मिर्गी का दौरा क्या है सावधानी और उपचार

What is Epilepsia and Treatment


तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम का यह रोग मिरगी (Epilepsia) अपस्मार एवं एपीलेप्सी के नाम से जाना जाता है ऐसे रोगी के हाथ-पांव एेंठने लगते हैं तथा मुंह से झाग निकलता है और दांत बंध जाते हैं तथा जबड़ा चिपक जाता है किसी किसी को मल-मूत्र निकल जाता है-

मिर्गी का दौरा क्या है सावधानी और उपचार

ऐलोपैथिक (अंग्रेजी) दवा देने वाले जमिनल, ब्रोमाइड आदि विषाक्त औषधियां देकर रोगी के मस्तिष्क स्नायुओं को चेतना शून्य कर देते हैं जिससे रोग के लक्षण दब जाते हैं किन्तु उसका जड़ से उपचार नहीं हो पाता है यह 10-20 वर्ष आयु के बच्चों को भी हो सकता है तथा रोगी 10 मिनट से 2-3 घंटे तक बेहोश रह सकता है-

यह रोग अत्यधिक मानसिक या शारीरिक कार्य करने, सिर पर चोट, बहुत अधिक मदिरापान, तीव्र ज्वर, मैनिनजाइटिस, ब्रेन ट्यूमर, लकवा, ज्ञान तंत्रों में ग्लूकोज की कमी या आनुवंशिक, मस्तिष्क उतकों को आक्सीजन की पर्याप्त मात्रा न मिलने, स्त्रियों को मासिक धर्म में गड़बड़ी, मस्तिष्क कैंसर, पाचन तंत्र में खराबी, आंव, कृमि आदि कारणों से होता है-

मिर्गी का दौरा क्या है सावधानी और उपचार

प्राकृतिक चिकित्सा की दृष्टि से खान-पान जन्य विषैला द्रव्य शरीर में एकत्र हो जाने से यह होता है इसके ऊपर वर्णित लक्षणों से सभी परिचित हैं इसके दौरे की स्थिति में मिर्गी के रोगी (Epilepsia) को हवा वाले स्थान पर दांई या बांई करवट लिटा दें तथा चेहरे पर पानी का छींटा मारें और दांतों के बीच कपड़ा या चम्मच रख दें जिससे जीभ न कटे उस समय कुछ भी खिलाने-पिलाने का प्रयास न करें-

करे ये उपाय-


1- मिर्गी के रोगी (Epilepsia) को तुलसी के पतों के रस में सेंधा नमक मिलाकर नाक पर टपकाएं या तुलसी रस व कपूर सुंघाएं, लहसुन रस सुंघाएं, सीताफल (शरीफा) के पत्तों का रस नाक में डालें या आक के जड़ की छाल को बकरी के दूध में घिसकर रस को सुघाएं, होश आने पर नींबू रस व थोड़ा सा हींग दें-

2- गेहूं के आटे की रोटी चोकर समेत बनाएं व खाएं तथा भुनी अरहर, मूंग की दाल आहार में लें और मिर्गी के रोगी (Epilepsia) का आहार सादा सुपाच्य व सीमित मात्रा में हो तथा रात को सोने से दो घण्टा पूर्व खाएं-

3- फलों में आम, अंजीर, अनार, संतरा, सेब, नाशपाती, आडू व अनन्नास का सेवन करें तथा अंकुरित मोंठ, मूंग, दूध, दूध से बने पदार्थ नाश्ता में लें और मेवे में बादाम, काजू, अखरोट खाएं तथा भोजन के साथ गाजर का मुरब्बा, पुदीने की चटनी खाएं-

4- लहसुन को तेल में सेंककर सुबह शाम खाएं व इसकी कच्ची कली तोड़कर सूंघे-खीरा, मूली, प्याज, टमाटर, नींबू गाजर आदि का सलाद खाएं-

5- मिर्गी के रोगी(Epilepsia) को सफेद प्याज के एक चम्मच रस को पानी में मिलाकर नियमित पिलाएं तथा दौरा बंद होने पर बंद करें-

6- नियमित प्रात: शाम खुली हवा में घूमें तथा ढीला कपड़ा पहनें करवट व उत्तर दिशा रक्खें में एक दो दिन मात्र फलों का सेवन करें तथा नींबू रस व शहद लें और पेट साफ रखें-

7- शीर्षासन, सर्वांगासन करें या हल्का व्यायाम करें-ब्राह्मी घृत खाएं और सफेद प्याज की एक गांठ प्रति रात्रि कच्चा खाएं रोगी जादा रात्रि तक न जागें और बाल छोटे रखें तथा प्रसन्न रहें- 

8- सिर की मालिश मक्खन व बादाम तेल से करें या सिर व पेट पर मिट्टी लेप करें स्नान करते समय कपाल व पेट पर पांच मिनट पानी की धार डालें-

9- भारी गरिष्ठ, तले, मिर्च-मसालेदार, चटपटा भोजन न खाएं-वातकारक पदार्थ उड़द, राजमा, कचालू, गोभी, मसूर की दाल, चावल, बैंगन, मछली, मूली, मटर का सेवन अत्यंत कम करें उत्तेजक पदार्थ कड़क चाय, काफी, तम्बाकू, गुटखा, शराब, मांसाहारी भोजन, पिपरमेंट से दूर रहें तथा अधिक शीतल व अधिक उष्ण पदार्थों का सेवन न करें-

10- पानी में राई पीसकर सुंघाएं या करौंदे के पत्तों की चटनी नित्य खिलाएं-

क्या न करें-


1- रोगी को अकेले यात्रा करने न दें-अकेले सीढ़ी चढ़ने न दें-साइकिल या गाड़ी चलाने न दें तथा आग व पानी से दूर रखें, तनाव व क्रोध न दिलाएं, झगड़ा न करें आप रोगी को अधिक ऊंचाई पर न ले जाएं रोगी अपने मल मूत्र के वेग को न रोकें रात्रि भरपूर नींद लें करवट लेटें तथा उसका सिर उत्तर दिशा में हो-

2- ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक, बायोकेमिक आदि सभी उपचार विधियों में इसकी अनेक दवाएं हैं पर इसकी एक्यूप्रेशर, सुजोक, चुम्बक, प्राकृतिक एवं योग में भी चिकित्सा की जाती है योग्य चिकित्सक से चिकित्सा करा सकते हैं और स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं किन्तु सबसे आवश्यक है पथ्य, अपथ्य को जानना-

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