24 मई 2018

बालों के झड़ने तथा सफेद होने पर आयुर्वेदिक तेल बनाने की विधि


पिछले लेखों में हमने क्रमशः बालों की समस्याओं के संदर्भ में तथा बालों की समस्या उत्पन्न करने वाले मुख्य कारण तथा उनके उपचार के बारे में विस्तार से जाना इन्हीं कारणों में से बाल झड़ने (Hair Fall) तथा असमय सफेद (White Hair) होने का एक मुख्य कारण है बालों को तेल ना लगाना और अगर तेल लगाया भी तो अयोग्य तरीके से लगाना व अयोग्य तेल लगाना-

बालों के झड़ने तथा सफेद होने पर आयुर्वेदिक तेल बनाने की विधि

अब इन सब के बारे में विस्तार से इस लेख में आगे जानेंगे ही लेकिन बालों को तेल लगाने के संदर्भ में आयुर्वेद क्या कहता है यह सब से पहले जान लेते हैं-

ध्रूद मुलाश्च्य दिर्धाश्च : केशा भवन्तिच |
इन्द्रियाणी प्रसीदन्ति सुत्वग्भवति चाननम |
निद्रलाभ: सुखं स्यान्मूनर्धि तैल निषेवणात || - चरक संहिता

अर्थात-

सर में तेल लगाने से बालों की जड़े मजबूत होती है बाल काले तथा लंबे होते हैं समस्त इन्द्रिया प्रसन्न रहती हैं तथा ताजगी तथा बढ़ती है सर में तेल मालिश करने से थकान दूर होती है नींद भी अच्छी आती है-

सर में तेल लगाने के लाभ-

1- सर में तेल लगाने तथा मालिश करने का चलन प्राचीन सभ्यताओं के काल से ही प्रचलित है इतिहास में प्रसिद्ध ग्रीस की  सम्रागिनी क्लियोपैट्रा जो अपने सौंदर्य के चलते आज भी प्रसिद्ध है प्राचीन ग्रंथों में मिले उल्लेख के मुताबिक क्लियोपेट्रा अपने बालों का सौंदर्य बढ़ाने के लिए जैतून तथा बादाम के तेल में कई प्रकार की जड़ी बूटियां मिला कर अपने सिर में मालिश करवाती थी-

2- भारत में फैशन के चलते तेल लगाने का चलन लगभग बंद ही हो गया है तथा इसकी जगह कॉस्मेटिक प्रोडक्ट तथा रसायनों से युक्त ज़ेल्स या तेलों ने  ले ली है-

3- लेकिन एक आपको जानकर आश्चर्य होगा कि विदेशों में भारतीय तेल मालिश को इंडियन चंपी सेज (Champissage) के नाम से बड़े-बड़े हेयर स्पा तथा ब्यूटी पार्लर में तगड़ी फ़ीस वसूल कर प्रेक्टिस किया जाता है और लोग खास तौर पर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों युक्त तेल से अपने सिर की मालिश करवाते हैं और अफसोस की बात यह है कि भारतीय लोग विदेशी फैशन के चलते तेल ना लगाकर अपने बालों का सौंदर्य नष्ट करने पर तुले हैं-

4- सर में तेल लगाने से केश ग्रंथिया (Hair Follicle) जो कि बालों की जड़ों में याने सर की त्वचा में होती है उनमें रक्त संचार बढ़ता है जिससे बालों की जड़ों को भरपूर पोषण मिलता है व बालों की जड़े मजबूत होने से बाल स्वस्थ बनते हैं तथा बाल लंबे भी होते हैं-

बालों के झड़ने तथा सफेद होने पर आयुर्वेदिक तेल बनाने की विधि

5- तेल द्वारा योग्य पोषण मिलने से बालों का असमय सफेद (White Hair) होना रुकता है तथा बाल रूखे बेजान होने से भी बचे रहते हैं-

6- बालों में तेल लगाकर हल्की मसाज करने से तथा वह तेल बालों में पूरी रात रखने से सिर की त्वचा का रूखापन दूर होता है सर की त्वचा का कंडीशनिंग (Scalp Conditioning) होता है जिससे पपड़ी जमना या रुसी होना जेसी समस्या कम होती है-

7- सिर में तेल लगाने से चेहरे का तनाव दूर होता है तथा आंखों को ठंडक मिलती है तेल लगाने से नींद भी अच्छी आती है तथा थकान दूर होती है व मानसिक तनाव (Mental Stress) भी कम होता है-

