वृद्धावस्था में फिजिकल रिलेशन की सोच

Thinking of Physical Relation in Old Age


लोग कहते है कि दिल कभी बूढ़ा नहीं होता है लेकिन मनुष्य के शरीर पर उम्र का असर अवश्य ही पड़ता है किसी भी व्यक्ति की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे उसके शरीर के अंगों में भी काम करने की शक्ति भी दिन-प्रतिदिन कम होती चली जाती है और कोई व्यक्ति वृद्धावस्था (Old Age) में किसी जवान लड़की से या काफी कम उम्र की लडकी से शादी करने की सोचता है तो इसके बुरे नतीजे भी सामने आते हैं-

वृद्धावस्था में फिजिकल रिलेशन की सोच

कोई व्यक्ति वृद्धावस्था (Old Age) में यदि किसी जवान लड़की से शादी करने की बात सोचता है तो उसे कुछ पहलू पर अवश्य गौर करना चाहिए क्युकि कभी इसके घातक परिणाम भी देखने को मिलते है अपने से आधी उम्र की लड़की से शादी  करने पर आप निश्चित रूप से अपनी पत्नी की शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते हैं जबकि आपकी पत्नी की आवश्यकता उस समय आपसे अधिक होती है जबकि वृद्धावस्था में आपके आंतरिक अंगों में शिथिलता आ चुकी होती है मान लो शुरू में ये रुझान ठीक भी रहा तो आगे चलकर समस्या अवश्य आपके सामने आने वाली है-

वृद्धावस्था में फिजिकल रिलेशन की सोच

पत्नी आपसे शादी करके आपसे कुछ न कुछ शारीरिक अपेक्षा (Physical Expectations) अवश्य रखती है और आप ये न सोचें कि दवा (Drug) ले कर हम उसकी ये आवश्यकता भी पूर्ण कर देगें जबकि इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है इस प्रकार की ली गई दवाओं का बाद में आपको घातक परिणाम भी देखने को मिलता है-काम शक्ति का बढ़ना या कम होना सिर्फ प्रकृति पर व आपके खान-पान पर ही निर्भर करता है-

वृद्धावस्था (Old Age) में अगर एक बार काम-शक्ति चली गई तो उसे दुबारा आप किसी भी तरीके से प्राप्त नहीं कर सकते है वैसे तो इंसान के मन में वासना की इच्छा तो अंतिम सांस तक चलती रहती है लेकिन उचित अवस्था युवावस्था से प्रौढ़ावस्था तक ही है लेकिन कुछ वृद्ध लोगों में ये इच्छा वृद्धावस्था आने तक भी बलवती रहती है आपने सुना ही होगा-अभी तो मैं जवान हूं...ऐसे व्यक्ति खुद को जवान मानते हुए शारीरिक-संबंधों के बारे में चिंतन करते हैं शारीरिक-संबंध (Physical Relation) बनाते हैं लेकिन यह स्थिति सामान्य अवस्था में दिखाई नहीं देती है-

वृद्धावस्था (Old Age) में शारीरिक-संबंध करने को सही नहीं बताया गया है वृद्धावस्था में व्यक्ति का मन चाहे कितना भी जवान क्यों न हो लेकिन तन तो उसका शिथिल पड़ ही जाता है इस उम्र में व्यक्ति को शारीरिक सुख के बजाय मानसिक सुख (Mental pleasure) की ज्यादा जरूरत होती है और जब उसके परिवार के लोग उसकी उपेक्षा करते है तो उसे किसी के प्रेम की भी आवश्यकता होती है ऐसे समय व्यक्ति किसी से प्रेम तो कर सकता है लेकिन शरीरिक सम्बन्ध नहीं बना सकता है-

वृद्धावस्था में किसी कम उम्र की लड़की के साथ शादी करने के कभी-कभी बुरे नतीजे भी सामने आते हैं बहुत से बूढ़े लोग जो कम उम्र की लड़कियों से शादी करते हैं वह अपनी बीवी की शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते हैं क्योंकि पत्नी तो उस समय जवानी के पूरे जोश में होती है और बूढ़े व्यक्ति के शरीर के आधे से ज्यादा अंग अपना काम करना लगभग बंद कर चुके होते हैं इसी कारण से युवा पत्नी फिजिकल रिलेशन (Physical Relation) से तृप्त नहीं हो पाती है अंत में युवा पत्नी आपकी रात भर तडपती रहती है ऐसी पत्नियाँ पति से छिप कर अपनी शारीरिक आवश्यकता के लिए पति के काम या आफिस जाने के बाद अन्य लोगों से मेल-मिलाप करके अपनी शारीरिक आवश्यकता को पूर्ण करती हैं और यदि ऐसे में उसके पति को पता चलता है तो अक्सर घातक परिणाम ही देखने को मिलते है असल में बुढ़ापा जिंदगी की एक आदर्श अवस्था होती है-

वृद्धावस्था (Old Age) में क्या करें-


1- वृद्धावस्था में अगर व्यक्ति फिजिकल रिलेशन के बारे में न सोचकर सिर्फ अपने परिवार के बारे में सोचता है तो वह अपने परिवार को एक सुखी परिवार साबित कर सकता है कुछ लोग कहते हुए पाए जाते है कि उनके घर में ही उनकी बात नहीं सुनी जाती है कोई उनकी राय नहीं लेता है तो आपको यह बताना जरूरी है कि बच्चे जब बड़े हो जाएं तो उन पर जबर्दस्ती अपनी इच्छाओं को नहीं लादना चाहिए क्योंकि समय के साथ पीढ़ियों के विचार भी बदलते रहते हैं-

2- आपके बच्चे अगर किसी मामले में फैसला लेते हैं तो उनमें जबर्दस्ती अपना फैसला थोपने की कोशिश न करें क्योंकि ऐसा करने से नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच में सिर्फ टकराव पैदा हो सकता है जो परिवार में क्लेश आदि पैदा कर सकता है आप उनको अपने फैसले पर सोचने की खुली आजादी दें और वक्त का इंतज़ार करें हो सकता है कि बाद में आपको उसकी बात पूरी तरह समझ आ जाए और वो आपकी बात माने-

3- घर के उम्रदराज व्यक्ति जादा वक्त अपने घर पर ही बिताते है इससे  घर के बाकी सदस्यों की आजादी पर असर पड़ने लगता है ऐसे व्यक्तियों को चाहिए कि रोजाना का कुछ ऐसा रुटीन बना लें जिससे कि उनका कुछ समय घर से बाहर बीत जाए जैसे- सुबह या शाम के समय पार्क आदि में चला जाना, अपनी उम्र के दोस्तों आदि के साथ समय बिताना या दूसरा कोई ऐसा काम जिससे कि उनका समय सही तरह से बीत जाए और घर वालों को भी कुछ समय आजादी से मिल जाए-

4- बुढ़ापे में अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए रोजाना सुबह या रात को कुछ समय घूमना-फिरना चाहिए या व्यायाम आदि करना चाहिए अगर घर में बगीचा आदि है तो उसकी देखभाल करने में समय बिताना चाहिए इससे समय भी सही तरह से कट जाता है और दिल भी लगा रहता है-

5- घर में किसी तरह के बड़े फैसले लेने हो तो उसके लिए अपने बहू-बेटों को आगे रखकर फैसला करें इस बात को अपने दिमाग से निकाल दें कि मैं अब भी सारे फैसले खुद ही ले सकता हूं जब भी घर में किसी प्रकार की पारिवारिक या आर्थिक समस्या पैदा हो जाए तो अपने बेटों से सलाह जरूर लें बेटे को यह लगेगा कि घर में उसकी भी कुछ पूछ होती है और उसके दिल में आपके लिए मान-सम्मान भी बढ़ेगा तथा समस्या का हल जल्दी ही निकल सकता है-

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