7 फ़रवरी 2018

गुलकंद के औषधीय गुण तथा गुलकंद बनाने की विधि

Preparation Method of Gulkand Therapeutic Uses


गुलकंद (Gulkand) घर-घर में प्रयोग किया जाने वाला प्रचलित आयुर्वेदिक योग है लेकिन आजकल मिलावट के दौर में बंदगोभी को शक्कर की चाशनी में पकाकर ऊपर से कृत्रिम रंग तथा गुलाब की सुगंध डालकर बाजारों में बेचा जाता है जिसकी वजह से गुलकंद के असली लाभ खाने वाले को नहीं मिल पाते इसीलिए घर में ही अच्छे देसी गुलाब लाकर उसका गुलकंद बनाना ही ज्यादा योग्य है जिससे गुलकंद के वांछित लाभ हमें मिल सके-

इस लेख में हम आपको गुलकंद (Gulkand) के औषधीय गुण, उपयोग तथा गुलकंद बनाने की विधि के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे-

गुलकंद के औषधीय गुण तथा गुलकंद बनाने की विधि

आयुर्वेद अनुसार गुलकंद (Gulkand) शीतल,स्निग्ध,मधुर, पाचक, दीपक, पित्त नाशक, रेचक, तथा दाह नाशक है इसीलिए गर्मियों में गुलकंद का उपयोग बेहद हितकर माना गया है उष्माघात तथा बढ़ी हुई उष्णता की वजह से होने वाली समस्याएं, पित्त प्रकोप, तथा दाह, छाले,वमन व मूत्र संबंधी समस्याओं पर गुलकंद बेहद प्रभावशाली औषधि है-

यह विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट काफी उत्तम स्रोत है इसीलिए गुलकंद (Gulkand) एक पौष्टिक व गुणकारी औषधि है जो स्वादिष्ट, सुगंधित तथा बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए बेहद हितकर है-

आयुर्वेद के अनुसार गुलकंद (Gulkand) अवलेह कल्पना हैं-

इसमें पाक के बिना याने पकाने की क्रिया या अग्नि संस्कार का उपयोग ना करते हुए इसे सिद्ध करना अनिवार्य हें इसीलिए शक्कर की चाशनी में गुलाब की पंखुड़ियों को पकाकर बनाया जाने वाला इनसेंट गुलकंद (Gulkand) याने गुलकंद निर्माण विधि को निरर्थक ,व गुलकंद के गुणों को बेजान करने के बराबर हैं-

गुलाबों की पंखुड़िया और शक्कर या मिश्री पर सूर्य की उष्ण किरने पड़ने से धीरे-धीरे पाक होने लगता हैं जिससे पंखुडियो की नमी से शक्कर पिघलने लगती हें व शक्कर की वजह से उष्णता मिलने पर गुलाब की पंकुडिया नर्म पडकर गलने लगती हें दिन भर गुलकंद पर सूर्य किरणों की उष्णता तथा शाम को शीतलता जेसे प्राकृतिक संस्कार गुलकंद पर होने से गुलकंद ज्यादा प्रभावी व गुणकारी बनता हैं-

गुलकंद (Gulkand) के गुण व उपयोग-


पित्तदोष, जलन, आंतरिक गर्मी की वृद्धि, उदर विकार, छाले दूर होते हैं, मस्तिष्क को शांति मिलती है, स्त्रियों की गर्भाशय की गर्मी, मासिक धर्म में अधिक रक्त जाना, हाथ पैर और तलवों की जलन, आंखों की जलन, शरीर के दाने आदि विकारों को नष्ट करता है-

प्रवाल पिष्टी युक्त गुलकंद (Gulkand) में गुलकंद के गुणों के साथ-साथ प्रवाल के गुण मिल जाते हैं जिससे ब्लड प्रेशर, रक्तपित्त, पित्त विकार, प्यास की अधिकता, अधिक गर्मी बढ़ जाना व कब्ज आदि विकारों को में उत्तम लाभ मिलता हैं-

