बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

Introduction to Datia Baglamukhi Pitambara Peeth


दतिया नगर के दक्षिण में स्थित श्री वनखण्डेश्वर प्राचीन सिद्ध स्थान में ब्रम्हनील पूज्यपाद राष्ट्रगुरू अनन्त श्री विभूषित स्वामी जी महाराज का पदार्पण लगभग 78 वर्ष पूर्व 6 जुलाई 1929 को हुआ था पूज्यपाद ने इस स्थान को अपनी साधना स्थली के रूप मे चुना तथा अन्त तक इसी स्थान में साधनालीन रहे उस समय का महाभारत कालीन श्री वनखण्डेश्वर स्थान आज भव्य आकार ले चुका है जो देखते ही बनता है-

बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय


बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

श्री पीताम्बरा पीठ के नाम से विख्यात यह स्थान अब देश के गिने-चुने तीर्थ स्थलों मेंसे एक है तंत्र विशेषकर शाक्त मत के साधको के लिये तो इससे अच्छी निझर्णीय विश्व में कही भी उपलब्ध नही है पूज्यपाद श्री स्वामी जी श्री सिद्ध साधक एवं विदवत्ता के अद्भुत संगम थे

बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

उनकी दिनचर्या, साधना पद्धति, साधना काल, सत्य के प्रति आग्रह, भारतीय संस्कृति प्रति अनुराग राष्ट्रप्रेम कोटि-कोटि अनुयागियों के लिये आज भी प्रेरणा श्रोत बना हुआ हैे प्रारंभ से ही पूज्यपाद स्वामी जी बगलामुखी (Bagalamukhi) देवी के उपासक रहे है परन्तु उन्होने सभी दश महाविद्याओ की साधना भी अनवरत की है तथा स्वामी द्वारा तंत्र शास्त्र से संबंधित गूढ़, दुर्लभ, अनउपलब्ध ग्रन्थों का प्रकाशन सार्वजनिक करने के उद्देश्य से टीका/अनुवाद कर प्रकाशन कराया है इस प्रकार के प्रकाशन का कार्य अब तक देश भर में किसी भी पीठ अथवा संस्था द्वारा नही कराया गया है तथा अधिकांश प्रकाशन हिन्दी भाषा में हुआ था जो सर्व साधारण को सरलता से उपलब्ध है-

पूज्यपाद श्री स्वामी द्वारा तंत्रोक्त पूजा पद्धति का विधिवत पालन किया गया जिसका निर्वहन आज परियन्त किया जा रहा है यद्पि पूज्यपाद का निर्वाण दिवस 3 जून 1979 है किन्तु पूज्यपाद के सभी भक्तों में यह धारण विद्धवान है कि स्वामी जी पूर्व की तरह आज भी सूक्ष्म स्वरूप में पीठ में पूर्ववत रूप से है तथा पीठ का संचालन वे स्वंय कर रहे है और भक्तों की समस्याओं का निराकरण कर मार्गदर्शन भी कर रहे है-

भगवती बगलामुखी (Bagalamukhi) की स्थापना-


बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

पूज्यपाद श्री स्वामी जी ने सर्वप्रथम भगवती पीताम्बरा माता की स्थापना वर्ष 1935 में की तभी से यह स्थान श्री पीताम्बरा पीठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ है पूज्यपाद द्वारा माँ पीताम्बरा विषयक समस्त समग्री बगलामुखी ग्रन्थ रहस्यं नामक ग्रन्थ में संग्रहित कर प्रकाशित की है उल्लेखनीय है कि इस ग्रन्थ के संबंध के माध्यम से अनगिनत साधको को बगलामुखी की साधना हेतु तांत्रिक विधि एंव अर्चन विधान सहज रूप से उपलब्ध हुआ जो उनकी साधना में सहायक सिद्ध हुआ-

परिसर में श्री यंत्र की स्थापना-


पूज्यपाद श्री स्वामी जी ने श्री पीताम्बरा मंदिर के पास ही अन्दर की ओर रजत चौकी पर श्री यंत्र की स्थापना की दश महाविद्याओं के अन्तर्गत श्री विद्या की उपासना साधना का प्रमुख स्थान है पीठ में स्थित श्री यंत्र का तंत्रोक्त विधि से पूजन अर्चन किया जाता है तथा इससे संबंधित विधि विधान एवं पूजा पद्धति पर अनेको ग्रन्थ भी प्रकाशित करायें गये हैं-श्री स्वामी जी कृत महात्रिपुर सुन्दरी पूजा पद्धति, चिदविलास, त्रिपुर महिम्न स्त्रोत, तांत्रिक पंचांग प्रमुख रूप से प्रकाशित ग्रन्थ है पीठ से प्रकाशित पूज्यपाद द्वारा बनाया तांत्रिक पंचाग तंत्र साधना के लिये विशिष्ठ उपयोगी है जो साधको को संकल्प के लिये अत्य आवश्यक है-

