बलवर्धक पुष्टिकर एक योग


आयुर्वेद में शीत ऋतु को सेहत बनाने के हिसाब से उत्तम माना गया है इसमें बलवर्धक, पौष्टिक, ओज वर्धक व वीर्यवर्धक बाजीकर तथा रसायन गुणों से भरपूर औषधि तथा पचने में गुरु याने भारी अन्नपदार्थो के सेवन को शारीरिक व मानसिक बलवर्धन  के लिए बेहद उपयोगी माना गया है-

बलवर्धक पुष्टिकर एक योग


शीत ऋतु में पौष्टिक योग खाने से बलवर्धन होता है, शरीर सौष्ठव पुष्ट होकर स्नायु तथा हड्डियां मजबूत बनती है, नया रक्त बनता है, आंखों की रोशनी सुधरती है, त्वचा मुलायम व चमकीली बनती है, थकान कमजोरी दूर होती है, बालों का झड़ना या टूटना कम होता है, बढ़ती उम्र का असर कम होता है तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है, लंबी बीमारी के बाद आई थकान अशक्ति व कमजोरी दूर होती है, धातु क्षय, स्नायु क्षय ,रक्तक्षय, मांसक्षय, तथा अन्य कारणों से आई कमजोरी व दुबलापन दूर होता है और वजन तथा बल योग्य तरीके से बढ़ता है ऐसे पौष्टिक औषधीय योग खाने से हम बीमारियों से बचाव कर सकते हैं व स्वस्थ जीवन जी सकते हैं...

जिन्हें हमेशा नजला, जुखाम, सिर दर्द, कमर दर्द, पैरों में कमजोरी, वात जैसी समस्या है ऐसे शीत प्रकृति वालों के लिए आयुर्वेद में बताए अनुसार आहार ही उत्तम औषधि है आज हम आपको ऐसे कुछ पौष्टिक योग बनाने की विधि बताएंगे जिससे आप घर में आसानी से बना कर स्वास्थ प्राप्त कर सकते हैं....

यह मोदक सिर्फ शीत ऋतू में ही सेवनीय है प्रातः सुबह जितनी जल्दी उठ सके आप उठ कर एक से दो मोदक प्रतिदिन खाए-

उड़द के लड्डू-


गेहूं का आटा छिलका उतारे हुए (250 ग्राम)
जौ का आटा (250 ग्राम)
उड़द की दाल का आटा (250 ग्राम)
चावल का आटा (250 ग्राम) 

उपरोक्त यह सभी सामग्री लें और कढ़ाई में डालकर शुद्ध देशी घी में भून लें फिर डेढ़ किलो चीनी को 2 किलो पानी में घोलकर चाशनी तैयार करें जब चाशनी लड्डू बनाने योग्य हो जाए तो भुना हुआ सब आटा उसमें अच्छी तरह मिलाकर 50-50 ग्राम वजन के लड्डू बांध ले- 

यह लड्डू सुबह नाश्ते में खाए वह ऊपर से गाय का एक कप गर्म दूध पिए इन लड्डूओ के प्रतिदिन सेवन से शारीरिक बल, ऊर्जा बढ़ती है कमजोरी दूर होती है तथा वीर्य भी बढ़ता है-

मेथी के मोदक-


मेथी दाने  (350 ग्राम)
सोंठ  (100 ग्राम)
गाय का घी  (250 ग्राम)
बादाम  (50 ग्राम)
इलायची  (25 ग्राम)
दूध  (3 लीटर) 
चीनी  (ढाई किलो)

मेथी और सोंठ को कूटकर छान ले दूध को उबालकर उसमें मेथी और सोंठ के चूर्ण को 7 घंटे तक भिगोकर रखें ले रोगियों को इसका सेवन करना बेहद लाभदाई है यह मोदक पौष्टिक होने के साथ साथ  कमर दर्द दूर करते हैं और भोजन को पचाने में भी सहायता करते हैं-गैस, बदहजमी, आमवात जैसी समस्याओं को भी यह मोदक खाकर कम किया जा सकता है अधेड़ आयु के स्त्री और पुरुष दोनों के लिए यह मोदक बेहद उपयोगी है-

धातु पौष्टिक लड्डू-


उड़द की धुली दाल का आटा (1 किलो)
चीनी (1 किलो)
खोवा (1 किलो)
कीकर (बबूल) का गोंद (250 ग्राम)
अखरोट (100 ग्राम)
बादाम (50 ग्राम)
खरबूजे की गिरी (100 ग्राम)
किशमिश (50 ग्राम)
इलायची (10 ग्राम)

कढ़ाई में थोड़ा सा घी डालकर गर्म करें और उसमें गोंद डालकर कर लाल हो जाए तब इसे निकाल ले और अलग रख दे अब घी लेकर उसमें उड़द की दाल का आटा डालकर भुने गुलाबी भून जाए तब उसमें खोवा डालकर भुने अच्छे से भूने जाने पर उतार ले फिर एक कढ़ाई में 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार करें जब एक तार की चाशनी बन जाए तो उपरोक्त सभी चीजें इसमें मिला ले ठंडे हो जाने पर अच्छे से मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बांध ले प्रतिदिन 50 से 100 ग्राम तक सेवन कर सकते हैं और ऊपर एक कप गुनगुना दूध पीने से वीर्य वृद्धि होती है तथा शरीर पुष्ट व बलवान बनता है-

बच्चों के लिए पौष्टिक योग-


अखरोट (500 ग्राम)
बादाम (500 ग्राम)
काजू (100 ग्राम)
छोटी इलायची (25 ग्राम)
पिस्ता (100 ग्राम)
चिरौंजी (50 ग्राम)
अश्वगंधा सत्व (25 ग्राम)
गिलोय सत्व (25 ग्राम)
सिंघाड़े का आटा (500 ग्राम)
चीनी (डेढ़ किलो)

सिंघाड़े के आटे को देसी घी में लाल और खस्ता होने तक भून ले चीनी को पीसकर इसमें मिलाएं बाकी बचे हुए सूखे मेवे को हल्का भूनकर इसमें मिलाएं अब अश्वगंधा सत्व वह गिलोय सत्व को इसमें अच्छे से मिला लें और हवा बंद डिब्बे में इसे रखें-

रोज सुबह शाम बच्चों को दो चम्मच एक कप गर्म दूध के में मिलाकर पिलाएं यह योग बेहद स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी है बच्चों के विकास के लिए लाभदायी है इस योग से मांस मज्जा तथा हड्डियां मजबूत होती है, दुबलापन दूर होता है और बच्चों में रोगप्रतिकारक शक्ती बढ़ती है-

बलवर्धक पुष्टिकर एक योग

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