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29 जून 2017

उदर रोगों में अमृत समान आसव आरिष्टम

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आयुर्वेद में जब भस्में व अन्य योग प्रचलन में नहीं थे तब सभी उपचार ताज़ी वनस्पतियों को खिलाकर किये जाते थे लेकिन इसमें एक समस्या थी क्योंकि बहुत सी जड़ी बूटियां(Herbs)केवल ऋतु विशेष में ही मिलती हैं इस कारण इनको पूरे वर्ष उपलब्ध करने के लिये औषिधियों को सुखाया जाने लगा व उपयोग करने योग्य बनाने के लिये क्वाथ, आसव व आरिष्ट बनाने की परम्परा तभी से आरम्भ हुई थी-

उदर रोगों में अमृत समान आसव आरिष्टम

सबसे पहले आपको बताना आवश्यक है कि आसव और आरिष्ट क्या होते हैं और किस लिए इसका उपयोग किया जाने लगा था तो आइये सबसे पहले आप इनके बारे में भी समझ लें चूँकि क्वाथ या काढ़े बना कर रखने के साथ एक समस्या ये रही कि इनका लम्बे समय तक परिरक्षण(Preservation)नहीं किया जा सकता था चूँकि उस युग में रेफ्रीजिरेटर उपलब्ध नहीं होते थे इसलिए ये समस्या गर्मियों के मौसम में और अधिक उग्र हो जाती थी जब इनमें सडन उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता था तथा दूसरा कारण ये रहा कि जब कोई द्रव्य शुद्ध पानी की अपेक्षा सुरा मिला कर दिया जाता है तो उसके योगवाही गुण(Bio availability)बढ़ जाते हैं इसलिए आयुर्वेद में आसव व अरिष्ट इस सन्दर्भ के रूप में हमारे सामने उभर कर आये-

अरिष्ट क्या है-


जब वनस्पति जड़ी-बूटी के काढ़े में कुछ गुड या चीनी मिला कर उसका खमीरीकृत संधान(Fermentation Process)कर बनाते हैं तो उसे अरिष्ट कहा जाता है-

आसव क्या है-


मिठासयुक्त(Carbohydrates Containing)ताज़ी जड़ी बूटियों से बिना उबाले खमीरीकृत संधान किये द्रव्य आसव कहलाये-

तो अब आप शायद समझ ही गए होंगें कि जो पहले काढ़ा बनाकर संधान किये जाएँ वे अरिष्ट तथा जो बिना उबाले खामिरिकृत किये जाएँ वे आसव कहलाते हैं-

आप जान लें कि आसव व अरिष्ट में एक सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इनमें कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrates)के सुरा में बदलने के कारण औषधि अधिक गुणकारी हो जाती है जो सुरा के योगवाही गुणों (Bio-availability Increase) के कारण होता है-दूसरे इससे पाचन क्रिया में भी सुधार होता है सुरा की मात्रा 5 से 10% तक होती है जो बहुत ही कम होकर औषधि को उत्तम योगवाही भी बना देती है-

आसव व अरिष्ट के संधान के लिये 30 से 40 दिन का समय चाहिए ताकि बैक्टीरिया(Bacteria)औषधि में उपलब्ध मिठासद्रव्यों को सुरामें बदल पायें इस अवधि को समाप्त करने के उद्देश्य से आयुर्वेदिक फ़ार्मुलेरी ऑफ इंडिया(AFI)ने आधुनिक निर्माण विधि में सीधे सुरा मिलाने की अनुमति भी दे रखी है लेकिन इससे कई लोगो को आसव सेवन से पेट मे जलन की शिकायतें हो सकती है-

चूंकि आधुनिक समय मे पारम्परिक विधि से बने आसव और आरिष्ट उपलब्ध नही है इसलिए हम आपको घर मे ही आसव बनाने का निराप्रद तरीका बता रहे है आसव आरिष्टम पेट के रोगों में अमृत समान है अजीर्ण, एसिडिटी, अपचन, आफरा, पेटदर्द, कब्ज, पाइल्स, एसिड बनना, लिवर की कमजोरी इन सब तकलीफों में लाभदायक है-

