Make Cholera Pills at Home-घर पर हैजा की गोली बनाएं

घर पर हैजा की गोली बनाएं (Make Cholera Pills at Home)-


गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और कभी-कभी किसी को भी हैजे (Cholera) की शिकायत हो जाती है। कुछ लोगों को बदहजमी की भी शिकायत हो जाती है। तो आइये आप घर पर ही छुट्टी के दिन आप हैजे गोलियों का निर्मार्ण अवश्य ही कर लें। ये वटी आपको कभी भी अचानक हैजे या विशुचिका और बदहजमी में तथा शूलजुकामदस्त में आपके बहुत काम आएगी। 


Make Cholera Pills at Home-घर पर हैजा की गोली बनाएं

हैजा क्या है (What is Cholera)-


हैजा (Cholera) एक प्रकार का संक्रामक आंत्रशोथ है। जो वाइब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु के एंटेरोटॉक्सिन उत्पन्न करने के कारण होता है। वाइब्रियो कॉलेरी एक ग्राम-नेगेटिव जीवाणु है। इसका फैलाव इस जीवाणु द्वारा दूषित भोजन या पानी को ग्रहण करने के माध्यम से होता है। 

हैजा उन रोगों मे से एक है जो बहुत तेजी से घातक असर करता हैं।  इसके सबसे गंभीर रूप में रोग के लक्षणों की शुरुआत के एक घंटे के भीतर ही हो जाती है। परिणाम स्वरूप एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप घटकर निम्न रक्तचाप के स्तर तक पहुँच सकता है। किसी भी लापरवाही के कारण यदि संक्रमित मरीज को अगर चिकित्सा प्रदान नहीं की जाये तो वो तीन घंटे के अन्दर मर सकता है।

हैजे से तत्काल राहत के लिए हम आपको एक नुस्खा बता रहे है। जिसे आपको बना कर अपने घर में रख लेना चाहिए ताकि वक्त जरुरत पड़ने पर आपके काम आ सकें। नुस्खा इस प्रकार है -

सामग्री-

देशी कपूर - 10 ग्राम 
शुद्ध हींग- 10 ग्राम 
लहसुन छिला हुआ-10 ग्राम 
प्याज का रस -आवश्यकता अनुसार 

हैजा गोलियाँ बनाने की विधि (Method of Making Cholera Tablets)--


कपूर+शुद्ध हींग+लहसुन छिला हुआ इन सबको आप प्याज के रस में तीन घन्टे खरल (घोटे) करे। फिर आप इसके बाद इसकी आप 250 मिलीग्राम वजन की गोलियां (वटी) बना ले। इसके बाद इसे छाँव में सुखा के आप किसी कांच की शीशी में रख ले। 

उपयोग की मात्रा (Doze)-

हैजे से पीड़ित रोगी को एक-एक गोली आधा-आधा घन्टे पर प्याज के रस के साथ देते रहे। आप चाहें तो आप इसे एक ग्राम शक्कर के साथ भी निगलवा सकते है। अथवा हैजा की स्थिति में हर आधे-आधे घंटे पर एक दो गोली बर्फ जैसे ठन्डे जल से देते रहे। जब रोग का प्रकोप कम हो जाए तो गोली देने का अंतराल बढ़ा देना चाहिए। 

लाभ-

हैजा (डायरिया-विशुचिका) में ये गुटिका अच्छा लाभ करती है तथा अपचन (बदहजमी), शूल, जुकाम और दस्तों (अतिसार) को दूर कर अग्नि प्रदीप्त करती है। इस वटी के सेवन से रोग के बाद होने वाली निर्बलता भी नहीं आती है। और कमजोर ह्रदय वालो को भी इसका सेवन निर्भय होकर कराया जा सकता है।

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