14 फ़रवरी 2018

विविध प्रकार के आयुर्वेदिक क्षीरपाक

Various Types of Ayurvedic KshirPak


पिछले लेख में हमने आपको आयुर्वेदिक क्षीरपाक (KshirPak) के उपयोग, गुण, लाभ तथा आयुर्वेदिक क्षीरपाक बनाने की विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी अब इस लेख में हम आपको विभिन्न रोगों में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न के क्षीरपाक बारे में बताएंगे-

विविध प्रकार के आयुर्वेदिक क्षीरपाक

जैसा कि पिछले लेख में हमने देखा क्षीरपाक (KshirPak) बनाने में बेहद आसान तथा उत्तम गुणकारी तथा पौष्टिक औषधीय कल्पना है क्षीरपाक एक उत्तम औषधि, उत्तम अनुपान तथा कई रोगों में पथ्य कर उत्तम औषधि भी है क्षीरपाक को हम आसानी से घर पर बनाकर स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं-

विविध रोगों में प्रयुक्त होने वाले विविध आयुर्वेदिक क्षीरपाक (KshirPak)-


अर्जुन क्षीरपाक-


अर्जुन की छाल का क्षीरपाक हृदय रोगों (Heart disease) में उत्तम लाभदाई है यह क्षीरपाक रक्त वाहिनियों का संकोचन करता है जिससे रक्त संचार सुचारू होता है तथा हृदय को पोषण मिलता है यह क्षीरपाक (KshirPak) रक्तचाप को भी सामान्य रखता है तथा हृदय दौर्बल्य, अवसाद (Depression) धमनी काठिन्य, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी तकलीफों में भी उत्तम लाभ देता है-

अश्वगंधा क्षीरपाक-


अश्वगंधा के चूर्ण को 25 ग्राम ले कर 100 ml दूध तथा 400 ml  पानी डालकर उबालें जब एक चौथाई बचे तब इसे छानकर इसमें मिश्री तथा इलायची मिलाकर सुबह-शाम पीने से गर्भाशय का संकुचन होता है यह क्षीरपाक (KshirPak) गर्भाशय प्रोलेप्स (Uterus Prolapse) या गर्भाशय भ्रंश पर भी उत्तम लाभदाई हैं-

अश्वगंधा का पौष्टिक क्षीरपाक-


अश्वगंधा के चूर्ण 25 ग्राम लेकर 25 ग्राम घी में अच्छे से भून लें अब इसमें एक कप दूध व 4 कप पानी डालें तथा स्वाद अनुसार मिश्री डालें जब एक चौथाई बचे तब इसमें एक चम्मच अखरोट बादाम का पाउडर मिला दे यह क्षीरपाक (KshirPak) पीने से शरीर को पोषण मिलता है, वजन बढ़ता है, दुबलापन दूर होता है, शरीर में मांस व बल की वृद्धि होती है यह क्षीरपाक मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) में भी बेहद लाभदायक है-

शतावरी क्षीरपाक-


25 ग्राम शतावरी चूर्ण को 25 ग्राम घी में अच्छे से भून ले अब उसमें 100 ml दूध तथा 400 Ml पानी डालकर अच्छे से उबालें जब एक चौथाई बचे तब इसे छानकर सुबह शाम पिए इसमें आप मिश्री भी डाल सकते हैं-

यह क्षीरपाक (KshirPak) गर्भाशय संबंधित तकलीफों, ज्यादा माहवारी होना, कमजोरी लगना, श्वेत प्रदर (Whitedischarge) रक्त प्रदर तथा गर्भाशय की कमजोरी जैसी समस्याओं में बेहद लाभदाई है-

यह प्रयोग करते समय तेज मिर्ची मसाले, लहसुन, अचार, खट्टे पदार्थ तथा तली-भुनी चीजें ना खाते हुए ठंडी तासीर की चीजें दूध, चावल, खीर, दूध की मलाई, फल जैसी चीजों का भोजन में समावेश अवश्य करना चाहिए ज्यादा माहवारी की तकलीफ में यह प्रयोग बेहद लाभदायक हैं-

