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20 जुलाई 2017

बच्चों का देरी से बोलना या तुतलाहट पर अनुभूत प्रयोग

Stutter Problem in Children


कई लोगों के सवाल आते है कि हमारा बच्चा तुतलाता (Stutter) है जुबान लडखडाती है सही उच्चारण नहीं करता है तो वैसे तो सामान्यतः शिशु आठ से नौ महिने से बोलना शुरू कर देते है और दो ढाई साल के होने तक तो अच्छे से बोलना भी सीख जाते है किन्तु कभी-कभी किन्ही वजहों से बोलने में देरी या तुतलाहट होती है और इन समस्याओं को अगर बचपन मे सुलझाया ना जाए तो फिर  बड़े होकर उपहास का पात्र बनना पड़ता है-

बच्चों का देरी से बोलना या तुतलाहट पर अनुभूत प्रयोग

बच्चों के तुतलापन पर एक अनुभूत प्रयोग-


हकलाना या तुतलाना जिसे Stammering या Stutter के नाम से भी जाना जाता है अगर सीधे सीधे शब्द में समझे तो हकलाने का मतलब होता है रुक-रुक कर बोलना और ये परेशानी आमतौर पर 3 से 5 साल के बच्चो में पाई जाती है बहुत लोग डॉक्टर स्पीच थेरेपी की सलाह देते है किंतु आप इस समस्या का इलाज घर पर भी कर सकते हो आज हम आपको इस पर अनुभूत योग बता रहे है जिसके प्रयोग से आपका बच्चा अवश्य ही सही प्रकार से बोलने लगेगा-

सबसे पहले आप एक पीपल का माध्यम आकार का पत्ता ले आइये और इसे धो कर उल्टा याने जिस तरफ हरी शिराएं होती है उस तरफ ताजा बनाया हुआ गर्म भात या चावल जितनी मात्रा में बच्चा खा सके रखे और ऊपर से एक चम्मच देशी घी डालकर 5 मिनिट ठंडा होने दे-

अब फिर घी और चावल को आपस में अच्छे से मिला ले ताकि उसमे पत्ते का भी अर्क मिक्स हो जाए अब आप यह चावल बच्चे को खिला दे ध्यान रहे कि आप यह प्रयोग मंगलवार और गुरुवार को ही करे इससे बच्चे की जिव्हा हल्की हो जाती है और वाचा (आवाज का खुलना) आती है तथा शब्दोच्चारण स्पष्ट और शुध्द होते है-

एक और प्रयोग-



दरअसल ये प्रयोग एक प्रकार का टोटका ही है लेकिन हर माँ बाप अपने बच्चे के लिए सब कुछ करता है इसलिए आप रविवार के दिन एक कटोरी खीर बनायें और उसे ऐसी जगह रक्खे जहाँ बहुत कौवे आते हो आपको दूर से नजर रखनी है कि कौवा कब खीर को झूठा करता है जैसे ही वो खीर को जूठा करे आप उस खीर को ला कर बच्चे को खिला दें बस आपको ये तीन या पांच रविवार ही करना पड़ेगा और आप देखेगें कि आपका बच्चा शुद्ध और स्पष्ट बोलने लगा है आगे चल कर ये बच्चे किसी भी समारोह में स्पष्टवक्ता भी हो जाते है-


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