9 मई 2018

दमा यानि अस्थमा क्या है क्यों होता है

What is Asthma


जब किसी व्यक्ति की सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाता है तो उस व्यक्ति को सांस लेने मे परेशानी होने लगती है जिसके कारण उसे खांसी होने लगती है इस स्थिति को दमा रोग कहते हैं अस्थमा (Asthma) एक गंभीर बीमारी है जो श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है श्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर-बाहर करती हैं-

दमा यानि अस्थमा क्या है क्यों होता है

अस्थमा (Asthma) होने पर इन श्वास नलिकाओं (Breathing duct) की भीतरी दीवार में सूजन होता है यह सूजन नलिकाओं को बेहद संवेदनशील बना देता है और किसी भी बेचैन करनेवाली चीज के स्पर्श से यह तीखी प्रतिक्रिया करता है जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं तो उनमें संकुचन होता है और उस स्थिति में फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाती है इससे खांसी, नाक बजना, छाती का कड़ा होना, रात और सुबह में सांस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण पैदा होते हैं-अस्थमा की पूरी सीरीज में हम आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना और क्या करना चाहिए तथा अस्थमा रोगी का उचित आहार क्या होना चाहिए इस पर कैसे नियन्त्रण करेगें विस्तार से बतायेगे-


क्या होता है अस्थमा-

दमा यानि अस्थमा क्या है क्यों होता है


1- अस्थमा एक अथवा एक से अधिक पदार्थों (एलर्जेन) के प्रति शारीरिक प्रणाली की अस्वीकृति (एलर्जी) है इसका अर्थ है कि हमारे शरीर की प्रणाली उन विशेष पदार्थों को सहन नहीं कर पाती और जिस रूप में अपनी प्रतिक्रिया या विरोध प्रकट करती है उसे एलर्जी (Allergy) कहते हैं-हमारी श्वसन प्रणाली जब किन्हीं एलर्जेंस के प्रति एलर्जी प्रकट करती है तो वह अस्थमा होता है-यह साँस संबंधी रोगों में सबसे अधिक कष्टदायी है अस्थमा (Asthma) के रोगी को सांस फूलने या साँस न आने के दौरे बार-बार पड़ते हैं और उन दौरों के बीच वह अकसर पूरी तरह सामान्य भी हो जाता है-

2- दमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन इस पर नियंत्रण जरूर किया जा सकता है ताकि दमे से पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन व्यतीत कर सके-अस्थमा (Asthma) तब तक ही नियंत्रण में रहता है जब तक मरीज जरूरी सावधाननियां बरत रहा होता है-

3- इस रोग के लक्षण व्यक्ति के अनुसार बदलते हैं अस्थमा के कई लक्षण तो ऐसे हैं जो अन्य श्वास संबंधी बीमारियों के भी लक्षण हैं इन लक्षणों को अस्थमा (Asthma) के अटैक के लक्षणों के रूप में पहचानना जरूरी है-

4- दमा रोग में रोगी को सांस लेने तथा सांस को बाहर छोड़ने में काफी जोर लगाना पड़ता है जब मनुष्य के शरीर में पाई जाने वाले फेफड़ों की नलियों (जो वायु का बहाव करती हैं) की छोटी-छोटी तन्तुओं (पेशियों) में अकड़न युक्त संकोचन उत्पन्न होता है तो फेफड़ा वायु (श्वास) की पूरी खुराक को अन्दर पचा नहीं पाता है जिसके कारण रोगी व्यक्ति को पूर्ण श्वास खींचे बिना ही श्वास छोड़ देने को मजबूर होना पड़ता है इस अवस्था को दमा या श्वास रोग (Asthma) कहा जाता है-

5- दमा रोग की स्थिति तब अधिक बिगड़ जाती है तब रोगी को श्वास लेने में बहुत दिक्कत आती है क्योंकि वह सांस के द्वारा जब वायु को अन्दर ले जाता है तो प्राय: प्रश्वास (सांस के अन्दर लेना) में कठिनाई होती है तथा नि:श्वास (सांस को बाहर छोड़ना) लम्बे समय के लिए होती हैं दमा रोग से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेते समय हल्की-हल्की सीटी बजने की आवाज भी सुनाई पड़ती है-

6- जब दमा रोग से पीड़ित रोगी का रोग बहुत अधिक बढ़ जाता है तो उसे दौरा आने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे रोगी को सांस लेने में बहुत अधिक दिक्कत आती है तथा व्यक्ति छटपटाने लगता है जब दौरा अधिक क्रियाशील होता है तो शरीर में ऑक्सीजन के अभाव के कारण रोगी का चेहरा नीला पड़ जाता है यह रोग स्त्री-पुरुष दोनों को हो सकता है

7- जब दमा रोग से पीड़ित रोगी को दौरा पड़ता है तो उसे सूखी खांसी होती है और ऐंठनदार खांसी होती है इस रोग से पीड़ित रोगी चाहे कितना भी बलगम निकालने के लिए कोशिश करे लेकिन फिर भी बलगम बाहर नहीं निकलता है अस्थमा (Asthma) के सभी रोगियों को रात के समय, खासकर सोते हुए, ज्यादा कठिनाई महसूस होती है-

8- दमा रोग से पीड़ित रोगी को रोग के शुरुआती समय में खांसी, सरसराहट और सांस उखड़ने के दौरे पड़ने लगते हैं दमा रोग से पीड़ित रोगी को वैसे तो दौरे कभी भी पड़ सकते हैं लेकिन रात के समय में लगभग 2 बजे के बाद दौरे अधिक पड़ते हैं दमा रोग से पीड़ित रोगी को कफ सख्त, बदबूदार तथा डोरीदार निकलता है दमा रोग से पीड़ित रोगी को सांस लेनें में बहुत अधिक कठिनाई होती है-सांस लेते समय अधिक जोर लगाने पर रोगी का चेहरा लाल हो जाता है तथा लगातार छींक आना  सामान्यतया अचानक शुरू होता है यह किस्तों मे आता है  रात या अहले सुबह बहुत तेज होता है दवाओं के उपयोग से ठीक होता है क्योंकि इससे नलिकाएं खुलती हैं बलगम के साथ या बगैर खांसी होती है-सांस फूलना जो व्यायाम या किसी गतिविधि के साथ तेज होती है-

क्यों होता है अस्थमा-


1- खान-पान के गलत तरीके से दमा रोग (Asthma) हो सकता है मानसिक तनाव, क्रोध तथा अधिक भय के कारण भी दमा रोग हो सकता है- 

2- खून में किसी प्रकार से दोष उत्पन्न हो जाने के कारण भी दमा रोग (Asthma) हो सकता है-

3- नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है- 

4- खांसी, जुकाम तथा नजला रोग अधिक समय तक रहने से दमा रोग हो सकता है-नजला रोग होने के समय में संभोग क्रिया करने से दमा रोग हो सकता है- 

5- भूख से अधिक भोजन खाने से दमा रोग (Asthma) हो सकता है तथा मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा गरिष्ठ भोजन करने से दमा रोग हो सकता है-

6- फेफड़ों में कमजोरी, हृदय में कमजोरी, गुर्दों में कमजोरी, आंतों में कमजोरी, स्नायुमण्डल में कमजोरी तथा नाकड़ा रोग हो जाने के कारण दमा रोग हो जाता है- 

7- मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण दमा रोग (Asthma) हो सकता है-धूल के कण, कुछ पौधों के पुष्परज, अण्डे तथा ऐसे ही बहुत सारे प्रत्यूजनक पदार्थों का भोजन में अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है-

8- मनुष्य के शरीर की पाचन नलियों में जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थों का सेवन करने से भी दमा रोग हो सकता है मल-मूत्र के वेग को बार-बार रोकने से दमा रोग हो सकता है-

9- धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ रहने या धूम्रपान करने से दमा रोग (Asthma) हो सकता है यदि गर्भावस्था के दौरान कोई महिला तंबाकू के धुएं के बीच रहती है तो उसके बच्चे को अस्थमा होने का खतरा होता है एवं औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ सूख जाने से दमा रोग हो जाता है-

10- जानवरों से (जानवरों की त्वचा, बाल, पंख या रोयें से) ठंडी हवा या मौसमी बदलाव मजबूत भावनात्मक मनोभाव (जैसे रोना या लगातार हंसना) और तनाव, पारिवारिक इतिहास-जैसे  की परिवार में पहले किसी को अस्थमा रहा हो तो आप को अस्थमा होने की सम्भावना है-

11- मोटापे से भी अस्थमा (Asthma) हो सकता है साथ ही अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं- 

12- सिर्फ पदार्थ ही नहीं बल्कि भावनाओं से भी दमे का दौरा शुरू हो सकता है जैसे-क्रोध, रोना व विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाएं-

अगली पोस्ट- अस्थमा रोगी इन बातों का अवश्य ध्यान दें

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