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23 फ़रवरी 2017

कैसे आप तनाव से मुक्त हो सकते है

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आज लोगों की तनाव(Stress)भरी जिन्दगी है जिन्दगी में काम की भागदौड है या फिर पारिवारिक क्लेश है या मानसिक चिंता से पीड़ित है तो इसका आपके मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है जिससे कारण स्मरण शक्ति(Memory)का हास होना स्वाभाविक है और धीरे-धीरे समयानुसार आपके आत्म-विश्वास में कमी होने लगती है-

कैसे आप तनाव से मुक्त हो सकते है

तो आपको भागमभाग जिन्दगी में इन सभी कमियों को दूर करना भी आवश्यक है वर्ना कुछ समय बाद आपको भूलने जैसी बीमारी से दो-चार होना पड़ता है इस प्रकार का व्यक्ति क्रोध,बैचेनी,सिरदर्द ,आत्म-ग्लानी आदि का भी शिकार हो जाता है तो आप सभी के लिए एक नुस्खा है जिसे प्रयोग करके आप अपने मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाए-

आवश्यक सामग्री-


शंखपुष्पी - 100 ग्राम
ब्राह्मी     - 100 ग्राम
गिलोय    - 100 ग्राम
आंवला    - 100 ग्राम (सूखा हुआ )
जटामासी - 100 ग्राम (सभी सामग्री आयुर्वेद जड़ी-बूटी विक्रेता से आसानी से प्राप्त )

प्रयोग विधि-


उपरोक्त सभी सामग्री को महीन कूट-पीस करछान कर एक एयर टाईट कांच के बर्तन में रख ले और प्रतिदिन इसकी एक-एक चम्मच मात्रा शहद या जल या आंवले के शरबत के साथ दिन में तीन बार ले तथा बच्चो को इसकी मात्रा आधा चम्मच दे - गर्भवती महिला यदि गर्भ-काल में नियमित सेवन करती है तो होने वाला बच्चा हर प्रकार से स्वस्थ और मानसिक रोगों मुक्त रहता है-वृद्ध भी इसका सेवन कर सकते है  और ये पूर्ण रूप से सुरक्षित प्रयोग है -

Upcharऔर प्रयोग-

22 फ़रवरी 2017

दांतों के मवाद का घरेलू उपचार क्या है

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दांतों में पस(Teeth Pus)पड़ने का मुख्य कारण मसूड़ों में लन और टूटे हुए दांत के कारण होता है दांतों में पस(Teeth Pus)मुख्य रूप से एक प्रकार का संक्रमण होता है जो मसूड़ों और दांतों की जड़ों के बीच होता है इसके कारण दांत के अंदर पस बन जाता है जिसके कारण दांत में दर्द होता है- 

दांतों के मवाद का घरेलू उपचार क्या है

जिस दांत में पस(Teeth Pus)हो जाता है उसमें बैक्टीरिया प्रवेश कर जाता है और वही बढ़ता रहता है जिससे उन हड्डियों में संक्रमण हो जाता है जो दांतों को सहारा देती हैं यदि समय पर इसका उपचार नहीं किया गया तो इसके कारण जीवन को खतरा हो सकता है

दांतों में पस(Teeth Pus)होने के कारण जो दर्द होता है वह असहनीय होता है तथा इस दर्द को रोकने के लिए लोग कई तरह के उपचार करते हैं परंतु अंत में दर्द बढ़ जाता है और यदि आप भी मसूड़ों की इस बीमारी से ग्रसित हैं तो आपको क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं इस पर थोडा प्रकाश डालने से पहले आपको इस बीमारी के लक्षण तथा कारण पहचानने होंगे-

दांतों में पस के कारण-


दांतों में पस होने का मुख्य कारण है मसूड़ों की बीमारी तथा मुंह की सफाई ठीक से न करना- आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होना भी दांतों में पस होने का एक कारण है तथा टूटा हुआ दांत मसूड़ों में सूजन और जलन दांतों में संक्रमण बैक्टीरिया कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा चिपचिपे पदार्थ अधिक मात्रा में खाने से भी होता है-

आप जब भी कुछ खाएं तो संक्रमित जगह पर दर्द होना तथा सुजन होकर मवाद पड़ जाना भी इसका कारण है संवेदनशील दांत मुंह में गंदे स्वाद वाले तरल पदार्थ का स्त्राव साँसों में बदबू मसूड़ों में लालिमा और दर्द होना तथा अस्वस्थ महसूस करना मुंह खोलने में तकलीफ होना प्रभावित क्षेत्र में सूजन का होना-

