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22 अगस्त 2018

जामुन का आसव-सिरका-जाम्बु द्राव व शर्बत बनाने की विधि

Makeing Jamun Asava Vinegar

वर्षाऋतु का अमृतफल-जामुन को कहा गया है बुद्ध धर्म मे भी जामुन के पेड़ को पवित्र मानते है और इसके पंचांग का उपयोग तिबब्बत चिकित्सा शास्त्र में कई योगों के रूप में किया गया है भारत मे जामुन की दो किस्में पाई जाती है एक बड़े फल जिसको राज जामुन और एक छोटा फल जिसको शूद्र जामुन कहा जाता है-

जामुन का आसव-सिरका-जाम्बु द्राव व शर्बत बनाने की विधि

जामुन में एक विदेशी किस्म भी होती है जिसके फल बड़े, गोलाकार गुलाबी रंग के गुठली रहित होते है और जिससे गुलाब के फूल की हल्की खुशबू आती है यह प्रजाति खास कर ब्रह्म देश और बंगाल में पाई जाती है-

देशी जामून(बड़े)के आयुर्वेदिक में बड़े गुणगान लिखे है चरक ने जामुन फल और पेड़ की छाल को मूत्र संग्रहक, पुरीशवीरजनिय तथा वातजनक कहा है सुश्रुत के अनुसार जामुन रक्तपित्तहर, दाहनाशक, योनिदोषहर, वर्ण्य याने शरीर की कांति सुधारने वाला कहा है-

वैद्य माधव के अनुसार जामुन अतिसार, रक्तातिसार, कोलेरा, रक्तपित्त, लिवर जनित रोग तथा रक्तजन्य विकारों को दूर करने वाला अमृत फल है तो चलिए आज हम आपको जामुन फल से आसव, सिरका, जाम्बु द्राव व शर्बत बनाने की विधि बताएंगे-

जामुनासव-


पके जामुन का रस -3200 ग्राम
पुराना गुड़ -1200 ग्राम
हरड़े- 20 ग्राम
बहेड़ा -20ग्राम
आंवला-20 ग्राम
नागरमोथा-20 ग्राम
वावडिंग-20 ग्राम
सोंठ -20ग्राम
काली मिर्च-20 ग्राम
पिप्पली-20ग्राम
अजवाइन-20ग्राम
नसोतर-20 ग्राम
पिपलीमुल-20 ग्राम
सेंधा नमक -60ग्राम

बनाने की विधि-


एक चीनीमिट्टी के बर्तन में जामुन का रस और गुड़ मिक्स करके मिलाए तथा अब ऊपर दिए गए औषधियो का मोटा-मोटा जौकूट चूर्ण मिला दे अच्छे से हिलाकर बर्तन को अच्छे से बन्द करके 31 दिन के लिए रख ले जब 31 दिन में आसव परिवक्व हो जाए तब छान कर रख ले यह जम्बूआसव सारे शुलरोग व उदररोगो में रामबाण इलाज है-

जामुन का सिरका-


पके हुये जामुन का रस- 1 लीटर

इस रस को किसी कांच के साफ बर्तन में भर दे और रोग इसे कपड़ छन करे एक हफ्ते तक फिर दूसरे हफ्ते में 2 बार कपड़छन करे तथा तीसरे हफ्ते में सिर्फ एक बार कपड़छन करे और चौथे हफ्ते अगर रस पर फफूंद दिखे तो एक बार कपड़छन करे-यह क्रिया एक महीने की है इस दौरान सावधानी रखनी है कि कपड़छन करने वाला कपड़ा गीला ना हो अन्यथा सिरका खरांब हो जाता है इस प्रकार जामुन का सिरका तैयार होता है-

इस सिरके को 5ml समभाग पानी के साथ सेवन करने से अपचन, उदरशूल, आफरा, कोलेरा, खट्टी डकारें आदि मिटती है यह सिरका पेट के रोग, स्प्लीन, लिवर, मंदाग्नि , मधुमेह और् पेशाब सम्भन्धित रोगों पर अचूक औषध है-

जाम्बुद्राव-


600 ग्राम बड़े पके जामुन को मसल कर उसका रस निकाल ले अब उसमे 100 ग्राम सेंधानमक डालकर कांच की शीशी में भर ले तथा इस शीशी को मजबूत बन्द करके 7 दिन रख दे फिर आठवे दिन जाम्बुद्राव तैयार हो जाएगा-यह जाम्बुद्राव दिन में 3 बार 5-5 ग्राम की मात्रा में पीने से समस्त उदर-रोगो में राहत मिलती है-

यह जाम्बुद्राव सुबह खाली पेट 2 महीने पीने से यकृत की कार्यक्षमता सुधरती है तथा लिवर की सूजन, लिवर बढ़ना, प्लीहोदर तथा पीलिया में राहत मिलती है-

जाम्बु का शर्बत-


जाम्बु रस- 1 लीटर
शक्कर- 2500 ग्राम

दोनों को मिलाकर ,उबालकर चासनी बना ले।इसे ठंडा करके छान कर बोटलो में भर ले 20 से 25 ml शर्बत 100 ml पानी मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों के अपचन व उल्टी में राहत मिलती है तथा पीलिया व कोलेरा जैसी बीमारियों से बचाव होता है-

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