नारियल अमृत तुल्य फल है

Amrat Equivalent Fruit Coconut


सनातन हिन्दू संस्कृति में नारियल (Coconut) को अत्यंत पवित्र माना है तथा नारियल को विशिष्ट धार्मिक और सामाजिक महत्व प्राप्त है नारियल यश, कीर्ति, ऐश्वर्य, स्वास्थ तथा सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है इसी गुण के चलते नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है हरा नारियल पित्त ज्वर तथा पित्त शामक है नारियल का गुदा पचने में भारी, मूत्राशय की सफाई करने वाला, दस्त को रोकने वाला, शरीर को पुष्ट करने वाला, बलदायक, वागु, पित्त का शमन करने वाला, रक्त शुद्ध करने वाला , दाहनाशक तथा त्वचा को साफ व रंगत निखारने वाले गुणों से भरपूर है-

नारियल अमृत तुल्य फल है

नारियल (Coconut) अमृत तुल्य फल है-


नारियल (Coconut ) का पानी शीतल, हितकारी, अग्निको प्रदीप्त करने वाला, वीर्य वर्धक, पचने में हल्का, तृषा को मिटाने वाला, नए कोषों की उतपत्ति में मदद करने वाला होता है नारियल ह्र्दय के लिए हितकारी, पचने में सरल, वीर्य व कामशक्ति वर्धक तथा मूत्रल होता है-

नारियल का गुदा, पानी, तेल, तथा नारियल की जटा या छिलके सब औषधीय गुणों से भरपूर है इसलिए नारियल को पूजन व धार्मिक विधि, औषधी, भोजन तथा सौंदर्य प्रसाधन और साबुन बनाने में प्रचुरता से इस्तेमाल किया जाता है-

नारियल (Coconut) के कुछ शास्त्रोक्त प्रयोग-


नारिकेल लवणम (Coconut Salts)-


छिलके उतारकर नारियल (Coconut) की एक आंख में छिद्र कर ले तथा उसका पानी निकाल ले अब इस नारियल में जितना समा जाए इतना बारीक पिसा हुआ सेंधा नमक नारियल मे भर दे और छिद्र वाली जगह आटे की पुल्टिस लगाकर सील कर दे फिर इस नारियल पर मिट्टी का मोटी परत लेप दे और इसे धूप में सुखा लें तथा मिट्टी सुख जाए तब 10-12 गोबर के कंडो के बीच रखकर इसे जला ले तथा जल जाने पर हल्के हाथों से नारियल को निकालकर खोल कर अंदर का काले रंग का लवण निकालकर ठंडा करके शीशी में भर ले-

लाभ-


यह लवण एसिडिटी, पेट दर्द, अरुचि, मंदाग्नि, गैस, तथा अपचन जैसी व्याधियों में कारगर है-

इसी चूर्ण 3 ग्राम में 1 ग्राम पीपल का चूर्ण मिलाकर सुबह शाम लेने से त्रिदोष शमन होता है और शूल मिटता है-

मात्रा- 


3-3 ग्राम सुबह शाम

नारिकेल अवलेहम (Coconut Awlehm)-


आप सबसे पहले 10 से 12 बड़े हरे नारियल का पानी निकालकर इसे उबाले जब पानी शहद की तरह गाढ़ा हो जाए तब इसमे सौंठ, काली मिर्च, पिप्पली, जायफल, जावन्त्री सब के 5-5 ग्राम चूर्ण मिलाकर काच के पात्र में भर ले यह अवलेहम सुबह शाम आधे से एक चम्मच चाटने से अम्लपित्त, पित्त जन्य रोग, उदरशूल, मिटते है तथा लिवर, पेनक्रियाज, पित्ताशय व स्प्लीन की समस्याओं में भी उपयोगी है-

लाभ-


जिनका वजन ना बढ़ता हो उनके लिए यह अवलेहम उत्तम औषध है-

नारिकेल अमृत (Coconut Amrit)-


नारियल अमृत तुल्य फल है

एक हरा नारियल (Coconut) ले फिर इसके पानी व सफेद मलाई को खुरच कर निकाल के इसमे एक चम्मच मिश्री तथा एक इलायची डालकर मिक्सर में क्रश कर ले इसे नारिकेल अमृत कहा जाता है यह उत्तम तृषा शामक होने के साथ साथ स्वादिष्ट और पुष्टि कारक भी है तथा यह क्षय रोग में अमृत समान है लम्बी बीमारी के बाद होने वाली कमजोरी, तथा दुबलापन जैसी समस्याओ में लाभदायक है-

नारिकेल सुधा रस (Coconut Sudha Ras)-


एक हरा नारियल जिसमे ज्यादा पानी हो लेकर उसमे छोटा सा छिद्र करके उसमे 1 ग्राम फिटकरी का चूर्ण डालकर छिद्र को आटे की लोई या परत से बन्द करके रात को चंद्र किरण उस पर पड़े इस तरह छत पर या खुले में रखे तथा सुबह नारियल को हिलाकर यह पानी निकाल ले इस तरह चन्द्र किरणों से सिध्द नारिकेल सुधा रस पीने से रक्त प्रमेह, अल्सर, यूरिन इंफेक्शन, तथा शरीर की गर्मी से होने वाले रोग मिटते है-

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