Benefits of Soyabean-सोयाबीन के फायदे

सोयाबीन क्या है (What is Soyabean)-


सोयाबीन (Soyabean) दलहन की फसल है शाकाहारी मनुष्यों के लिए इसको मांस भी कहा जाता है क्योंकि इसमें बहुत अधिक प्रोटीन होता है। स्वास्थ्य के लिए एक बहुउपयोगी खाद्य पदार्थ है। सोयाबीन एक महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत है। इसके मुख्य घटक प्रोटीन, कार्बोहाइडेंट और वसा होते है।

Soyabean Benefits
Soyabean Nutrients
Soya Milk and Cholesterol
Soyabean Milk Benefits
Soyabean Dahi Vada

Benefits of Soyabean-सोयाबीन के फायदे

सोयाप्रोटीन के एमीगेमिनो अम्ल की संरचना पशु प्रोटीन के समकक्ष होती हैं। मनुष्य के पोषण के लिए सोयाबीन (Soyabean) उच्च गुणवत्ता युक्त प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं। कार्बोहाइडेंट के रूप में आहार रेशा, शर्करा, रैफीनोस एवं स्टाकियोज होता है जो कि पेट में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों के लिए लाभप्रद होता हैं।

सोयाबीन के फायदे (Soyabean Benefits)-


सोयाबीन (Soyabean) में कुछ ऐसे तत्त्व पायें जाते है जो कैंसर से बचाव का कार्य करते है। क्योकि इसमें कायटो-केमिकल्स पायें जाते है। खासकर फायटो एस्ट्रोजन और 950 प्रकार के हार्मोन्स होते हैं यह सब बहुत लाभदायक है। इन तत्त्वों के कारण स्तन कैंसर एवं एंडोमिट्रियोसिस जैसी बीमारियों से बचाव होता है। यह देखा गया है कि इन तत्त्वों के कारण कैंसर के टयूमर बढ़ते नही है और उनका आकार भी घट जाता है। सोयाबीन के उपयोग से कैंसर में 30 से 45 प्रतिशत की कमी देखी गई है। 

ओमेगा-3 अखरोट, सोयाबीन व मछलियों में पाया जाता है। इससे दिल के रोग होने की आंशका में काफी कमी आती है। इसलिये महिलाओं को गर्भावस्था व स्तनपान कराते समय अखरोट और सोयाबीन (Soyabean) का सेवन करते रहना चाहियें। 

सोयाबीन पोषक तत्व (Soyabean Nutrients)-


प्रोटीन 40 %
कार्बोहाइड्रेट 24.6 %
नमक 48 %
तेल 20 %
कैल्शियम लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग
फॉस्फोरस लगभग आधा ग्राम
लौह तत्त्व लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग
विटामिन ए 710 अ.ई
विटामिन बी-1 730 माइक्रोग्राम
विटामिन बी-2 760 माइक्रोग्राम
नायसिन लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग
कैलोरी 432 

सोया दूध और कोलेस्ट्रॉल (Soya Milk and Cholesterol)-


सोयाबीन का दूध (Soyamilkकोलेस्ट्राल पर काबू पाने के लिए बेहतर है। बस आप अपना खान-पान थोडा बदलें। सोया प्रोटीन एलडीएल की मात्रा 14 फीसदी तक घटा सकते हैं। हर दिन 2 गिलास सोया का दूध पीना ही इसके लियें काफी है। इसके अलावा जौ के साबुत दानों में मौजूद रेशे जो कि दालों में भी मिलते हैं वो भी  एलडीएल की समस्या से निजात दिलाने में सहायक है। 

सोयाबीन (Soyabean) रक्तवसा को घटाता है और सीएचडी के वृद्धि के खतरे को बढ़ने नही देता है। जो लोग रोजाना औसतन 47 ग्राम सोया प्रोटीन खाते हैं उनकी पूर्ण रक्तवसा में 9 प्रतिशत कमी होती है। एलडीएल खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर प्राय: 13 प्रतिशत कम हुआ है। एचडीएल अच्छा कोलेस्ट्रॉल मगर बढ़ा और ट्राइग्लीसेराइड्स घट कर 10 से 11 प्रतिशत कम हुआ जिनके रक्तवसा के माप शुरू में ही अपेक्षाकृत अधिक थे उनको आश्चर्यजनक रूप से लाभ हुआ है। 

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सोयाबीन मिल्क कैसे बनायें (How to Make Soyabean Milk)-


आवश्यक सामग्री-

सोयाबीन (Soyabean) - 125 ग्राम (आधा कप से अधिक)
पानी 

सोयाबीन मिल्क बनाने की विधि (Method of Making Soybean Milk)-

सोयाबीन मिल्क बनाने की विधि-Method of Making Soybean Milk


सबसे पहले आप सोयाबीन को साफ कीजिये धोइये और रात भर या 8 से 12 घंटे के लिये भीगने दीजिये। अब आप सोयाबीन से पानी निकाल दीजिये तथा सोयाबीन को प्याले में डालिये और इसे ढककर 2 मिनिट के लिये माइक्रोवेव में रख दीजिये। 

