18 जून 2018

शिशुओं की समस्याओं पर उत्तम औषधि है बालामृत


आजकल छोटे बच्चों की छोटी मोटी समस्याओं पर तुरंत डॉक्टर के पास दौड़ जाना तथा दवाई लिखवाकर बच्चों को दवाई खिलाना बेहद आम हो गया है लेकिन इसके चलते बच्चों की स्वाभाविक रूप प्रतिकारक शक्ति कम हो जाती है तथा कभी-कभार बच्चों को एलोपैथी के साइड इफेक्ट भी हो जाते हैं जिससे अन्य समस्याए बढ़ जाती है-

शिशुओं की समस्याओं पर उत्तम औषधि है बालामृत

माताओं को चाहिए कि बच्चों की छोटी मोटी तकलीफों में आयुर्वेद तथा घरेलू उपचार को ही आजमाएं जिससे बच्चों को अनावश्यक रुप से दवाइयों के सेवन से बचाया जा सके तथा उनकी प्राकृतिक रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाया जा सके-

आज हम आपको आपके बच्चों के लिए अमृत समान बालामृत (Balamrut) के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे जो बनाने में बेहद सरल है तथा संपूर्ण निराप्रद है व छोटे बच्चों की कई छोटी मोटी समस्याओं पर रामबाण उपचार है तथा रोकथाम भी है-

छोटे बच्चों के लिए उत्तम स्वास्थ्य वर्धक तथा स्वास्थ रक्षक है बालामृत-


यह बालामृत (Balamrut) बच्चों के लिए कई महंगे टॉनिक का तोड़ है यह बच्चों की छोटी मोटी समस्याओं को कम करता है तथा बालकों की रोगप्रतिकारक शक्ति (Immune system) को बढ़ाता है तथा ऋतू बदलने से होने वाले रोगों (Seasonal disease) से भी आपके बच्चों की रक्षा करता है-

बालामृत बनाने की विधी-


सामग्री-

बिना बुझा हुआ पत्थर का चुना- 250 ग्राम 
शुद्ध पानी- ढाई लीटर
मिश्री-  500 ग्राम 
रतनजोत का चूर्ण- 25 ग्राम 

विधि-

चूने को रात को मिट्टी के बर्तन में पानी में भिगो दें तथा सुबह लकड़ी से खूब चला कर छोड़ दे फिर दूसरे दिन या 24 घंटे के बाद चूना पानी में नीचे बैठ जाएगा तथा चूने का दूधिया पानी ऊपर रहेगा अब हल्के हाथों से ऊपर के पानी को निथार ले तथा दूसरे पात्र में निकालें-

अब इस पानी में मिश्री मिलाकर मंद आंच पर पकाएं जब मिश्री घुल जाए तथा पानी आधा रह जाए तब उसमें रतनजोत का चूर्ण मिला लें तथा एक तार की चाशनी बना ले-

ठंडा हो जाने पर इसे छानकर साफ-सुथरी बोतलों में भर ले इसे ही बालामृत योग (Balamrut) कहा जाता हैं- 

बालामृत (Balamrut) सेवन विधि-


बालामृत की 20 से लेकर 30 बूंद तक दिन में दो या तीन बार बच्चों की उम्र व समस्या के अनुरूप चटाए इसे आप बच्चों को दूध में घोलकर भी पिला सकते हैं तथा पानी में मिलाकर भी पिला सकते हैं- 

बालामृत सेवन के लाभ-


1- बालामृत के सेवन से बच्चों में होने वाला अजीर्ण, पेट का फूलना, गैस, पेट दर्द (Gripe), हरे पीले दस्त होना, पेट का दुखना जैसी समस्या में आराम मिलता है तथा यह समस्या नही होती-

2- कुछ बच्चे दूध पीते से ही दूध की उल्टी कर देते हैं या दस्त कर देते हैं ऐसी समस्याओं में दूध में बालामृत (Balamrut) की कुछ बूंदें मिलाकर पिलाने से बच्चों की यह समस्या समाप्त होती है तथा बच्चों को दूध आसानी से पच जाता हैं-

शिशुओं की समस्याओं पर उत्तम औषधि है बालामृत


3- बालामृत (Balamrut) के सेवन से बच्चों के सूखा रोग (Rickets) में भी आराम मिलता है इसके नियमित सेवन से बालक का शरीर बलवान होता है इसके नियमित सेवन करने से बच्चों की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ती है तथा बच्चों के छोटे मोटे रोग नहीं होते हैं-

4- यह बालको के लिए अमृत समान योग है इस योग से बच्चों की पाचन शक्ति (Digestion Power) मजबूत बनती है तथा बच्चों को अच्छा पोषण मिलता है-

5- बालामृत (Balamrut) के सेवन से बच्चों की हड्डियां मजबूत बनती है तथा बच्चों का योग्य विकास (Growth) होता है-

6- बालामृत के सेवन से बच्चों का मन प्रसन्न रहता है तथा बच्चों में चुस्ती-फुर्ती रहती है जिससे बच्चे हमेशा हंसते खिलखिलाते रहते हैं-

7- दो साल तक बच्चों को बालामृत (Balamrut)  का सेवन अवश्य करवाना चाहिए-

8- इस तरह बालामृत (Balamrut) बच्चों के सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है इससे बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है छोटे-मोटे रोगों से रोकथाम होती हैं तथा बच्चों को अनावश्यक रुप से टॉनिक या दवाइयां देने की जरूरत नहीं पड़ती है-

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