आम्र कल्प चिकित्सा की शास्त्रोक्त विधि तथा उसके अद्भुत लाभ

Scientific Method of Amrakalpa Therapy its Amazing Benefits


पिछले लेख में हमने आम्र कल्प चिकित्सा के परिचय, प्रयोजन तथा आम्र कल्प चिकित्सा (Amrakalpa Therapy) में रखने योग्य सावधानियों के बारे में विस्तार से जाना-इस लेख में हम आपको शरीर को आम्र कल्प चिकित्सा के लिए शरीर को तैयार करने हेतु किया जाने वाला पूर्व चिकित्सा कर्म, आम्र कल्प चिकित्सा की विधि याने मुख्य चिकित्सा कर्म तथा आम्र कल्प चिकित्सा के पश्चात किये जाने वाले चिकित्सा कर्म के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे साथ साथ ही हम आपको आम्र कल्प चिकित्सा के लाभ के बारे में भी बताएँगे-

आम्र कल्प चिकित्सा की शास्त्रोक्त विधि तथा उसके अद्भुत लाभ

आम्र कल्प चिकित्सा की विधि-


पूर्व कर्म-

1- आम्र कल्प चिकित्सा (Amrakalpa Therapy) करने से पहले शरीर को चिकित्सा के लिए तैयार करना चाहिए इसे पूर्व चिकित्सा कर्म कहा जाता हैं-

2- इसका प्रयोजन शरीर में संचित दोष तथा विजातीय द्रव्य (Toxin) व मल (Faeces) का योग्य उत्सर्जन करके शरीर को शुद्ध (Datoxification) तथा चिकित्सा के लाभ ग्रहण करने हेतु सक्षम बनाना होता है-

3- इसके लिए सबसे पहले 3 दिन उपवास (Fasting) या द्रव्य आहार (Liquid Diet) पर रहना चाहिए अगर शारीरिक बल तथा मनोबल कम हो तो खाने में उबले हुए मुंग या श्यामाक विलेपी खा कर रहना हितकर होता है तथा साथ-साथ रोज सुबह पेट पर तिल का तेल लगाकर पेट की मालिश करना चाहिए-

4- सुबह पानी में नींबू का रस, नीम के पत्ते, हल्दी, मेथी जैसे औषधियां उबालकर उस गुनगुने पानी से एनिमा (Enema) लेना चाहिए जिससे आंतों की पूर्ण रूप से सफाई हो जाए तीन दिन के इस चिकित्सा के बाद शरीर आम्र कल्प चिकित्सा (Amrakalpa Therapy) ग्रहण करने योग्य बन जाता है-

आम्र कल्प चिकित्सा (Amrakalpa Therapy)


मुख्य कर्म-

1- यह आम्र कल्प चिकित्सा  (Amrakalpa Therapy) आप 7 दिन, 14 दिन, 21 दिन या अपने सामर्थ्य तथा इच्छा व आवश्यकता अनुसार कर सकते हैं-

2- पहले दिन प्रातः पांच देसी आम (Mango) तथा सांयकाल सूर्यास्त से एक घंटे पहले पांच देसी आम चूसे तथा बीच-बीच में भुना जीरा, सोंठ तथा सेंधा नमक का चूर्ण चाटते जाए आम चूसने के लगभग डेढ़ से 2 घंटे बाद एक गिलास दूध पिए-

3- इसमें प्रतिदिन एक-एक आम की बढ़ोतरी करते जाए अगर भूक व प्यास ज्यादा लगती हो तो दूध (Milk) की मात्रा भी बढ़ाई जा सकती है-

4- शाम को आम (Mango) चूसने से पहले एक चम्मच भुना जीरा, एक चम्मच शहद तथा दो चम्मच लाही का चूर्ण मिलाकर चाट ले-

5- पहले दिन से आखरी दिन तक यह प्रयोग करना है दूसरे दिन से आम चूसने के के बाद एक चम्मच खंडाम्रपाक का सेवन करना कुछ वैद्यो ने अति लाभदायक कहा है-

6- इस तरह यह क्रम एक एक आम बढ़ाते हुए आप इस आम्र कल्प चिकित्सा को 7 दिन, 15 दिन, 21 दिन, 40 दिन या आप की आवश्यकता अनुसार बढ़ा सकते हैं-

पश्चात कर्म-

आम्र कल्प चिकित्सा (Amrakalpa Therapy) के आखिरी दिन के बाद दूसरे दिन से सुबह पक्वाम्रपाक के दो टुकड़े दूध के साथ सेवन करें तथा भोजन में दलिया, चावल की मांड घी डालकर या दूध चावल का ही सेवन करें दो-तीन दिन तक द्रव्य आहार (Liquid Diet) का सेवन करें तथा रोटी या पचने में भारी आहार ना ले इस दौरान शरीर की मालिश (Body Massage) करवाना भी हितकर माना गया है-

