दमा यानि अस्थमा रोगी को क्या करना चाहिए

What  do should Asthma Patients


पिछली दो पोस्ट में हमने आपको बताया कि अस्थमा (Asthma) क्या होता है और क्यों होता है तथा अस्थमा पीड़ित रोगी को किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए इस पोस्ट में हम अस्थमा होने पर रोगी को क्या उपाय करना चाहिए इस पर विस्तार से चर्चा करेगें-

दमा यानि अस्थमा रोगी को क्या करना चाहिए

अस्थमा रोगी (Asthma Patients) को क्या करना चाहिए-


1- सबसे पहले अस्थमा रोगी (Asthma Patients) को पेट पर मिट्टी की पट्टी सुबह-शाम रखकर कब्ज के कारण आतों में संचित मल को मुलायम करे तत्पश्चात एनिमा या वस्ति क्रिया अथवा अरंडी के तेल से ‘गणेश क्रिया’ करके कब्ज को तोड़े-

2- अस्थमा रोगी (Asthma Patients) के नाक के बढ़े हुए मास या हड्डी से छुटकारा पाने के लिए तेल नेति, रबर नेति व नमक पड़े हुए गर्म पानी से जल नेति करे-

3-  रोगी के फेफड़े में बसी ठडक निकालने के लिए छाती और पीठ पर कोई गर्म तासीर वाला तेल लगाकर ऊपर से रुई की पर्त बिछाकर रात भर या दिन भर बनियान पहने रहें-

4- अस्थमा रोगी (Asthma Patients) की बायीं नासिका के छिद्र में रुई लगाकर बन्द करने से दाहिनी नासिका ही चलेगी-इस स्वर चिकित्सा से दमा के रोगियों को बहुत आराम मिलता है-

5- भोजन में प्रात: तुलसी, अदरक, गुलबनफसा आदि की चाय या सब्जी का सूप, दोपहर में सादी रोटी व हरी सब्जी, गर्म दाल, तीसरे पहर सूप या देशी चाय और रात्रि में सादे तरीके से बनी मिश्रित हरी सब्जिया माइक्रोवेब या कुकर से वाष्पित (स्ट्रीम्ड) सब्जियों का अस्थमा रोगी (Asthma Patients) सेवन करे-

6- दमा रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में जल्दी ही भोजन करके सो जाना चाहिए तथा रात को सोने से पहले गर्म पानी को पीकर सोना चाहिए तथा अजवायन के पानी की भाप लेनी चाहिए-इससे अस्थमा रोगी (Asthma Patients) को बहुत अधिक लाभ मिलता है-

7- दमा रोग (Asthma) से पीड़ित रोगी को अपनी छाती पर तथा अपनी रीढ़ की हड्डी पर सरसों के तेल में कपूर डालकर मालिश करनी चाहिए तथा इसके बाद भापस्नान करना चाहिए-ऐसा प्रतिदिन करने से अस्थमा रोगी (Asthma Patients) का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है-

दमा यानि अस्थमा रोगी को क्या करना चाहिए


8- दमा रोग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार कई प्रकार के आसन भी है जिनको करने से दमा रोग अस्थमा (Asthma) कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है ये आसन इस प्रकार हैं- योगमुद्रासन, मकरासन, शलभासन, ताड़ासनउत्तान कूर्मासननाड़ीशोधनकपालभाति, बिना कुम्भक के प्राणायाम, उड्डीयान बंध, महामुद्रा, श्वास-प्रश्वास, गोमुखासन, मत्स्यासन, उत्तामन्डूकासन, धनुरासन तथा भुजांगासन आदि-

