अस्थमा रोगी के लिए उचित आहार


पिछले तीनो लेख में आपने अस्थमा (Asthma) क्या होता है क्यों होता है अस्थमा रोगी को किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए और अस्थमा रोगी को क्या-क्या करना है ये जानकारी विस्तार से प्राप्त की है अब इस लेख में हम अस्थमा रोगी के लिए क्या उचित आहार होना चाहिए इसके बारे में जानेगें-

अस्थमा रोगी के लिए उचित आहार

जो लोग आस्थमा (Asthma) जैसी बीमारी से लड़ रहे हैं उनके लिए सबसे ज़रूरी है खाने में एण्टी आक्सिडेंट का इस्तेमाल करना चूँकि ये एण्टी आक्सिडेंट सीधा फेफड़ों में जाकर फेफड़ों की बीमारियों से और सांसों की बीमारियों से लड़ते हैं ये वो खाद्य पदार्थ है जिनमें विटामिन सी और ई होते है वो हर प्रकार की सूजन कम करते हैं-


आस्थमा (Asthma) रोगी का आहार कैसा हो-


अस्थमा रोगी के लिए उचित आहार


1- साइट्रस फूड (Citrus Food) जैसे संतरे का जूस, हरी गोभी में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक पायी जाती हैं और यह अस्‍थमा के मरीज़ों (Asthma Patients) के लिये  अच्‍छे होते हैं ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमे विटामिन ए की मात्रा अधिक होती है वो फेफड़ों से एलर्जेन निकालने में बहुत उपयोगी होते हैं-

2- ऐसे फल व सब्ज़ियां जो गहरे रंग की होती हैं उनमें बीटा कैरोटिन की मात्रा बहुत अधिक होती है जैसे गाज़र, गहरे हरे रंग की सब्ज़ियां पालक आदि जिन फल व सब्ज़ियों का रंग जितना गहरा होता है उनमें एण्टीआक्सिडेंट (Antioxidant) की मात्रा उतनी ही अधिक होती है-

3- विटामिन ई का उपयोग ज़्यादातर खाना बनाने के तेल में होता है लेकिन अस्थमा के मरीज़ को इसका उपयोग कम कर देना चाहिए-विटामिन ई गेहूं, पास्ता और ब्रेड में भी पाया जाता है लेकिन इन आहार में विटामिन की मात्रा कम होती है-

4- ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें विटामिन बी की मात्रा ज़्यादा होती है जैसे दाल और हरी सब्ज़ियां ये अस्थमा के रोगी (Asthma Patient) को अटैक से बचाती हैं ऐसा भी पाया गया है कि अस्थमा के रोगी में नायसिन और विटामिन बी 6 की कमी होती है चूँकि कच्चे प्याज़ में सल्फर की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है जिससे कि आस्थमा के मरीजों को बहुत लाभ मिलता है-

5- ओमेगा 3 फैटी एसिड फेफड़ों में हुई सूजन को कम करने के साथ बार-बार हो रहे अस्थमा अटैक (Asthma Attack) से भी बचाने में मदद करता है ओमेगा 3 फैटी एसिड मछलियों (Fish) में पाया जाता है ये सेलेनियम भी फेफड़ों में हुई सूजन को कम करने में उपयोगी होता है अगर सेलेनियम के साथ अस्थमैटिक्स (Asthmatics) द्वारा विटामिन सी और ई भी लिया जा रहा है तो प्रभाव दोगुना हो जाता है सेलेनियम सी फूड, चिकेन और मीट में भी पाया जाता है-

6- वो खाद्य पदार्थ जिनमें कि मैगनिशीयम (Magnesium) की मात्रा ज़्यादा होती है वो श्वास नली से अतिरिक्त हवा को अन्दर आने देते हैं जिससे कि सूजन पैदा करने वाले सेल्स भी कम हो जाते है-मैग्निशीयम की मात्रा पालक, हलिबेट, ओएस्टर में ज़्यादा होती है कुछ खाने पीने की चीज़ों से श्वासनली में मौजूद म्यूकस बहुत पतला और पानी सा हो जाता है जैसे स्पाइसी खाना अदरक, प्याज़ आदि-

