फ्रोजन शोल्डर की आयुर्वेदिक चिकित्सा

Ayurvedic Treatments of Frozen Shoulder


फ्रोजन शोल्डर (Frozen Shoulder) यानि की अडहेसिव कैप्सूलाईटी में जॉइंट्स के आसपास की कैप्सूल में सूजन आ जाना यह जॉइंट के कैप्सूल स्केस्युला, क्लेविक्ल (collar Bone) और ह्म्युर्स के बीच में आई हुई है इस कैप्सूल का मुख्य कार्य शोल्डर या कंधे की संधि को जकड़े रखना तथा उसको हलचल में मदद करना होता है-

फ्रोजन शोल्डर (Frozen shoulder) के बारे में जानकारी व जागरूकता कम होने से रोगी अक्सर दर्द-नाशक या पेन किलर गोलियां खाकर इस दर्द को अनदेखा करते रहते हैं आधुनिक मेडिकल साइंस में भी इस दर्द के कारण व उपचार की कोई सटीक चिकित्सा उपलब्ध नहीं है सिर्फ एक्सीडेंट, गंभीर चोटें या हार्ट अटैक जैसी बीमारी को ही आजकल गंभीरता से लिया जाता है लेकिन फ्रोजन शोल्डर की जटिलता तथा दर्द इन दर्दो से भी कहीं ज्यादा होता है इसकी अवधि सामान्यतः डेढ़ से 2 साल की होती है लेकिन अगर इसके प्रति लापरवाही की जाए तो यह दर्द रोगी का पीछा आसानी से नहीं छोड़ता हें-

आयुर्वेद में फ्रोजन शोल्डर (Frozen shoulder) को अवबाहुक नाम से जाना गया है तथा इसके उद्भव के कारणों में कफ तथा वात रोग दोष को मुख्य कारण माना गया है आयुर्वेदिक चिकित्सा में वातहर औषधियों का सेवन, पथ्यापथ्य तथा पंचकर्म की चिकित्सा से इस रोग का सामना करके इसे पूरी तरह मिटाया जा सकता है-

फ्रोजन शोल्डर की आयुर्वेदिक चिकित्सा

आयुर्वेद चिकित्सा में अनुभवी वैद्य रोगी का परिक्षण, रोगी का आयुमान, रोगी की प्रकृति, रोग का कारण, रोग की जटिलता तथा कितने समय से रोग है यह सब जानने के बाद आयुर्वेद चिकित्सा तथा औषधि निर्धारण करते है इस लेख का उद्देश्य आयुर्वेद के प्रति जागृति तथा पाठकों का ज्ञानवर्धन करना ही है बिना उचित व अनुभवी वैध्य की सलाह या सहायता के स्वयं चिकित्सा करना हितकर नहीं है-

फ्रोजन शोल्डर (Frozen Shoulder) की आयुर्वेदिक चिकित्सा-


फ्रोजन शोल्डर की आयुर्वेदिक चिकित्सा

नाड़ी स्वेदन (Steam Bath)-

स्टीम बाथ (Steam Bath) यह एक तरह का भांप स्नान है कुकर में या स्टीम मशीन में रोगी की प्रकृति के अनुसार औषधीय काढ़े तथा तेल डालकर भांप बनाई जाती है तथा रबर की नली से उसे विशिष्ट स्थानों पर जैसे गर्दन, कंधे, पीठ, हाथ, कोहनी, उंगलियां जैसे भागों पर भाप दी जाती है यह चिकित्सा मुख्य रूप से जोड़ों के दर्द पर दी जाती है पूरे शरीर पर स्टीम देने की बजाय लोकल या दर्द वाले स्थानों पर टीम देने से ज्यादा राहत मिलती है यह ट्रीटमेंट जरुरत के मुताबिक 15 से 20 मिनट तक दी जाती है कभी-कभी यह ट्रीटमेंट अभ्यंग के पहले भी दी जाती हैं और बाद में भी दी जाती है औषधि भाप लेने से दर्द व सूजन में लाभ मिलता है तथा कंधे की मांसपेशियां ढीली होकर असहजता भी कम होती है-

