24 जनवरी 2018

चंदन के आयुर्वेदिक प्रयोग


पिछले लेखों में हमने क्रमशः चंदन के गुण उपयोग तथा लाभ, चंदन के घरेलू प्रयोग, तथा चंदन के अनुभूत औषधीय प्रयोग पढे-आज हम आपको चंदन (Sandalwood) के आयुर्वेदिक प्रयोग या चंदन से बनने वाले आयुर्वेदिक योगों के बारे में जानकारी देंगे-

चंदन के आयुर्वेदिक प्रयोग

चंदन के दो अंगों का औषधि निर्माण में उपयोग किया जाता है जिसमें चंदन की लकड़ी तथा चंदन का तेल मुख्य है चंदन का बाह्य प्रयोग मरहम व लेप की तरह किया जाता है तथा आंतर प्रयोग में चंदन (Sandalwood) के तेल या चूर्ण को अन्य औषधियों के साथ मिलाकर गोली, गुटी, वटी, अवलेह, आसव, अरिष्ट तथा चंदन का हिम बनाया जाता है-

चंदन आसव-


चंदन (Sandalwood) का बुरादा 1 किलो, शक्कर 2 किलो, काला अंगूर 1 किलो लेकर 8 लीटर पानी में इसे गला कर चीनी मिट्टी के बर्तन में बंद करके साफ-सुथरे अंधेरे जगह पर रखा जाता है 40 दिन में इसका आसव तैयार होता है-यह आसव एसिडिटी (Acidity) अल्सर, छाले, दाह, पित्त संबंधी विकार तथा मुत्रविकार (Urinary disorder) में बेहद उपयोगी है-

चंदन आसव नंबर दो-

सफेद चंदन (Sandalwood) लाल चंदन, सालकाष्ठ, देवदारु, दारू हल्दी, शीतल चीनी, चित्रकमूल की छाल, आमलकी, निशीत, अगर, शतावरी, पाषाणभेद, अनंतमूल अडूसे के जड़ की छाल, बबूल की छाल सबको 36-36 ग्राम लेकर पीसकर बारीक चूर्ण बना लें इसके बाद 1 किलो काला अंगूर और 750 ग्राम धाय के फूल भी पिस ले अब 27 लीटर पानी में 5 किलो शक्कर और अन्य सभी औषधीया डालकर कांच के पात्र में भरकर सुखी अंधेरी जगह पर रख दें 45 दिन के बाद इसका असर तैयार हो जाएगा जिसे छानकर बोतल में भर ले इसे चंदन आसव कहते हैं-

इसका सेवन करने से पित्त विकार, प्रमेह रोग, मूत्र रोग, उपदंश (Gonorrhoea) तथा स्त्री और पुरुषों के विविध प्रकार के प्रजनन संबंधित रोग दूर होते हैं-


चंदनादि अवलेह-


चंदन (Sandalwood) वंशलोचन, धनिया, सारिवा, कंकोल, खस, शतावरी तथा गिलोय सत्व 12 -12 ग्राम लेकर 1 किलोग्राम नींबू का रस, आधा किलोग्राम अनार का रस और आधा किलो नारियल पानी लेकर इनको धीमी आंच पर पकाएं जब पानी आधा होकर गाढ़ा हो जाए तब उसमें उपरोक्त सारे चूर्ण मिला लें तथा 5 ग्राम केसर मिलाएं और अच्छी तरह से घोट कर ठंडा होने पर कांच की शीशी में भर लें-

इस योग को चन्दनादी अवलेह कहते हैं प्रतिदिन सुबह शाम 10 से 15 ग्राम तक सेवन करने से शरीर शक्तिशाली बनता है शरीर में बढ़ी हुई गर्मी, उपदंश, छाले (Ulcer) तथा बार-बार मूर्छा आना (Fainting) जैसी समस्या हल होती है-यह है हृदयरोग की भी उत्तम औषधि है हृदय रोग में इसका सेवन करने से उच्च रक्तचाप, बढ़ी हुई धड़कन, घबराहट (Palpitation) तथा हृदय दर्द में लाभ मिलता है-

चंदन पाक-


250 ग्राम चंदन (Sandalwood) का बुरादा लेकर इसे गुलाब जल में मिलाकर सिलबट्टे पर महीन पीस लें इस चटनी में गुलाब की पंखुड़ियों के बने आधा लिटर काढे को मिलाकर 24 घंटे रहने दे 24 घंटे बाद इसे धीमी आंच पर पकाकर चासनी जैसा गाढ़ा बनाए ठंडा करके कांच की शीशी में भर ले-

चंदन पाक को दो से तीन चम्मच तक एक कप दूध के साथ सेवन करने से शरीर बलवान होता है रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है (Immunity) सूजाक जैसे विकार में राहत मिलती है मानसिक तनाव, बेचैनी, घबराहट, धड़कनों की असामान्य गति, मूत्र संबंधी विकार तथा सुजाक जैसे रोगों में चंदन पाक एक उत्तम औषधि माना गया है-

चंदन कल्प-


चंदन (Sandalwood), खस, जटामासी, अंगूर, सुगंधबाला और गेहूं को अनार या आंवले के रस अथवा जीरे के काढे के साथ कूट-पीसकर कल्क तैयार किया जाता है-

इस कल्प का सुबह शाम ताजे पानी के साथ सेवन करने से पित्त विकार व एसिडिटी से होने वाली उल्टी, हार्टबर्न, छाती में जलन, कड़वी डकारें, गर्मी से आए गले के छाले, अन्ननलिका की जलन, पेट के छाले  (Peptic ulcer) गुदा की सूजन या छाले तथा जलन जैसी समस्याएं दूर होती है-

चंदनादि हिम-

चंदन के आयुर्वेदिक प्रयोग

चंदन का बुरादा (Sandalwood), गुलाब की पंखुड़ियां, सेवती गुलाब, खस,धनिया, नीलोफर, सौफ,छोटी इलायची के दाने, खीरे के बीज, ककड़ी के बीज इन सब को सम भाग लेकर मोटा-मोटा कुट ले रात को इस मिश्रण को 20 ग्राम की मात्रा में 250 ग्राम पानी में भिगोकर रख दें सुबह इसे सिलबट्टे पर चटनी की तरफ पीस ले अब इसमें 25 ग्राम मिश्री मिलाकर पिए-

यह चंदनादि हिम अनिंद्रा, हैजा (Cholera), मूत्र विकार, यूरिन इन्फेक्शन (Urine Infection) जैसी समस्याओं में बेहद लाभदाई है-

चंदनादि वटी-


छोटी इलायची के बीज और वंशलोचन समभाग लेकर कूट-पीसकर कपड़छन महीन चूर्ण बना लें इस चूर्ण को चंदन (Sandalwood) के तेल में सानकर इससे छोटी-छोटी गोलियां बनाएं-इन गोलियों को दिन में दो बार पानी में घोलकर ऊपर से 6 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करने से कुछ ही दिनों में सुजाक (Gonorrhoea), उपदंश और प्रदर रोग नष्ट होते हैं-

चंदन (Sandalwood) से बने अन्य प्रचलित योग-


इन योगों के अलावा बाजार में चंदन से बनने वाले दूसरे भी आयुर्वेदिक योग उपलब्ध है-जिसमें चंदनादि वटी, चंद्रकला रस, दशमूलारिष्ट, अश्वगंधा पाक, धात्री रसायन, चंदनबला लाक्षादि तेल, नस्य तेल, इरेमिरादी तेल, स्वर्ण मुखी चूर्ण तथा कुमकुमादी तेल में चंदन एक प्रमुख घटक औषधि है-
प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai


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