9- कंबल या दरी बिछाकर घुटनों के बल लेट जाएं और अपने दाहिने पांव को घुटने से मोड़कर नितंब के नीचे लगा दें-अब बाएं पांव को भी घुटने से मोड़कर, बाएं भुजदण्ड पर रख लें और दोनों हाथों को गर्दन के पीछे ले जाकर परस्पर मिला लें-इस आसन की यही पूर्ण स्थिति है-इस आसन से फेंफड़ों में शक्ति आती है ये आसन दमा और क्षय आदि रोगों को यह शांत करता है तथा साथ ही हाथ-पांवों में लचीलापन और दृढ़ता लाकर उन्हें मजबूत बनाता है यह आसन लड़के और लड़कियों दोनों के लिए बेहद फायदेमंद है-

10- दमा रोग (Asthma) से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में रीढ़ की हड्डी को सीधे रखकर खुली और साफ स्वच्छ वायु में 7 से 8 बार गहरी सांस लेनी चाहिए और छोड़नी चाहिए तथा कुछ दूर सुबह के समय में टहलना चाहिए-

11- दमा रोग (Asthma) से पीड़ित रोगी को चिंता और मानसिक रोगों से बचना चाहिए क्योंकि ये रोग दमा के दौरे को और तेज कर देते हैं-

12- दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट को अवश्य साफ रखना चाहिए तथा कभी कब्ज नहीं होने देना चाहिए-

13- दमा रोग (Asthma) से पीड़ित रोगी को धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ नहीं रहना चाहिए तथा धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इस रोग का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है-

14- दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी और उसके बाद गुनगुने जल का एनिमा लेना चाहिए-फिर लगभग 10 मिनट के बाद सुनहरी बोतल का सर्यतप्त जल जो प्राकृतिक चिकित्सा से बनाया गया है उसे लगभग 25 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन पीना चाहिए-इस प्रकार की क्रिया को प्रतिदिन नियमपूर्वक करने से दमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है-

15- दमा रोग से पीड़ित रोगी को सप्ताह में 2-3 बार सुबह के समय में कुल्ला-दातुन करना चाहिए-इसके बाद लगभग डेढ़ लीटर गुनगुने पानी में 15 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर धीरे-धीरे पीकर फिर गले में उंगुली डालकर उल्टी कर देनी चाहिए-इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है-

16- दमा रोग (Asthma) से पीड़ित रोगी को अपने रोग के होने के कारणों को सबसे पहले दूर करना चाहिए और इसके बाद इस रोग को बढ़ाने वाली चीजों से परहेज करना चहिए-फिर इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए-

17- दमा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी को कम से कम 10 मिनट तक कुर्सी पर बैठाना चाहिए क्योंकि आराम करने से फेफड़े ठंडे हो जाते हैं-इसके बाद रोगी को होंठों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हवा खींचनी चाहिए और धीरे-धीरे सांस लेनी चाहिए-इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है-दमा रोग (Asthma) से पीड़ित रोगी को गर्म बिस्तर पर सोना चाहिए-

18- दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपनी रीढ़ की हड्डी की मालिश करवानी चाहिए तथा इसके साथ-साथ कमर पर गर्म सिंकाई करवानी चाहिए-इसके बाद रोगी को अपनी छाती पर न्यूट्राल लपेट करवाना चाहिए-इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से कुछ ही दिनों में दमा रोग ठीक हो जाता है-

19- शरीर शोधन में कफ के निवारण के लिए वमन (उल्टी) लाभप्रद उपाय है-श्वास के रोगी को आमाशय, आतों और फेफड़ों के शुद्धीकरण के लिए ‘अमलतास’ का विरेचन विशेष लाभप्रद है-इसके लिए 250 मि.ली. पानी में 5 से 10 ग्राम अमलतास का गूदा उबालें और चौथाई शेष रहने पर छानकर रात को सोते समय दमा पीड़ित शख्स को चाय की तरह पिला दें-

20- अस्थमा रोगी (Asthma Patients) हमेशा खुश रहें जब भी हंसे तो खिलखिलाकर हंसें और अपनी जीवनशैली संयमित रखें-



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1 टिप्पणी:

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