कुलथी से कैसे दूर करे पथरी


आयुर्वेद व घरेलू चिकित्सा में किडनी की पथरी में कुलथी (Kulthi) को फायदेमंद माना गया है गुणों की दृष्टि से कुल्थी पथरी एवं शर्करानाशक है ये वात एवं कफ का शमन करती है और शरीर में उसका संचय रोकती है कुल्थी में पथरी का भेदन तथा मूत्रल दोनों गुण होने से यह पथरी बनने से रोकती है इसके अतिरिक्त यह यकृत व पलीहा के दोष में लाभदायक है-

कुलथी से कैसे दूर करे पथरी

कैसे प्रयोग करें-


250 ग्राम कुल्थी कंकड़-पत्थर निकाल कर साफ कर लें और रात में तीन लिटर पानी में भिगो दें अब सवेरे भीगी हुई कुल्थी उसी पानी सहित धीमी आग पर चार घंटे पकाएं और जब एक लिटर पानी रह जाए (जो काले चनों के सूप की तरह होता है) तब नीचे उतार लें-फिर तीस ग्राम से पचास ग्राम (पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का उसमें छोंक लगाएं-छोंक में थोड़ा-सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं-पथरीनाशक औषधि तैयार है-

आप दिन में कम-से-कम एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर यह सारा सूप पी जाएं या 250 ग्राम पानी अवश्य पिएं बस एक-दो सप्ताह में गुर्दे तथा मूत्राशय की पथरी गल कर बिना ऑपरेशन के बाहर आ जाती है और बीच-बीच में लगातार सेवन करते रहना पथरी से राहत देता है-यदि भोजन के बिना कोई व्यक्ति रह न सके तो सूप के साथ एकाध रोटी लेने में कोई हानि नहीं है-गुर्दे में सूजन की स्थिति में जितना पानी पी सकें, पीने से दस दिन में गुर्दे का प्रदाह ठीक होता है और यह कमर-दर्द की भी रामबाण दवा है- 

कुल्थी की दाल साधारण दालों की तरह पका कर रोटी के साथ प्रतिदिन खाने से भी पथरी पेशाब के रास्ते टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है यह दाल मज्जा (हड्डियों के अंदर की चिकनाई) बढ़ाने वाली है-

मूत्र को रोकना नहीं चाहिए तथा लगातार एक घंटे से अधिक एक आसन पर न बैठें-कुल्थी का पानी विधिवत लेने से गुर्दे और मूत्रशय की पथरी निकल जाती है और नयी पथरी बनना भी रुक जाता है-किसी साफ सूखे, मुलायम कपड़े से कुल्थी के दानों को साफ कर लें-किसी पॉलीथिन की थैली में डाल कर किसी टिन में या के मर्तबान में सुरक्षित रख लें-

कुल्थी का पानी केसे बनाये-


किसी कांच के गिलास में 250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुल्थी डाल कर ढक कर रात भर भीगने दें और प्रात: इस पानी को अच्छी तरह मिला कर खाली पेट पी लें-फिर उतना ही नया पानी उसी कुल्थी के गिलास में और डाल दें जिसे आप दोपहर में पी लें-दोपहर में कुल्थी का पानी पीने के बाद पुन: उतना ही नया पानी शाम को पीने के लिए डाल दें-

इस प्रकार रात में भिगोई गई कुल्थी का पानी अगले दिन तीन बार सुबह, दोपहर, शाम पीने के बाद उन कुल्थी के दानों को फेंक दें और अगले दिन यही प्रक्रिया अपनाएं-महीने भर इस तरह पानी पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी धीरे-धीरे गल कर निकल जाती है-

साथ ही अगर आप कुल्थी के पानी के साथ हिमालय ड्रग कंपनी की सिस्टोन की दो गोलियां दिन में 2-3 बार प्रतिदिन लेने से शीघ्र लाभ होता है-कुछ समय तक नियमित सेवन करने से पथरी टूट-टूट कर बाहर निकल जाती है-यह मूत्रमार्ग में पथरी, मूत्र में क्रिस्टल आना, मूत्र में जलन आदि में दी जाती है-

क्या खाएं क्या नहीं-


कुल्थी के अलावा खीरा, तरबूज के बीज, खरबूजे के बीज, चौलाई का साग, मूली, आंवला, अनन्नास, बथुआ, जौ, मूंग की दाल, गोखरु आदि खाएं-कुल्थी के सेवन के साथ दिन में 6 से 8 गिलास सादा पानी पीना, खासकर गुर्दे की बीमारियों में बहुत हितकारी सिद्ध होता है-

पालक, टमाटर, बैंगन, चावल, उड़द, लेसदार पदार्थ, सूखे मेवे, चॉकलेट, चाय, मद्यपान, मांसाहार आदि से बचना चाहिए-

विशेष सूचना-

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