Teenage Attitude and Behavior-किशोर मनोवृत्ति और व्यवहार

किशोर बच्चों के प्रति आपका रवैया (Your Attitude Towards Teenage Children)-


माता-पिता के लिए किशोर बच्चों (Teenage Children) को संभालना भी एक चुनौती भरा काम है। माता-पिता के सामने किशोर होते हुए बच्चे नयी-नयी चुनौतियाँ खड़ी करते रहते हैं। सच कहा जाए तो माता-पिता ही उनके सच्चे शिक्षक हैं और माता पिता ही अपने बच्चों को सही दिशा निर्देश (Guidance) देने के साथ साथ उनका हौसला बढ़ाने वाले हैं


Teenage Attitude and Behavior-किशोर मनोवृत्ति और व्यवहार

मगर आजकल के बदलते परिवेश (Changing environment) में सब कुछ तेजी से बदलता जा रहा है। हलांकि सारा दोष आप अपने किशोर बच्चों (Teenage Children) पर भी नहीं डाल सकते है। इसमें कहीं न कहीं आपका भी थोडा बहुत दोष है। घर की आवश्यकताओं और जिम्मेदारी को पूर्ण करते-करते आप ये भूल जाते है कि बच्चों की सही परवरिश हो ये जिम्मेदारी भी आपकी ही है। अधिक धन कमाने की लालसा भी इसका मुख्य कारण है। देर रात तक काम या व्यापार में लिप्त रहने के बाद आपका शरीर थक जाता है और इसके बाद आपको मानसिक और शरीरिक आराम की आवश्यकता होती है। इन कारणों से भी आप अपने किशोर बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते है।

आजकल घर में माँ की बात बच्चे सुनते नहीं है और आजकल की माताओं को भी अपनी सोसायटी और पार्टी से भी फुर्सत नहीं है। थोडा समय मिला भी तो खाली वक्त में टी वी का रिमोट और सीरियल देखने में निकल जाता है। बच्चे ने जो समझा दिया आप मानने को विवश हैं।

किशोर का रवैया और व्यवहार (Teenage Attitude and Behavior)-


किशोर बच्चों (Teenage Children) के साथ व्यवहार करने की बात आती है तब इस सलाह को मानना और भी ज़रूरी हो जाता है। इसमें माता-पिताओं को शायद खूब मेहनत करनी पड़ेगी। जैसे जैसे आपका बच्चा किशोरावस्था में प्रवेश करता है आपको भी बातचीत करने की अपनी काबिलीयत बढ़ानी पड़ेगी। बच्चे जब छोटे होते हैं आप और आपकी पत्नी अपने बच्चों को बताते रहते है कि उसे क्या करना चाहिए और बच्चे चुपचाप आपकी बात मान लेते थे। मगर किशोरावस्था आने पर हालात तेजी से बदलने लगते है।

Teenage Attitude and Behavior

किशोर बच्चों में तर्क करने की छमता का विकास हो जाता है आपको भी उनके साथ तर्क करना पड़ता है। उन्हें काफी समझाना पड़ता है। क्या गलत है क्या सही है। लेकिन कुछ माँ-बाप इससे बचने के लिए हर मामले को उनके हाथ में छोड़ देते हैं। आपकी यही भूल कभी कभी आपके लिए नुकसान दायक होती है तभी आपका किशोर बच्चा (Teenage Children)  अपनी मनमानी करने लगता है। सच बात ये है कि आप खुद ही अपने बच्चों के दिल तक नहीं पंहुच पाते है।

माता-पिता के साथ किशोर समस्याएं (Teenage Problems with Parents)-


आपने देखा ही होगा कि बहुत से माँता-पिता कहते है कि मेरा बेटा/बेटी मुझे बहुत जबान लड़ाता है वह मुझे पलटकर जवाब देता है। यदि आप समझदार हैं तो इस मतभेद को सुलझाने के लिए बैठकर बात करें और ध्यान से एक-दूसरे की बात को सुनें। किशोर बच्चे की मन की भावना को समझे यदि आपका बेटा/बेटी किसी गलत बात पर भी आपसे तर्क कर रहा है तो पहले उसकी बात को ध्यान से सुने और उसे ये निर्देश अवश्य दें कि हमने आपकी बात ध्यान से सुनी है लेकिन आप ने जो बात बोली है दुबारा गम्भीरता से आप इसे सोचो हम आपसे दुबारा बात करेगें। तुरंत आप अपने बच्चे की बात पर प्रतिक्रिया न दें। हो सकता है बाद में उसे अपने दिए तर्क का पछतावा हो और आपकी बात उसे आसानी से समझ आ जाए। 