आसव बनाने के लिए हमे अन्नानास, अंगूर, काले अंगूर, फालसा, संतरा, स्ट्रॉबेरी, चेरी, लीची जैसे फल आप ले सकते है यह आसव जब हम घर पर बनाते है तो वो शुद्धता के साथ-साथ स्वादिष्ट भी होते है और हम जरूरत के मुताबिक उसमे सामग्री कम या ज्यादा डाल सकते है-

सामग्री-

एक से डेढ़ किलो फल- (छोटे टुकड़ों में कटे हुए ऊपर लिखे है उसमें से कोई भी)
चीनी- एक किलो 
अदरक- 50 ग्राम 
जीरा- 25 ग्राम 
एक्टिव ईस्ट- 25 ग्राम
शुद्ध उबला हुआ पानी- 1 लीटर

बनाने की विधि-

एक कांच के(चौड़े मुह वाला बर्तन जिसमे ढक्कन भी हो जैसे जो पहले अचार डालने के काम आता था)बर्तन को धो कर सूखा कर उसमे 2 से 3 इंच परत फलों की टुकड़े छोटे काट के(थोड़ा दबाके जिससे रस आसानी से निकले)आप बिछा दें-

अब अदरक के छोटे छोटेे टुकड़ो को चीनी में मिलाकर फलों की परत के ऊपर शक्कर की 2 इंच की परत बनाए इस तरह फलों और शक्कर की परत बनाले तो अब इसमें 1 लीटर पानी डाल दे और ऊपर से एक्टिव यीस्ट को भी डाल दे तथा बर्तन को पक्का ढक्कन लगाकर 21 दिन के लिए सूखे और कम सूर्य प्रकाश वाली जगह पर रख दे तथा 3-4 दिन में एक बार सामग्री को अच्छे से हिलाते रहे-आपका 21 दिन बाद स्वादिष्ट आसव आरिष्टम तैयार है अब इसे छान कर दूसरी बाटलो में भर कर रख दे-

लाभ-

उल्टी, दस्त, भूख ना लगना, कमजोर पाचनाग्नि, बेस्वाद और मुँह का स्वाद बिगड़ना जैसी बीमारियों में इस आसव को तीन चम्मच आधे कप पानी और चुटकी भर सेंधा नमक के साथ लेने से लाभ होता है-

प्रस्तुती-

Dr. Chetna Kanchan Bhagat

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रूट कनाल(Root Canal) आपके लिए कब जरुरी है

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दांतों में जब कीड़ा काफी बढ़ जाता है और दांत में गहरा सूराख कर देता है और जड़ों तक इसका इंफेक्शन फैल जाता है तो रूट कनाल(Root Canal)किया जाता है जिन टिस्यू(Tissues)में इंफेक्शन हो गया है उन्हें Sterilization करके दांत में एक मटीरियल भर दिया जाता है ताकि वह बरकरार रहे यानी दांत ऊपर से पहले जैसा ही रहता है और काम करता है जबकि दांत की ब्लड सप्लाई काट देते हैं इससे कोई नुकसान नहीं होता है लेकिन हां दांत में इंफेक्शन या किसी और बीमारी की आशंका खत्म हो जाती है-

रूट कनाल(Root Canal)

रूट कनाल(Root Canal)की प्रकिया में अक्सर दांत के टूटने की आशंका बढ़ जाती है इसलिए जरूरी है कि दांत पर Crown लगाया जाए इससे दांत का फ्रेक्चर भी रुकता है और लुक भी पहले जैसा बना रहता है-कभी-कभी रूट कनाल फेल भी हो जाती है और उसमें मवाद(Pus)पड़ जाता है तब डॉक्टर ये तय करता है दांत निकालें या नहीं तो ऐसी स्थिति में फिर से इलाज किया जाता है रूट कनाल(Root Canal)के इस पूरे प्रॉसेस में चार-पांच सिटिंग लगती हैं-

