22 जनवरी 2018

चंदन के घरेलू प्रयोग

पिछले लेख में हमने चंदन (Sandalwood) के गुण उपयोग तथा स्वास्थ्य लाभ के बारे में विस्तार से चर्चा की इस लेख में हम आपको चंदन की घरेलू प्रयोग की जानकारी देंगे जो बेहद आसान है व बिना किसी साइड इफेक्ट्स बेहद लाभदायक भी है जिसे आप घरेलू तौर पर प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं-

चंदन के घरेलू प्रयोग

चंदन (Sandalwood) के घरेलू प्रयोग-


1- उल्टियां (Vomiting) होने पर चंदन (Sandalwood) को पानी के साथ पत्थर पर घिस ले इसमें आंवले का चूर्ण तथा मधु मिलाकर सेवन करने से उल्टियां तथा पित्त की उल्टियां बंद हो जाती है-

2- गर्मियों में मूत्र दाह होना, लाल रंग का मूत्र आना या यूरिन इन्फेक्शन (Urine infection) होना जैसी समस्याओं पर एक कप दूध में आधा चम्मच चंदन (Sandalwood) का पत्थर पर घिस कर किया हुआ लेप तथा एक चम्मच मिश्री मिलाकर पीने से मूत्र संबंधी सारी समस्याएं दूर होती है-

3- चेचक के रोग (Chicken Pox) में कडू, आंवला, खस अडूसा का मूल, नीम की छाल, पित्तपापड़ा, पटोल पत्र, रक्त चंदन, सफेद चंदन (Sandalwood) तथा पाटला इन सभी औषधियों को समभाग लेकर काढ़ा बना लें इस काढ़े में एक चम्मच मिश्री मिलाकर पीने से चेचक व खसरे में लाभ मिलता है-

4- चेचक रोग (Chicken Pox) में दानों में या त्वचा पर दाह हो रहा हो तो चमेली के पत्ते, अनंतमूल, नागकेसर, रक्त चंदन व चंदन (Sandalwood) को पानी में लेप बनाकर शरीर पर लगाने से दाह का शमन होता है-

चंदन के घरेलू प्रयोग

5- गर्मी की वजह से होने वाले सर दर्द (Headache) में तथा आंखों की सूजन, आंखों का दर्द तथा आंखों में पानी आना जैसी समस्याओं में चंदन (Sandalwood) के लेप में थोड़ा कपूर मिलाकर कनपटी तथा आंखों के आसपास लेप करने से यह समस्याएं दूर होकर त्वरित आराम मिलता है-

6- बवासीर (Hemorrhoids) के लिए कडू छाल को 800 ml पानी में उबालें जब 100 ml पानी बच जाए तब उसे उतार कर छानकर उसमें चंदन, बावडिंग, त्रिकूट, त्रिफला, रसवंती, चित्रक मूल, इंद्रजव, ब्रज, अतिविष की कली तथा बेल फल का गूदा का चूर्ण डालकर हिलाते हुए पकाए जब गाढ़ा हो जाए तब चूल्हे से उतार ले ठंडा होने पर इस अवलेह में आधी मात्रा में शहद डालकर खूब अच्छे से घोट कर रख लें सुबह शाम एक-एक चम्मच लेने से बवासीर में तथा गुदाद्वार की जलन में लाभ मिलता है-

7- चंदन (Sandalwood) तथा रक्त चंदन को पानी में पत्थर पर घिसकर छाती तथा उसके नीचे के अंगों पर लेप करने से रक्तपित्त, छाती का दाह, तथा हृदयका दाह कम होता है व घबराहट (Anxiety) में और बढ़ी हुई धड़कन में तथा उच्च रक्तचाप में लाभ मिलता है-

8- घमौरियों (Prickly Heat) में रक्त चंदन, चंदन,  हल्दी, सौंफ, फिटकरी, नीम, गुलाब की पत्तियां को पानी में लेप बना ले इसलिए घमौरियों पर लगाकर 15 मिनट बाद स्नान करने से घमोरियां, फोड़े फुंसी, खुजली तथा त्वचा के दाग में लाभ मिलता है-

9- रक्ताल्पता (Anemia) में चंदन, लोह भस्म, नवायस लौह, शिलाजीत केसर, पुनर्नवा, मुनक्का, रक्त चंदन, अश्वगंधा व वावडिंग को गाय के दूध में मिलाकर खीर की तरह उबालकर क्षीरपाक बना ले यह क्षीरपाक लगातार ढाई महीने सेवन करने से रक्ताल्पता, कमजोरी, उच्चरक्तचाप, हृद्य रोग जैसी बीमारियों में चमत्कारिक लाभ मिलता है-

10- बवासीर (Piles) रक्तपित्त तथा रक्तातिसार में चंदन के 3 ग्राम चूर्ण को 5 ग्राम मिश्री मिले हुए एक कप दूध में लेने से इन समस्याओं से राहत मिलती है-
प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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