आम्र कल्प चिकित्सा के लाभ-


1- प्रतिवर्ष एक बार यदि आम्र कल्प चिकित्सा कर ली जाए तो शरीर में पूरे वर्ष भर के लिए नव चैतन्य, ऊर्जा (Vitality) बल तथा उत्साह का संचार होता है-

आम्र कल्प चिकित्सा की शास्त्रोक्त विधि तथा उसके अद्भुत लाभ

2- आम्र कल्प चिकित्सा से शरीर नये जैसा बनता है याने शरीर में नए कोषों का निर्माण होने लगता है तथा विषैले तत्वों का उत्सर्जन (Emission) होने से शरीर की शुद्धि (Datoxification) होने से शरीर किसी रोग का शिकार नहीं होता-

3- जैसा कि पिछले लेखों में भी हमने बताया था कि दूध, आम रस, शहद, तथा घी जैसे उत्तम रसायन तत्वों का संयोजन हमारे शरीर के लिए, प्राणों के लिए तथा आंतरिक अंगों (Vital Organs) के लिए बेहद लाभदायक है इस चमत्कारिक आम्रकल्प चिकित्सा से हर प्रकार के असाध्य रोग, संग्रहणी, उदर रोग, क्षय रोग, दमा नपुसंकता (Impotency), रक्तविकार, त्वचा रोग, बवासीर (Hemorrhoids), यकृत के दोष दूर होते हैं यह चिकित्सा संग्रहणी तथा मंदाग्नी की तो परम औषधि है-

4- आम्रकल्प चिकित्सा बुढ़ापे को रोकती है व जवानी को बरकरार रखती हैं, नया खून उत्पन्न करती है आम्रकल्प चिकित्सा से वात संस्थान (Nervous System) को उत्तेजना मिलती है, कब्ज (Constipation) दूर होता है, शरीर मांसल व बलशाली बनता है, मूत्र रोग नष्ट होते हैं, त्वचा व बाल चमकीले बनते हैं-

5- आम्रकल्प चिकित्सा से शरीर में पित्त संतुलित होने से शरीर में आम्लता (Acidity) कम होती है जिससे पाचन संस्थान व ह्रदय को बल मिलता है, जननेंद्रिय तथा प्रजनन संबंधित अवयवों (Reproductive organ) को पुष्टि मिलती है पुरुषों में वीर्य वर्धन होता है तथा कामशक्ति भी बढ़ती है, स्त्रियों में गर्भाशय की कमजोरी दूर होती है त्वचा की कांति निखरती है शरीर सुडौल व स्तन पुष्ट होते हैं-

6- आम्रकल्प चिकित्सा से वायु का नाश होने से हड्डी का रूखापन तथा जोड़ों के दर्द, साइटिका (Sciatica), कमर दर्द जैसी समस्या दूर होती है-

7- बच्चों में आम्रकल्प चिकित्सा से रोग प्रतिकारक शक्ति (Immunity) बढ़ती है, याददाश्त अच्छी होती है, बुद्धि तेज होती है-

8- मदनपाल निघंट के अनुसार आम्रकल्प चिकित्सा स्मृति तथा मेघा वर्धक है यह बल (Energy) तथा उत्साह वर्धन करते हुए सौंदर्य तथा रूप को भी बढ़ाता है-आम्रकल्प मनुष्यों का जीवन स्वास्थ,सौन्दर्य, और प्रसन्नता से भरता हैं इसीलिए आम्रकल्प चिकित्सा को शास्त्रों में तन व मन का  कायाकल्प (Rejuvenation) करने वाली चिकित्सा माना गया हैं-

विशेष सूचना-

सभी मेम्बर ध्यान दें कि हम अपनी नई प्रकाशित पोस्ट अपनी साइट के "उपचार और प्रयोग का संकलन" में जोड़ देते है कृपया सबसे नीचे दिए "सभी प्रकाशित पोस्ट" के पोस्टर या लिंक पर क्लिक करके नई जोड़ी गई जानकारी को सूची के सबसे ऊपर टॉप पर दिए टायटल पर क्लिक करके ब्राउज़र में खोल कर पढ़ सकते है....

किसी भी लेख को पढ़ने के बाद अपने निकटवर्ती डॉक्टर या वैद्य के परमर्श के अनुसार ही प्रयोग करें-  धन्यवाद। 

Upchar Aur Prayog 

Upcharऔर प्रयोग की सभी पोस्ट का संकलन

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Upchar Aur Prayog

About Me
This Website is all about The Treatment and solutions of Home Remedies, Ayurvedic Remedies, Health Information, Herbal Remedies, Beauty Tips, Health Tips, Child Care, Blood Pressure, Weight Loss, Diabetes, Homeopathic Remedies, Male and Females Sexual Related Problem. , click here →

आज तक कुल पेज दृश्य

हिंदी में रोग का नाम डालें और परिणाम पायें...

Email Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner