22 अगस्त 2017

कभी ख़ुशी तो कभी गम(Mood Swing)का रोग

Mood Swing Disease


मै चेतना कंचन आज आपसे एक और केस की चर्चा करती हूँ पारिजात जी एक बिजनसमेन है और अच्छे लेखक भी है उनकी उम्र है 42 वर्ष चूँकि वो अपने बिजनस ग्रुप के अग्रणी होते हुए उनको कई समारोह में स्टेज पर स्पीच भी देनी होती थी वो कुशल व्यक्ता होने के साथ साथ व्यवहार कुशल व्यक्ति भी थे उनके यही गुणों से वह हमेशा हर बात में अग्रणी थे-

कभी ख़ुशी तो कभी गम(Mood Swing)का रोग

घर का माहौल भी उनके व्यक्तित्व के अनुरूप ही था हर सदस्य उनका आदर व प्रेम करता था किन्तु कई दिनों से वो मूड स्विंग (Mood Swing) जैसे मानसिक रोग का शिकार हो गए थे-कभी भी बिना बात के उन्हें उदासी के दौरे पड़ जाते थे-कही कुछ बुरा होने वाला है ऐसा अंदेशा होने लगता और तब वो अपने स्नेहीजनों और प्रियजनों को फोन लगाकर सब ठीक है कि नही-ऐसा पूछने लगते और जब उदासी छा जाती तब उन्हें कुछ अच्छा नही लगता था वो काम भी नही करते और फोन भी बंद रखते थे-

इस दौरान उनको भूख, प्यास, नींद सब डिस्टर्ब हो जाता था और जब यह दौरा अपने आप ही ठीक हो जाता तब इनको कमजोरी और गिल्टी फीलिंग्स आती थी-जब वो मेरे पास आए तब उन्होंने मुझे कहा कि में पूर्णतः थक हार गया हूँ मेरी इस तकलीफ से मेरे परिवार को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है-

मैंने उन्हें उनके लक्षणों के अनुसार 2 अलग-अलग बेचफ्लॉवर कॉम्बिनेशन दिए और लगभग डेढ़ महीने बाद उनको आशास्पद लाभ भी होने लगा उसके बाद उनको लक्षणों के हिसाब से दवाई अगले 2 महीने और दी गई आज अब उन्हें अपनी परेशानी से सम्पूर्ण आराम है और वो सबको हँसते हुए बताते है कि मै खुद यकीन नही कर सकता कि 4 महीने पहले में इतना परेशान था-

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Chetna Kanchan Bhagat Mumbai

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