धूम्रपान एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है


धूम्रपान (Smoke) आयुर्वेदिक चिकित्सा कर्म है आचार्य चरक, वाग्भट तथा आचार्य सुश्रुत, आचार्य शारंगधर ने विविध प्रकार के धूम्र सेवन तथा उससे होने वाले लाभ वर्णित किए हैं शास्त्रोक्त विधि से धूम्रपान करने से मस्तिष्क, फेफड़े, सर, नासीका, तथा छाती संबंधित रोगो का नाश होता है इसलिए महर्षि शारंगधर कहते हैं नस्य कर्म के बाद धूम्र सेवन विधि आवश्यक है-

धूम्रपान एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है

आयुर्वेद के हिसाब से धूम्र सेवन 12 वर्ष से लेकर 80 वर्ष की आयु के व्यक्तियों ने करना चाहिए-योग्य तरीके से औषिधि द्रव्यों के साथ किया हुआ धूम्र सेवन सर्दी, गर्दन, गले, आंख, नाक, कान ,तथा सिर के रोग में अत्यंत लाभकारी है शास्त्रोक्त विधि से किया हुआ धूम्र सेवन वायु तथा कफ विकारों को दूर करता है-

महर्षि चरक कहते हैं धुम्रपान चिकित्सा से मनुष्य की समस्त इंद्रिया, वाणी तथा मन प्रसन्न रहता है सिर के बाल दांत तथा दाढ़ी मूंछ के बाल मजबूत होते हैं आंतर मुख सुगंधित रहता है याने किन्ही रोगों मुख से आ रही दुर्गंध दूर होती है-

धूम्रपान एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है

धूम्रपान याने धुमस्य पानम अर्थात औषधि युक्त धुए का सेवन या ग्रहण करना इस क्रिया को धूम्रपान या धूम्र सेवन कहते हैं औषधीय द्रव्य के धुए को सूंघने से या त्वचा पर ग्रहण करने से औषधि के विशिष्ट गुण धर्म तथा गर्मी इन दोनों चिकित्सकीय तत्वों का एक साथ लाभ मिलता है हालांकि धूम्रपान यह एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक चिकित्सा कर्म है लेकिन आज हम आपको सरल व सुलभ तथा कारगर प्रयोग बताएंगे जो आप घर में प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं-

शास्त्रोक्त धूम्रपान प्रयोग-


1- गाय का घी, गुग्गल तथा मोम को एक साथ मिलाकर आग में डाल दे और उसका धुँआ सूंघे इससे बार-बार छींक आना बंद हो जाता है-

2- अजवाइन को जलते कोयले पर डालकर उसका धुआं सूंघने से जुकाम के साथ-साथ नाक दर्द तथा पीनस की समस्या दूर होती है-

3- पीपल के सूखे पत्तों में थोड़ी अजवाइन भरकर बीड़ी की तरह उस का कश खींचने से पुराने से पुराना जुकाम, इन्फेक्शन तथा कफ की समस्याएं ठीक हो जाती है-

4- आम के पत्तों को जलाकर उसका धुआ पीने से गले के भीतरी दर्द में तथा टॉन्सिल्स में राहत मिलती है-

5- गूगल का धुआं कान पर लेने से कान पकने की समस्या वह कान से मवाद आने की समस्या दूर होती है वह दर्द में राहत मिलती है-

6- नजले में हींग और काली मिर्च का धुआं सुघने से आश्चर्यजनक रूप से लाभ मिलता है जिनकी सूंघने की शक्ति कम हो गई हो उनको यह प्रयोग प्रतिदिन जरूर करना चाहिए-

7- नीम की पत्ते छाल तथा अरंड के सूखे पत्ते का धुआं लेने से योनि दाहा श्वेत प्रदर तथा योनि के दर्द की समस्या दूर होती है-

8- दालचीनी, सोंठ, तेजपत्ता के धुए को सूंघने से आधा शीशी का दर्द ठीक हो जाता है-

9- पुरानी रूई को तिल के तेल में या गाय के घी में डुबोकर रखें इस के छोटे-छोटे टुकड़ों को कोयले पर रखकर जलाकर इसके धुए को एक नाक बंद करके दूसरे नाक से जोर लगाकर यह धुआं अंदर ले यह प्रयोग प्रतिदिन करने से आधासीसी माइग्रेन तथा कब्ज की वजह से सर चकराना, चक्कर आना, आंखें कमजोर हो जाना जैसी समस्याओं में आश्चर्यजनक रूप से लाभ मिलता है-

10- अगर बाल टूट रहे हो झड़ रहे हो डैंड्रफ की समस्या हो तो बड़ की जटा, पत्ते, नीम के पत्ते, उड़द की दाल, सहजन के पत्ते, तथा गुड़हल के फूल को जलते हुए कोयलों पर डालकर उसका धुआ सर में लेने से यह समस्याएं जड़ से खत्म हो जाती है लेकिन उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को यह प्रयोग नहीं करना चाहिए-

11- दशमुल, गाय का घी व सेंधा नमक इन को जलाकर इनका धुआं सुनने से शिरो वेदना में लाभ होता है-

नजला-जुकाम-खांसी-दमा-खरार्टे के लिए धूम्र सेवन चिकित्सा-


जौ (Barley) एक किस्म का अनाज होता है जो कुछ-कुछ गेहूं जैसा दिखता है आप इसे बाजार से लगभग 250 ग्राम जौ ले आएँ बस ध्यान रहे कि इसमे घुन न लगा हुआ हो इसे साफ कर ले तथा मंद मंद आग पर कड़ाही मे डाल कर भून ले और ध्यान रहे कि जले नहीं-इसके बाद इसे मोटा-मोटा कूट-पीस ले-

अब जरूरत के समय 1 बड़ा चम्मच जौ का चूर्ण लेकर उसमे 1 छोटा चम्मच देशी घी मिला कर तेज गरम तवे पर या तेज गरम लोहे की कड़छी मे डाल कर इसका धुआँ नाक से या मुँह से खींचें यदि लकड़ी के जलते हुए कोयले पर डाल कर धुआँ खींचे तो और भी अधिक लाभदायक है धुआँ लेने के 15 मिनट पहले और 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पिए जब भी प्यास लगे तो गरम दूध पिए-

नोट- यदि बार बार मुँह सूखता हो और प्यास लगती हो तो ये प्रयोग न करें

लाभ-


नए जुकाम मे जब सिर भारी हो और नाक बंद तब यह प्रयोग करें और चमत्कार देखें 5 मिनट मे फायदा होगा-खांसी, दमे मे इन्हेलर कि तरह तत्काल फायदा दिखता है तथा खर्राटे मे प्रतिदिन ये धुआँ लें-

सुबह शाम किसी भी समय ले सकते हैं इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी सुरक्षित है अन्य दवाओं के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है-

बदलते मौसम मे स्वस्थ भी प्रयोग करें ताकि नजले जुकाम से बच सकें दिन मे 4 बार तक प्रयोग कर सकते हैं एक समय मे 4 बड़े चम्मच जौ व घी मिला कर प्रयोग कर सकते हैं-


विशेष सूचना-

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