स्नेहन (Body Massage)-

रोगी की प्रकृति तथा शरीर सौष्ठव के हिसाब से औषधीय गर्म तेल (Medicated hot oil) तथा जड़ी बूटियों के चूर्णों से यह मसाज किया जाता है इसमें शरीर के विभिन्न मर्म बिंदुओं (Trigger Points) पर हल्के या जोरों से या जरूरत के हिसाब से दबाव देकर नसों को खोला जाता है तथा स्नायुओ को ढीला किया जाता है पहले औषधि युक्त तेल लगाकर उसे शरीर पर 15 से 20 मिनट लेप के तौर पर रखा जाता है तथा उसके बाद विशिष्ट तरीके से दबाव देकर तथा अलग-अलग मूवमेंट से शरीर पर मसाज किया जाता है-इस चिकित्सा से रक्त संचार सुचारू होता है शरीर तरोताजा बनता है तथा आपकी त्वचा में नमी (Moisture) बरकरार रहती है तथा नर्वस सिस्टम शांत रहता है, तेल मसाज से वात दोष संतुलित होते हैं जिससे बदन दर्द, फ्रोजन शोल्डर (Frozen shoulder) कमर दर्द, आर्थराइटिस जैसी समस्या कम होती है-

नस्य क्रिया (Sniffing)-

विविध औषधी युक्त काढ़े,तेल, धृत तथा औषधीय चूर्णों को नाक से सूंघने (Sniffing), अंदर खीचने तथा नाक में डालने की क्रिया को नस्य कर्म कहते हैं नस्य गर्दन, आँख, नाक तथा मस्तिष्क के रोगों में उत्तम चिकित्सा माना जाता है नस्य लेने से मस्तिष्क, माथे तथा साइनस कैविटी में जमे हुए विषैले तत्व या दोषों का उत्सर्जन होता है, कफ दोष निकलता है तथा मस्तिष्क, सिर व गर्दन की जकड़न दूर होकर गर्दन की मूवमेंट सुचारू होती है फ्रोजन शोल्डर (Frozen shoulder) की वजह से आने वाले चक्कर,सरदर्द तथा सिर का भारीपन जैसी समस्याएं दूर होती है-

पोटली मसाज (Elakizhi)-

ताजी औषधीय पत्तियां या उनका कल्क या चूर्ण तथा चावल और उड़द की दाल को औषधीय काढे में अथवा बकरी के या गाय के दूध में पकाया जाता है तथा इनकी सूती कपड़े में बांधकर पोटली बनाई जाती है उस पोटली को गर्म काढे में या दूध में डुबोकर पूरे शरीर पर 30 से 40 मिनट तक मसाज किया जाता है इस चिकित्सा कर्मों में हाथ से मसाज ना करते हुए सिर्फ  करते हुए पोटली से मसाज किया जाता है इस मसाज को कायाकल्प मसाज भी माना गया है क्योंकि यह शरीर को नए कोष पैदा करने मैं मदद करती है, शरीर का भारीपन व जकड़न दूर करती है, इस चिकित्सा से रक्त परिभ्रमण क्रिया सुचारू होती है, शरीर की फलेक्जीबिलीटी बढ़ती है तथा संधियों की जकड़न व कड़ापन दूर होता है यह चिकित्सा हर तरह के न्यूरो मस्क्युलर दर्द (Nuro muscular Pain) जकड़न साइटिका तथा फ्रोजन शोल्डर (Frozen shoulder) में बहुत लाभदाई है-

पिज्चिल (Pizhichil)-

इस चिकित्सा औषधि युक्त गर्म तेल पूरे शरीर पर डाला जाता है यह एक तरह से तेल स्नान (Oil Bath) ही है तेल डालने के बाद या आपके शरीर को तेल से सराबोर करने के बाद विशिष्ट तरीके से विशिष्ट ताल से शरीर पर मसाज करके यह तेल शरीर में उतारा जाता है इस क्रिया में 2 मसाज चिकित्सक एक ही लय में मसाज करते हैं यह ट्रीटमेंट फ्रोजेन शोल्डर (Frozen shoulder) और रुहमेतिक समस्या जैसे की आथ्राइटीस, पैरालिसिस (Paralysis) तथा नसों की कमजोरी (Neuralgia) संबंधित समस्याओं पर उत्तम चिकित्सा है-

इसके अलावा महालाक्षादी तेल, अरंड तेल, तिल तेल, अश्वगंधा तेल तथा दशमूल क्वाथ से भाप तथा शतावरी जैसी औषधियां फ्रोजन शोल्डर (Frozen shoulder) की चिकित्सा में बेहद लाभदायक है-


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