ठंडा-गरम(Cold-Hot)लगना-


दांत के टूटने, नींद में किटकिटाने, घिसने के बाद, मसूड़ों की जड़ें दिखने और दांतों में कीड़ा लगने पर ठंडा-गरम लगने लगता है और कई बार बेहद दबाव के साथ ब्रश(Brsh)करने से भी दांत घिस जाते हैं और दांत सेन्सेटिव(Sensitive)बन जाते हैं इसलिए ध्यान रक्खे कि ज्यादा दबाव से ब्रश न करें और आप क्रोध में भी दांत पीसने से बचें-

इलाज(Treatment)-

इसका इलाज वजह के मुताबिक होता है फिर भी आमतौर पर डॉक्टर इसके लिए मेडिकेटेड टूथपेस्ट की सलाह देते हैं-जैसे कि सेंसोडाइन, थर्मोसील रैपिड एक्शन, सेंसोफॉर्म, कोलगेटिव सेंसटिव आदि-

वैसे आप बिना डॉक्टर की सलाह लिए भी इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन दो-तीन महीने के बाद भी समस्या बनी रहे तो आप डॉक्टर को अवश्य ही दिखाएं-

सांस में बदबू(Breath Stink)-


अधिकतर 95 फीसदी मामलों में मसूड़े और दांत(Gums and Teeth)की ढंग से सफाई न होने और उनमें सड़न व बीमारी होने पर मुंह से बदबू आती है तथा कुछ मामलों में पेट खराब होना या मुंह की लार का गाढ़ा होना भी इसकी वजह होती है जादा प्याज और लहसुन आदि खाने से भी मुंह से बदबू आने लगती है-

इलाज(Treatment)-

लौंग,इलायची चबाने से इससे छुटकारा मिल जाता है या थोड़ी देर तक शुगर-फ्री च्यूइंगगम चबाने से मुंह की बदबू के अलावा दांतों में फंसा कचरा भी निकल जाता है तथा इससे दांतों की मसाज भी हो जाती है इसके लिए बाजार में कई तरह के माउथवॉश भी मिलते हैं-

पायरिया(Pyorrhea)-


मुंह से बदबू आने लगे, मसूड़ों में सूजन और खून निकलने लगे और चबाते हुए दर्द होने लगे तो पायरिया हो सकता है पायरिया होने पर दांत के पीछे सफेद-पीले रंग की परत बन जाती है और कई बार हड्डी गल जाती है और दांत हिलने लगता है पायरिया की मूल वजह दांतों की ढंग से सफाई न करना है-

इलाज(Treatment)-

पायरिया का सर्जिकल और नॉन सर्जिकल दोनों तरह से इलाज होता है इसका शुरू में इलाज कराने से सर्जरी की नौबत नहीं आती है-क्लीनिंग ,  डीप क्लीनिंग(मसूड़ों के नीचे)और फ्लैप सर्जरी से पायरिया का ट्रीटमंट होता है-

दांत निकालना कब जरूरी-


दांत अगर पूरा खोखला हो गया हो और भयंकर इन्फेक्शन हो गया हो या मसूड़ों की बीमारी से दांत हिल गए हों या बीमारी दांतों की जड़ तक पहुंच गई हो तो फिर इस स्थिति में दांत निकालना जरूरी हो जाता है-

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28 जून 2017

दांतों की फिलिंग(Teeth Filling)क्यों आवश्यक है

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यदि आप दांतों में फिलिंग(Filling)न कराएं तो दांत में ठंडा-गरम और खट्टा-मीठा लगता रहेगा और इसके बाद दांत में दर्द होने लगता है तथा पस बन जाता है और फिर रूट कनाल ट्रीटमंट की नौबत आ जाती है इसका मतलब आप जितनी जल्दी फिलिंग कराएं आपके लिए उतना अच्छा है लेकिन समस्या ये है कि अब आप कौन सी फिलिंग(Filling)कराएं-