दांतों में पस(Teeth Pus)होने पर उपचार-


1- लहसुन बैक्टीरिया को मारने के लिए एक प्राकृतिक हथियार है कच्चे लहसुन का रस संक्रमण को मारने में मदद करता है यदि वास्तव में यदि आपके दांत में बहुत अधिक दर्द हो रहा हो तो फिर आप ऐसा कर सकते हैं कि कच्चे लहसुन की एक कली लें और इसे पीसें और निचोड़कर इसका रस निकालें तथा इस रस को मसूड़े के उस प्रभावित क्षेत्र पर लगायें-यह घरेलू उपचार दांत के दर्द में जादू की तरह काम करता है-

2- लौंग का तेल भी संक्रमण रोकने में सहायक होता है तथा दांतों के दर्द में तथा मसूड़ों की बीमारी में अच्छा उपचार है आप थोड़ा सा लौंग का तेल लें तथा तथा इस तेल से धीरे-धीरे ब्रश करें-जब आप प्रभावित क्षेत्र में इसे लगायें तो अतिरिक्त सावधानी रखें इस पर बहुत अधिक दबाव न डालें तथा अपने मसूड़ों पर धीरे धीरे मालिश करें अन्यथा अधिक दर्द होगा या फिर आप अपनी ऊँगली से मसूड़ों पर लौंग के तेल की कुछ मात्रा लगायें तथा धीरे धीरे मालिश करें-

3- आईल पुलिंग यह एक घरेलू उपचार बहुत ही सहायक है इसमें आपको सिर्फ नारियल के तेल की आवश्यकता होती है आप एक टेबलस्पून(चम्मच)नारियल का तेल लें और इसे अपने मुंह में चलायें बस इसे निगले नहीं तथा इसे लगभग 30 मिनिट तक अपने मुंह में रखें रहें फिर आप इसे थूक दें और मुंह धो लें-आपको निश्चित रूप से आराम मिलेगा-

4- दांत के दर्द में पेपरमिंट आईल जादू की तरह काम करता है आप अपनी उँगलियों के पोरों पर कुछ तेल लें तथा इसे धीरे धीरे प्रभावित क्षेत्र पर मलें इससे आपको दांत के दर्द से तुरंत आराम मिलेगा-

5- दांतों में पस होने पर ऐप्पल सीडर विनेगर(सेब का सिरका)एक अन्य प्रभावशाली उपचार है चाहे वह प्राकृतिक हो या ऑर्गेनिक, यह बहुत अधिक प्रभावशाली है-एक टेबलस्पून ऐप्पल सीडर विनेगर लें-इसे कुछ समय के लिए अपने मुंह में रखें और फिर इसे थूक दें-इसे निगलें नहीं- इससे प्रभावित क्षेत्र रोगाणुओं से मुक्त हो जाएगा-इससे सूजन भी कम होती है-

चमकते सफेद दांतों के लिए क्‍या करें और क्‍या न करें-


आप जितना मुश्किल समझते है उससे कहीं ज्‍यादा आसान होता है दांतों की सफेदी और चमक को बरकरार रखना जानिए कैसे-दांतों की सही तरीके से देखभाल करने से न सिर्फ दांत का स्‍वस्‍थ रहना आवश्यक है बल्कि उनकी चमक को भी बरकरार रखना जरुरी है आइये इस बारे में आपको कुछ टिप्‍स बताते है-

आप क्‍या न करें-


1- बेकिंग सोडा के ज्‍यादा सेवन या इस्‍तेमाल से बचाव करें-पहले तो आपको इसके इस्‍तेमाल से दांत सफेद और चमकदार लग सकते है लेकिन बाद में दांतों में पीलापन आ जाता है-

2- आप ज्‍यादा गाढ़े रंग वाले फलों या खाद्य सामग्रियों के सेवन से बचें जैसे-सोया सॉस, मरिनारा सॉस आदि दांतों पर दाग छोड़ देते है-नूडल आदि खाने से परहेज करें-

3- आप बहुत ज्‍यादा मात्रा में एनर्जी ड्रिंक न पिएं-इसमें मिला हुआ एसिड दांतों को नुकसान पहुंचाता है और दातों की सफेदी चली जाती है-

आप क्‍या करें-


1- आप समय-समय पर अपने ब्रश को बदलते रहें-हर तीन महीने में ब्रश को बदलना सही रहता है-ब्रश अच्‍छी क्‍वालिटी का होना चाहिये ताकि दातों और मसूडों को नुकसान न पहुंचे-

2- आप अपनी जीभ को भी साफ रखें तथा जब भी ब्रश करें आप अपनी जीभ को साफ करना कतई न भूलें-इससे सांसों में बदबू नहीं आएगी और आपका मुंह फ्रेश रहेगा-

