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21 सितंबर 2018

रंग चिकित्सा क्या है

What is Color Therapy


विभिन्न रंगों का हमारे मूड, स्वभाव, स्वास्थ तथा मनोभावों पर पड़ने वाले प्रभाव हमेशा ही वैज्ञानिकों, चिकित्सकों तथा  फैशन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए अध्ययन व कुतूहल का विषय रहा है कलर (Colors) या रंग एक दृश्य प्रकाशीय ऊर्जा है जिसका हमारे मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है आधुनिक शोध से यह पता चला है कि रंग व प्रकाशीय किरणे जब हमारे शरीर मे प्रविष्टि होती है तब वो किरणे हमारी पिट्यूटरी व पिनियल ग्रन्थियों को उत्तेजित करती है जिसका प्रभाव हमारे शरीर के हार्मोन्स पर पड़ता है नर्वस सिस्टम शांत होती है जिसके मन मस्तिष्क को शांत बनाकर तन व मन को प्रफुल्लित बना रहता है-

रंग चिकित्सा क्या है

भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धिति आयुर्वेद ने तो इस रहस्य को सदियों पहले ही पहचान लिया था इसीलिए कुछ विशिष्ट रंगो के वस्त्रों, भोजन तथा अन्य सामग्रियों को दैनिक जीवन तथा धार्मिक विधियों में विशिष्ट स्थान दिया गया था-

आयुर्वेदिक चिकित्सा में भी रंगों को विशिष्ट स्थान दिया गया है पंचमहाभूतों के नियम में हर तत्व का अपना एक विशिष्ट रंग माना गया है हर महत्वपूर्ण अंग (Vital Organs) तथा हर एक भावना व मनोभाव का अपना एक विशिष्ट रंग निश्चित किया गया है जिसके द्वारा हम उस रंग के जरिये शरीर मे उस तत्व की पूर्ति करके शारीरिक व मानसिक व्याधियों की चिकित्सा कर सकते है-

रंग चिकित्सा (Color Therapy) कैसे उपयोग होती है-


1- विशिष्ट ऋतुओं तथा विशिष्ट व्याधियों में विशिष्ट रंग के वस्त्र या आभूषण पहन कर-

2- विभिन्न रँगो की कांच की बोतल में पानी भरकर उसे सूर्य किरणों की ऊर्जा से सिद्ध कर वो पानी पीना-

3- विभिन्न रंग की लाइट रेडिएशन्स शरीर के विभिन्न अंगों पर लेकर-

4- विभिन्न रंग के हीरे, पत्थर, या क्रिस्टल धारण करके-

5- शरीर पर विशिष्ट कर हाथों की हथेलियों पर विभिन्न स्थानों पर विशेष रंग के पेच लगाकर हम रंग चिकित्सा का आसानी से उपयोग कर सकते है-

6- जब हम हथेलियों पर रंग लगाते है तब उसे स्केचपेन से लगाए तथा कम से कम 4 घण्टे उसे लगे रहने दे उसके बाद धो डालें-

7- इस तरह रंग चिकित्सा से हम शारीरिक व्याधियों तथा मानसिक व्याधियों की आसान व निराप्रद तरीके से चिकित्सा घर बैठे कर सकते है-


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