Filling in teeth

अस्थायी फिलिंग(Temporary Filling)-


अस्थायी फिलिंग(Temporary Filling)उस वक्त करते हैं जब दांत में काफी गहरी कैविटी हो तब सेंसटिविटी नहीं होने पर परमानेंट फिलिंग कर देते हैं अगर इसके बाद भी दिक्कत होती है तो रूट कनाल या फिर दांत निकाला जाता है-

सिल्वर फिलिंग(Silver filling)-


इसे एमैल्गम(Malgm)भी कहते हैं इसमें सिल्वर, टिन, कॉपर को मरकरी के साथ मिक्सचर करके तैयार किया जाता है लेकिन पहले कीड़े की सफाई और कैविटी कटिंग की जाती है इसके बाद जिंक फॉस्फेट सीमेंट की लेयर लगाई जाती है क्युकि फिलिंग में इस्तेमाल होने वाली मरकरी जड़ तक पहुंचकर नुकसान न पहुंचाए तब इसके बाद एमैल्गम भरा जाता है आप इस फिलिंग को कराने के एक घंटे तक कुछ न खाएं फिर फिलिंग वाली दाढ़ के दूसरी तरफ से खा सकते हैं तथा 24 घंटे बाद फिलिंग वाले दांत से भी आप खा सकते हैं यह दूसरी अन्य फिलिंग्स से सस्ती और ज्यादा मजबूत होती है लेकिन यह ग्रे/ब्लैक होती है और देखने में खराब लगती है क्युकि इसे मरकरी से मिक्स किया जाता है-

कंपोजिट फिलिंग(Composite Filling)-


इस कंपोजिट फिलिंग(Composite Filling)को Cosmetic या Tooth-colored filling भी कहते हैं इसे बॉन्डिंग टेक्निक और Light Cure Method से तैयार किया जाता है-

कैसे करते है-


इसमें सबसे पहले कैविटी कटिंग की जाती है फिर सरफेस(Surface)को फॉस्फेरिक एसिड के साथ खुरदुरा किया जाता है इससे सरफेस एरिया बढ़ने के अलावा मटीरियल अच्छी तरह सेट हो जाता है इसके बाद मटीरियल भरा जाता है-कंपोजिट फिलिंग(Composite Filling)छोटी-छोटी मात्रा में कई बार मेटीरियल भरा जाता है इसको हर बार करीब 30 सेकंड तक एलईडी लाइट गन की नीली रोशनी से उसे पक्का किया जाता है इसके बाद उभरी सतह को घिसकर शेप दी जाती है और फिर पालिसिंग(Polishing)होती है आप तुरंत बाद खा सकते हैं यह टूथ कलर की होती है पता भी नहीं चलता कि फिलिंग की गई है यह टिकाऊ होती है लेकिन आजकल अब नैनो तकनीक(Nanotechnology)का मटीरियल आने से यह फिलिंग और भी बेहतर हो गई है-

नुकसान(Loss)से बचें-


फिलिंग कराते हुए दांत सूखा होना चाहिए वरना मटीरियल निकलने का डर होता है बच्चों में यह Composite Filling नहीं की जाती है ये फिलिंग आमतौर पर उन्हीं दांतों में की जाती है जिनसे खाना चबाते हैं-

जीआईसी फिलिंग(GIC Filling)-


इसका नाम ग्लास इनोमर सीमेंट फिलिंग है ज्यादातर बच्चों में या बड़ों में कुछ सेंसेटिव दांतों में की जाती है इसमें सिलिका होता है और यह हल्की होती है इसलिए चबाने वाले दांतों में यह फिलिंग नहीं की जाती फिलिंग कराने के एक घंटे बाद तक कुछ न खाना बेहतर रहता है यह सेल्फ क्योर और लाइट क्योर दोनों तरीकों से लगाई जाती है इसमें मौजूद फ्लोराइड आगे कीड़ा लगने से रोकता है इसलिए इसे प्रिवेंटिव फिलिंग(Preventive filling)भी कहा जाता है-