गुलकंद (Gulkand) बनाने की विधि-


गुलकंद हमेशा शास्त्रोक्त विधि से ही बनाना उचित होता है इसमें किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या किसी भी प्रकार के कृत्रिम चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए-

शास्त्रोक्त विधि-


ताजा गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां- 1 किलो
चीनी- 2 किलो

गुलाब की पंखुड़ियों को लेकर उसमें चीनी मिलाकर साफ हाथों से थोड़ा सा मसल ले फिर कांच के बर्तन में इसको डालकर ऊपर से साफ कपड़ा बाँध कर बर्तन अच्छे से बंद कर लें तथा इसे धूप में रख दें 40 दिन बाद अच्छी गुणवत्ता का गुलकंद तैयार हो जाएगा-

मात्रा व अनुपान- 


एक से दो तोला जल या दूध के साथ ले

प्रवाल मिश्रित गुलकंद-


उपरोक्त विधि से बनाया हुआ 1 किलो गुलकंद लेकर उसमें 3 ग्राम की मात्रा में प्रवाल पिष्टी मिलाकर अच्छे से घोंट ले-इस योग में गुलकंद (Gulkand) के गुणों के साथ-साथ प्रवाल मिलाने से इसकी गुण वृध्धि होती है-

मात्रा और अनुपान- 


6 से 10 ग्रामजल या दूध के साथ ले-

गुलकंद के औषधीय गुण तथा गुलकंद बनाने की विधि

अन्य विधि-


आजकल विदेशों में गुलाब की कोमल छोटी-छोटी कलियों को शक्कर के साथ मसल कर उसमें थोड़ी सी इलायची तथा जायफल मिलाकर गुलकंद (Gulkand) बनाने का प्रचलन बढ़ा है-यह गुलकंद भी गुणकारी होने के साथ-साथ खाने में भी बेहद स्वादिष्ट लगता है- 

गुलकंद (Gulkand) के औषधीय उपयोग-


1- कमजोरी यदि कोई रोगी अभी-अभी टीबी के रोग से मुक्त हुआ हो और टीबी के कारण काफी दुर्बल हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक बार गुलकंद का सेवन दूध के साथ करना चाहिए गुलकंद के सेवन से किसी भी तरह की कमजोरी (Weakness) दुर्बलता मिटती है तथा शरीर को बल (Energy) मिलता है-

2- कई बार फेफड़े टीबी, दमा (Bronchitis) खांसी, इन्फेक्शन, जैसी समस्याओं के कारण काफी कमजोर पड़ जाते हैं ऐसे में प्रतिदिन गुलकंद का सेवन फेफड़ों की कमजोरियों को दूर करके बल प्रदान करता है-

3- यदि किसी को भोजन ठीक से नहीं पचता हो या हाजमा कमजोर हो ऐसे व्यक्तियों को भोजन के बाद एक एक चम्मच गुलकंद खाने से पाचन शक्ति (Digestion) ठीक रहती है तथा खाया हुआ भोजन भी आसानी से पच जाता है-

4- चने के सत्तू को पानी में घोलकर उसमें एक चम्मच गुलकंद मिलाकर पीने से अम्ल पित्त (Acidity) तथा संबंधित रोगों में लाभ होता है इसकी वजह से होने वाली उल्टियों में भी यह प्रयोग बेहद उपयोगी हैं-

5- मानसिक तनाव, उदासीनता (Nervousness weakness) थकान (Weakness) कमजोरी, अनिंद्रा, सिर दर्द, तथा स्ट्रेस (Stress) जैसी समस्याओं में रोज एक चम्मच गुलकंद तथा चार बादाम के साथ चबा चबा कर खाए व ऊपर से एक कप दूध पी लें-

6- गुलकंद का प्रयोग करने से शरीर को बल मिलता है, मन को शांति मिलती है तथा मस्तिष्क को शीतलता मिलती है यह प्रयोग विद्यार्थियों के लिए बेहद लाभदायक हैं-यह प्रयोग करने से उनका मन शांत रहेगा साथ ही साथ याददाश्त (Memory Power) भी बढ़ेगी तथा उत्साह व ताजगी भी बनी रहेगी-

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