पंचनिंबादि चूर्ण बनाने की विधि तथा सेवन से होने वाले लाभ

Preparation Method of Panch Nimbadi Churna and Benefit


पिछले लेख में हमने त्वचा रोगों (Skin Disease) की उत्पत्ति का मुख्य कारण तथा त्वचा रोगों पर पंचनिंबादि चूर्ण (Panch Nimbadi Churna) किस तरह काम करता है यह विस्तार से जाना इस लेख में हम आपको पंचनिंबादि चूर्ण बनाने की विधि, सेवन विधि तथा उसके लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे-

पंचनिंबादि चूर्ण बनाने की विधि तथा सेवन से होने वाले लाभ

पंचनिंबादि चूर्ण की विशेषता यह है कि इसमें नीम के पंचांग याने नीम की छाल, नीम पत्र, नीम के फूल, नीम के फल तथा नीम की जड़ का उपयोग किया गया है इसलिए इसे त्वचा रोगों (Skin Disease), त्वचा के इन्फेक्शन्स तथा अन्य असाध्य समस्याओं पर विशिष्ट रुप से गुणकारी माना गया है-

इसके बारे में शारंगधर संहिता में महर्षि शारंगधर ने कहा है कि-

    मासेन सर्वकुष्ठानी विनिहन्ति रसायानम
    पंचनिम्बभिंद चूर्ण सर्व रोग प्राणाशनम ||१५९||

अर्थात-

इस चूर्ण के विधिवत सेवन से एक ही महीने में सर्व प्रकार के कुष्ठ रोग, त्वचा रोग (Skin Disease) मिट जाते हैं यह एक रसायन है तथा सारे रोगों का नाश करता है इस चूर्ण को महर्षि शारंगधर ने सर्व रोग प्राणाशनम कहा है याने की समस्त रोगों का नाश करने वाला-

पंचनिंबादि चूर्ण (Panch Nimbadi Churna) बनाने की विधि-


सामग्री-

नीम की छाल- 125 ग्राम
नीम के पत्ते- 125 ग्राम
नीम के फूल- 125 ग्राम
नीम के फल- 125 ग्राम 
नीम की जड़- 125 ग्राम
लोहाभस्म, चक्रमर्द, चित्रक मूल, भल्लातक, बाय-बिडंग, शक्कर, सौंठ, कालीमिर्च, पीपर, आवला, हल्दी, अमलताश का गुदा, गोखरू तथा बावची- 40-40 ग्राम

बनाने की विधि-

सबसे पहले नीम के पंचांग तथा उपरोक्त सारे चूर्णों को अच्छे से मिलाकर खूब बारीक पीस लें तथा कपड़छन कर ले-

अब इन सारे चूर्णों को अच्छे से मिलाकर उनको भृंगराज के रस की एक भावना देकर छाया में सुखा लें यानि भृंगराज का रस डालकर खुब घोंटे तथा जब भृंगराज का रस इन चूर्णों में अच्छे से जब्ज हो जाए तथा चूर्ण थोड़ा गाढ़ा हो जाए तब इसे साफ कपड़े पर फैलाकर छाया में सुखा लें-

सूख जाने पर इस चूर्ण को फिर से खूब घोंट ले तथा एकरस कर ले इसके बाद इसको खेर सार के रस की एक भावना देकर फिर से छाया में सुखा लें और इसे साफ़ बोतलों में भर ले पंचनिंबादि चूर्ण (Panch Nimbadi Churna) उपयोग के लिए तैयार है-

सेवन विधि व अनुपान-


5 से 6 ग्राम की मात्रा में खेर सार के क्वाथ के साथ या गाय के घी के साथ या गाय के दूध के साथ दिन में दो बार लें-

पंचनिंबादि चूर्ण (Panch Nimbadi Churna) के लाभ-


1- पंचनिंबादि चूर्ण के नियमित सेवन से हर प्रकार के कुष्ठ रोग त्वचा रोग (Skin Disease) व इन्फेक्शन मिटते हैं-

2- शरीर से विषाक्त द्रव्य बाहर निकलते हैं शरीर के संचित दोषों तथा विषों (Toxins) का योग्य निष्कासन होने से अन्य रोग ठीक होने में भी सहायता मिलती है-

पंचनिंबादि चूर्ण बनाने की विधि तथा सेवन से होने वाले लाभ

3- पंचनिंबादि चूर्ण (Panch Nimbadi Churna) के सेवन से लिवर पुष्ट होता है यह उत्तम रक्त शोषक (Blood Purifier) हैं इसके सेवन से रक्त के दोष व गर्मी नष्ट होती हैं जिससे बार-बार होने वाले फोड़े, फुन्सिया कील मुहाँसे (Acne Pimple) मिटते हैं-

4- पंचनिंबादि चूर्ण (Panch Nimbadi Churna) के सेवन से पेट व आँतों में जमे हुए मैल का योग्य उत्सर्जन (Ejection) होता है जिसकी वजह से बड़ी आंत संबंधित व्याधियां जैसे बवासीर, भगंदर (Fistula) तथा गुदाद्वार के छाले जैसी समस्याएं दूर होती हैं-

5- पंचनिंबादि चूर्ण के सेवन से शरीर की पूर्ण रूप से शुद्धि (Detoxification) होती है शरीर के अंदरूनी अंगों की कार्य क्षमता बढ़ती है रक्त शुद्ध होता है दाद, खाज, खुजली, एग्जिमा, सोरायसिस (Psoriasis), त्वचा के इंफेक्शन, फोड़े-फुंसियां, फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection) जैसी समस्याए नष्ट होती है-

6- इस चूर्ण के नियमित सेवन से त्वचा की रंगत भी निखरती है तथा त्वचा साफ, स्निग्ध और चमकदार बनती है इस तरह यह चूर्ण समस्त त्वचा रोग नाशक होने के साथ-साथ सौंदर्य वर्धक भी है धीरज रखकर इसका सेवन करने से असाध्य व हठीले त्वचा विकारों तथा पुराने व्रण तथा प्रदर रोगों में चमत्कारिक लाभ मिलता है-

नोट- यह चूर्ण आप बाजार में बना बनाया भी मिलता है लेकिन हमारी सलाह है कि इसका उत्तम लाभ लेने के लिए आप इसे घर पर ही बनाएं अगर बना पाने में असमर्थ हो तो किसी अनुभवी वैध से बनवा कर सेवन करे-

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