आपको अपने किशोर बच्चे (Teenage Children)  पर बार-बार हुक्म चलाना भी ठीक नहीं है। आप चिल्ला कर भी बात न करें। आपको अपने व्यवहार में नम्रता लाकर ही उससे बात करनी चाहिए। इससे उसे आपकी बात आसानी से समझ आएगी। यदि बात-चीत करते हुए तकरार होती है तो अपने किशोर बच्चे के गुस्से का ठंडा होने का इंतज़ार करें और फिर उसे समझाएं। इससे उसके रवैये में काफी सुधार आएगा। 

किशोर बच्चों को अपने दिल की बात कहने का मौका देना बेहद ज़रूरी है। हम उनकी बात सुने बगैर तथा बच्चों की भावनाओं को समझे बगैर उन्हें झिडक देते हैं। जो सरासर ही गलत है। बच्चों को कभी भी ये फीलिंग न आने दें कि घर में उनकी अहमियत कुछ भी नहीं है। लेकिन उनकी बात मानने का मतलब ये भी नहीं है कि आप उनको पूरी आजादी दें दें। आपको जहाँ तक हो सके तो किशोरावस्था के समय उनकी पूरी एक्टिविटी पर पूरी निगरानी रखनी चाहिए। ये काम आप अपने किशोर बच्चों (Teenage Children) के साथ दोस्ताना व्यवहार बना कर भी कर सकते हैं

किशोर बच्चों पर ध्यान दें (Focus on Teenage Children)-


जब आपका यही बच्चा छोटा था आपने अपनी गोद का सहारा दिया था और जब थोडा बड़ा होकर अपने पैरों पर चलने लगा तब आप अपने बच्चे (Children) को अकेला नहीं छोड़ते थे। क्यूंकि आपको डर था कि अकेला छोड़ देना बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए आप उस पर कड़ी नजर रखते थे फिर आज ये सोच कर आप अपना पल्ला कैसे झाड सकते है कि वह बड़ा हो गया है। जबकि इस समय तो उसकी देख-रेख की जादा आवश्यकता है। इस समय की जाने वाली देखभाल ही आपके बच्चे का कैरियर बना सकती है और जरा सी की गई लापरवाही बच्चे के जीवन को निम्न स्तर पर ले जा सकती है।

माँ-बाप को चाहिए कि वे प्यार और दृढ़ता से घर के नियम लागू करवाएँ। यदि आप घर के किसी काम की जिम्मेदारी देते है तो बच्चे (Children) से उसकी जवाबदेही अवश्य ही ले। कहीं आपका बच्चा झूठ बोलकर आपको बहका तो नहीं रहा है आप इस पर भी ध्यान दें। चूँकि झूठ बोलने की आदत क्रमश: बढती जाती है इसलिए समय रहते ही इस पर अंकुश लगाने का प्रयत्न करें। 

आप शुरू में अपने बच्चों पर विश्वास करके थोड़ी आजादी अवश्य दें लेकिन उनकी हर हरकत पर निगाह भी अवश्य रक्खें। यदि आपके बच्चे आपकी दी हुई आज़ादी का ज़िम्मेदाराना तरीके से इस्तेमाल करते हैं तो आप धीरे-धीरे उन्हें और भी आज़ादी दे सकते हैं।

आपको अपने घर के संस्कार और कर्तव्यनिष्ठ बनने के बारे में बीच-बीच में सलाह अवश्य दें। यदि आपका बच्चा पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्य को निभा रहा है तो जादा दखलंदाजी न करें। उसमे जिम्मेदारी का एहसास होने दें। इससे आपके बच्चों में निर्णय लेने की छमता का विकास होगा।

अपने किशोर बच्चे के द्वारा किये गए अच्छे काम पर उसे  प्रोत्साहित अवश्य करें। यदि आपके बच्चे को किसी काम को करने में कुछ हिचकिचाहट महसूस होती है। तो आप उसके साथ सहभागी बने। इससे उसका मनोबल बढ़ेगा। आगे चल कर उसके अंदर की सारी हिचक गायब हो जायेगी। 

माता-पिता अपने किशोर बच्चों को उनकी नादानी में किये गलत काम के प्रति सचेत करते रहे जिससे उनका बच्चा दुबारा उन गलत काम को करने की गलती न करें। हर माता-पिता अपने बच्चों पर थोड़ी सख्ती अवश्य करते हैं लेकिन उनका इरादा हमेशा नेक होता है। माता-पिता की बात को मानकर चलने वाले बच्चे हमेशा उन्नति करते देखे जा सकते है।

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