यष्टिमधु क्षीरपाक-


जेठीमधु तथा शतावरी चूर्ण को समान भाग लेकर मिलाकर रख ले अब इस चूर्ण को  30 ग्राम लेकर उसे 120 ml दूध तथा 480 ml पानी में उबालें इसमें एक चम्मच मिश्री डालें उबालकर जब जल उड़ जाए व क्षीरपाक सिद्ध हो जाए तब इसे छान के ठंडा करके पिए-

यह क्षीरपाक सुबह शाम पीने से शरीर की आंतरिक गर्मी, योनीमार्ग के छाले, हॉट फ्लैशेस (Hot flashes) शरीर दाह, जलन, छाले (Blisters), बार-बार गर्भपात होना या गर्भाधान में होने वाली समस्या तथा पित्त की समस्या में बेहद लाभ मिलता है-

बला क्षीरपाक-


25 ग्राम बला मूल चूर्ण को 100 ml दूध तथा 400 ml पानी में डालकर उबाल कर  क्षीरपाक सिद्ध करें सिद्ध हो जाने पर इसमें एक चम्मच मिश्री तथा दो बूंदे अखरोट के तेल की डालकर सुबह शाम पीए-

यह क्षीरपाक कंपवात, शरीर में हाथ पैरों का कंपन होना, जैसी समस्याओं पर बेहद हितकर हैं यह क्षीरपाक पीने से वृधावस्था की कमजोरी (Debility) मिटती हैं, शारीरिक बल बढ़ता है हाथ पैर तथा जोड़ों की कमजोरी में लाभ मिलता है यह क्षीरपाक पार्किंसन डिजीज (Parkinson disease) के लिए बेहद लाभदाई है-

समुद्र वेल समुद्र शोथ क्षीरपाक-


समुद्र बेल का चूर्ण लाकर उसका क्षीरपाक सिद्ध करें तथा उसमें एक चम्मच मिश्री डालकर सुबह शाम पिएं-यह क्षीरपाक पीने से वायु तथा रक्त दोष का शमन होता है आचार्य भाव प्रकाश कहते हैं कि-

         क्षीरेण पिबेद्वा वृध्ददारुकम: 

याने यह क्षीरपाक एक उत्तम टॉनिक है यह क्षीरपाक पीने से घुटनों के दर्द (Kneepain) घुटनों की सूजन, ऐठन तथा जोड़ों के दर्द में बेहद लाभ होता है तथा शरीर में बल, चेतन तथा उत्साह की वृद्धि होती है-

अल्वी क्षीरपाक-


25 ग्राम अल्वी, एक चम्मच बादाम पाउडर, एक चम्मच अखरोट पाउडर तथा दो छुहारे इन सब को मिलाकर 25 ग्राम घी में अच्छे से भून ले अब इसमें 125 Ml दूध डालें तथा 500 ml पानी डालें व क्षीरपाक सिद्ध करें क्षीरपाक (Kshir Pak) सिद्ध होने पर इसमें गुड तथा थोड़ी इलायची डालकर इसका सेवन करें-

विविध प्रकार के आयुर्वेदिक क्षीरपाक

यह क्षीरपाक बेहद पौष्टिक है प्रसूति के बाद आई हुई कमजोरी (Weakness) चक्कर, कमर दर्द, दूध का कम उतरना, स्तनों में दर्द, रक्त की कमी (Animia) तथा हड्डियों के दर्द व कैल्शियम की कमी जैसी समस्याओं में यह क्षीरपाक एक स्वादिष्ट व पौष्टिक अन्नऔषधि मानी जाती है-

गोखरू क्षीरपाक-


गोखरू तथा शतावरी चूर्ण को समान भाग लेकर मिलाकर रख लें अब यह चूर्ण 10 ग्राम तथा मिश्री 10 ग्राम लेकर 80ml दूध तथा 640 ml पानी में उबालें जब 100 ml  कितनी मात्रा रह जाए तब इसे छानकर ठंडा करके पिए-

