22 जुलाई 2018

खांसी और श्वास रोग में अलसी के अनुभूत प्रयोग


अलसी एक पौष्टिक व औषिधियों गुणों से भरपूर होने बावजूद भी लम्बे समय तक हम भारतीयों ने इसे नजर अंदाज ही किया है लेकिन जब से विदेशियों ने इसे सुपर फूड घोषित किया है तब से अलसी ने फिर वापस से अपनी तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित किया है अलसी को संस्कृत में अतशी या तीसी तथा मराठी में जवस गुजराती में अलसी अंग्रेजी में लिंसीड (linseed) तथा फ्लैक्स सीड (Flax seed) भी कहा जाता है-

खांसी और श्वास रोग में अलसी के अनुभूत प्रयोग

आयुर्वेद के मतानुसार अलसी मधुर, स्निग्ध, कटु, बलकारक, तीक्ष्ण, गुरु, उष्ण, वातकर, पित्तनाशक, शुक्रदोष नाशक, पौष्टिक, विषहरण करने वाली, व्रण या जख्मों को भरने वाली, चिकनाहट देने वाली, दर्द निवारक तथा शूल निवारक है-

अलसी के बीजों से निकलने वाला तेल खाने में पौष्टिक व बलवर्धक है इस तेल को लगाने से नशों की कमजोरी, स्नायु का ठीलापन, तथा अंगों की कमजोरी दूर होती है अलसी गुण में तीक्ष्ण व उष्ण होने की वजह से जुखाम खांसी तथा श्वासरोगों में विशेष लाभदायक है-

खांसी और श्वास रोग में अलसी के अनुभूत प्रयोग

आज हम आपको जुखाम तथा श्वासरोगों पर अलसी के बेहद आसान व अनुभूत प्रयोग बतायेगें जो आप आसानी से घर पर प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ ले सकते है-

जुखाम पर अलसी का प्रयोग-


जिन लोगों को बार-बार जुखाम की समस्या होती है ठीक से कफ या बलगम बाहर नहीं निकल पाता हो ऐसी समस्या में अलसी को साफ़ करके तवे पर धीमी आंच पर भून लें तथा इसे पीस कर महीन चूर्ण बना लें अब इसमें समभाग मिश्री का चूर्ण मिला दें जुखाम से पीड़ित व्यक्ति को दो से तीन चम्मच तक यानि लगभग पंद्रह से बीस ग्राम तक यह चूर्ण गर्म पानी के साथ सुबह शाम लें इस प्रयोग से सात दिन में ही शरीर में जमा हुआ कफ परिपक्व होकर बहार आ जाता है-

इससे कास और खांसी की समस्या भी नष्ट हो जाती है श्वसन मार्ग में फंसे हुए बलगम की वजह से उत्पन्न होने खर्राटे की समस्या भी दूर हो जाती है-

श्वासरोग पर अलसी का चमत्कारिक प्रयोग-


यह प्रयोग हमें नादुरबार से आये हुए एक वैद्य जी ने यह नुस्खा हमे बताया था यह प्रयोग उनका पीढ़ियों से अनुभूत है तथा हमने भी इसे कई लोगों पर आजमा कर इसका चमत्कारिक लाभ अनुभव किया है यह नुस्खा बेहद सरल निराप्रद व चमत्कारिक लाभ देने वाला है लोक कल्याण की भावना से आज हम यह प्रयोग आपके साथ साझा कर रहे है-

दस ग्राम साबुत अलसी लेकर उसमे 50 ml पानी मिलाकर चांदी की कटोरी में भिगो कर ढककर रख दें (कटोरी चांदी की ही लेनी है अत्यंत आवश्यकता और चांदी की कटोरी का न होने पर कांच की कटोरी ले सकते है लेकिन उत्तम लाभ हेतु चांदी की कटोरी ही अनिवार्य है) इस पानी को 12 घंटे भिगोने के बाद छान कर पी लीजिये यह प्रयोग दिन में दो बार करना है प्रात:काल का भिगोया हुआ पानी शाम को तथा शाम का भिगोया पानी प्रात:काल सेवन करें-

इस प्रकार दोनों वक्त अलसी जल के सेवन से श्वासग्रस्त रोगियों को बहुत राहत मिलती है इस प्रयोग से फेफड़ों में ऊर्जा की वृद्धि होती है जिससे श्वास संबंधित समस्याएं चमत्कारिक रूप से दूर होती हैं अगर रोगी योग्य पथ्य-अपथ्य का ध्यान रक्खते हुए यह प्रयोग करता है तो बिना दवाई के भी स्वास्थ्य संबन्धित समस्याएं इस प्रयोग से अपने आप दूर हो जाती है जिनको पुरानी व अधिक समय से श्वास की तकलीफ हो ऐसे रोगियों ने इस अलसी जल के साथ एक-एक ग्राम की मात्रा में मृगश्रृंग भस्म लेने से शीघ्र लाभ होता है-

श्वास-खांसी-कास पर अलसी अवलेह योग-


आठ ग्राम कच्ची अलसी को कूट कर तीस ग्राम पानी में उबालकर गाढ़ा जैल जैसा बना लें फिर उसमे बीस ग्राम मिश्री मिलाकर अगर सूखी खांसी हो तो एक कप गर्म दूध के साथ और अगर गीली खांसी हो तो एक कप गर्म पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करें सर्दियों में यह प्रयोग करते समय मिश्री की जगह शहद का प्रयोग करना अधिक हितकारी है-

बच्चों के लिए अलसी का प्रयोग-


बच्चों को यदि खांसी हो गई है तथा छाती में कफ भर गया हो जिससे श्वास लेने में दिक्कत हो रही हो-ऐसी समस्या में अलसी को पीस कर उसका आटा बना लें तथा उसे साफ़ सुधरे सूती कपडे में बाँध कर अलसी के आटे की पोटली बना लें तथा इन पोटली को गर्म तवे पर रखकर बारी-बारी से बच्चे के छाती पीठ गला तथा माथे पर सेंक करें इस प्रयोग से छाती में जमा हुआ कफ निकल जाता है-इससे छाती का दर्द खांसी बलगम साइनस पीठ का दर्द पसलियों का दर्द तथा फेफड़ों की सूजन दूर होती है-

बच्चों की काली खांसी (Hooping Cough) पर अलसी का प्रयोग-


बच्चो की काली खांसी (कुकुर खांसी) की समस्या से बच्चों का खांसते-खांसते बुरा हाल हो जाता है और हमारी माताएं अधिक परेशान हो जाती है ये वेग इतना अधिक होता है कि बच्चे की आँखें तक लाल हो जाती है लेकिन ये खांसी रुकने का नाम नहीं लेती है इसके लिए आप 60 ग्राम अलसी ले कर 30 ग्राम अलसी को तवे की हल्की आंच पर सेंक ले तथा बची हुई 30 ग्राम कच्ची अलसी के साथ मिलाकर मिक्सी में पीस लें आधी कच्ची और आधी भूनी अलसी को आप रख लें अब आप इसमें से एक चम्मच अलसी का पिसा हुआ पावडर और एक चम्मच देशी घी मिलाकर बच्चे को रात को चटा कर सुला दें ऐसा प्रयोग दो तीन दिन लगातार करने से बच्चों की कुकुर खांसी ठीक हो जाती है यह प्रयोग हमारे द्वारा कई बच्चों पर आजमाया हुआ है 

तीन साल से 15 साल की आयु के बीच बच्चों को ये तत्काल लाभ देता है बड़ो के लिए इसकी मात्रा को दुगना कर के दिया जा सकता है-


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