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9 फ़रवरी 2019

Prithvi Mudra for Weight Gain-वजन बढाने के लिए पृथ्वी मुद्रा

Prithvi Mudra for Weight Gain-वजन बढाने के लिए पृथ्वी मुद्रा


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Low weight (कम वजन) किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए अच्छा नहीं माना जाता है तथा सामान्य से बहुत कम वजन वाला व्यक्ति Weakness (दुर्बल) कहलाता है जिस व्यक्ति में दुर्बलता है वह किसी भी काम को करने में जल्द थक जाता है ऐसे व्यक्तियों के शरीर में रोग Immunity (प्रतिरोधक क्षमता) कम होती है Weight Gain (वजन बढाना) करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि हम Prithvi Mudra नियमित करने की आदत डालें। 
वैसे तो पाचन शक्ति में गड़बड़ी के कारण भी व्यक्ति को Weakness (दुर्बलता) हो सकती है तथा मानसिक, भावनात्मक तनाव, चिंता की वजह से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है इसके अलावा शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो जाने पर भी व्यक्ति दुर्बलता का शिकार हो सकता है ज्यादातर लोग इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए कई उपाय करते हैं लेकिन परिणाम नहीं मिलता है Weight Gain के लिए योग व मुद्राओं से बेहतर दवा और कोई नहीं है Prithvi Mudra (पृथ्वी मुद्रा) इस समस्या का सबसे आसान उपाय माना जाता है। 

How to Prithvi Mudra for Weight Gain-वजन बढ़ाने के लिए पृथ्वी मुद्रा कैसे करें


Prithvi Mudra (पृथ्वी मुद्रा) के लिए अनामिका ऊँगली के पोर को अंगूठे के पोर के साथ स्पर्श करने पर पृथ्वी मुद्रा बनती है बाकी शेष तीनो अंगुलियां अपनी सीध में खड़ी होनी चाहिए जैसे पृथ्वी सदैव पोषण करती है इस मुद्रा से भी शरीर का पोषण होता है ये मुद्रा Weakness (शारीरिक दुर्बलता) दूर कर स्फूर्ति और ताजगी देने वाली और बल वृद्धिकारक यह Prithvi Mudra (पृथ्वी मुद्रा) अति उपयोगी है जो व्यक्ति अपने दुबलेपन से चिंतित और व्यथित हैं वे यदि इस Prithvi Mudra का निरंतर अभ्यास करें तो निश्चित वे लोग दुबलेपन से मुक्ति पा सकते हैं। 


यह Prithvi Mudra (पृथ्वी मुद्रा) रोगमुक्त ही नहीं बल्कि तनाव (Tension) मुक्त भी करती है यह व्यक्ति में सहिष्णुता (Tolerance) का विकास करती है कोई भी व्यक्ति रोज इस मुद्रा का सिर्फ पंद्रह मिनट अभ्यास करने से दुबलेपन से छुटकारा पा सकता है। 

Method of Prithvi Mudra-पृथ्वी मुद्रा करने की विधि


Prithvi Mudra (पृथ्वी मुद्रा) के लिए आप वज्रासन की स्थिति में दोनों पैरों के घुटनों को मोड़कर बैठ जाएं तथा रीढ़ की हड्डी सीधी रहे एवं दोनों पैर अंगूठे के आगे से मिले रहने चाहिए तथा एड़िया सटी रहें नितम्ब का भाग एड़ियों पर टिकाना लाभकारी होता है और अगर आप किसी कारण से यदि वज्रासन में न बैठ सकें तो फिर आप पदमासन या सुखासन में बैठ सकते हैं तथा दोनों हांथों को घुटनों पर रखें तथा Prithvi Mudra बनाकर हथेलियाँ ऊपर की तरफ रहें। 
अपने हाथ की अनामिका अंगुली (सबसे छोटी अंगुली के पास वाली अंगुली) के अगले पोर को अंगूठे के ऊपर के पोर से स्पर्श कराएँ तथा हाथ की बाकी सारी अंगुलिया बिल्कुल सीधी रहें। 

Some Precautions of Prithvi Mudra-पृथ्वी मुद्रा की कुछ सावधानियां


वैसे तो Prithvi Mudra को किसी भी आसन में किया जा सकता है परन्तु इसे वज्रासन में करना अधिक लाभकारी है अतः यथासंभव इस मुद्रा को वज्रासन में बैठकर करना चाहिए। 

Time and Duration of Prithvi Mudra-पृथ्वी मुद्रा का समय और अवधि


पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) को प्रात या सायं 24-24 मिनट करना चाहिए वैसे तो आप इसे किसी भी समय एवं कहीं भी इस मुद्रा को कर सकते हैं।

Medical Benefits of Prithvi Mudra-पृथ्वी मुद्रा के चिकित्सीय लाभ


1- जिन लोगों को भोजन न पचने का या गैस का रोग (Gas Disease) हो उनको भोजन करने के बाद 5 मिनट तक वज्रासन में बैठकर Prithvi Mudra  (पृथ्वी मुद्रा) करने से अत्यधिक लाभ होता है। 

2- पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) के अभ्यास से आंख, कान, नाक और गले के समस्त रोग दूर हो जाते हैं। 

3- Prithvi Mudra करने से कंठ सुरीला हो जाता है तथा इस मुद्रा को करने से गले में बार-बार खराश होना, गले में दर्द (Throat Pain) रहना जैसे रोगों में भी बहुत लाभ होता है। 

4- पृथ्वी मुद्रा को प्रतिदिन करने से महिलाओं की खूबसूरती (Beauty) बढ़ती है चेहरा सुंदर हो जाता है एवं पूरे शरीर में चमक (Body Glow) पैदा हो जाती है। 

5- पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) से मन में हल्कापन महसूस होता है एवं शरीर ताकतवर (Powerful) और मजबूत (Strong) बनता है। 

इसे भी देखे- दुबलापन होने का कारण और आयुर्वेदिक उपाय

6- Prithvi Mudra के अभ्यास से स्मृति शक्ति (Memory Power) बढ़ती है एवं मस्तिष्क में ऊर्जा बढ़ती है। 

7- पृथ्वी मुद्रा करने से दुबले-पतले लोगों का Weight Gain (वजन बढ़ता) है तथा साथ ही शरीर में ठोस तत्व और तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए पृथ्वी मुद्रा सर्वोत्तम मुद्रा मानी गई है। 

8- जिस प्रकार से पृथ्वी माँ प्रत्येक स्थिति जैसे-सर्दी, गर्मी, वर्षा आदि को सहन करती है एवं प्राणियों द्वारा मल-मूत्र आदि से स्वयं गन्दा होने के वाबजूद उन्हें क्षमा कर देती है हमारी पृथ्वी माँ आकार में ही नही वरन ह्रदय से भी विशाल है Prithvi Mudra (पृथ्वी मुद्रा) के अभ्यास से इसी प्रकार के गुण साधक में भी विकसित होने लगते हैं और यह मुद्रा विचार शक्ति (Thought Power) को उनन्त बनाने में मदद करती है।

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