मेडिकल साइंस में प्यार क्या होता है


कोई ही विरला व्यक्ति होगा जो किसी से प्यार (Love) न करता होगा लेकिन बहुत से लोग आज भी नहीं जानते है प्यार कब और क्यों होता है भावनात्मक और सामाजिक ताने-बाने में इस सवाल के कई जवाब हैं मगर मेडिकल साइंस (Medical Science) की दुनिया में प्यार एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है शरीर में कुछ हार्मोन्स और केमिकल्स का कॉकटेल व्यक्ति को प्यार की राह पर ले जाता है कई बार प्यार को एक रोग भी मान लिया जाता है लेकिन यह एक केमिस्ट्री है जिसे समझना बेहद दिलचस्प है-

मेडिकल साइंस में प्यार क्या होता है

प्यार (Love) क्या होता है जाने मेडिकल साइंस में-


प्यार (Love) की न्यूरोलॉजिकल स्थिति के तीन पड़ाव बताए हैं प्यार के हर एक पड़ाव के लिए अलग-अलग तरह के हार्मोन्स और केमिकल्स उत्तरदायी होते हैं आमतौर पर जिसे प्यार कहा जाता है वह शरीर में होने वाला एक प्रकार का हार्मोनल बदलाव है-

मेडिकल साइंस में प्यार क्या होता है

इसे बीमारी जैसे नकारात्मक शब्द से नहीं जोड़ा जा सकता है क्योंकि प्यार एक सकारात्मक भावना है जो मस्तिष्क को ऊर्जा से भर देती है लेकिन जब प्यार में अपने आपको या किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने की बात आती है तो इसका संबंध उन प्राकृतिक हार्मोनल बदलावों से नहीं होता है-

मोह या लालसा (Longing)-


शोध के अनुसार यह प्यार (Love) की राह में आने वाला यह पहला पड़ाव है महिला और पुरुष दोनों में इसका कारण सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन होते हैं-

आकर्षण (Attraction)-


प्यार (Love) का यह दूसरा पड़ाव एक अद्भुत भावनात्मक स्थिति है इस पड़ाव पर आकर व्यक्ति लालसा और मोह से भी आगे सोचने लगता है हमारे यहाँ वैज्ञानिक मानते हैं कि इस पड़ाव से तीन मुख्य न्यूरो-ट्रांसमीटर्स जुड़े होते हैं- एड्रेनेलिन, डोपमाइन और सेरोटोनिन

एड्रेनेलिन (Adrenaline) का बढ़ना-


प्यार की राह पर आगे बढ़ने के शुरुआती दौर में व्यक्ति के तनाव का स्तर बेहद सक्रिय हो जाता है इसकी वजह से रक्त में एड्रेनेलिन और कोर्टीसोल हार्मोन का स्तर अधिक बढ़ जाना है इस स्थिति में व्यक्ति एक अजीब सी बेचैनी से घिर जाता है उसके मन में अकल्पनीय रूप से एक व्यक्ति के लिए बेहद प्यार पनपने लगता है ऐसे में दिल की धड़कनें बढ़ना और अक्सर गला और मुंह सूखने की समस्या भी होने लगती है-

डोपमाइन (Dopamine) का बढ़ना-


वैज्ञानिकों के एक शोध के दौरान जब प्यार करने वाले कुछ जोड़ों के मस्तिष्क का अध्ययन किया तो उन्होंने पाया कि उनमें डोपमाइन न्यूरो-ट्रांसमीटर का स्तर काफी ज्यादा था यह केमिकल इच्छाओं की पूर्ति के लिए आपको उकसाता है तथा इसका मस्तिष्क पर बिलकुल वैसा ही असर होता है जैसा कि कोकीन के सेवन का होता है  प्यार करने वाले लोगों में अक्सर डोपमाइन की वजह से ही नींद न आना, भूख न लगना, किसी और काम में मन न लगना और अपनी रिलेशनशिप से जुड़ी हर छोटी से छोटी चीज के बारे में सोचकर खुश होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं-

सेरोटोनिन (Serotonin) का बढ़ना-


यह प्यार की स्थिति से जुड़ा सबसे अहम केमिकल है किसी भी व्यक्ति के विचारों में अपने प्यार के लिए पूर्णतया रूप से समर्पण हो जाना इसी केमिकल की वजह से होता है-

गहरा लगाव (Deep Affection)-


ये प्यार के तीसरे और अंतिम पड़ाव पर आकर महसूस होने वाला लगाव है ये एक ऐसा बंधन होता है जो दो लोगों को एक लंबे सफर पर साथ ले जाने की ताकत रखता है एक ऐसा सफर जहां वे जिंदगी का हर पल साथ गुजारना चाहते हैं और अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव पर भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ना चाहते है वैज्ञानिक ये मानते हैं कि एक-दूसरे से लगाव की इस भावना के लिए दो हार्मोन्स जिम्मेदार होते हैं "ऑक्सीटोसिन और वेसोप्रेसिन" आइये ये भी जान ले ये क्या है-

ऑक्सीटोसिन (Oxytocin)-


प्यार और चाहत के रिश्ते में ऑक्सीटोसिन भी एक अहम् हार्मोन है यह एक-दूसरे से लगाव और जुड़ाव की भावना को और भी गहरा बना देता है इससे दो लोग एक-दूसरे को एक-दूसरे के सबसे ज्यादा करीब महसूस करते हैं यही हार्मोन मां और बच्चे के बीच भी गहरे भावनात्मक जुड़ाव के लिए उत्तरदायी होता है न्यूयॉर्क में असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ साइकोलॉजी डियान विट ने भेड़ और चूहों पर किए गए एक शोध के दौरान पाया कि यदि उनके शरीर में ऑक्सीटोसिन के स्राव को ब्लॉक (रोक) कर दिया जाए तो मादा भेड़ और चूहे अपने बच्चों को स्वीकार ही नहीं करते हैं-

वेसोप्रेसिन (Vasopressin)-


वेसोप्रेसिन लंबे समय के कमिटमेंट में अहम भूमिका निभाने वाला एक और महत्वपूर्ण हार्मोन है लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप में इसकी भूमिका पैरीवोल (एक प्रकार की जीव) पर किए गए एक शोध के दौरान सामने आई है पैरीवोल भी मनुष्यों की तरह संतुलित रूप से स्थिर रिश्ते बनाते हैं और जब नर पैरीवोल को वेसोप्रेसिन के प्रभाव को कम करने वाले ड्रग्स दिए गए तो उनके अपनी मादा साथी के साथ संबंध खत्म होने लगे क्योंकि हार्मोन्स की अनुपस्थिति में उनके भीतर की लगाव की भावना खत्म हो गई-

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि मेडिकल साइंस के अनुसार प्यार का संबंध दिमाग से होता है इसमें दिल की भूमिका सिर्फ इतनी है कि प्यार में अक्सर व्यक्ति के दिल की धड़कनें बढ़ जाती है लेकिन सत्य ये है कि इन दोनों हारमोंस के बढ़ने पर प्यार गहरा होता जाता है और फिर वे एक दुसरे से समर्पित प्रेम जीवन भर करते है-

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