19 अगस्त 2018

प्रेम क्या है क्यों किसी से प्रेम करें

What is Love Why Love Someone 


कुछ लोग प्यार (Love) की परिभाषा जानना चाहते है वो समझना चाहते है कि प्यार क्या है मेरा उनको जवाब है प्यार गेहूं के दाने की तरह है अगर गेंहूँ के दाने को पीसे तो उजला हो जाता है यदि पानी के साथ गूँथ ले तो वह लचीला हो जाता है और यही लचीलापन ही प्यार है ये लचीलापन केवल पूर्ण समर्पण से ही आएगा प्रेम में न ही किसी प्रकार की कोई शर्त है वास्तव में प्यार एक एहसास है अंदर उपजी हुई एक भावना है प्रेम हर परंपराओं को तोड़ देता है तथा प्यार त्याग व समरसता का नाम है-


प्रेम क्या है क्यों किसी से प्रेम करें

प्यार (Loveकी अभिव्यक्ति सबसे पहले आँखों से होती है और फिर होंठ हाले दिल बयाँ करते हैं लेकिन ये आपको प्यार कब, कैसे और कहाँ हो जाएगा आप खुद भी ये नहीं जान पाते हैं वो पहली नजर में भी हो भी हो सकता है और हो सकता कि धीरे-धीरे कई मुलाकातें भी आपके दिल में किसी के प्रति प्यार न जगा सकें-

प्रेम तीन स्तरों में प्रेमी के जीवन में आता है चाहत-वासना और आसक्ति के रूप में हो सकता है इन तीनों को पा लेना प्रेम को पूरी तरह से पा लेना है इसके अलावा प्रेम से जुड़ी कुछ और बातें भी हैं जिनको स्पस्ट करता हूँ-

प्यार (Loveका दार्शनिक पक्ष क्या है-


मनुष्य में जब भी प्रेम पनपता है तो अंदर का अहंकार टूटता है और जब अहंकार टूटता है तो फिर सत्य का जन्म होता है यह स्थिति तो बहुत ऊपर की है यदि हम प्रेम के साथ श्रद्धा को मिला लें तो फिर यही प्रेम भक्ति बन जाता है जो लोक-परलोक दोनों के लिए ही कल्याणकारी भी हो सकता है इसके लिए गृहस्थ आश्रम श्रेष्ठ है क्योंकि हमारे पास भक्ति का कवच है इसी तरह जहाँ तक मीरा की भक्ति थी मीरा का  प्रेम अमृत था जो किसी भी बंधन से मुक्त था- 

प्रेम क्या है क्यों किसी से प्रेम करें

अन्य तमाम रिश्तों की तरह ही प्रेम का भी वास्तविक पहलू ये है कि इसमें भी संमजस्य बेहद जरूरी है यदि आप यदि बेतरतीबी से हारमोनियम के स्वर दबाएँ तो कर्कश शोर ही सुनाई देगा लेकिन वहीं यदि क्रमबद्ध दबाएँ तो मधुर संगीत गूँजेगा बस यही समरसता प्यार है जिसके लिए आपसी सामंजस्य बेहद जरूरी है बस प्रेम में आपको समर्पण की कला आनी चाहिए आपको अपना इगो हटाना आवश्यक है-

प्रेम (Love) का पौराणिक पक्ष क्या है-


प्रेम के पौराणिक पक्ष को लेकर सबसे पहला सवाल यही दिमाग में आता है कि प्रेम किस धरातल पर उपजा है आपको ये प्रेम वासना या फिर चाहत किसके लिए है वैसे मानाकि  प्रेम में काम का महत्वपूर्ण स्थान है लेकिन महज वासना के दम पर उपजे प्रेम (Love) का अंत तलाक पर ही अधिकतर समाप्त होता है जबकि चाहत के रंगों में रंगा प्यार ज़िंदगी भर बहार बन दिलों में खिलता है जिसकी महक उम्र भर आपके साथ होती है और आप अपने पार्टनर के साथ दुःख सुख सभी प्रकार से इस प्रेम को निभाते हुए पूरा जीवन आनंद के साथ जी लेते है-


प्रेम (Love) का प्रतीक गुलाब क्यों कहा गया है-


सुगंध और सौंदर्य का अनुपम समन्वय गुलाब सदियों से प्रेमी-प्रेमिकाओं के आकर्षण का केंद्र रहा है गुलाब का जन्म स्थान कहाँ है यह आज भी विवाद का विषय बना हुआ है वैसे कई लोग इस पर अपना अपना पक्ष रखते है लेकिन हमको उस तर्क में नहीं जाना है-लाल गुलाब की कली मासूमियत का प्रतीक है और यह संदेश देती है तुम सुंदर और प्यारी हो यदि लाल गुलाब किसी को भेंट किया जाए तो यह संदेश है कि मैं तुम्हें प्यार करता हूँ तथा सफेद गुलाब गोपनीयता रखते हुए कहता है कि तुम्हारा सौंदर्य नैसर्गिक है-जहाँ पीला गुलाब प्रसन्नता व्यक्त करता है वहीं गुलाबी रंग प्रसन्नता और कृतज्ञता व्यक्त करता है वैसे गुलाब यदि दोस्ती का प्रतीक है तो गुलाब की पत्तियाँ आशा की प्रतीक हैं-


प्रेम (Love) का बंधन-


जीवन में प्रेम करो बस अगर प्रेम स्वार्थ से निहित नही है और समर्पण के साथ कर रहे है तो अपेक्षा करना तो बिलकुल भी उचित नहीं है बस तुम इस प्रेम को परवान चढ़ने दो हो सकता है आपकी सभी आशाएं अपने आप पूर्ण हो जाएँ-प्रेम जाति, मजहब, उम्र के बंधन से मुक्त होता है किसी को ये प्रेम युवावस्था में मिले या प्रौढ़ावस्था में इस बात का कोई महत्व नहीं है जबकि प्रौढ़ावस्था का प्रेम स्थाई होता है जिसमे आकर्षण कम लेकिन असीम प्रेम की प्रबल भावना समाहित होती है जबकि युवावस्था का प्रेम आकर्षण युक्त प्रेम होता है इसमें कुछ पाने की इच्छा होती है लेकिन प्रेम तो बस प्रेम है अवस्था कुछ भी हो हर एक को करने का अधिकार है-

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