महाभारत कालीन वनखण्डेश्वर मन्दिर-


बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

मान्यता है कि द्वापरयुग कालीन प्रसिद्ध वनखण्डेश्वर शिव मंदिर वाममार्ग के साधकों की साधना स्थलीय रह है पूज्यपाद की साधना स्थली यही मंदिर था यहाँ स्थापित शिवलिंग के चारो ओर श्री गणेश कीर्ति मुख वीरभद्र अन्नपूर्णा स्वामी कार्तिकेय एवं महिष मर्दिनी के छोटे किन्तु मोहक श्री विग्रह प्रतिष्ठित है वनखण्डेश्वर विग्रह ईषाणकोण में दक्षिणमुखी मारूति नन्दन श्री हनुमान जी की तेजुमय सिद्ध एवं आकर्षक प्राचीन प्रतिमा भी दर्शनीय है-वनखण्डेश्वर के मंदिर में श्री स्वामी की आज्ञा से तंत्रोक्त विधि से षष्टमुखी शिव की छ: प्रतिमाऐं स्थापति की गई है जिनका अपना अलग-अलग महत्व एवं स्थान है-

भगवान परशुराम की स्थापना-


भगवान परशुराम के विषय में कहा गया है कि-

अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमानश्य बिभीषण:।कृप : परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन: ।।

शक्ति पीठ पर भगवान परशुराम की प्रतिष्ठा पूज्यपाद द्वारा संम्वत् 2020 मे की गई भगवान परशुराम शाक्त मत के अग्रणीय आचार्यो में है भगवान परशुराम का शस्त्र एवं शास्त्र पर समान रूप से अधिकार है भगवान परशुराम द्वारा विराचित परशुराम कल्प शुत्र नामक ग्रन्थ शाक्य संप्रदाय के अनुयायिओं के लिये अनुकर्णीय है यह पीठ के पुस्तकालय में संग्रहित है मान्यता है कि जहा कही भी भगवान परशुराम की चर्चा होती है वे स्वंय वहा विद्धमान रहते है-

भगवती धूमावती की स्थापना-


देश में भगवती धूमावती के मंदिर कम उपलब्ध है भगवती धूमावती की उपासना शत्रु निग्रह हेतु करने का विधान है चीन के भारत आक्रमण के समय पूज्यपाद श्री स्वामी जी द्वारा राष्ट्र रक्षा हेतु भगवती धूमावती माई का अनुष्ठान पूर्व आर्वाहन किया गया था-

बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

भगवती धूमावती से सम्बन्धित साहित्य संकलित कर प्रकाशित कराया गया-इसमें महाविद्या चतुष्टय तथा धूमावती सपर्यार्णव का विशेष स्थान है तथा ये ग्रन्थ साधकों का मार्ग दर्शन करते है-माँ धूमावती का प्राकट्य नरक चतुर्दशी के दिन माना गया है इनका दूसरा नाम ज्येष्ठा भी है क्योकि ये लक्ष्मी जी की बड़ी बहिन के रूप में निरूपति की गई है-भगवती के एक हाथ में सूप है जो सूप के गुण को भासित करता है तथा-साधू ऐसा चाहिए-

बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

जैसा सूप सुभाय।सार-सार को गहि रहे थोथा देय उड़ाय।।

आम दर्शनार्थियों में यह भ्रम फैलाया गया है कि श्री धूमावती माई के दर्शन सिर्फ शनिवार को ही होते है जबकि तथ्य यह है कि माई दर्शन प्रतिदिन प्रात: 08 बजे और सांयकाल 8 बजे होते है-भक्तगण प्रतिदिन माई के दर्शनों का लाभ ले सकते है और माई का प्रसाद घर ले जाने में कोई असंगति नही है-

गणेश एवं भैरव मंदिर-


बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

मंदिर मे प्रवेश के दाई ओर श्री गणेश जी इसके पश्चात महाकाल भैरव एवं बटुक भैरव की आकर्षक प्रतिमाऐं अवस्थित है महाकाल भैरव की स्थापना पूज्यपाद श्री स्वामी के निर्देशोनुसार हुई थी-इनका वर्ण श्याम है तथा वक्ष पर मुण्डमाला सुषोभित है बटुक भैरव का शाक्य साधना में विशिष्ट स्थान है स्वान पर विराजवान यह दर्शनीय है भगवती बगलामुखी के यह बटुक है तथा भगवती के द्वारपाल है-

ज्योतिष्मती औषधि का निर्माण-


ज्योतिष्मती औषधि का निर्माण और श्रद्धावान को मिलना पीताम्बरा पीठ की एक विशेषता है यह औषधि स्वामी जी बनवाते थे-यद्यपि यह औषधि प्रमुख रूप से नेत्र रोग व स्मृति रोग के लिये है किन्तु स्वामी जी अनेक रोगो में इसे प्रदान करते थे तथा सभी रोग समाप्त हुए पाये गये यथार्थ में यह उनकी कृपा का माध्यम था और यह औषधि नि:शुल्क प्राप्त होती थी-वर्तमान में भी नि:शुल्क ही प्रदान की जाती है किन्तु श्रद्धावान को ही प्राप्त होती है जो प्रसाद समझ कर लेते है-आज उस औषधि का बहुत महत्व बढ गया है तथा दूर दूर से रोगी व्यक्ति इस औषधि को प्राप्त करने के लिये आश्रम पर आते हैं-

