जो व्यक्ति गिरता है वही सफल होता है

The Person who falls is Successful


मनुष्य अगर अपने मन में किसी बात को ठान लें तो फिर वो क्या नहीं कर सकता है हर मनुष्य में कुछ करने की लालसा अवश्य होती है लेकिन उसका संकल्प कमजोर पड़ जाता है तो फिर असफलता ही हाथ लगती है हमारे जीवन में भी एक उदाहरण से परिवर्तन हुआ है-

जो व्यक्ति गिरता है वही सफल होता है

एक बार मै घर में कुछ काम न होने के कारण खाली बैठा था और कुछ सोच रहा था तभी मेरी नजर मेरे किचन में पड़े हुए पके चावल के टुकड़े पर गई एक चींटी उस चावल को मुंह में दबा कर ले जाने का प्रयास बार-बार करती रही लेकिन चावल का वजन चींटी के वजन से शायद भारी था इसलिए असफल हो रही थी लेकिन वह अपना प्रयास छोड़ने को भी कतई भी राजी नहीं थी और तब तक एक दूसरी चींटी  भी आ गई और एक आगे और एक पीछे मिल कर प्रयास करने लगी और फिर सफल हो गई उस चावल को अपने बिल तक ले जाने में-

बस यही देख कर हमें एक सीख मिली कि जीवन में प्रयास कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए जो प्रयास करता रहता है भले ही असफल होता रहे लेकिन एक दिन वही सफल हो जाता है यही जीवन की सफलता का राज है उपरोक्त उदाहरण में दो चीज है एक है निरंतर प्रयास और दूसरी बात है सहयोग-अगर एकता से काम सहयोगात्मक रूप से किया जाए तो कार्य आसान हो जाता है लेकिन आजकल लोग अपने दुःख से नहीं बल्कि दूसरों की ख़ुशी से दुखी है इसलिए सहयोग कि भावना कुछ वर्षो बाद सिर्फ इतिहास में ही पढने को मिलेगी आज मनुष्य स्वयं-स्वार्थ सिद्ध के बारे में सोचता है-

हमने जब ये ब्लॉग लिखना शुरू किया था मुसकिल से 20-25 लोग ही पढ़ते थे दो माह लिखते हो गए थे लेकिन मुझे असफल ही माना जाएगा तब एक बार तो मेरे मन में भी आया कि छोडो क्यों लोगो को ज्ञान-और जानकारी से अवगत कराये अपना समय खराब करो पोस्ट लिखो और चंद लोग देख कर निकल जाते है ये बात अक्तूबर 2014 की है लेकिन मन को ये समझा कर लिखता रहा और सोचा कि-कोई पढ़ेगा या नहीं लेकिन तब भी ये मेरा कलेक्शन तो रहेगा ही और एक तरफ अंतर-मन ये कहता था-करते रहो-कभी-न-कभी तो सफल होगा ही-मेरा मकसद सिर्फ ऋषि-मुनियों की परम्परा को जीवंत रखने का था और आज की दवाईयों के साइड-इफेक्ट से बचा कर घरेलू दवा से छोटी-छोटी चीजो से इलाज से अवगत कराना था-

वैसे ये आयुर्वेद का काम हमारा पुरातन और वंशावली का था-मगर हमने उस वक्त को भी देखा है जब परिवार में दो जून की रोटी भी चलना भारी होता था-हमारे बुजुर्ग लोगों की सेवा में अपना भी धन खर्च करते थे और फ्री दवा लेने वालों का तांता खत्म होने का नाम ही नहीं लेता था-बस धन के नाम पर आता कुछ नहीं था-हाँ-दुआए अवश्य मिलती थी-लेकिन आप जानते ही है कि दुआओं से घर तो नहीं चल सकता था-ये बात हमारे पितामह और पिताजी के जमाने की थी-

हमने जब पहले औषिधियों को बनाने का काम शुरू किया तो पहली बात औषिधियों का संकलन करना और ढूढ़ कर या खरीद का इकट्ठा करना फिर उनको कूट-पीस कर तैयार करना और जब किसी को उसकी कीमत बताया जाता तो मुझे इस तरह शक की निगाहों से देखता था जैसे हम उसके कपडे उतार रहे है इसलिए हमें इस काम को बंद करके जीविकोपार्जन का माध्यम कुछ और ही साधन से अपनाना पड़ा-

जबकि एलोपैथी में इसका उल्टा है डॉक्टर ने घसीटी भाषा का प्रयोग करके दवा लिखी परचा आपको थमा दिया और बिना तर्क-कुतर्क के आपने उसकी फीस दी और मेडिकल से दवा लाये-मेडिकल स्टोर से भी कमीशन डॉक्टर को आना बिलकुल तय सा होता है क्युकि अब ये चिकित्सा पद्धति का बिजनेस पूरी इमानदारी से मेडिकल स्टोर के साथ एग्रीमेंट पे चल रहा है-

इसका सबसे बड़ा मुख्य कारण है डॉक्टर की पढाई में धन का अधिक खर्च होना और जब खर्च किया है तो उगाही तो होनी ही है आज समाज सेवा करके वो अपना नर्सिंग होम नहीं बना सकता है और आपको अपनी फ़ीस एक-दो हजार बता के ले नहीं पाता है सौ या दो सौ आप से फीस के लिए ही ले सकता है वर्ना उसका डर ये है कि इलाज के लिए आप कही और चले जायेगें तो अब जादा इनकम कैसे हो तो मेडिकल स्टोर से भी डॉक्टर को आपकी दवा का कमीशन आता है और अगर उसने जाँच आदि लिख दी-तो पैथालाजी से भी हिस्सेदारी आ जाती है तब जा के उसके घर का मेंटिनेंस चलता है-

इसलिए जीविकोपार्जन के लिए आवश्यक था हम इसे सिर्फ सलाह के रूप में लोगों को बताये और अपने जीविकोपार्जन के लिए कोई और संसाधन को अपनाए जो आज भी हम सर्विस कर रहे है-

अंत में हमने इसे सिर्फ लोगों में ज्ञान रूप से ही प्रवाहित करने का संकल्प लिया है न हम कोई दवा का निर्माण करते है न ही किसी प्रकार के धन की लालसा है हम जहाँ कार्य करते है प्रतिष्ठित जगह है और उच्च-पद पर हूँ इसलिए इतना मिलता है कि ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ-


जो व्यक्ति गिरता है वही सफल होता है

लेकिन आज मुझे कहने में कोई संकोच नहीं होता है कि ये वेबसाईट आज आपके सहयोग और प्यार से काफी सफल है अगर उस वक्त हमने हिम्मत हार ली होती तो आज इस मुकाम पर नहीं होते प्रयत्न करना ही जीवन का उद्देश्य होना आपकी सफलता की कुंजी है- अब तक इसके व्यूवर की संख्या दो करोड़ उनसठ लाख (25900000) से उपर तक पहुच गई है और प्रतिदिन अभी 20000 (बीस हजार) लोग वेबसाईट को पढ़ रहे है आप सभी पाठक का दिल से आभारी हूँ आप बस अपना प्यार देते रहे-और हमें हौसला प्रदान करते रहे-

इसे भी देखें- आप अपने भाग्य के निर्णायक स्वयं है

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4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही प्रेरणादायक

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  2. बहुत अच्छी बात कही है आज आपने गुरु जी एक अच्छी सोच मिली है जी और हम तो बहुत दिनों से आपके सारे लेख से बहुत खुस है जी पर आज वाला बहुत अच्छा है जी

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