28 जुलाई 2018

तिल के ताजे पुष्पों से पारंपरिक घरेलू उपचार

Traditional Home Remedies Sesame Flowers


हिंदी में आयुर्वेद उपचार-Ayurveda treatment in Hindi


आज से लगभग 100 साल पहले चिकित्सा पद्धति बेहद सरल सुलभ तथा किसी भी तरह के साइड इफेक्ट से मुक्त होती थी आयुर्वेद में विविध औषधीय कल्पनाओं के साथ साथ आहार को भी औषध माना गया हैं और इसी सिध्धांत पर हमारी भारतीय पारम्परिक भोजन प्रणाली तथा जीवन शैली का निर्माण हुआ था-

वैध जनों तथा घर के बड़े बुजुर्गो को कितने ही ऐसे छोटे छोटे नुस्खे (Traditional Home Remedy) पता होते थे जो वाकई चमत्कारिक रूप से असरदार होते थे लेकिन बदलते समय के साथ अंग्रेजी दवाओं के बढ़ते प्रचलन तथा बनी बनाई दवाईया खाने की आलस्यपूर्ण आदतों ने ऐसे नुस्खो को मानो विलुप्त प्राय कर दिया और ऐसे नुस्खे अपनाना दकियानूसी माना जाने लगा-लेकिन अब बढती महंगाई तथा अंग्रेजी दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट्स के मद्दे नजर आजकल लोग फिर से प्राचीन चिकित्सा पध्धति तथा घरेलू नुस्खो की तरफ आकर्षित हो रहे हैं-

तिल के ताजे पुष्पों से पारंपरिक घरेलू उपचार

आज हम जो आपको प्रयोग बताने वाले हैं उसका विवरण आज से सौ साल पहले लिखी गयी किताबों में मिलता हैं यह प्रयोग अत्यंत सरल व लाभदायक हैं देहात तथा आदिवासी क्षेत्रो में आज भी यह प्रयोग काफी प्रचलित हैं-

लोगो का रुझान प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ बढाने तथा लोक कल्याण हेतु से हम यह प्रयोग यहाँ आपको बताने जा रहे है जो की सम्पूर्ण निराप्रद तथा अनुभूत हैं-

हड्डियों तथा जोड़ों के दर्द पर लेप-


तिल के ताजे पुष्पों (Sesame flowers) को पानी में उबालकर उसमें अरंड तेल मिलाकर लसोंट कर चटनी बना ले इस चटनी को धीमी आंच पर पकाए तथा इसे सुहाता हुआ गरम हो तब दर्द वाले स्थान पर लगाएं ऊपर से सूती कपड़े की पट्टी या अरंड के पत्ते बांध दें यह प्रयोग रात को करें तो उत्तम फायदा करता है-

उपयोग-


तिल के ताजे पुष्पों से पारंपरिक घरेलू उपचार

यह लेप विटामिन डी तथा स्निघ्ता से भरपूर हैं इस लेप को लगाने से संधिवात (Arthritis), हड्डियों का सूखना, जोड़ों का दर्द (Joints Pain),घुटनों का दर्द, कमर दर्द (Lumbago), गर्दन का दर्द जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है कैल्सियम की कमी या विटामिन डी की कमी से होने वाले हड्डियों के दर्द में यह लेप बहुत लाभ दायक हैं-

फ्रेक्चर होने के बाद भी हड्डियों में दर्द, कडापन या सुजन व कमजोरी जैसी समस्याए देखने को मिलती हैं तब यह लेप लगाने से हड्डीया मजबूत बनती हैं त्तथा कमजोरी मिटती हैं-

सर्दियों के मौसम में रूखेपन की वजह से हड्डियों के दर्द की समस्या अकसर बढ़ जाती है तब इस लेप को रात को लगाने से हड्डियों रूखापन व कडापन का मिटता है तथा जोड़ों के दर्द में भी आराम मिलता है-

नोट-

अगर आपको तिल के ताजे फूल (Sesame flowers) ना मिले तो आप सूखे हुए फूल भी इस्तेमाल कर सकते हैं-

जलन-दाह तथा मूत्र रोगों पर ठंडा हिम-


तिल के ताजे 50 पुष्प (Sesame flowers) लाकर 200 ml पानी में शाम को भिगो दें सुबह उस पानी को व पुष्पों को अच्छे से मसल ले जिससे गाढा द्रव्य तैयार होगा अब द्रव्य में से तिल के फूलों को निकाल दे बचे हुए गाढे पानी में मिश्री मिलाकर इसे सुबह शाम पिए-कुछ वैद लोग इसमें दूध शहद मिलाकर पीने की भी सलाह देते हैं-

उपयोग-


यह प्रयोग सुबह तथा शाम 7 दिन करने से सुजाक (Gonorrhea) की गर्मी, जलन, जलन हॉट फ्लैश (Hot Flashes), आंतरिक दाह, पेट में जलन जैसे विकार नष्ट होते हैं-

इस प्रयोग से मूत्रावरोध, कष्ट मूत्र, तथा पेशाब की जलन जैसी समस्याएं भी दूर होती है-

इस प्रयोग से मूत्राशय (Urinary Bladder) व मुत्रपिंड मजबूत बनता है जिससे किन्ही कारणों से आई हुई पेशाब की रुकावट दूर होती है-

मूत्र पर कंट्रोल न रहना तथा बहुमूत्रता (Polyuria) जैसी समस्याएं भी दूर होती है-

इस प्रयोग से छोटे बच्चों की शैयामूत्र (Bed-Wetting) की समस्या भी दूर होती है-

अगली पोस्ट- तिल के पुष्प का गुलकंद बनाने की विधि व लाभ


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Chetna Kanchan Bhagat Mumbai


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