नुकसान-

यह सफेद होती है पर दांतों के रंग से मैच न करने से देखने में अच्छी नहीं लगती है और सभी दांतों में इसे नहीं भरा जाता है चबाने और सामने वाले दांतों में इसके इस्तेमाल से बचा जाता है क्यूंकि यह ज्यादा मजबूत नहीं होती है वैसे अब जीआईसी फिलिंग में भी दांतों के रंग के शेड आने लगे हैं-

कब निकल जाती है फिलिंग-


जब फिलिंग को पूरा सपोर्ट न मिला हो या सही मटीरियल और तकनीक इस्तेमाल न की गई हो तो ये समस्या होती है या फिर फिलिंग कराते हुए दांत सूखा न रहा हो या उसमें लार आ गई हो अथवा दांत और फिलिंग के बीच गैप आने से माइक्रो लीकेज हो जाए या फिर अगर कैविटी की शेप और साइज ठीक न हो या कैविटी काफी बड़ी हो-

फिलिंग से जुड़े दो और जरूरी बात-


फिलिंग कराने के बाद कई बार दांत में सेंसिटिविटी आ जाती है दांत पर ठंडा-गर्म महसूस होने लगता है अगर यह कुछ दिनों में ठीक न हो तो फिर आप डॉक्टर को अवश्य दिखाएं-

फिलिंग कराने के बाद कीड़ा बढ़ता नहीं है लेकिन कई बार थोड़ी-बहुत लीकेज हो सकती है तथा कई बार फिलिंग के नीचे ही कीड़ा लग जाता है यदि फिलिंग पुरानी हो गई है तो अवश्य ही चेक करानी चाहिए-

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दांत दर्द और मुहं की बदबू का घरेलू उपचार

Upcharऔर प्रयोग-

27 जून 2017

दांत दर्द और मुहं की बदबू का घरेलू उपचार

By With 3 टिप्‍पणियां:
दांत एवं मुंह की बदबू(Mouth stench)से पीड़ित व्यक्ति का जीवन कष्टमय होता है उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता है हमेशा अपनों के बीच में ही उसे शर्मिंदी उठानी पड़ती है और लोग उसके पास बैठने से कतराते रहते है तो आप बिलकुल भी परेशान न हो आप नीचे दिए मंजन को एक बार बनाएं और दांत दर्द(Toothache)या फिर मुंह की बदबू(Mouth stench)से हमेशा के लिए छुटकारा पायें आपके जीवन में ये दन्त-मंजन एक नवीन संचार भर देगा-

दांत दर्द और मुहं की बदबू का घरेलू उपचार

सामग्री-

बड़ी इलायची के बीज(Large cardamom seeds)-10 ग्राम
लवंग(Cloves)-10 ग्राम
दाल चीनी(Cinnamon)-10 ग्राम
काली मिर्च(Black pepper)-10 ग्राम
नौसादर(salt ammoniac) -10 ग्राम
भुनी हुयी फिटकरी(Roasted alum)-10 ग्राम
काला नमक(Black Salt) -30 ग्राम
माजूफल(Gallnut) -10 ग्राम

उपरोक्त सभी सामग्री को कूट-पीस कर एक कर ले और अंत में कपूर की एक टिक्की पीसकर इसमें मिक्स करके फिर छान कर एक शीशी जिसमे हवा प्रवेश न कर सके रख ले अगर किसी को दांत में ठंडा या गर्म लग रहा हो या फिर दांत में दर्द(Toothache)हो या मुख से बदबू(Stench of Mouth) आती हो तो दिन में दो बार दन्त मंजन करने से कुछ ही दिन में ठीक हो जायेगा तथा फिर किसी दवा की आवश्यकता नहीं होगी-

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क्या आपके दांत पीले है तो करें घरेलू उपचार

