What is Health Benefits of Sahjan-सहजन के स्वास्थ्य लाभ क्या है

सहजन से पोषण होता है (Sahjan Leaves Nutrition)-


सहजन (Sahjan) से तो आप सभी लोग भलि-भाति परिचित होगें। यह एक ऐसी हरी सब्‍जी है जो बाजार में चारों ओर बिकती है। हम में ऐसे बहुत से लोग हैं जो इस सब्‍जी को देख कर भी अनदेखा कर देते हैं। सहजन की सब्‍जी ही नहीं बल्‍कि इसके पेड़ के विभिन्‍न भाग के अनेको प्रयोग पुराने जमाने से ही किये जा रहे हैं।


What is Health Benefits of Sahjan-सहजन के स्वास्थ्य लाभ क्या है

सहजन (Drumstick) या मुनगा जड़ से लेकर फूल और पत्तियों तक सेहत का भरपूर एक खजाना है।सहजन (Sahjan) के ताजे फूल और गाय का दूध ऐसा हर्बल टॉनिक है जिससे पुरुषों की मर्दाना कमजोरी और महिलाओं में सेक्स की कमजोरी दूर होती है। 

सहजन की छाल (Bark of Sahjan) का पावडर रोज लेने से वीर्य की गुणवत्ता में भी सुधार होता है तथा पुरुषों में शीघ्रपतन की समस्या भी दूर होती  है। छाल का पावडर, शहद और पानी से ऐसा मिश्रण तैयार होता है जो शीघ्रपतन की समस्या का अचूक इलाज है

What is Health Benefits of Sahjan

सहजन के बीज (Seeds of Sahjan) से तेल भी निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। सहजन कई बीमारियों को दूर करती है और शरीर के हर अंग को मजबूती भी देती है। क्‍योंकि इसमें बहुत सारे पोषक तत्‍व भरे हुए हैं। आज हम सहजन के बारे में आपसे विस्तार में चर्चा करते है कि सहजन का पूरा वृक्ष ही आपके लिए कितना लाभदायक है। 

सहजन के फायदे (Benefits of Sahjan)-

सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है। जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्‍युरेटेड फैट है। यह शरीर के लिये अति आवश्‍यक है।

पेट के कृमियों के लिए सहजन का उपयोग (Use of Sahjan for Stomach Worms)-


इसे मुनगा (Moringa), सहजन (Sahjan), ड्रमस्टिक्स (Drumstick) आदि नाम से पुकारा जाता है। सहजन की करीब 50 ग्राम पत्तियों को लेकर चटनी बना कर सेवन करें। तो यह पेट के कृमियों को बाहर निकाल फेंकने में काफी कारगर होती है। चटनी बनाने के लिए पत्तियों को बारीक कुचल लिया जाए। इसमें स्वादानुसार नमक और मिर्च पाउडर भी मिला लिया जाए और इस पूरे मिश्रण को तवे या कढाही पर आधा चम्मच तेल डालकर कुछ देर भून लिया जाए। सप्ताह में एक या दो बार इस चटनी का सेवन बेहद गुणकारी होता है।

टीबी-ब्रोंकाइटिस-अस्थमा के लिए सहजन (Sahjan for TB-Bronchitis-Asthma)-


सहजन की पत्तियों (Drumstick leaves) का सूप टीबी, ब्रोंकाइटिस तथा अस्थमा पर नियंत्रण के लिए कारगर समझा जाता है। इसका स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू का रस, कालीमिर्च और सेंधा नमक मिलाया जा सकता है। 

सर्दी जुखाम के लिए सहजन (Sahjan for Cold Winter)-


सहजन में विटामिन C की मात्रा बहुत होती है। विटामिन C शरीर के कई रोगों से लड़ता है। खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तो आप सहजन (Sahjan) को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।

कॉलरा-डायरिया-पीलिया-कोलाइटिस के लिए सहजन (Sahjan for Cholera-Diarrhea-Jaundice-Colitis)-


सहजन (Sahjan) की ताजी पत्तियों को निचो़ड़कर रस निकाले। निकाले गए रस को एक चम्मच शहद तथा एक गिलास नारियल के पानी के साथ लेना चाहिए। इससे कॉलरा, डायरिया, डीसेंट्री, पीलिया तथा कोलाइटिस की समस्या में आराम मिलता है

मुंहासों के लिए सहजन (Sahjan for Acne)-


सहजन (Sahjan) की ताजा पत्तियों के निचोड़े हुए रस के साथ नींबू के रस से मुंहासों का कारगर इलाज किया जाता है। इससे ब्लेक स्पॉट्स भी हटते हैं। उम्र के कारण थकी और कांति हीन त्वचा में नई जान भी फूंकी जा सकती है। इसी के साथ ही सहजन के फूलों के साथ पत्तियां, सहजन के बीज और जड़ से शरीर में हुई गठानों का इलाज किया जा सकता है।

सौंदर्य के लिये सहजन (Sahjan for Beauty)-


सहजन में विटामिन ए होता है। पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये इसका प्रयोग किया आता जा रहा है। अगर आप इस हरी सहजन की सब्‍जी को अक्‍सर अपने खाने में शामिल करेंगी तो आप कभी बूढी नहीं होंगी। इससे आंखों की रौशनी भी अच्‍छी होती है

शिशुओं की मालिश के लिए सहजन (Sahjan for Babies Massage)-


सहजन के बीजों का तेल (Oil of Sahajan Seeds) शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है। सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं

त्वचा के रंग-टोन के लिए सहजन (Sahjan for Skin Color-Tone)-


सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है। मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है। धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग सफल साबित हुआ है।

सायाटिका-गठिया के लिए सहजन (Sahajan for Sciatica-Arthritis)-


सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात एव कफ रोग शांत हो जाते है। इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, सायाटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। सायाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है।

सहजन के अन्य उपयोग (Other Uses of Sahjan)-


1- सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है। सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।

2- सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है। सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।

3- सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है। सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है।

4- सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है। सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है। सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है। सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है। सहजन की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हींग  के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है

5- पेशाब में अधिक मात्रा में यूरिया जा रहा हो तो मरीज को सहजन की ताजी पत्तियों के निचोड़े हुए रस के साथ खीरा या गाजर के रस के मिलाकर पिला दें। इससे तत्काल आराम मिलता है। मूत्रवर्धक होने से मूत्र संबंधी विकारों का निवारण भी करती है।

6- सहजन की पत्‍तियों के साथ ही सजहन का फल भी बी कामप्‍लेक्‍स से भरा होता है। इसमें बहुत सारा विटामिन जैसे, विटामिन बी6, नियासिन, राइबोफ्लेविन और फॉलिक एसिड होता है। जड़ रूखी और स्वाद में कड़वी होती है लेकिन फेफड़ों के लिए बढ़िया टॉनिक के रूप में काम करती है। यह कफ को बाहर निकालती है।

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