3- फल को काटकर खाने से बेहतर है कि आप उसे यूं ही खाएं-इससे दांतों में मजबूती आएगी और आपके दांत भी साफ रहेगें तथा स्‍ट्रांग बनेगें-

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Upcharऔर प्रयोग-

हर्निया है तो आप करे ये उपाय

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मनुष्य के शरीर के कुछ अंग शरीर के अंदर खोखले स्थानों में स्थित है जिसे देहगुहा(body cavity)कहते हैं देहगुहा चमड़े की झिल्ली से ढकी रहती है इन गुहाओं की झिल्लियाँ कभी-कभी फट जाती हैं और अंग का कुछ भाग बाहर निकल आता है इस प्रकार की विकृति को हर्निया(Hernia)कहते हैं झिल्ली के फटने से जब कोई अंग या आंत बाहर की तरफ आने से वहां एक उभार हो जाता है जिसे आसानी से देखा जा सकता है-

हर्निया है तो आप करे ये उपाय

लंबे समय से खांसते रहने या लगातार भारी सामान उठाने से भी पेट की मांसपेशियां(Muscles)कमजोर हो जाती है ऐसी स्थिति में हर्निया(Harniya)की संभावना बढ़ जाती है इसके कोई खास लक्षण नहीं होते हैं लेकिन कुछ लोग सूजन और दर्द का अनुभव करते हैं जो खड़े होने पर और मांसपेशियों में खिंचाव होने या कुछ भारी सामान उठाने पर बढ़ सकता है-

ये समस्या जन्मजात भी हो सकती है इसे कॉनजेनाइटल हर्निया कहते हैं हर्निया एक वक्त के बाद किसी को भी हो सकता है और बिना सर्जरी के ठीक भी नहीं हो सकता इसमें पेट की त्वचा के नीचे एक असामान्य उभार आ जाता है जो नाभि के नीचे होता है आंत का एक हिस्सा पेट की मांसपेशियों के एक कमजोर हिस्से से बाहर आ जाता है इसके अलावा इंगुइंल हर्निया, फेमोरल हर्निया, एपिगास्त्रिक हर्निया, एम्ब्लाइकल हर्निया भी होता है जो बहुत कम दिखता है-

प्रारम्भिक अवस्था की हर्निया की बीमारी में कपड़ा या बेल्ट बांधकर धीरे धीरे प्राणायाम करें धीरे धीरे प्राणायाम करने से हर्निया में लाभ होता है बाह्य प्राणायाम  सबसे अधिक लाभदायक होता है- पूरा श्वास बाहर निकालकर कुछ क्षण  पेट को ऐसे ही रखें  फिर धीरे धीरे श्वास अन्दर लें तथा पीछे झुकने वाले आसन न करें--

एक योग बनाएं-

अमरुद के पत्ते- चार-पांच 
युक्लिप्ट्स के  पत्ते- चार या पांच 
आम के  पत्ते- चार या पांच 

इन सभी को मिलाकर कूटकर इनका काढ़ा पीयें  इससे आँतों की झिल्ली मजबूत हो जाती है-

उपचार-

1- कांचनार गुग्ग्लु या वृद्धि बाधिका वटी और सर्वक्ल्प क्वाथ आदि का प्रयोग किया जा सकता है लेकिन ज्यादा हर्निया बढने पर आपरेशन ही करना पड़ता है-

2- यदि हर्निया के लक्षण पता लगे तो आप उसे घरेलू इलाज से कम कर सकते हैं हालांकि इन घरेलू उपायों से सिर्फ प्राथमिक इलाज ही संभव है और इसे आजमाने पर कभी उल्टे परिणाम भी हो सकते हैं इसलिए घरेलू इलाज आजमाने से पहले डॉक्टर से जरुर संपर्क कर लें-

Marshmallow

3- मार्श मैलो(Marshmallow)एक जंगली औषधि है जो काफी मीठी होती है इसके जड़ के काफी औषधीय गुण हैं यह पाचन को ठीक करता है और पेट-आंत में एसिड बनने की प्रक्रिया को कम करता है हर्निया में भी यह काफी आराम पहुंचाता है-

4- बबूने का फूल(Chamomile)पेट में हर्निया आने से एसिडिटी और गैस काफी बनने लगती है इस स्थिति मेंम बबूने के फूल के सेवन से काफी आराम मिलता है यह पाचन तंत्र को ठीक करता है और एसिड बनने की प्रक्रिया को कम करता है-

5- अदरक के जड़(Ginger Root)पेट में गैस्ट्रिक एसिड और बाइल जूस से हुए नुकसान से सुरक्षा करता है यह हर्निया से हुए दर्द में भी काम करता है-

6- हर्निया के दर्द में एक्यूपंक्चर काफी आराम पहुंचाता है खास नर्व पर दबाव से हर्निया का दर्द कम होता है-