7- फैट युक्त पदार्थ जैसे दूध, बटर से अस्थमा की तीव्रता कम हो जाती है जो बच्चे ज़्यादा फैट युक्त आहार लेते है उनकी तुलना में वो बच्चे जो फैट युक्त आहार कम लेते हैं उनमें आस्थमा की सम्भावना अधिक होती है

8- आस्थमा अटैक के समय कॉफी  बहुत ही फायदेमंद सिद्ध हो सकती है क्योंकि कैफीन-थियोफाइलिन से बहुत ही मिलता जुलता है और थियोफाइलिन (Theophylline) का इस्तेमाल कई दवाओं में होता है जिससे कि सांस लेने में मदद मिलती है लेकिन वो लोग जो थियोफाइलिन ले रहे है उन्हें कैफीन युक्त चाय, काफी या कोल्ड ड्रिंक नहीं लेना चाहिए क्योंकि थियोफाइलिन और कैफीन मिलकर टाक्सिक हो सकते हैं अगर आपके अटैक का कारण चिन्ता है तो आप ज़्यादा मात्रा में कैफीन (Caffeine) ले सकते हैं-

9- अस्थमा के रोगी (Asthma Patient) को शीतल खाद्य पदार्थो और शीतल पेयों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा उष्ण मिर्च-मसाले व अम्लीय रस से बने खाद्य पदार्थो का सेवन न करें- 

10- भोजन में अरबी, कचालू, रतालू, फूलगोभी आदि का सेवन न करें साथ ही अस्थमा के रोगी को केले नहीं खाने चाहिए साथ ही उड़द की दाल से बने खाद्य पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए तथा अस्थमा के रोगी को दही और चावल का सेवन नहीं करना चाहिए-

फिश आयल (Fish oil) क्या है-


अस्थमा रोगी के लिए उचित आहार


1- समुद्री मछली, सैल्मन, ट्यूना और कॉड लिवर इत्यादि को मिलाकर ही फिश ऑयल और फिश के अन्य उत्पादों का निर्माण किया जाता है फिश ऑयल में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो कि बहुत जल्दी अस्‍थमा रोगियों (Asthma Patient) को ठीक करने में कारगार है यानी यदि अस्थमा रोगी फिश ऑयल का सेवन करते हैं तो ये उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभदायक है इससे गले में आने वाली सूजन से निजात मिलती हैं तथा जो बच्चे श्वास दमा (Bronchial Asthma) के शिकार होते हैं उनके लिए फिश ऑयल का सेवन बहुत फायदेमंद है-

2- अस्‍थमा रोगियों (Asthma Patient) के लिए रोजाना तीन ग्राम फिश ऑयल (Fish oil) लेना उनके अस्थमा की समस्याओं को दूर कर सकता है लेकिन ध्यान रहें यदि इससे अधिक फिश ऑयल लिया जाता है तो सांस संबंधी विकार, दस्त की समस्या और नाक से खून बहना इत्यादि की समस्या हो सकती है अस्थमा के दौरान आराम पाने के लिए फिश ऑयल के बदले दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए- 

3- अस्थमा से निजात पाने के लिए फिश ऑयल का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए-अस्थमा के अलावा फिश ऑयल (Fish oil) से दिल की बीमारियां, अलजाइमर रोग (Alzheimer's Disease), अर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी बीमारियों को भी कम किया जा सकता है-

4- मछली के नियमित सेवन से आप कई बीमारियों से निजात पा सकते हैं अस्थमैटिक मरीजों को अस्थमा से जुड़ी समस्याओं से निजात पाने के लिए निश्चित रूप से मछली का सेवन करना चाहिए-फैटी फिश अस्थमा रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होती है अस्थमा के मरीजों को सप्ताह में कम से कम दो बार मछली का सेवन जरूर करना चाहिए-इससे ना सिर्फ वे आसानी से सांस ले सकते हैं बल्कि उनके गले की सूजन, खराश, संकरी श्‍वासनली इत्यादि में भी सुधार होता है-

5- क्या आप जानते हैं जो अस्थमैटिक मरीज सप्ताह में दो बार मछली का सेवन करते हैं ऐसे मरीजों में लगभग 90 फीसदी अस्थमा की समस्याएं कम हो जाती हैं-



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