किडनी के रोगो के नैसर्गिक उपचार करें

Natural Treatments for Kidney Diseases


किडनी (Kidney) को आयुर्वेद में हमारे शरीर का जन्मजात ऊर्जा स्रोत कहा गया है किडनी में जीवन सत्व संग्रहित होता है जिससे हमारे शरीर की सारी भौतिक क्रियाए सुचारू रूप से चलती है तथा शरीर मे जल नियमन तथा शुद्धिकरण का कार्य किडनी ही करती है-

किडनी के रोगो के नैसर्गिक उपचार करें

किडनी के रोगो के नैसर्गिक उपचार करें (Natural Treatments for Kidney Diseases)-


छोटी आंत व बड़ी आंत के गंदे द्रव व फेफड़ो में ली हुई ऑक्सीजन को ऊर्जा में रूपांतरित करने में मदद व नियमन करने में किडनी (Kidney) मुख्य भूमिका निभाती है और जब किन्ही वजहों से किडनी सिकुड़ जाती है तो किडनी के नेफ्रॉन्स जो फ़िल्टर की तरह काम करती है ये नेफ्रान्स दब जाते है जिससे किडनी की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है जिससे किडनी फ़िल्टर भी ठीक से नहीं हो पाती जिससे विषैले तत्व का उत्सर्जन नही हो पाता और वही बिषैला पदार्थ हमारे रक्त में शरीर में जाने लगता है और Creatinine, Urea ये सब रक्त में बढ़ जाते है तब ऐसी परिस्थितियों में आधुनिक चीकित्सा विज्ञान डायलिसिस की सलाह देता है किन्तु आयुवर्दिक ओर् प्राकृतिक इलाज से भी हम इस समस्या से मुक्ति पा सकते है-

किडनी (Kidney) के रोग में सावधानियां-


ऐसे रोगियों को पानी कम पिलाए और पानी उबालकर ही तथा थोड़ा हल्का गर्म हो तब ही पीना चाहिए तथा रोगी को हमेशा हाथ पांव तथा चहेरा पर हवा ना लगे व ठंड ना लगे इसका भी ख्याल रखना चाहिए तथा शुद्ध हवा तथा सात्विक भोजन पर जोर देना चाहिए-

ठंडे पानी से स्नान व एयरकंडीशनर से बचना चाहिए और बासी, तला हुआ, सूखा व मसालेदार भोजन से सख्त परहेज रखना चाहिए जब भी खाएं भोजन गर्म और ताजा ही खाना चाहिए-

किडनी (Kidney) रोगी के लिए उपचार-


किडनी रोगी को योग्य दिनचर्या तथा पथ्य अपथ्य और नैसर्गिक चिकित्सा से यह व्याधि को ठीक किया जा सकता है-आइये जाने क्या-क्या करें-

रोगी को रोज रात को पीठ से लेकर कूल्हों तक गर्म तेल से हल्के मसाज करना चाहिए तथा उसके बाद अदरक की स्टीम लेनी चाहिए-उसके लिए एक लीटर पानी मे 100 ग्राम अदरक को कूटकर डाले तथा वो पानी जब उबल जाए तो फिर उसमे साफ टॉवल भिगोकर निचोड़ लें तथा वो तौलिया से पीठ से कमर तक के भाग की सिकाई करे लेकिन ध्यान रहे यह प्रयोग बिना नागा करना है-

रोगी को रोज सुबह गर्म पानी मे पैर डुबो कर बाद में पोछकर पैरों के तलवों की अच्छे से मसाज करनी या किसी से करवानी चाहिए-

500 ग्राम अलसी को पीस के चूर्ण बनाले और अब 2-3 चम्मच अलसी पावडर को एक कप पानी मे ख़ौलाए और गाढ़ा बन जाए तब यह लेप पीठ से लेकर कमर तक लगाए और इस पर हल्की धूप पड़ने दे जब सुख जाए तब निकाल ले-

शाम को 5 से 7 बजे के बीच मे रोगी की मुट्ठी में जितने काले तिल समां सकते है उतने काले तिल खूब चबा चबा कर खाए-फिर शाम को 6 बजे 2 मकोय के पत्ते तथा एक काली मिर्च डालकर चबाकर खाएं-इसी के साथ रोगी अधिक परिश्रम, चिंता, रात्रि जागरण से बचे तथा कब्ज ना हो इसका भी ध्यान रखे और यदि सुगर हो तो उसे कंट्रोल में रखे इस प्रकार करने से रोगी को जल्द लाभ मिलता है-

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