यह क्षीरपाक पित्तप्रकृति के लोगों को, पित्त संबंधी समस्या होने पर, रक्तपित्त, जलन, पेशाब से रक्त आना, रक्तप्रदर तथा पथरी की समस्या में बेहद लाभदायक है-

यह क्षीरपाक सुबह शाम पीने से पेशाब में आने वाला रक्त बंद हो जाता है तथा पथरी (Stone) भी धीरे-धीरे टूट कर निकल जाती है-

क्रौंच क्षीरपाक-

क्रौंच के बीजों के चूर्ण से क्षीरपाक सिद्ध कर ले तथा ठंडा होने पर यह क्षीर पाक दिन में दो या पाचन शक्ति के अनुरूप तीन बार सेवन करे-

यह क्षीरपाक नपुसंकता (Impotence), शुक्र दोष, धातु दौर्बल्य तथा वायु रोगों में श्रेष्ठ औषधि है धातु दृष्टि या वीर्य के क्षय से तथा शुक्र दृष्टि की वजह से उत्पन्न  तकलीफों में जिसमें वीर्य कम हो जाना, वीर्य पतला हो जाना, शीघ्रपतन (Premature ejaculation) जैसी समस्याओं में यह क्षीरपाक बेहद लाभदाई है यह क्षीरपाक उत्तम बाजी कर योग भी है-कृशता, दौर्बल्य (Weakness) तथा वजन कम होना जैसे समस्या में यह क्षीरपाक लाभदाई है वात रोग में इस में क्षीरपाक आधे चम्मच सोंठ डालकर यह क्षीरपाक का सेवन करना चाहिए-

रसोन क्षीरपाक-

रसोन याने लहसुन (Garlic) 25 ग्राम लहसुन को 100ml दूध तथा 400 ml पानी में उबालें जब चौथाई बचे तब छानकर इसे आधी चम्मच घी डालकर सेवन करें-

रसोंन (Garlic) क्षीरपाक के नियमित सेवन से मायोकार्डियल इन्फार्कशन तथा उच्च कोलेस्ट्रॉल के बचाव में लाभ मिलता है यह क्षीरपाक गाउट (Gaut) तथा एसिडिटी (Acidity) में भी लाभदाई है पेट की गैस, बादी बवासीर तथा कमजोर पाचन शक्ति में भी यह क्षीरपाक बेहद उपयोगी है यह रक्तचाप को सुचारू करता है तथा जोड़ों के दर्द (Jointspain) कमर दर्द, हड्डियों के दर्द को दूर करता है यह क्षीरपाक लकवा तथा समस्त वायु रोगों में रामबाण औषधि है ह्रदय रोग, कामेच्छा की कमी तथा मानसिक थकान व सुस्ती जैसी समस्याओं पर भी रसोंन क्षीरपाक उत्तम औषधि हैं-

हरिद्रा क्षीरपाक-


हल्दी (Turmeric) की गाठों को दरदरा पिस लें फिर इसे गाय के घी में भून ले तथा भुनी हुई हल्दी को बारीक पीस लें 5 ग्राम हल्दी के चूर्ण को 50 ml गाय के दूध तथा 200 ml पानी मिलाकर क्षीरपाक सिद्ध कर ले-

यह क्षीरपाक (Kshir Pak) पीने से सिर के रोग, आंख, नाक तथा कान संबंधित समस्याएं, माइग्रेन, त्वचा रोग, फोड़े (Boils) फुंसी, कील मुंहासे (Acne) सर्दी, खांसी, छाती में कफ का जम जाना, सूखी खांसी, फेफड़े संबंधी रोग, छाती में दर्द (Chest Pain) पीठ में दर्द जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है-

हरिद्रा क्षीरपाक उत्तम रक्तशोधक भी है इसी वजह से यह क्षीरपाक त्वचा के इंफेक्शन, दाद, खाज (Herpes) खुजली, सोराइसिस (Psoriasis) जैसी समस्याओं पर भी उत्तम लाभदायक है-

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