Upcharऔर प्रयोग-

पायरिया से परेशान है तो करे ये उपाय

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पायरिया(Pyorrhea)दाँतों की एक गंभीर बीमारी होती है जो दाँतों के आसपास की मांसपेशियों को संक्रमित करके उन्हें हानि पहुँचाती है दांतों की साफ सफाई में कमी होने से जो बीमारी सबसे जल्दी होती है वो है पायरिया-सांसों की बदबू, मसूड़ों में खून और दूसरी तरह की कई परेशानियां भी होती है जाड़े के मौसम में पायरिया(Pyorrhea)की वजह से ठंडा पानी पीना भी बहुत मुश्किल हो जाता है और पानी ही क्यों कभी-कभी तो हवा भी आपके दांतों को सिहरा देता है-

पायरिया से परेशान है तो करे ये उपाय

जो लोग खाना खाने के बाद दांतों की सफाई ठीक ढंग से नहीं करते हैं उनको पायरिया जैसी घातक बीमारी होने की संभावना हो सकती है मुंह से गंदी बदबू आना, दांतों में दर्द और मसूड़ों में सूजन और खून आना पायरिया(Pyorrhea)के लक्षण भी हो सकते हैं अगर पायरिया को रोका ना गया तो इस बीमारी की वजह से आपके पूरे दांत गिर सकते हैं-

कई लोग ब्रश तो अच्‍छी तरह से कर लेते हैं मगर जब बात जीभ को साफ करने की आती है तो वह उसे ऐसे ही छोड़ देते हैं जिससे मुंह में बैक्‍टीरिया पनपने लगते हैं यह भी पायरिया(Pyorrhea) होने का एक बड़ा कारण है-

पायरिया(Pyorrhea)का आयुर्वेदिक उपचार-


1- नीम की पत्‍तियों को धो कर छाया में सुखा लें और फिर उसे एक बर्तन में रख कर जला लें और जब पत्‍तियां जल जाएं तब बर्तन को ढंक दें और फिर कुछ देर के बाद राख में आप सेंधा नमक मिला लें अब इस मिश्रण को शीशी में भर कर लख लें और चूर्ण बना कर दिन तीन चार बार मंजन करें-

2- 200 मिलीलीटर अरंडी का तेल,5 ग्राम कपूर और 100 मिलीलीटर शहद को अच्छी तरह मिला दें और इस मिश्रण को एक कटोरी में रखकर उसमे नीम के दातुन को डुबोकर दाँतों पर मलें और ऐसा कई दिनों तक करें-आपके लिए यह पायरिया को दूर करने के लिए एक उत्तम उपचार है-

3- प्याज के टुकड़ों को तवे पर गर्म कीजिए और दांतों के नीचे दबाकर मुंह बंद कर लीजिए इस प्रकार 10-12 मिनट में लार मुंह में इकट्ठी हो जाएगी फिर आप उसे मुंह में चारों ओर घुमाइए तथा फिर निकाल फेंकिए इस प्रकार आप दिन में चार-पांच बार आठ-दस दिन करें आपका पायरिया जड़ से खत्म हो जाएगा तथा दांत के कीड़े भी मर जाएंगे और मसूड़ों को भी मजबूती प्राप्त होगी-

4- सूखे मसाले जीरा,सेंधा नमक, हरड़, दालचीनी, दक्षिणी सुपारी को समान मात्रा में लें अब इसे बंद बर्तन में जलाकर पीस लें तथा इस मंजन का नियमित प्रयोग करें-

5- चुटकी भर सादा नमक चुटकी भर हल्दी में चार पांच बुंद सरसों का तेल मिला कर उंगली से दांतों पर लगाकर 20 मिनट तक रखें और लार आने पर थूकते रहें-

6- काली मिर्च काली मिर्च के चूरे में थोडा सा नमक मिला कर दाँतों पर मलने से भी पायरिया के रोग से छुटकारा पाने के लिए काफी मदद मिलती है-

7- कच्‍चा अमरूद कच्चे अमरुद पर थोडा सा नमक लगाकर खाने से भी पायरिया के उपचार में सहायता मिलती है क्योंकि यह विटामिन सी का उम्दा स्रोत होता है जो दाँतों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है-

8- आंवला जलाकर सरसों के तेल में मिलाएं अब आप इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें तथा खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं-

पायरिया(Pyorrhea)में तम्बाखू मंजन का प्रयोग-


सामग्री-

सादी तम्बाकू- 50 ग्राम
सेंधा नमक - 25 ग्राम
फिटकरी - 25 ग्राम

सबसे पहले आप तम्बाखू को लेकर तवे पर काला होने तक भूनें और फिर पीसकर कपडे से छान कर महीन चूर्ण कर लें तथा सेंधा नमक और फिटकरी बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और तीनों को मिलाकर तीन बार छान लें ताकि ये सभी पावडर एक साथ मिल जाएँ अब इस मिश्रण को थोड़ी मात्रा में हथेली पर रखकर इस पर नीबू के रस की पांच से छ: बूँदें टपका दें और अब इससे दाँतों व मसूढ़ों पर लगाकर हल्के-हल्के अँगुली से मालिश करें आप यह प्रयोग सुबह और रात को सोने से पहले 10 मिनट तक करके पानी से कुल्ला करके मुँह साफ कर लें-जो लोग तम्बाकू का प्रयोग नहीं करते उन्हें इसके प्रयोग में तकलीफ होगी तथा उन्हें चक्कर आ सकते हैं अत: आप सावधानी के साथ कम मात्रा में मंजन लेकर प्रयोग करें-

पायरिया(Pyorrhea)के लिए एक अन्य प्रयोग-


सामग्री-

गंधक रसायन- 5 ग्राम
आरोग्यवर्धिनी बटी - 5 ग्राम
कसीस भस्म - 5  ग्राम
शुभ्रा(फिटकरी) भस्म- 5 ग्राम
सोना गेरू- 10  ग्राम
त्रिफला चूर्ण-  20 ग्राम (उपरोक्त ये सभी दवाए आप आयुर्वेदिक दवा खाने से ले)

उपरोक्त सभी सामग्री को आप घोंट करके मिला लीजिये तथा इस पूरी दवा की बराबर वजन की कुल आप इक्कीस पुड़िया बना लीजिये फिर सुबह-दोपहर-शाम को एक-एक पुड़िया एक कप पानी में घोल कर मुंह में भर कर जितनी देर रख सकें रखिये फिर उसे निगल लीजिये-

अन्य प्रयोग-


1- अनार के छिलके पानी मे डाल कर खूब खौला कर ठंडा कर लें -इस पानी से दिन मे तीन चार बार कुल्ले करें-इससे मुंह की बदबू से बहुत जल्द छुटकारा मिल जाएगा -

2- बादाम के छिलके तथा फिटकरी को भूनकर फिर इनको पीसकर एक साथ मिलाकर एक शीशी में भर दीजिए-इस मंजन को दांतों पर रोजाना मलने से पायरिया रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है-

3- पायरिया होने पर कपूर का टुकड़ा पान में रखकर खूब चबाने और लार एवं रस को बाहर निकालने से पायरिया रोग खत्म होता है-

4- एक गिलास गर्म पानी में 5 से 6 बूंद गर्म पानी में लौंग का तेल मिलाकर प्रतिदिन गरारे व कुल्ला करने से पायरिया रोग नष्ट होता है-

    पायरिया से बचाव और सावधानियाँ-


    1- दिन में दो बार दाँतों को सही और नियमित रूप से ब्रश करना बहुत ज़रूरी होता है तथा शरीर में मौजूद विषैले तत्वों के निकालने के लिए पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें और आप विटामिन सी युक्त फल, जैसे कि आंवला, अमरुद, अनार, और संतरे का भी सेवन भरपूर मात्रा में करें-

