18 जुलाई 2018

उत्तम दर्द निवारक है राई का लेप

राई या सरसों (Mustard) जिसका उपयोग भारत देश के हर घर में लगभग हर रोज होता है भारतीय रसोई के मसाले के डिब्बे में सरसों बड़ी शान से विराजमान है इसीलिए इसे ज्यादा परिचय की जरूरत नही हम सभी सरसों भली भाँती परिचित हैं-

उत्तम दर्द निवारक है राई का लेप

आयुर्वेद के मतानुसार राई उष्ण, अत्यंत तीक्ष्ण, कड़वी, अग्निवर्धक, उदर रोग और कुष्ठ, कंडू, कृमिरोग को नष्ट करने वाली, वात कफ नाशक बलकारक तथा दर्दनाशक है-

राई के बीज पसीना लाने वाले, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाले, शरीर के अंदर होने वाले रक्त संचार की वजह से उत्पन्न हुई समस्याओं में तथा स्नायु संबंधी विकृति, संधिवात में बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं मस्तिष्क की नाड़ियो की तकलीफ में यह लाभदायक है राई के बिज से एक तेल भी निकलता है यह तेल बलदायक, स्निग्ध, दर्द निवारक तथा पसीना लाने वाला होता है इन्हीं गुणों के चलते प्राचीन काल से ही भारत भर में राई के बीजों का लेप (Mustard seed plaster) बनाकर विभिन्न समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता है-

आज हम आपको राइ के बीजों का लेप (Mustard seed plaster) बनाने की विधि, उसके गुण तथा उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे जिसे आप घर बैठे प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं-

राई के लेप के गुण तथा लाभ-


बाह्यउपचार के तौर पर राई का लेप (Mustard seed plaster) चिकित्सा शास्त्र के लिए एक लाभदायक व गुणकारी प्रयोग है यह लेप त्वचा के अंदर की रक्त वाहिनियां उत्तेजित करके शुन्यता पैदा कर देता है जिससे अंग में होने वाले दर्द में शीघ्र लाभ होता है-

शरीर पर जहां यह लेप लगाया जाता है उस स्थान के साथ शरीर के जिन जिन हिस्सों का संबंध होता है उन हिस्सा की रक्ताभिसरण की क्रिया को मज्जातंतू के द्वारा उत्तेजना मिलती है जिससे रक्त संचार सुचारू होता है जिससे अंगों की बधिरता, सुन्नपन, दर्द, ढीलापन जैसी समस्याएं दूर होती है तथा अंगों को विशेषकर जोड़ों में स्निग्धता तथा बल की वृद्धि होती है-

उत्तम दर्द निवारक है राई का लेप

सूजन में भी राई का लेप (Mustard seed plaster) बेहद उपयोगी है यह लेप रक्त संचार सुचारू करता हैं व सूजन तथा अंतःदाह को तुरंत कम कर देता है-

राई का लेप बनाने की विधि-


राई के बीजों को ठंडे पानी के साथ सिल पर महीन पीस लें व चिकना तथा गाढ़ा लेप बना ले इसके बाद साफ़ सूती कपड़े की पट्टी पर इस लेप की मोटी परत जमा दे कपड़े की पट्टी को जिधर राई का लेप लगा हुआ हो उसकी दूसरी तरफ से जिस अंग पर लेप लगाना हो उस जगह रख देना चाहिए-

राई के लेप को सीधे त्वचा पर रखने से उसका प्रभाव जल्दी होता है लेकिन सीधे त्वचा पर यह लेप लगाने से वह स्थान लाल हो जाता है फुंसिया भी हो सकती है इसलिए इसे सीधे त्वचा पर ना लगाते हुए कपड़े की पट्टी लगा कर उपयोग करना  ही ज्यादा उचित होता है-

अगर आपको शीघ्र लाभ हेतु सीधे त्वचा पर लेप लगाना हो तो आप इस लेप में थोड़ी सी हल्दी तथा आधा चम्मच एरंड का तेल मिलाकर यह लेप सीधे त्वचा पर भी लगा सकते हैं-

आप राई को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें तथा लेप का प्रयोग करने से एक घंटा पहले इस चूर्ण क पानी में अच्छे से भिगो के तर कर ले इस तरह भी आप इस लेप का आसानी से प्रयोग कर सकते हैं-इस लेप का प्रयोग आप कपड़े की पट्टी द्वारा कर रहे हैं तो यह पट्टिया शरीर पर आधे घंटे तक रखनी चाहिए और अगर आप सीधे त्वचा पर ही लेप लगा रहे हो तो यह लेप 10 से 15 मिनट तक त्वचा पर रखना चाहिए-

सीधे त्वचा पर लगाया हुआ लेप निकलने के बाद उस स्थान पर  थोड़ा सा घी लगा देना चाहिए जिससे त्वचा की उष्णता कम हो जाती है व त्वचा पर फुंसियां अथवा लाली नहीं होती-

राई के लेप के उपयोग-


1- फेफड़ों की सूजन, यकृत के कोशो की सूजन, श्वास नलिका की सूजन, सूजन बीजकोशो की सूजन, मस्तिष्क के कोशो की सूजन इत्यादि रोगों में राई का लेप (Mustard seed plaster) बहुत लाभदायक है-

2- भयंकर ज्वर भ्रम को दूर करने के लिए कनपटी पर राई का लेप किया जाता है-

3- हृदय कमजोर होने पर हाथ पाव और ह्रदय पर राई का लेप किया जाता है-

अजीर्ण और पेट दर्द-


1- पेट में भयंकर दर्द होने पर पेट पर राई का लेप करने से लाभ होता है-

2- हैजे (Cholera) में रोगियों को जब उल्टी और दस्त हो रहे हो तथा अन्य दवाईयां वांछित लाभ ना दे रही हो उस समय रोगी के पेट पर राई का लेप करना लाभदायक सिद्ध होता है-

3- छोटे बच्चों के पेट में आफरा होने पर नाभि के आसपास राई का लेप लगाने से आफरा की समस्या खत्म होती है बच्चों में यह लेप लगाने से पहले पेट पर थोड़ा सा घी मल कर फिर यह लेप लगाएं-

मासिक धर्म संबंधित समस्याएं-


जिन स्त्रियों को मासिक धर्म के समय अधिक कष्ट होता है पेट, पेढू, कमर तथा जननांग में दर्द होता हो टीसे उठती हो, मासिक धर्म खुलकर ना होता हो ऐसे समय पेढू पर राई का लेप (Mustard seed plaster) लगाने से मासिक धर्म खुलकर आता है तथा कष्टार्तव की समस्या मिटती है-

उत्तम दर्द निवारक है राई का लेप

जोड़ों के दर्द तथा बदन दर्द में-


1- उष्ण होने के साथ-साथ राई का लेप  (Mustard plaster) वायु तथा कफ की वजह से उत्पन्न हुई बीमारियों में बेहद लाभदायक है-

2- राई का लेप कान के नीचे की सूजन, जोड़ों के दर्द, कांख में गांठ, सिर दर्द ,कमर दर्द, साइटिका आदि में तकलीफ में लाभदायक होता है-

3- सन्निपात की अवस्था में शरीर शिथिल हो गया हो व ठंडा पड गया हो तब हथेलियां तथा पैरों के तलवों पर राई का लेप गया  लगाने से शरीर में तुरंत गर्मी व चेतना आती है-

4- पेशाब की रुकावट होने पर पेढू पर यह लेप करने से पेशाब खुलकर आता है-

5- महिलाओं में कमर दर्द में कमर पर यह लेप करने से कमर दर्द राहत मिलती है-

6- आधाशीशी (Migraine) की तकलीफ में सर पर याने ललाट पर यह लेप लगाने से सर्दी की वजह से होने वाला सिर दर्द मिटता है-

7- सर्दियों में अक्सर बड़ी उम्र के लोगों के जोड़ों में काफी तकलीफ पाई जाती है जोड़ों में कड़ापन आने की वजह से जोड़ों का दर्द तथा सूजन बढ़ जाती है ऐसे में यह लेप लगाने से जोड़ों में स्निग्धता आती है तथा जोड़ों का दर्द (Joint pain) व सूजन कम होता है-

8- छाती में कफ जम (Accumulation of phlegm) गया हो जिसकी वजह से छाती में तथा पीठ में दर्द हो रहा हो ऐसे में छाती तथा पीठ पर राई का लेप लगाने से संचित कफ दूर होता है तथा दर्द से आराम मिलता है-


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Chetna Kanchan Bhagat Mumbai


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