इंटरनेट की भ्रामक दुनिया क्या है

Internet An illusionary World


दुनिया में जब भी कोई नया अविष्कार होता है उसे मानव जीवन के लिए लाभदायक तथा जीवन को गतिशील या विकासशील बनाने वाला माना जाता है या यूं कहिए कि दुनिया में नए-नए तकनीकी आविष्कार का प्रयोजन ही मानव जीवन को सुगम, सरल तथा आसान बनाने का होता है लेकिन जब किसी भी सुविधा का अति उपयोग होने लगता है तब उस सुविधा के फायदे से ज्यादा नुकसान ही मालूम पड़ने लगते हैं और यही बात आजकल इंटरनेट (Internet) के या सोशल मीडिया (Social media) के विषय में कही जा सकती है-

इंटरनेट की  भ्रामक दुनिया क्या है

डर (Phobia) मानव जीवन का एक महत्व का इमोशन या भावना है हर इंसान किसी न किसी रूप के डर को अपने अंदर पाले हुए जीता है जिसमें ईश्वर, समाज, कानून जैसे चीजो की डर की वजह से जहां इंसान एक अच्छा नागरिक बनने की कोशिश करता है वही अनजान डर (Unknown Phobia) या भविष्य की चिंताओं से ग्रस्त होकर जीवन को तथा अपने स्वास्थ्य को गंभीर क्षति पहुंचा देता है-

जीवन के प्रति मोह ही इंसान को अच्छा जीवन जीने को तथा स्वस्थ रहने को प्रेरित करता है और इसीलिए आजकल स्वास्थ के प्रति लोगों की जागरूकता (Awareness) तथा रुझान अपनी चरम सीमा पर है और इसी डर का फायदा आजकल कुछ लोग अपने व्यक्तिगत लाभ (Personal Profit) के लिए उठा रहे हैं-

सोशल मीडिया विविध वेबसाइट (Website) तथा व्हाट्सअप (Whatsup) जैसे माध्यमों पर होने वाली स्वास्थ्य की चर्चाएं इस बात का प्रमाण है कि आज हमारा समाज स्वास्थ्य की बातें करते-करते एक तरह से रुग्णता (Morbidness) की ओर ही बढ़ रहा है बिना जांच पड़ताल के स्वास्थ्य मैसेज फॉरवर्ड करना, गलत जानकारी फैलाना तथा अपने अहंकार को पोषित करने के लिए लोगों को गलत या उजुल फिजूल नुस्खे बताना एक तरह रुग्णता ही है कुछ लोग निरर्थक (Pointless) तथा आधारहीन जानकारियां इंटरनेट (Internet) पर साझा करके अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं और वही भोले-भाले लोग या स्वास्थ्य के प्रति जागरुक या उत्सुक लोग इनके लिखी बेतरतीब जानकारियां पढ़कर इस डर से ग्रसित होकर रहे हैं कि कहीं हम भी किसी बीमारी की चपेट में ना जाए और एक बार जब आशंका या डर के बीच में रोपित हो जाते हैं तब अगर स्वयं विवेक से काम ना लिया जाए तो यह डर बढ़कर मन पर पूरा कब्जा जमा लेता है तथा मानव मन तथा शरीर को रुग्ण बना देता है-

इंटरनेट (Internet) पर बीमारियों के लक्षण कारण तथा दवाइयां ढूंढने वाले लोगों को हमारी यही विनती है कि ऐसे भ्रामक (Misleading) जानकारी के चुंगल में फंसने से पहले जानकारी देने वाले सोर्स तथा लेखक को व  उसके प्रयोजन को भी ठीक से जांच ले बिना संपर्क विवरण के लिखी हुई जानकारी कभी भी पूर्णतया सत्य तथा लोगों के मदद के हेतु से लिखी गई नहीं होती है इससे समाज का यह राष्ट्र का फायदा ना होकर नुकसान ही होता है-

