Prithvi Mudra for Weight Gain-वजन बढाने के लिए पृथ्वी मुद्रा

वजन बढाने के लिए पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra for Weight Gain)-


कम वजन (Low weight) किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए अच्छा नहीं माना जाता है तथा सामान्य से बहुत कम वजन वाला व्यक्ति दुर्बल (Weakness) कहलाता है। जिस व्यक्ति में दुर्बलता है वह किसी भी काम को करने में जल्द थक जाता है। ऐसे व्यक्तियों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease resistance) कम होती है वजन बढाने (Weight Gain) के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि हम पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) नियमित करने की आदत डालें।

Weight Gain Mudra
Prithvi Mudra for Weight Gain
How to Gain Weight Naturally
How to Prithvi Mudra for Weight Gain

Prithvi Mudra for Weight Gain-वजन बढाने के लिए पृथ्वी मुद्रा

वजन के लिए योग (Yoga for Weight Gain)-


वैसे तो पाचन शक्ति में गड़बड़ी के कारण भी व्यक्ति को दुर्बलता (Weakness) हो सकती है। मानसिक, भावनात्मक तनाव, चिंता की वजह से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है। इसके अलावा शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो जाने पर भी व्यक्ति दुर्बलता का शिकार हो सकता है। ज्यादातर लोग इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए कई उपाय करते हैं। लेकिन परिणाम नहीं मिलता है। वजन बढाने (Weight Gain) के लिए योग व मुद्राओं से बेहतर दवा और कोई नहीं है। पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) इस समस्या का सबसे आसान उपाय माना जाता है।

वजन बढ़ाने के लिए पृथ्वी मुद्रा कैसे करें (How to Prithvi Mudra for Weight Gain)-


पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) के लिए अनामिका ऊँगली के पोर को अंगूठे के पोर के साथ स्पर्श करने पर पृथ्वी मुद्रा बनती है। बाकी शेष तीनो अंगुलियां अपनी सीध में खड़ी होनी चाहिए। जैसे पृथ्वी सदैव पोषण करती है इस मुद्रा से भी शरीर का पोषण होता है। ये मुद्रा शारीरिक दुर्बलता (Weakness) दूर कर स्फूर्ति और ताजगी देने वाली और बल वृद्धिकारक है। पृथ्वी मुद्रा अति उपयोगी है जो व्यक्ति अपने दुबलेपन से चिंतित और व्यथित हैं वे यदि इस पृथ्वी मुद्रा का निरंतर अभ्यास करें तो निश्चित वे लोग दुबलेपन से मुक्ति पा सकते हैं।

यह पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) रोगमुक्त ही नहीं बल्कि तनाव (Tension) से भी मुक्त करती है। यह व्यक्ति में सहिष्णुता (Tolerance) का विकास करती है। कोई भी व्यक्ति रोज इस मुद्रा का सिर्फ पंद्रह मिनट अभ्यास करने से दुबलेपन से छुटकारा पा सकता है।

पृथ्वी मुद्रा करने की विधि (Method of Prithvi Mudra)-


Prithvi Mudra for Weight Gain

पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) के लिए आप वज्रासन की स्थिति में दोनों पैरों के घुटनों को मोड़कर बैठ जाएं तथा रीढ़ की हड्डी सीधी रहे। दोनों पैर अंगूठे के आगे से मिले रहने चाहिए तथा एड़िया सटी रहें। नितम्ब का भाग एड़ियों पर टिकाना लाभकारी होता है और अगर आप किसी कारण से यदि वज्रासन में न बैठ सकें तो फिर आप पदमासन या सुखासन में बैठ सकते हैं। तथा दोनों हांथों को घुटनों पर रखें तथा पृथ्वी मुद्रा बनाकर हथेलियाँ ऊपर की तरफ रहें। 

अपने हाथ की अनामिका अंगुली (सबसे छोटी अंगुली के पास वाली अंगुली) के अगले पोर को अंगूठे के ऊपर के पोर से स्पर्श कराएँ तथा हाथ की बाकी सारी अंगुलिया बिल्कुल सीधी रहें।

पृथ्वी मुद्रा की कुछ सावधानियां (Some Precautions of Prithvi Mudra)-


वैसे तो Prithvi Mudra को किसी भी आसन में किया जा सकता है परन्तु इसे वज्रासन में करना अधिक लाभकारी है अतः यथासंभव इस मुद्रा को वज्रासन में बैठकर करना चाहिए। 

पृथ्वी मुद्रा का समय और अवधि (Time and Duration of Prithvi Mudra)-


पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) को प्रात या सायं 24-24 मिनट करना चाहिए वैसे तो आप इसे किसी भी समय एवं कहीं भी इस मुद्रा को कर सकते हैं।

पृथ्वी मुद्रा के चिकित्सीय लाभ (Medical Benefits of Prithvi Mudra)-


1- जिन लोगों को भोजन न पचने का या गैस का रोग (Gas Disease) हो। उनको भोजन करने के बाद 5 मिनट तक वज्रासन में बैठकर पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) करने से अत्यधिक लाभ होता है। 

2- पृथ्वी मुद्रा के अभ्यास से आंखकाननाक और गले के समस्त रोग दूर हो जाते हैं।

3- पृथ्वी मुद्रा करने से कंठ सुरीला हो जाता है। इस मुद्रा को करने से गले में बार-बार खराश होना, गले में दर्द (Throat Pain) रहना जैसे रोगों में भी बहुत लाभ होता है। 

4- पृथ्वी मुद्रा को प्रतिदिन करने से महिलाओं की खूबसूरती (Beauty) बढ़ती है। चेहरा सुंदर हो जाता है एवं पूरे शरीर में चमक (Body Glow) पैदा हो जाती है।

5- पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) से मन में हल्कापन महसूस होता है एवं शरीर ताकतवर (Powerful) और मजबूत (Strong) बनता है। 

6- पृथ्वी मुद्रा के अभ्यास से स्मृति शक्ति (Memory Power) बढ़ती है एवं मस्तिष्क में ऊर्जा बढ़ती है। 

7- पृथ्वी मुद्रा करने से दुबले-पतले लोगों का वजन बढ़ता है। साथ ही शरीर में ठोस तत्व और तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए पृथ्वी मुद्रा सर्वोत्तम मुद्रा मानी गई है। 

8- जिस प्रकार से पृथ्वी माँ प्रत्येक स्थिति जैसे-सर्दी, गर्मी, वर्षा आदि को सहन करती है एवं प्राणियों द्वारा मल-मूत्र आदि से स्वयं गन्दा होने के वाबजूद उन्हें क्षमा कर देती है। हमारी पृथ्वी माँ आकार में ही नही वरन ह्रदय से भी विशाल है। पृथ्वी मुद्रा (Prithvi Mudra) के अभ्यास से इसी प्रकार के गुण साधक में भी विकसित होने लगते हैं और यह मुद्रा विचार शक्ति (Thought Power) को उनन्त बनाने में मदद करती है।

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