दूसरा तरीका ये है कि आप इसे उबलते पानी में डालिये और ढककर 5 मिनिट के लिये रख दीजिये। इस तरह से सोयाबीन्स की महक कम हो जायेगी और सोयाबीन के छिलके उतारने में आसानी रहेगी। सोयाबीन के गरम किये गये दानों को अब आप हाथ से मलिये और छिलके अलग कर दीजिये। अब सोयाबीन को पानी में डालिये और छिलके तैरा कर हाथ से निकाल दीजिये। आप चाहे तो सोयाबीन के छिलके सहित ही दूध बना सकते हैं। लेकिन बिना छिलके के सोयाबीन का दूध अधिक स्वादिष्ट होता है और इसका पल्प (Pulp) भी अधिक अच्छा निकलता है। 

छिलके रहित सोयाबीन को मिक्सर में डालिये पानी डाल कर एकदम बारीक पीस लीजिये। अब आप पिसे मिश्रण में एक लीटर पानी डालिये और मिक्सर चला कर अच्छी तरह मिक्स कर दीजिये।

अब इस सोयाबीन दूध को गरम करने के लिये आग पर रख दीजिये। दूध के ऊपर जो झाग दिखाई दे रहे हैं उनको चमचे से निकाल कर हटा दीजिये। दूध उबालते समय थोड़ी थोड़ी देर में चमचे से चलाते रहिये। दूध में उबाल आने के बाद 5-10 मिनिट तक सोयाबीन दूध को उबलने दीजिये। अब आग बन्द कर दीजिये अब इस उबले हुये दूध को को साफ कपड़े में डालकर अच्छी तरह छान लीजिये और छानने के बाद जो ठोस पदार्थ सोयाबीन पल्प (Pulp) कपड़े में रह गया है उसे किसी अलग प्याले में रख लीजिये। सोयाबीन का दूध तैयार है। दूध को ठंडा होने दीजिये। सोयाबीन के दूध को आप अब पीने के काम में ला सकते हैं। सोयाबीन का दूध फ्रिज में रखकर 3 दिन तक काम में लाया जा सकता है। 

सोयाबीन दूध के फायदे (Soyabean Milk Benefits)-


1- आप सोया मिल्क को सामान्य मिल्क की तरह से पी सकते हैं या फलों के साथ इसका शेक या स्मूदी भी बना सकते हैं। सोयाबीन के दूध को फाड़ कर बने सोया पनीर (Soya cheese) से बनी सब्जी भी बना सकते हैं। 

2- सोया दूध बनाने से निकली हुई सोयाबीन पल्प (Pulp) को आटे में मिलाकर बनी मिस्सी रोटी अथवा सोयाबीन पल्प  में आलू और ब्रेड के टुकड़े मिलाकर सोयाबीन कटलेट बनाकर भी खाये जा सकते हैं। 

3- दूध पिलाने वाली महिला यदि सोयाबीन का दूध पीये तो बच्चे को पिलाने के लिये उसके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती है।

नोट- 

ध्यान रहे कि गर्भधारण करने वाली स्त्रियों को सोयाबीन का प्रयोग बिलकुल नही करना चाहियें। इससे होने वाली सन्तान पर बुरा असर पड़ता है।

सोयाबीन का दही बड़ा-Soyabean Dahi Vada

सोयाबीन का दही बड़ा (Soyabean Dahi Vada)-


सोयाबीन- 100 ग्राम
उड़द की धुली दाल- 50 ग्राम 
घी-तेल तलने के लियें
सोंठ पिसी-चौथाई छोटी चम्मच,
दही- 500 ग्राम 
भुना जीरा
लाल मिर्च
काला नमक
सफेद नमक -स्वादानुसार

सोयाबीन दही वड़ा बनाने की विधि (Method of Making Soybean Dahi Vada)-

सोयाबीन व उड़द की दाल को अलग-अलग रातभर भिगोयें। सोयाबीन के छिलके अलग कर दोनों को मिलाकर पेस्ट बना लें। इसमें सोंठ भी मिलायें इसे खूब अच्छी तरह मिलाकर फेट लें और बड़े बना कर तल लें। थोड़े गुनगुने पानी में नमक मिलाकर तले हुए बड़ों को 2 मिनट पानी में रखकर, निकालकर, दबाकर पानी अलग कर बड़ों को दही में डाल दें। ऊपर से मसाला डालकर परोसें। 

स्वाद के लियें-

इस बने हुए पेस्ट में आप सभी मसालें, हरी मिर्च, हरा धनिया आदि डालकर बड़े बनाकर चटनी या सॉस के साथ ले। 

सोयाबीन की छाछ (Soyabean Buttermilk)-

सोयाबीन को दही में उचित मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह मिलाने से छाछ बन जाती है और मक्खन भी निकलता है। 

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