डप रत्न वेद्यां,
सिंहासनो परिगतां परिपीत वर्णाम,
पीताम्बरा भरण माल्य विभूषिताड्गीं
देवीं भजामि धृत मुद्गर वैरिजिह्वाम
जिह्वाग्र मादाय करेण देवीं,
वामेन शत्रून परिपीडयन्तीम,
गदाभिघातेन च दक्षिणेन,
पीताम्बराढ्यां द्विभुजां नमामि॥

अब आप यह मंत्र जाप करें मंत्र इस प्रकार है-

"ऊं ह्लीं बगलामुखि! सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊंस्वाहा। "

आप इस मंत्र का जाप पीली हल्दी की गांठ की माला से करें जप के समय माला को ढक कर ही जप करें तथा जब के बाद भी माला को किसी कपड़े के अंदर ढक कर ही रक्खें जप के समय तर्जनी ऊँगली को माला से दूर ही रक्खें लेकिन आपको कम से कम पांच बातें पूजा में अवश्य ध्यान रखनी है-

1. ब्रह्मचर्य
2. शुद्घ और स्वच्छ आसन
3. गणेश नमस्कार और घी का दीपक
4. ध्यान और शुद्ध मंत्र का उच्चारण
5. पीले वस्त्र पहनना और पीली हल्दी की माला से जाप करना

यदि किसी को कोई समस्या आये या कोई बात समझ में नहीं आ रही है तो आप मुझसे भी पूछ सकते है-

Whatsup No- 7905277017

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