हरिद्रा सरोवर-


बगुलामुखी पीताम्बरा पीठ दतिया का एक परिचय

स्वामी मन्दिरम् के पृष्ठ भाग में 100x150 का एक मनमोहक हरिद्रा सरोवर है-पीताम्बरा शक्ति का प्रादुर्भाव हरिद्रा सरोवर से मान्य है-इसमे समुद्र मंथन की घटना के आधार पर मध्य में कच्छप का पृष्ठ भाग निर्मित है-मध्य में पीताम्बरा देवी का लाल प्रस्तर से निर्मित यन्त्र है-सरोवर के तीन ओर नारद ब्रम्हा और देव प्रणाम मुद्रा में है-गौमुख से प्रवाहित सरोवर की जलधारा दर्शितहै-श्वेत संगमरमर का सरोवर है-

स्वामी जी के समय में यह सरोवर कच्चा केवल मिट्टी का ही था-इसके तीनों ओर शिखर युक्त संगमरमर की जाली है-समुद्र मंथन की कल्पना पर इस का आकार कूर्मवत् हैं-समुद्र मंथन के अवसर पर मन्दराचल की मथानी का भार न सह सकने के कारण अस्थिर हो रहे विष्णु की सहायतार्थ पीताम्बरा शक्ति ने कूर्मेश्वरी का रूप धारण करके स्थिर का समुद्र मंथन सम्पन्न कराया-कच्छप के मुख से निकलती हुई लपटें मंदराचल के भार व समुद्रमथानि की तीव्रता शक्ति की परिचायक है-

सरोवर के मध्य में लाल पत्थर से निर्मित बगलामुखी का तन्त्रोक्त युक्त यंत्र है जिनकी साधना से पुरूषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति होती है-सरोवर के तीनों ओर ब्रहमा नारद का ध्यान मग्न विग्रह है-मन्दिर के नीचे गोमुख से प्रवाहित निर्मत्म जल अमृत वर्षण का प्रतीक है-यह सरोवर देवी के प्राकट्य स्थल का प्रतीक है-ऐसा इस सरोवर पर लिखा है-प्राचीनकाल में वातक्षोभ हुआ, विनाश की उपस्थिति देख सृष्टि के पालन कर्ता विष्णु ने तपस्या कर सौराष्ट्र के हरिद्रा सरोवर में पीताम्बरा शक्ति के दर्शन किये स्तुति की वातक्षोभ शांत हुआ अत: विष्णु ही इन शक्ति के प्रथम उपासक है ऐसा भी यहां लिखा है-

मणिपुर धाम-


इस सरोवर के ऊपर स्वामी मन्दिरम् मणिपुर धाम नाम से 60 X 40 फीट के क्षेत्रफल में विशाल हॉल है जिसमें 200 से अधिक संख्या में साधक एक साथ साधना कर सकते है-इसमें भी गुरू जी की प्रतिमा है जिसका नियमित पूजन अर्चन होता है-इस हॉल में ही महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाल व गणपति के विग्रह है तथा चित्रों के माध्यम से गुरू जी के अनेक रूपों का दर्शन होता हैं अमृतेश्वर महादेव इस हॉल के आगे आंगन प्रांगण में अमृतेश्वर महादेव अर्थात् समाधि स्थल है-3 जून 1979 को गुरू जी को यहीं समाधिस्थ किया गया है-

तंत्र ग्यानी अध्यात्म से सम्बंधित लोगों को एक बार अवश्य ही पीताम्बरा पीठ जाके माता बगुलामुखी के दर्शन अवश्य करना चाहिए-


विशेष सूचना-

सभी मेम्बर ध्यान दें कि हम अपनी नई प्रकाशित पोस्ट अपनी साइट के "उपचार और प्रयोग का संकलन" में जोड़ देते है कृपया सबसे नीचे दिए "सभी प्रकाशित पोस्ट" के पोस्टर या लिंक पर क्लिक करके नई जोड़ी गई जानकारी को सूची के सबसे ऊपर टॉप पर दिए टायटल पर क्लिक करके ब्राउज़र में खोल कर पढ़ सकते है...  धन्यवाद। 

Upchar Aur Prayog

Upcharऔर प्रयोग की सभी पोस्ट का संकलन

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Upchar Aur Prayog

About Me
This Website is all about The Treatment and solutions of Home Remedies, Ayurvedic Remedies, Health Information, Herbal Remedies, Beauty Tips, Health Tips, Child Care, Blood Pressure, Weight Loss, Diabetes, Homeopathic Remedies, Male and Females Sexual Related Problem. , click here →

आज तक कुल पेज दृश्य

हिंदी में रोग का नाम डालें और परिणाम पायें...

Email Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner