13 जून 2018

यूरिक एसिड पर अमृता गूग्गुलु रामबाण औषधि है

Amrita Googgulu is a Panacea on Uric Acid


अमृता गुग्गुल सादा सरल तथा निराप्रद योग है जिसका उल्लेख भावप्रकाश में किया गया है इस औषधीय योग का उपयोग सर्वप्रथम वात नाड़ियो या वात वाहिनी शिराओ तथा रक्त पर होता है इसीलिए यह योग वात रोग, रक्त संबंधित रोग, त्वचा संबंधित रोग, पेट तथा आंतों के रोगों में बेहद लाभकारी माना गया हैं आज हम आपको दो प्रकार के अमृता गुग्गुल योग बनाने की विधि बताएंगे जो बनाने में बेहद ही आसान है व प्रयोग करने में भी सरल है-

यूरिक एसिड पर अमृता गूग्गुलु रामबाण औषधि है

गुण तथा उपयोग-


अमृता गुग्गुल के सेवन से वातरक्त (Gout), यूरिक एसिड का बढना, कोढ, अर्श मंदाग्नी, कुष्ठ रोग, त्वचा रोग, दृष्टव्रण  याने सड़े-गले घाव या जख्म (Wounds), प्रमेह, आमवात, भगंदर, नाड़ी व्रण, सूजन (Inflammation) आदि रोग नष्ट होते हैं अमृता गुग्गल एक उत्तम रक्तशोधक (Blood purifier), वात नाशक, तथा कब्ज (Constipation) को हटाने वाला औषधीय योग है-

अमृता गुग्गुल - नंबर-1


सामग्री-

गिलोय- 320 ग्राम 
शुद्ध गुग्गुल- 160 ग्राम
हरडे के छिलके- 160 ग्राम

बनाने की विधी-


इन सब को 30 लिटर पानी में पकाएं जब पानी उबलकर 8 लिटर रह जाए तब उतारकर इसका रस  निकाल ले तथा इस रस को गाढ़ा होने तक फिर से मंदाग्नि पर पकाएं जब यह गाढ़ा हो जाए तब इसमें 30 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिलाकर अच्छे से हिला लें तथा इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें व सुखा ले इसे ही अमृता गुग्गुल कहते हैं-

मात्रा व अनुपान-


सुबह शाम दो-दो गोली गुनगुने जल के साथ सेवन करें-


सेवन के लाभ-


यूरिक एसिड पर अमृता गूग्गुलु रामबाण औषधि है

इसके सेवन से वातरक्त (Gout), गठिया (Arthritis), बढ़ा हुआ यूरिक एसिड, कोढ, बवासीर, मंदाग्नी, प्रमेह, आमवात, भगंदर, उरुस्थम्भ याने जांघें सुन्न तथा संज्ञाहीन (Numbness) हो जाना  आदि वात रोग नाश होते हैं-

अमृता गुग्गुल - नंबर- 2


सामग्री-

शहद- 640 ग्राम
आंवला- 60 ग्राम
पुनर्नवा-160 ग्राम 

बनाने की विधी-


आंवला और पुनर्नवाको कूटकर 30 लिटर पानी में पकाएं जब पानी औटकर 8 लिटर रह जाए तब खूब मसलकर छान कर इस मिश्रण का रस निकाल ले अब इस मिश्रण को पुनः मंद आंच पर गाढ़ा होने तक पकाएं जब यह गाढा हो जाए तब उसमें शहद तथा दंती, चीते की जड़, पीपल, सोंठ, त्रिफला, गिलोय, दालचीनी, सब बीस-बीस ग्राम तथा निशोध 10 ग्राम पीसकर मिला ले तथा गोलिया बनाकर सुखाले-

मात्रा व अनुपान-


सुबह शाम दो-दो गोली गुनगुने जल के साथ सेवन करें-

सेवन के लाभ-


इसके सेवन से बवासीर (Piles), मंदागनी, द्रष्टव्रण, प्रमेह, आमवात ,भगंदर (Fistula), नाडी वात (Sciatica) उरुस्तंभ तथा सूजन व अन्य सभी वात रोग नाश होते हैं-

नोट- 

कुछ पुराने वैध जन इसकी गोलिया ना बनाते हुए इसे चूर्ण स्वरूप में ही रखते हैं-

यह योग बना बनाया गोलियों के स्वरूप में बजार में उपलब्ध हैं लेकिन उत्तम लाभ हेतु इसे घर पर ही बनाना ज्यादा फायदेमंद हैं-

चूर्ण सेवन करने की मात्रा आधा से एक ग्राम तक रोगी के बल व रोग अनुसार हैं-

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