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21 जनवरी 2018

चंदन के उपयोग व लाभ


चंदन (Sandalwood) एक सुगंधित द्रव्य औषधि है इसे पवित्रता सौंदर्य समृद्धि तथा धर्म व अध्यात्म का प्रतीक माना गया है हिंदू धर्म के साथ-साथ जैन धर्म तथा पारसी धर्म में चंदन का उपयोग धार्मिक तौर पर किया जाता है इसके साथ-साथ ही चंदन औषधीय गुणों से भी भरपूर है आयुर्वेद तथा यूनानी चिकित्सा में प्रकांड ज्ञानी वेदों तथा हकीमों ने इसके बड़े गुणगान किए हैं विदेशों में भी अब चंदन के औषधीय गुणों पर विशेष संशोधन तथा प्रयोग हो रहे हैं आधुनिक रिसर्च के परिणाम इसकी पुष्टि करते हैं कि भारतीय ऋषि मुनियों ने और वेदों ने अपने दिव्य दृष्टि से चंदन का जो गुणगान किया है वह शत प्रतिशत सच है-

चंदन के उपयोग व लाभ

चंदन (Sandalwood) सौंदर्यवर्धक स्वास्थ्यवर्धक तथा मानसिक स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है इस पोस्ट में  हम आपको चंदन के लाभ उपयोग के बारे में विस्तार से बताएंगे-

चंदन को इंग्लिश में सेंडल वुड (Sandalwood)  कहा जाता है इसके पेड़ भारत में दक्षिण भारत में बहुत प्रमाण में है जिसमें कर्नाटक व मैसूर शहर चंदन के शहर के नाम से ही पहचाना जाता है इसके साथ-साथ भारत में तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश में भी चंदन के पेड़ या जंगल पाए जाते हैं विदेशों में मलेशिया, इंडोनेशिया, सीलोन जैसे देशों में भी चंदन के वृक्ष पाए जाते हैं-

चंदन (Sandalwood)  का पेड़ 20 से 25 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है-यह पेड़ 15 से 20 साल का होने पर उसके तने में सुगंध कोशिकाएं तैयार होने लगती हैं और 30 से 40 वर्ष पुराने पेड़ औषधीय गुणों से प्रचुर होने के साथ-साथ तेल निकालने के लायक हो जाते हैं चंदन का बुरादा या लकड़ी का पाउडर तथा चंदन की लकड़ी व जड़ों से निकलने वाला तेल औषधि के रूप में सदियों से इस्तेमाल किया जाता है-

         ‘‘श्रीखण्डं शीतलं स्वादु तिक्तं पित्तविनाशनम्। 
            रक्तप्रसादनं वृष्यमन्तंदहि पहारकम्।। 
            पित्तस्त्रविषतुइ. दाहकृमिघ्नं गुरू रक्षणम।।’’ (ध. नि.)

आयुर्वेद के मतानुसार चंदन मधुर, कटु, शीतल स्वेदजन्य, वेदना शामक, दाह नाशक, पिपाशाहर, ग्राही, ह्रदयसंरक्षक तथा रक्ताभिसरण की क्रिया को शांत करने वाला है-इसे संस्कृत में श्रीखंड नाम से जाना जाता है चंदन के पेड़ की ऊपर की लकड़ी को श्रीखंड तथा अंदर के भाग को पित्त चंदन नाम से जाना जाता है औषधो में पित्तचंदन का प्रयोग प्रचुर प्रमाण में किया जाता है-

           ‘श्रीया सौंगंध्यलक्षया खंडयति अन्य गंधमिति श्रीखंडम्’

याने अपनी सुगंध से अन्य गंध को या दुर्गंध को हटाने वाला चंदन दुर्गंध हरने वाला तथा दाह(Inflammation) व जलन को शांत करने वाला है-

चंदन (Sandalwood) के लाभ-


1- चंदन उत्तम पित्त शामक तथा शीतल है जिन लोगों को गर्मी या पित्त की तकलीफ होती है उनके लिए चंदन एक वरदान है-

2- चंदन (Sandalwood) से हृदय की बढ़ी हुई धड़कन या गति कम होती है तथा घबराहट (Palpitation) दूर होती है-