7- मुलैठी (Licorice)कफ, खांसी में मुलैठी तो रामबाण की तरह काम करता है और आजमाय हुआ भी है हर्निया के इलाज में भी अब यह कारगर साबित होने लगा है खासकर पेट में जब हर्निया निकलने के बाद रेखाएं पड़ जाती है तब इसे आजमाएं-

8- बर्फ से हर्निया वाले जगह दबाने पर काफी आराम मिलता है और सूजन भी कम होती है यह सबसे ज्यादा प्रचलन में है-

9- हावथोर्निया(Hawthornia)एक हर्बल सप्लीमेंट है जो पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और पेट के अंदर के अंगों की सुरक्षा करती है यह हर्निया को निकलने से रोकने में काफी कारगर है हावथोर्निया में Citrus Seed, Hawthorn और Fennel मिली होती है-

हर्निया में इससे बचे-

1- शराब पीना पूरी तरह बंद कर दें तथा हर्निया में ज्यादा तंग और टाइट कपड़ें नहीं पहनें-

2- हर्निया में कसरत करने से परहेज करें-

3- बेड पर अपने तकिए को 6 इंच उपर रखें ताकि पेट में सोते समय एसिड और गैस नहीं बन पाए-

4- प्रभावित जगह को कभी भी गर्म कपड़े या किसी भी गर्म पदार्थ से सेंक नहीं दें-

5- एक ही बार ज्यादा मत खाएं थोड़ी-थोड़ी देर पर हल्का भोजन लें तथा खाने के तुरंत बाद झुकें नहीं-

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20 फ़रवरी 2017

बर्फ के अदभुत प्रयोग आजमायें

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हमारे आस-पास बहुत सी ऐसी चीजे मौजूद है लेकिन हम इनकी उपयोगिता को लेकर अनजान रहते है और जब कहीं पढने को मिला जाता है तब आपको पता होता है कि अरे ये तो हमें पता ही नहीं था जी हाँ हम बात कर रहे है बर्फ के बारे में आप बर्फ(Ice)के कुछ प्रयोगों को जानकार आश्चर्यचकित रह जायेगें-

बर्फ के अदभुत प्रयोग आजमायें

बर्फ(Ice)का उपयोग-


1- आजकल भागमभाग भरी जिन्दगी में बहुत सी महिलाओं के पास मेकअप का समय नहीं होता है और इस लापरवाही में आपकी त्वचा ढीली पड़ जाती है तो आप को जब भी समय मिले एक बर्फ का छोटा-सा टुकड़ा लेकर उसे किसी कपड़े में(मखमल)लपेट चेहरे पर लगाइए इससे आपके चेहरे की त्वचा टाइट होगी तथा यह बर्फ का टुकड़ा आपकी त्वचा में ऐसा निखार ला देगा जो और कहीं नहीं मिलेगा तो देर किस बात की आज से ही आजमाना शुरू कर दें-

2- यदि आपको शरीर में कहीं पर भी चोट लग गई है और खून निकल रहा है तो उस जगह बर्फ मसलने से खून बहना बंद हो जाता है-अंदरुनी यानी गुम चोट लगने पर बर्फ लगाने से खून नहीं जमता व दर्द भी कम होता है-

3- यदि आपको शरीर में कही काँटा चुभ गया है तो कांटा चुभने पर बर्फ लगाकर उस हिस्से को आप सुन्न कर ले फिर आप कांटा या फांस आसानी से निकालें काँटा आसानी से निकल जाएगा और दर्द भी नहीं होगा-

4- यदि आइब्रो बनवाते समय आपको अधिक दर्द होता है तो एक बर्फ का टुकड़ा आइब्रो के चारों और घिस लीजिए इससे यह हिस्सा थोड़ी देर के लिए सुन्न हो जाएगा और आपको दर्द भी नहीं होगा-यही तरीका शरीर के किसी और हिस्से पर भी आप लागू कर सकते हैं-

5- नाक से खून आने पर बर्फ को कपड़े में लेकर नाक के ऊपर चारों और रखें आप देखेगें कि थोड़ी देर में खून निकलना बंद हो जाता है-

6- प्लास्टिक में बर्फ का टुकड़ा लपेटकर सिर पर रखने से आपको सिरदर्द में राहत मिलती है तथा जिन लोगों को कडवी दवा खाने से परहेज है तो आप कड़वी दवाई खाने से पहले मुंह में बर्फ का टुकड़ा रख लें आपको दवाई कड़वी ही नहीं लगेगी-