कौन सा तेल उपयुक्त है-


1- आजकल विविध केश तेलों से बाजार भरे पड़े हैं बिना चिकनाहट के औषधीय गुणों तथा बालों को लंबा करने के दावे करने वाले केश तेल दरअसल मिनिरल आयल से बने होते हैं जो कि एक पेट्रोलियम पदार्थ है और यह कहने की जरूरत नहीं होगी यह फायदे की जगह नुकसान ही करते हैं-

2- ज्यादातर आयुर्वेदिक जाने वाले तेलों में भी कृत्रिम रंग तथा कृत्रिम सुगंध व अन्य मिलावट होती हैं जिससे लगाने पर भी आपको वांछित लाभ नहीं मिल पाता व परिणाम स्वरूप आयुर्वेद बदनाम होता हैं-

3- इसका सुलभ उत्तम मार्ग यही है कि घर में ही शुद्ध तेलो तथा अच्छी गुणवत्ता की औषधियों का संयोजन करके स्वयम केशतेल बनाया जाए-

बालों के झड़ने तथा सफेद होने पर आयुर्वेदिक तेल बनाने की विधि

4- आज हम आपको ऐसे ही तेल बनाने की विधि बताएंगे जो बालों के झड़ने (Hair Fall) तथा असमय सफेद (White Hair) होने पर बेहद लाभदाई हैं इसके नियमित इस्तेमाल से बालों की समस्याएं कम होगी तथा ऊपर बताए गए लाभ भी होंगे-

केश तेल बनाने की विधि-


भृंगराज रसनैव लोहकिटट फलत्रिकम |
सारिवा च पचतक्कैस्तैल दारुणनाशनम
अकाल पलितं कंडूमिन्द्र लुप्तं च नाशेयत || - भेषज संहिता

इस तेल का वर्णन भेषज संहिता में किया गया है इस तेल के उपयोग से बाल मजबूत व काले होते हैं बालों का झड़ना (Hair Fall) बंद होता है तथा यह तेल बालों को असमय सफेद (White Hair) होने से रोकता है-

तेल से सर में मालिश करने से सर की त्वचा में रक्त संचार सुचारू होता है जिससे बालों में रूसी (Dandruff) तथा सिर की त्वचा पर खाज खुजली व पपड़ी जमना जैसी समस्या भी मिटती है-

सामग्री-


भृंगराज के पत्ते- 50 ग्राम
त्रिफला चूर्ण- 150 ग्राम
अनंतमूल चूर्ण- 50 ग्राम
नील कमल चूर्ण- 50 ग्राम
आम की गुठली का चूर्ण- 50 ग्राम
मंडूर भस्म-  50 ग्राम
भृंगराज का स्वरस- 3200 ml
काले तिल का तेल- 1600 ml

बनाने की विधि-



उपरोक्त चूर्णों को मिलाकर भृंगराज के रस में डुबोकर 24 घंटे रखें उसके बाद उसमें तिल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर जलांश उड़ने तक पकाएं तथा तेल सिद्ध करें-ठडा होने पर कांच की शीशी में भरकर रख लें-

नोट-

भृगराज का स्वरस उपलब्ध ना हो तो 400 ग्राम भृंगराज के पत्ते के पाउडर को 3 लीटर पानी में भिगोकर 24 घंटे रखें उसके बाद उसको उबालकर वो  काढा इस्तेमाल करें-

काले तिल के तेल की जगह सफेद तिल के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं-इस तेल का नस्य के रूप में भी इस्तेमाल करना हैं इसलिए इसमें क्रुत्रिम रंग या सुगंध इसलिए कतई ना मिलाएं-


कैसे उपयोग करें-


रात को सोने से पहले इस तेल को हल्का गर्म करके सिर्फ बालों की जड़ों में हल्के हल्के मसाज करके लगाएं-मसाज होने के बाद इस तेल की 2-3 बूंदे नाक में भी डालें तथा सुबह बाल काली मिट्टी या आयुर्वेदिक लेप से धो ले (जिस की विधि अगले लेखों में बताई जाएगी)-

याद रहे बाल झड़ने (Hair Fall) तथा असमय सफेद (White hair) होने की समस्या में शैंपू का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर देना चाहिए (शैंपू बालों के लिए केसे और क्यों हानिकारक है तथा शैंपू का उत्तम पर्याय क्या है? इसका विस्तार से विवरण आगे की पोस्ट में देंगे)



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