22 जुलाई 2017

सुरण कंद यानि जिमीकंद बहुउपयोगी क्यों है

Why is it very useful Zimikand

आज हम आपसे एक ऐसी सब्जी की चर्चा करने जा रहे है जो सब्जी होने के साथ-साथ एक जड़ी-बूटी भी है जी हाँ हम सुरण कंद (जिमीकंद) की बात कर रहे है वैसे तो सुरण कंद (Jimikand) एक बहुत ही आम सी सब्जी है जो जमीन के नीचे उगती है जो कि सभी को स्वस्थ एवं निरोगी रखने में मदद करती है सुरण कंद की सब्जी में अच्छी मात्रा में ऊर्जा पाई जाती है इसमें खूब सारी मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी, फोलिक एसिड और नियासिन होता है और साथ ही मिनरल जैसे पोटाशियम, आयरन, मैगनीशियम, कैल्शियम और फासफोरस भी पाया जाता है- 


सुरण कंद यानि जिमीकंद बहुउपयोगी क्यों है

सुरण कंद (Jimikand) एक गुणकारी सब्जी है इसके पत्ते 2-3 फुट लंबे, गहरे हरे रंग के व हल्के हरे धब्बे वाले होते हैं इसकी पत्तियां अनेक छोटी-छोटी लंबोतरी गोल पत्तियों से गुच्छों में घिरी होती हैं इसका कंद चपटा, अंडाकार और गहरे भूरे व बादामी रंग का होता है अनेक संप्रदायों में प्याज-लहसुन के साथ-साथ सुरण से दूर रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह कामुकता बढ़ाने वाला होता है-

इसमें विटामिन ए व बी भी होते हैं यह विटामिन बी-6 का एक अच्छा स्रोत है तथा रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है इसमें ओमेगा-3 काफी मात्रा में पाया जाता है यह खून के थक्के को जमने से भी रोकता है तथा इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकलों से लड़ने में सहायक होता है इसमें पोटैशियम होता है जिससे पाचन में सहायता मिलती है और इसमें तांबा पाया जाता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में रक्त के बहाव को दुरुस्त करता है-

आयुर्वेद के अनुसार इसे उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनको किसी भी प्रकार का चर्म या कुष्ठ रोग हो-सुरण कंद अग्निदीपक, रूखा, कसैला, खुजली करने वाला, रुचिकारक विष्टम्मी, चरपरा, कफ व बवासीर रोगनाशक है इसे आप कभी-कभार इसलिए खा सकते हैं क्योंकि इसमें ओमेगा-3 होता है और इसमें भरपूर मात्रा में तांबा पाया जाता है-

सुरण कंद (Jimikand) के फायदे-


1- सुरणकंद यनि जिमीकंद दिमाग तेज करने में भी आपकी मदद करता है अक्सर बहुत सी चीजें हम भूल जाते हैं लेकिन जिमीकंद खाने से याद करने की पावर बढती है और दिमाग तेज बनता है तथा साथ ही यह अल्जाइमर रोग होने से भी बचाता है अगर आप अपना दिमाग तेज करना चाहते हैं तो इस कंद को अपने आहार में शामिल करें-

2- सुरण में पाया जाने वाला कॉपर लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में खून के फ्लो को दुरुस्त करता है और आयरन ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में मदद करता है-


3- इस कंद में अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रैडिकल्स से लड़ने में सहायक होता है तथा साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह आहार गठिया और अस्थमा रोगियों के लिये सबसे अच्छा होता है-


4- सुरण में पोटैशियम की मौजूदगी के कारण यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है इसे नियमित खाने से कब्ज़ और खराब कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो जाती है-


5- शरीर में अच्छी मात्रा में बी 6 होने से दिल की बीमारी नहीं होती है यह ब्लड प्रेशर और हार्ट फेल के लिये भी लाभदायक है और सुरण में विटामिन बी भरपूर मात्रा में पाया जाता है ये रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है-इसमें ओमेगा-3 काफी मात्रा में पाया जाता है यह खून के थक्के जमने से रोकता है-


6- सुरण का अधिकतर उपयोग बवासीर, सांस रोग, खांसी, आमवात और कृमिरोगों आदि में किया जाता है सुरण के प्रमुख गुणों में से एक इसका उपयोग अर्श अथवा बवासीर में होना है और इसी वजह से इसे अर्शीघ्न भी कहते हैं जिन लोगों को लीवर या यकृत में समस्या हो उनके लिए भी सुरण एक वरदान है इसके सेवन से वातरोग में भी फायदा होता है-


7- फाइबर से भरपूर होने के कारण सुरण के सेवन से आपको भरा हुआ महसूस होता है जिससे आप आसानी से वजन कम कर सकते हैं अगर आप भी अपना वजन कम करना चाहते हैं तो इस कंद को अपने आहार में शामिल करें-


सावधानियां-


आयुर्वेद के अनुसार सुरण उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनको किसी भी प्रकार का चर्म या कुष्ठ रोग हो-जिमिकंद ड्राई, कसैला, खुजली करने वाला, रुचिकारक, चरपरा, कफ व बवासीर रोगनाशक है इसे आप कभी-कभार इसलिए खा सकते हैं क्योंकि इसमें ओमेगा-3 होता है और इसमें भरपूर मात्रा में आयरन भी पाया जाता है आइए अब हम आपको इसके स्वास्थ्यकर योग बनाना बताते है-

घरेलू प्रयोग-


सुरण के छोटे छोटे टुकड़े कर, इसको गाय के घी में तल लें और इसमें धनिया पावडर, जीरा पावडर, हल्दी और सेंधा नमक डालकर खाए अथवा सुरण को उबाल कर उपरोक्त मसाले डालकर खाए तथा ऊपर से छाछ पिये दूसरा कुछ अन्न ना खाएं-

यह प्रयोग कम से कम 7 दिन करने से वाग्भट्ट के अनुसार रक्तशोधक, जठराग्नि प्रदीप्त होता है वायू दोष सम होते है अर्श मस्से मिटते है दस्त साफ आते है आतें मजबूत होती है तथा अरुचि और अपचन दूर होता है-

शास्त्रोक्त  प्रयोग-


पहला प्रयोग-

सुरण कंद को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण  100 ग्राम को गाय के घी में भून लें अब इसमें खड़ी शक्कर या मिश्री 75 ग्राम मिलाकर कैप्सूलों में भर ले और यह 2-2 केप्सुन सुबह शाम भोजन के बाद गर्म जल से लेने से आमवात मिटता है-

दूसरा प्रयोग-

सुरण का छाया शुष्क चूर्ण- 320 ग्राम
चित्रक मूल चूर्ण - 160 ग्राम
काली मिर्च का चूर्ण- 20 ग्राम
पुराना गुड़- 1 किलो

उपरोक्त सबको अच्छे से मिलाकर 5 ग्राम तक कि गोलियां बना ले यह गोली खाने से सर्व प्रकार के अर्श मस्से मिटते है-

विशेष सूचना-

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