7- आंखों के काले घेरे दूर करने के लिए खीरे के रस और गुलाब जल को मिलाकर आप बर्फ जमा लीजिए तथा फिर उस टुकड़े से काले घेरों पर मालिश करे यकीन माने आपकी ये समस्या बहुत जल्द दूर होगी-

8- ज्यादा देर मोबाइल या कंप्यूटर चलाने के बाद आपकी आंखें दर्द कर रही हैं तो बर्फ के टुकड़े को अपनी आंखों पर रखिए आपको जल्द ही राहत मिलेगी और पैरों की एड़ियों में बहुत ज्यादा तीखा दर्द हो तो बर्फ की क्यूब मलने से आपको अवश्य ही आराम मिलेगा-

9- शरीर में किसी स्थान पर जल जाने के तुरंत बाद बर्फ का टुकड़ा जले हुए स्थान पर लगाने से छाले और जलन शांत होता है और निशान भी गहरा नही पड़ता है-

10- यदि आपने बहुत ज्यादा खा लिया है और खाना पच नहीं रहा है तो थोड़ा-सा बर्फ का टुकड़ा खा ले आपका खाना शीघ्र पच जाएगा और धीरे-धीरे बर्फ का टुकड़ा चूसने से उल्टी भी बंद हो जाती है-बर्फ का टुकड़ा गले के बाहर धीरे-धीरे मलने से गले की खराश ठीक हो जाती है-

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19 फ़रवरी 2017

शादी-शुदा रिश्ते को मजबूती से कैसे निभाएं

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शादी करना जीवन का अभिन्न और महत्वपूर्ण पल है लेकिन क्या आप अपनी शादी-शुदा जिन्दगी(Married life)को ठीक उसी प्रकार निभा रहें है जब आप शादी से पहले एक दूसरे को प्यार करते थे-जी हाँ आज ये सवाल इस लिए पूछ रहा हूँ क्युकि आप जान सकें कि अगर अब नहीं वो बात है तो इसका मुख्य कारण क्या है-

शादी-शुदा रिश्ते को मजबूती से कैसे निभाएं

शादी सामाजिक बंधन के साथ जीवन को जीने की एक कला भी है लेकिन शादी के बाद आपको कैसे जीना है इस बात पर कम लोग ही ध्यान देते है यदि आपने शादी करके इतिश्री कर ली है तो शादीशुदा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं है जबकि शादी के बाद तो जीवन और भी खूबसूरत हो सकता है अगर आपको जीने की कला का ज्ञान है ये बात स्त्री-पुरुष दोनों को सामान रूप से समझना आवश्यक होता है-

हम आप पर ये आरोप नहीं लगा रहे है कि आपको शादी शुदा जीवन(Married life)जीना नहीं आता है परन्तु अगर आप कुछ छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देगें तो फिर आप अपनी शादी-शुदा जिन्दगी को और भी खूबसूरत बना सकते है-

शादी एक ऐसी जिम्मेदारी है जहां पर आपका और आपके पार्टनर दोनों का प्रयास काफी जरूरी होता है लेकिन कभी-कभार कई प्रयास करने के बाद भी कुछ कमियां पीछे छूट ही जाती है शादी के बाद कई रिश्ते गलतफहमी और एकरसता के कारण भी कमजोर पड़ जाते हैं आइये जानते है कि आखिर क्यों कई पति अपनी शादीशुदा जिदंगी(Married life)से ना खुश होते जाते हैं-

शादी-शुदा जीवन(Married life)के लिए क्या ध्यान दें-


1- यदि आप पत्नी हैं और आपको अपने पति की कोई भी बात या उनकी कोई आदत आपको परेशान करती है तो आपको बिना देर किये अपने पति से बात करनी चाहिए बिना बात किये किसी चीज का समाधान नहीं हो सकता है-बातचीत करके ही आप किसी समस्या का हल कर सकती हैं लेकिन आपको भी अपने पति की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना आवश्यक है-

2- आपकी शादी को कितना भी समय हो गया हो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जहाँ तक रोमांस की बात हो आपको पहले की तरह ही स्वयं रखना चाहिए हमने बहुत से पुरुषों को यही कहते पाया है कि अब उनकी पत्नी शादी के कुछ समय के बाद से ही रोमांस में कम दिलचस्पी दिखाती हैं हम ये मानते है कि आप शादी के बाद कई प्रकार की जिम्मेदारियों में लिप्त हो जाती है लेकिन ध्यान रक्खें कि आपका प्यार पति के प्रति किसी भी तरह कम नहीं होने पायें तभी आप अपने पति को अपने मोहपाश में बाँध कर रख सकती है ठीक यही बात पति पर भी लागू होती है कि जीविकोपार्जन की जिम्मेदारी के साथ-साथ आपका रोमांस पत्नी के प्रति बढ़ता ही रहना चाहिए क्युकि आपकी आखिरी सांस तक वही साथ देने वाली है-

3- शादी दो विचारों का मिलन है ये जरुरी भी नहीं है सभी के विचार पूर्णतया आपस में मेल खाते हों और ये भी सत्य है कि शादी के बाद आपसी मतभेद भी होते है लेकिन ये जन्म-जन्मान्तर का रिश्ता है जो पूर्व निर्धारित होता है आप चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते है आपस का मतभेद आपके रिश्ते को कमजोर कर सकता है इसलिए आप दोनों को मिलकर अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश करनी चाहिए और अगर आपकी कोई आदत यदि आपकी शादीशुदा जिंदगी को बर्बाद कर रहीं है तो आप उसे तुरंत ड्रॉप कर दें-

4- शादी के बाद आपके बच्चे आपकी जिन्दगी का अभिन्न अंग हैं लेकिन आप बच्चों पर ध्यान देने के साथ-साथ आपसी रोमासं का भी ध्यान रक्खें वर्ना आपकी लाइफ आगे चल कर बोरिंग बन सकती है हाँ जब भी आप इस मूड में हो बच्चों को अवश्य दूर ही रक्खें कही ऐसा न हो कि एक अच्छी माँ तो बन जाएँ लेकिन एक अच्छी पत्नी का दर्जा आपके हाथों से फिसल जायें-तो हो सके तो आप बच्चों के सो जाने के बाद अपने पति को भी पर्याप्त समय अवश्य दें जिससे आपकी शादी-शुदा जिन्दगी ताउम्र हसीन बनी रहे-

5- कई पति और पत्नी शादी के कुछ अंतराल के बाद सेक्स से दूर होते भी देखे गए है कुछ लोग बाद में एक नीरस जीवन जीते देखे जा सकते है आप अपनी जिन्दगी में ऐसा न होने दे-सेक्स भी आपके जीवन में रिश्ते को भली प्रकार चलाने के लिए बहुत ही आवश्यक है आप इस बात को बखूबी जानते होंगे कि सेक्स ही आपके रिश्ते का एक महत्वपूर्ण तत्व है-

6- जब दो इंसान एक दूसरे के साथ रहने की आदत हो जाती है तो कुछ समय बाद वह एक दूसरे के साथ कमफर्टेबल हो जाते हैं और यह वही समय होता है जब दोनों को ही एक दूसरे को आपस में उनके कामों के प्रति सराहना करनी चाहिए-

7- आपके पति कोई माइंड रिडर नहीं है जो उन्हें क्षण में वह बात पता चल जाए जो आपके मन में हो इसलिए आप मायूस या गुस्सा इजहार करने के बजाय अपने मन की बात समय देख कर आपस में शेयर करें-

8- कुछ पत्नियाँ पति के घर में प्रवेश करते ही पति को एक लिस्ट थमा देती हैं जो कुछ पतियों को शायद अच्छा नहीं लगता है हो सकता है आपकी इस बात से वह काफी नाराज हो सकते हैं इसलिए पहले आप उन्हें प्यार से उनकी थकावट और कामों के प्रति सराहना करें और फिर आप अपनी बातों को प्रस्तुत करें-

9- मेरे कहने का तात्पर्य ये है कि आप अपने रिश्ते में पहले जितनी मस्ती करते थे तो क्या उस मस्ती का एक भी हिस्सा अब आपके रिश्ते में नहीं बचा है अगर ये सच है तो आज से ही आप दोनों खुद को बदलने का प्रयास करें-

10- यदि आपने शादी-शुदा जीवन में कुछ अंतराल के बाद नीरस जीवन जीना शुरू किया है या मेरे कहने का मतलब है आपस में एक दुसरे के साथ इंजॉय करना बंद कर दिया है तो फिर आपका रिश्ता कमजोर हो रहा है तो रिश्ते को लंबे समय तक टिकाने के लिए आप रोमांटिक बने और आपस में उन सभी बातों को दूर करने का प्रयास करें जो आपके जीवन को नीरस बनाने में सहायक हो रही है-




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सफ़ेद पानी(श्वेत प्रदर)आने की शिकायत तो नहीं

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श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया(Leukorrhea)या सफेद पानी का आना स्त्रियों में होने वाला एक रोग है जिसमें स्त्री की योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है शुरुवाती दौर में श्वेत पानी आना बाद में दही जेसा गाढ़ा बदबूदार पीव जैसा और कभी कभी योनी मार्ग से हरा पीला मिश्रित स्राव जलन के साथ कमजोरी का महसूस होना आदि लक्षण दिखते है महिलाओं एवं किशोरियों में इसकी पहचान कमर में हमेशा दर्द रहता है-

सफ़ेद पानी(श्वेत प्रदर)आने की शिकायत तो नहीं

ये गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला स्त्राव होता है यह खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण ल्यूकोरिया(Leukorrhea)होता है श्वेत प्रदर वास्तव में एक बीमारी नहीं है बल्कि किसी अन्य योनिगत या गर्भाशयगत व्याधि का लक्षण है तथा सामान्यतः प्रजनन अंगों में सूजन का बोधक है-

ल्यूकोरिया(Leukorrhea)में योनि स्राव-


वैसे महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होना आज मध्य उम्र की महिलाओं की एक सामान्य समस्या हो गई है सामान्य भाषा में इसे सफेद पानी जाना कहते हैं भारतीय महिलाओं में यह आम समस्या प्रायः बिना चिकित्सा के ही रह जाती है-

सबसे बुरी बात यह है कि इसे महिलाएँ अत्यंत सामान्य रूप से लेकर ध्यान नहीं देती हैं कुछ महिलायें इसे डॉक्टर को नहीं बताती है और लापरवाही करती है श्वेत प्रदर में योनि की दीवारों से या गर्भाशय ग्रीवा से श्लेष्मा का स्राव होता है जिसकी मात्रा, स्थिति और समयावधि अलग-अलग स्त्रियों में अलग-अलग होती है यदि स्राव ज्यादा मात्रा में, पीला, हरा, नीला हो, खुजली पैदा करने वाला हो तो ऐसी स्थिति असामान्य मानी जाएगी-इससे शरीर कमजोर होता है और कमजोरी से श्वेत प्रदर बढ़ता है इसके प्रभाव से हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन रहता है-इस रोग में स्त्री के योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा, गाढ़ा, बदबूदार स्राव होता है इसे वेजाइनल डिस्चार्ज भी कहते हैं-

ल्यूकोरिया(Leukorrhea)के कारण-


1- सहवास के बाद योनि को स्वच्छ जल से न धोना तथा वैसे ही गन्दे बने रहने से भी ये रोग होता है-

2- अत्यधिक उपवास, उत्तेजक कल्पनाएं, अश्लील वार्तालाप, मुख मैथुन, सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना आदि भी इसका एक कारण है-

3- रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास करने से भी ल्यूकोरिया(Leukorrhea)होता है-

4- महिलाओं का बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक प्रमुख कारण है-

5- सफेद पानी(श्वेत प्रदर)का एक और कारण प्रोटिस्ट हैं जो कि एक सूक्ष्म जीवों का समूह है-

बचाव एवं चिकित्सा(Rescue And Treatment)-


1- इसके लिये सबसे पहले साफ-सफाई जरूरी है योनि को धोने के लिये सर्वोत्तम उपाय फिटकरी के जल से धोना है फिटकरी एक श्रेष्ठ जीवाणु नाशक और सस्ती औषधि है तथा ये आसानी से सर्वसुलभ है- 

2- बोरिक एसिड के घोल का भी प्रयोग करा जा सकता है और यदि अंदरूनी सफ़ाई के लिये पिचकारी से धोना (डूश लेना)हो तो आयुर्वेद की अत्यंत प्रभावकारी औषधि “नारायण तेल” का प्रयोग सर्वोत्तम होता है-

3- मैथुन के पश्चात अवश्य ही साबुन से सफाई करना चाहिए-

4- प्रत्येक बार मल-मूत्र त्याग के पश्चात अच्छी तरह से संपूर्ण अंग को साबुन से धोना चाहिए-

5- बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक प्रमुख कारण है अतः महिलाओं को अनचाहे गर्भ की स्थापना के प्रति सतर्क रहते हुए गर्भ निरोधक उपायों का प्रयोग(कंडोम, कापर टी, मुँह से खाने वाली गोलियाँ) अवश्य करना चाहिए तथा साथ ही एक या दो बच्चों के बाद अपना या अपने पति का नसबंदी आपरेशन कराना चाहिए-

6- आप शर्म त्यागकर इसके बारे में अपने पति एवं डाक्टर को अवस्य ही बताये नहीं तो आगे चलकर ये रोग असाध्य हो जाता है वैसे इस रोग की प्रमुख औषधियां अशोकरिष्ट, अशोक घनबटी, प्रदरांतक लौह, प्रदरहर रस आदि हैं-

ल्यूकोरिया(Leukorrhea)होने पर करे उपचार-


1- घृतकुमारी को गुड या मिस्री के साथ आप खाली पेट ले ये रोज आपको एक चम्मच लेना है पांच या दस दिनों तक लेना है और अगर ये रोग पुराना है तो फिर इसे एक दो माह तक जारी रखे (बीच में एक हफ्ते अंतराल करके भी दुबारा ले सकती है)-