3- ज्वर (Fever) जैसे विकारों में शरीर की गर्मी बढ़ने से होने वाली तकलीफों में चंदन (Sandalwood) बेहद उपयोगी है इसीलिए शास्त्र कहते हैं कि किसी भी प्रकार के ज्वर में चंदन का उपयोग अति हितकर है इसे ज्वर में लेने से तुरंत पसीना आता है ज्वर कम होता है तथा शरीर का दाह या जलन (Irritation) भी कम होती है नारियल के पानी के साथ चंदन को पत्थर पर घिसकर आधा चम्मच लेने से ज्वर तथा तृषा रोग में उत्तम लाभ मिलता है-

4- दुर्गंधयुक्त इंफेक्शन या का कफप्रधान समस्याओं में चंदन का सेवन करने से कफ से रक्त आना बंद होता है रक्तातिसार (Haematochezia) में भी चंदन (Sandalwood)  उत्तम लाभदायक है-

5- सुजाक (Gonorrhea) उपदंश जैसे विकारों में चंदन के तेल का उपयोग करने से उत्तम लाभ मिलते हैं-

चंदन के उपयोग व लाभ

6- चंदन त्वचा पर भी बेहद लाभकारक है चंदन सौन्दर्य वर्धन के लिए भी बेहद उपयोगी माना गया है सौंदर्य वर्धन के साथ-साथ चंदन त्वचा रोगों में भी बेहद उपयोगी है त्वचा की सूजन, जलन, फोड़े फुंसी, घमोरी(Prickly Heat), कालापन जैसे विकारों में चंदन अत्यंत लाभकारी है गर्मी से होने वाली खाज खुजली, दाद तथा इन्फेक्शन (Infection) जैसे त्वचा रोगों में चंदन लेपन के तौर पर बाह्य उपचार तथा औषधि के तौर पर खाने से बेहद फायदा होता है-

7- टीबी, निद्रानाश (Insomnia) धातु क्षय तथा कमजोरी जैसी समस्याओं पर चंदन (Sandalwood) बलवर्धक शक्तिवर्धक तथा गुणकारी माना गया है उष्माघात (Heat stroke) से बचाव के लिए भी चंदन बेहद उपयोगी है-

8- चंदन की सौम्य शीतल सुगंध मन को शांत करती है तथा एंजाइटी (Anxiety) को कम करती हैं चंदन में पाया जाने वाला बीटी-सेंटालोल एक उत्तम सौंदर्यवर्धक तत्व के साथ-साथ बाजीकर तत्व भी है याने जवानी को बरकरार रख कर बुढ़ापे को दूर रखने वाला एंटी एजिंग तत्व है-

9- रक्तपित्त, मस्से तथा रक्तातिसार में चंदन का चूर्ण बेहद लाभदायक है इसके अतिरिक्त जलन, चर्म रोग, पसीने की बदबू (Body Odour) या ज्यादा पसीना आना जैसे तकलीफों में चंदन का लेप बेहद उपयोगी है-

10- सन फ्रांसिस्को में हुए एक संशोधन अनुसार चंदन में ह्रदय रोग को मिटाने की शक्ति है रिसर्च में यह बात साबित हुई कि रक्त वाहिनियों में जमा हुआ कोलेस्ट्रॉल तथा धमनियों का कड़ापन (Hardness of the arteries) दूर करने में चंदन बेहद उपयोगी है चंदन (Sandalwood) के नियमित प्रयोग से रक्त संचार सुचारू होता है, धमनियों में आए हुए अवरोध मिटते हें जिससे धमनियों का चौड़ा होना कम होने लगता है-

11- सौंदर्य शारीरिक स्वास्थ्य तथा मानसिक स्वास्थ्य देने वाले चंदन के गुणों को भारतीय ऋषि मुनियों ने अपनी दिव्य दृष्टि से पहचान कर चंदन (Sandalwood) को पूजा तथा ईश्वर की आराधना में अग्रसर स्थान दिया है इस तरह चंदन अपने गुणों के अनुसार हमारे जीवन में पवित्रता, शीतलता, स्वास्थ्य, सौंदर्य तथा सुगंध देता है इसीलिए वेदों ने चंदन के गुणगान में इसे स्वर्ग का वृक्ष तथा पाप नाशक व संपदा वर्धक कहा है-
प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai


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