ऐसी भ्रामक (Misleading) वह गलत-सलत जानकारी फैलाने वालों को हम यही कहेंगे कि अज्ञानी होना या ज्ञान कम होना कोई अपराध नहीं है लेकिन आधी-अधूरी या भ्रामक जानकारी फैलाना तथा लोगों के स्वास्थ्य से खेलना निश्चित रूप से ही गंभीर अपराध है आप अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी के स्वास्थ्य के साथ नहीं खेल सकते और आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि लोग आंखें मूंदकर आप की लिखी हुई जानकारी पर नहीं लेकिन हमारी प्राचीन धरोहर आयुर्वेद पर भरोसा करते हैं यह श्रेय आपका ना होते हुए आयुर्वेद का है आप आयुर्वेद के नाम से लोगों के साथ धोखाधड़ी करके अपने आप का ही कहीं ना कहीं नुकसान कर रहे हैं क्योंकि जब रोगी आपको कोई प्रति-प्रश्न करता है तब आप उसका उत्तर देने मैं असमर्थ होते हो आपका यही रवैया बताता है कि आपको समाज या लोगों की मदद करने में कोई रस नहीं है किंतु सिर्फ अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए ऐसी भ्रामक जानकारियां फैलाकर आप अपना उल्लू सीधा करने की मंशा रखते हो-

कहां हो जाती है चूक-


आजकल इंटरनेट (Internet) भी हमारा मानो सर्वस्व बन गया है और हम आंखें मूंदकर के इंटरनेट पर साझा हुई जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं दिन के घंटों हम इंटरनेट का उपयोग करते हैं तथा इंटरनेट की विविध वेबसाइट्स पर हम जानकारी के नाम से जो कचरा तथा प्रदूषण मन में भरते जा रहे हैं उसका खामियाजा हमारे मन तथा मस्तिष्क को किसी ना किसी रूप से भुगतना ही पड़ रहा है और सच मानिए तो इंटरनेट लोगों को स्वस्थ करने की बजाय रुग्ण बनाने का ही काम ज्यादा कर रहा है-

इंटरनेट की  भ्रामक दुनिया क्या है

हमारे अनुभव में तो इंटरनेट (Internet) के माध्यम से लोगों के मन में बीमारियों के प्रति डर और आशंका की भावना की ज्यादा वृधि हुई है इंटरनेट की वजह से रात्रि जागरण, अनिंद्रा, डर, स्ट्रेस,बिना प्रयोजन के उत्सुकता, आशंका जैसी तकलीफों में बढ़ोतरी ही हुई है जहां बच्चे व युवा वर्ग अपनी पढ़ाई तथा कैरियर बनाने की उम्र के अनमोल क्षण इंटरनेट की बलि चढ़ा रहे हैं वही कोई सामान्य सी तकलीफ से जूझता व्यक्ति इंटरनेट की सूचनाएं पढ़कर बीमारियों के बारे में आशंका से या डर से भयभीत हो रहा (Nosemaphobia) है वही कोई इंटरनेट पर बिना लेखक के नाम दिए हुए उपाय व घरेलू नुस्खे पढ़कर अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगा रहा हैं-

कुल मिलाकर इंटरनेट के विवेकहिन उपयोग के चलते हम स्वस्थ होने की वजह ज्यादा परेशान तथा भ्रमित व अस्वस्थ ही हो रहे हैं और हमारे ख्याल से समाजशास्त्रियों, वैद्यों, तथा सुयोग्य जनों को इस बात की ओर गंभीरता से सोचना चाहिए तथा ज्यादा से ज्यादा अच्छी, उपयोगी व सार्थक बातें ही लोगों तक पहुंचानी चाहिए-

साथ ही साथ लोगों ने भी इंटरनेट का उपयोग करते समय आपको भी विवेकपूर्णता रखनी चाहिए इंटरनेट पर साझा हुई हर जानकारी सत्य या तथ्यों पर आधारित है या नहीं है यह समझना चाहिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अच्छी बात है लेकिन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता व रोगों के प्रति  भय या आशंका कब एक बीमारी का रूप ले लेती है तथा  स्वास्थ को पाने के लिए उठ रहे उसके कदम कब रुग्णता की ओर मुड़ जाते हैं इसका पता इंटरनेट पर स्वास्थ विषयक जानकारी पढ़ने वाले व्यक्ति को स्वयं भी नहीं पता चलता-

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