2- अशोक के पेड की छाल 60 ग्राम को एक लीटर पानी में इतना उबाल ले कि पानी सिर्फ 250 मिलीलीटर ही रह जाए आप इसे दो चम्मच प्रतिदिन एक या दो माह तक लेना है -

3- शतावर(Asparagus Racemosus)की ताज़ी कंदमूल या सूखी जड़ो का चूर्ण 5-10 ग्राम स्वादानुसार जीरे के चूर्ण के साथ एक कप ढूध में सुबह खाली पेट में पिलाने से कमजोरी और तनाव से होने वाली श्वेत प्रदर दो से तीन सप्ताह में ठीक हो जाती है-

4- ब्राम्ही, बेंग साग(Centella asiatica)का चूर्ण दो छोटी चम्मच या उसका स्वरस एक या दो चाय की चम्मच दिन में दो बार मिसरी के साथ 15 -20 दिन तक दें-

5- अरहर(Canjanus cajan)के पत्तों का स्वरस(बिना पानी मिलाये)एक चम्मच दिन में दो बार 12-15 दिन तक लें अथवा अरहर का जूस, सेंधा नमक में मिलकर दिन में एक बार 30 दिनों तक लें-

6- सेमल  की छाल- 200 ग्राम         
    पलाश की छाल- 200 ग्राम
    शतावरी की जड़-200 ग्राम ( मूलकंद

उपरोक्त तीनों को बराबर मात्रा में लेकर कूट- पिसकर छान कर चूर्ण को कांच की शीशी में भरकर रख लें और इस चूर्ण को 1-2 चम्मच ठण्डे पानी या चावल के पानी, या मांड (ठण्डा) के साथ 15-20 दिन तक सुबह-शाम लें-

नोट- धृतकुमारी के गुच्छे का प्रयोग करने से पूर्व इसके काँटों को साफ कर लें ये ज़हरीला है -

परहेज-

तेल, खटाई, मसाला, टमाटर, गर्मी पैदा करने वाला भोजन व कब्ज जनित खाध पदार्थों का सेवन न करें-





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17 फ़रवरी 2017

पूजा में अक्षत समर्पण का अभिप्राय क्या है

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अक्षत यानि कि पूर्णता का प्रतीक-जी हाँ जो टूटा न हो जो अखंडित न हो अक्षत पूर्णता का प्रतीक है इसलिए आप हमेशा ही ध्यान रक्खे कि आप जब भी भगवान् को चावल चढ़ाए तो ध्यान रक्खे कि आपका चावल विखंडित(टूटा)न हो-

पूजा में अक्षत समर्पण का अभिप्राय क्या है

पूजा में अक्षत(Intact)का महत्व-


अखंडित और स्वच्छ चावल शिवलिंग पर चढाने से शिवजी अति-प्रसन्न होते है और भक्तों को अखंडित चावल की तरह ही अखंडित धन, मान-सम्मान प्रदान करते हैं और श्रद्धालुओं को जीवनभर धन-धान्य की कमी नहीं होती हैं-

पूजन के समय अक्षत इस मंत्र के साथ भगवान को समर्पित किए जाते हैं-

      'अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कमाक्ता: सुशोभिता: मया निवेदिता भक्त्या: गृहाण परमेश्वर '

भावार्थ-

 हे परमेश्वर कुंकुम के रंग से सुशोभित यह अक्षत आपको समर्पित कर रहा हूं, कृपया आप इसे स्वीकार करें-

अन्न में अक्षत यानि चावल को श्रेष्ठ माना जाता है-इसे देवताओं का अन्न भी कहा गया है अर्थात देवताओं का प्रिय अन्न है चावल-अत: इसे सुगंधित द्रव्य कुंकुम के साथ आपको अर्पित कर रहे हूँ आप इसे ग्रहण कर आप भक्त की भावना को स्वीकार करें-

अक्षत चढ़ाने का अभिप्राय यह है कि हमारा पूजन अक्षत की तरह पूर्ण हो तथा अन्न में श्रेष्ठ होने के कारण भगवान को चढ़ाते समय यह भाव रहता है कि जो कुछ भी अन्न हमें प्राप्त होता है वह भगवान की कृपा से ही मिलता है अत: हमारे अंदर यह भावना भी बनी रहे-इसका सफेद रंग हमारे जीवन में शांति का प्रतीक है-अत: हमारे प्रत्येक कार्य की पूर्णता ऐसी हो कि उसका फल हमें शांति प्रदान करे-इसीलिए पूजन में अक्षत एक अनिवार्य सामग्री है ताकि ये भाव हमारे अंदर हमेशा बने रहें-





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