20 दिसंबर 2017

सम्मोहन शक्ति द्वारा स्मरण शक्ति बढायें


पिछली पोस्ट में हमने जानकारी दी थी कि हमारे समाज में बहुत से लोगों को भूलने की बीमारी होती है तथा उनकी स्मरण शक्ति (Memory Power) भी कमजोर हो जाती है इस पोस्ट में हम आपको एक क्रिया और बताते है जिसके प्रयोग से चमत्कारिक रूप स्मरणशक्ति बढ़ जाती है-

सम्मोहन शक्ति द्वारा स्मरण शक्ति बढायें

ये क्रिया आत्म सम्मोहन (Self Hypnosis) की क्रिया है-इसके लिए आप सर्वप्रथम हाथ-पैर धोकर रात्रि में एक खुशबूदार अगरबत्ती लगाकर बिस्तर पर लेट जाएँ व तीन बार गहरी-गहरी साँसे लें व धीरे- धीरे छोड़ें फिर अपने दोनों पैरों को ढीला छोड़ दें फिर दोनों हाथ, सिर व पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें फिर मन ही मन आप खुद को आदेश दें मुझे आँखों में एक सम्मोहक नींद समाती जा रही है ऐसा कम से कम दस बार करें-फिर अपने आपको खुद निर्देश दें कि आज जो भी पढ़ा या लिखा मुझे हमेशा जीवन भर ध्यान में रहेगा और जब भी मैं उसे लिखना चाहूँगा-लिख दूँगा या बताना चाहूँगा बता दूँगा-अब से मेरी याददास्त पहले से अधिक बढ़ गई है-ऐसा क्रम एक माह तक करें फिर देखें कि आपकी से स्मरणशक्ति चमत्कारिक रूप से बढ़ गई है और इसी क्रिया से आपको एक लाभ और भी होगा कि बिना दवा के एक अच्छी नींद भी आएगी -

हमारा स्वयं का अनुभव-


हम अपना अनुभव भी आपसे शेयर करते है हम देर रात तक लेपटाप पे कुछ न कुछ पोस्ट लिखते है लेकिन यकीन माने हम कभी किसी चीज को याद नहीं करते है न ही हम कभी जबरजस्ती मस्तिष्क पे जोर-अजमाईस करते है-लेकिन मुझे बहुत कुछ याद रहता है और जब हम सोने जाते है तो बस मानसिक रूप से बिना होठों को हिलाए मन में गुरु मन्त्र का जप शुरू कर देते है पूरी रात सोने के बाद सुबह तक ये जप अनवरत चलता रहता है कुछ दिन के प्रयास से आप भी इसका अनुभव कर सकते है-


स्मरण शक्ति शक्ति को जाग्रत करने के कुछ अन्य उपाय-


1- दोनों कानों के नीचे के भाग को अंगूठे और अंगुलियों से दबाकर नीचे की ओर खीचें-पूरे कान को ऊपर से नीचे करते हुए मरोड़ें-सुबह 4-5 मिनट और दिन में जब भी समय मिले-कान के नीचे के भाग को खींचे-

2- सिर व गर्दन के पीछे बीच में मेडुला नाड़ी होती है-इस पर अंगुली से 3-4 मिनट मालिश करें-इससे एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ा हुआ याद रहता है-

ज्ञान मुद्रा (Gyan Mudra) का अभ्यास करे- 


प्रात: उठकर पद्यासन या सुखासन में बैठकर हाथों की तर्जनी अंगुली के अग्र भाग को अंगूठे से मिलाकर रखने से ज्ञान मुद्रा बनती है शेष अंगुलियां सहज रूप से सीधी रखें और आंखें बंद तथा कमर व रीढ़ सीधी रक्खें यह अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्रा है-इसका हितकारी प्रभाव समस्त वायुमंडल और मस्तिष्क (Brain) पर पड़ता है ज्ञानमुद्रा पूरे स्नायुमंडल को सशक्त बनाती है-विशेषकर मानसिक तनाव से होने वाले दुष्प्रभावों को दूर कर मस्तिष्क के ज्ञान तंतुओं को सबल बनाती है- 

ज्ञानमुद्रा (Gyan Mudra) के निरंतर अभ्यास से मस्तिष्क की सभी विकृतियां और रोग दूर होते हैं-जैसे पागलपन, उन्माद, विक्षिप्तता, चिड़चिड़ापन, अस्थिरता, अनिश्चितता, क्रोध, आलस्य घबराहट, अनमनापन, व्याकुलता, भय आदि- मन शांत हो जाता है और चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है-ज्ञानमुद्रा विद्यार्थियों के लिए वरदान है इसके अभ्यास से स्मरण शक्ति (Memory) और बुध्दि तेज होती है-

अकारण अंगुलियों को चटकाना, पंजा लड़ाना और अंगुलियों को अनुचित रूप से चलाना आदि आदतें मस्तिष्क और स्नायु-मंडल पर बुरा प्रभाव डालती हैं-इससे प्राणशक्ति का ह्रास होता है और स्मरण शक्ति कमजोर होती हैं अत: आप इनसे बचे-

आज्ञाचक्र (Agya Chakra) ललाट पर दोनों भौंहों के मध्य स्थित होता है-इसका संबंध ब्रह्म शरीर से होता है-जिस व्यक्ति का आज्ञाचक्र जाग जाता है वही विशुध्द ब्रह्मचारी हो सकता है और उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं रहता आज्ञाचक्र पर ध्यान केन्द्रित करने से आज्ञाचक्र जाग्रत होता है-सफेद रंग की ऊर्जा यहां से निकलती है अत: सफेद रंग के ध्यान से आज्ञाचक्र के जागरण में सहायता मिलती है-

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