Which Pranayama is for Compatibility of Planet-ग्रह की अनुकूलता के लिए कौन सा प्राणायाम करें

ग्रह की अनुकूलता के लिए कौन सा प्राणायाम (Pranayama for Compatibility of Planet)-


वैसे तो ग्रहों (Planet) की प्रतिकूलता के असर को कम करने या उन्हें नियंत्रित करने के लिए कई तरह के कर्म, मंत्र और दान का सहारा लिया जाता है। क्युकि ज्योतिष शास्त्र में सारी बातें ग्रहों की स्थिति पर ही निर्भर करती है। लेकिन शायद यह बात कम ही लोग जानते होंगे कि योग और प्राणायाम (Pranayama) के जरिए भी ग्रहों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस पोस्ट में आप जानें कि किस योग के किस आसन के जरिए किस ग्रह को नियंत्रित किया जा सकता है। 


Which Pranayama is for Compatibility of Planet-ग्रह की अनुकूलता के लिए कौन सा प्राणायाम करें

ग्रह की अनुकूलता के लिए प्राणायाम (Pranayama for Compatibility of Planet)-



1- जब किसी व्यक्ति की राशि में सूर्यग्रह (Sun Planet) अनिष्टकर हो जाता है तो उस व्यक्ति के ईर्द-गिर्द कई प्रकार की नकारात्मकता फैल जाती है और सबसे पहले उसका अंदर से आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है। निर्णय लेने की छमता नहीं रह जाती है तथा दिल सम्बंधित बीमारी हो सकती है। आँखे कमजोर हो सकती है तथा उसे तंत्रिका तंत्र की समस्या भी हो सकती है। इस प्रकार के लक्षण या सूर्यग्रह अनिष्ट होने पर सूर्य के हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए सूर्य नमस्कार के साथ अग्निसार और भस्त्रिका सबसे उत्तम प्राणायाम (Pranayama) है। 

2- यदि किसी व्यक्ति का चंद्रमा कमजोर या अनिष्टकर हो जाए तो वह व्यक्ति जरुरत से ज्यादा भावुक और तनावग्रस्त हो जाता है। ऐसे में चंद्रमा को नियंत्रित करने के लिए अनुलोम-विलोम के साथ भस्त्रिका की जा सकती है तथा इसके साथ ही अगर "ओम्" का उच्चारण भी किया जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। 

3- जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर या हानिकर हो तो वह व्यक्ति या तो जरुरत से ज्यादा आलसी हो जाता है या फिर अतिक्रियाशील और ये दोनों ही स्थितियां उचित नहीं हैं। ऐसे में पद्मासन, तितली आसन, मयूरासन के साथ ही अगर शीतलीकरण प्राणायाम (Pranayama) भी किया जाए तो उपयुक्त रहेगा। 

4- बुध ग्रह के अनिष्टकर होने का सीधा प्रभाव व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है तथा साथ ही चर्म रोग होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में बुध ग्रह के नकारात्मक असर को कम करने के लिए भस्त्रिका के साथ ओम का उच्चारण और अनुलोम-विलोम का प्रयोग हमारे प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत करता है। 

Which Pranayama is for Compatibility of Planet-ग्रह की अनुकूलता के लिए कौन सा प्राणायाम करें

5- गुरु या बृहस्पति ग्रह जब किसी व्यक्ति का अनिष्टकर हो जाता है तो व्यक्ति में पेट से जुड़ी समस्याएं, डायबीटीज़ और मोटापे की समस्या बढ़ जाती है। लिहाजा बृहस्पति को नियंत्रित करने के लिए मीठा और पीली चीजों को खाने से बचें। इसके अलावा जिस आसन और प्राणायाम (Pranayama) के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है उसमें कपालभाति, सर्वांगासन, अग्निसार और सूर्य नमस्कार शामिल है। 

6- जब शुक्र ग्रह कमजोर होता है तो यौन रोग, कामुकता में असंतुलन, महिलाओं के पीरियड साइकल में अनियमितता जैसी शिकायतें होने लगती है। शुक्र ग्रह के नकारात्मक पहलू को कम करने के लिए ठंडी चीजों जैसे- दही, चावल आदि के सेवन से बचना चाहिए तथा साथ ही धनुरासन, हलासन, मूलबंधासन और जानुशिरासन जैसे आसन लाभदायक हो सकते हैं। 

7- जब शनि ग्रह कमजोर हो जाए तो व्यक्ति ऐसिडिटी, आर्थ्राइटिस और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का शिकार हो सकता है तथा साथ ही नींद की कमी भी एक मुख्य समस्या है। इन सब चीजों से बचने के लिए बहुत ज्यादा ऑइली और हेवी खाने से बचें और ज्यादा पानी पीएं तथा इसके अलावा भ्रामरी, शीतलीकरण, अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Pranayamaभी लाभदायक साबित हो सकते हैं।

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