    2- पायरिया के इलाज के दौरान रोगी को मसाले रहित उबली सब्ज़ियों का ही सेवन करें-

    3- मसालेदार खान पान,जंक फ़ूड और डिब्बाबंद आहार का सेवन बिल्कुल भी न करें-

    4- चीज़ और दूध के अन्य उत्पादनों का सेवन बिल्कुल भी न करें क्योंकि इनका दाँतों से चिपकने का खतरा होता है और जीवाणुओं के बढ़ने में सहायता करते हैं-

    5- धूम्रपान और तम्बाकू के सेवन से भी बचें क्योंकि यह पायरिया की बीमारी को बढाते हैं-

    6- पायरिया रोग से पीड़ित रोगी को कभी-भी चीनी,मिठाई या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए-
    Upcharऔर प्रयोग-

    दांतों के मवाद का घरेलू उपचार क्या है

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    दांतों में पस(Teeth Pus)पड़ने का मुख्य कारण मसूड़ों में लन और टूटे हुए दांत के कारण होता है दांतों में पस(Teeth Pus)मुख्य रूप से एक प्रकार का संक्रमण होता है जो मसूड़ों और दांतों की जड़ों के बीच होता है इसके कारण दांत के अंदर पस बन जाता है जिसके कारण दांत में दर्द होता है- 

    दांतों के मवाद का घरेलू उपचार क्या है

    जिस दांत में पस(Teeth Pus)हो जाता है उसमें बैक्टीरिया प्रवेश कर जाता है और वही बढ़ता रहता है जिससे उन हड्डियों में संक्रमण हो जाता है जो दांतों को सहारा देती हैं यदि समय पर इसका उपचार नहीं किया गया तो इसके कारण जीवन को खतरा हो सकता है

    दांतों में पस(Teeth Pus)होने के कारण जो दर्द होता है वह असहनीय होता है तथा इस दर्द को रोकने के लिए लोग कई तरह के उपचार करते हैं परंतु अंत में दर्द बढ़ जाता है और यदि आप भी मसूड़ों की इस बीमारी से ग्रसित हैं तो आपको क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं इस पर थोडा प्रकाश डालने से पहले आपको इस बीमारी के लक्षण तथा कारण पहचानने होंगे-

    दांतों में पस के कारण-


    दांतों में पस होने का मुख्य कारण है मसूड़ों की बीमारी तथा मुंह की सफाई ठीक से न करना- आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होना भी दांतों में पस होने का एक कारण है तथा टूटा हुआ दांत मसूड़ों में सूजन और जलन दांतों में संक्रमण बैक्टीरिया कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा चिपचिपे पदार्थ अधिक मात्रा में खाने से भी होता है-

    आप जब भी कुछ खाएं तो संक्रमित जगह पर दर्द होना तथा सुजन होकर मवाद पड़ जाना भी इसका कारण है संवेदनशील दांत मुंह में गंदे स्वाद वाले तरल पदार्थ का स्त्राव साँसों में बदबू मसूड़ों में लालिमा और दर्द होना तथा अस्वस्थ महसूस करना मुंह खोलने में तकलीफ होना प्रभावित क्षेत्र में सूजन का होना-

    दांतों में पस(Teeth Pus)होने पर उपचार-


    1- लहसुन बैक्टीरिया को मारने के लिए एक प्राकृतिक हथियार है कच्चे लहसुन का रस संक्रमण को मारने में मदद करता है यदि वास्तव में यदि आपके दांत में बहुत अधिक दर्द हो रहा हो तो फिर आप ऐसा कर सकते हैं कि कच्चे लहसुन की एक कली लें और इसे पीसें और निचोड़कर इसका रस निकालें तथा इस रस को मसूड़े के उस प्रभावित क्षेत्र पर लगायें-यह घरेलू उपचार दांत के दर्द में जादू की तरह काम करता है-

    2- लौंग का तेल भी संक्रमण रोकने में सहायक होता है तथा दांतों के दर्द में तथा मसूड़ों की बीमारी में अच्छा उपचार है आप थोड़ा सा लौंग का तेल लें तथा तथा इस तेल से धीरे-धीरे ब्रश करें-जब आप प्रभावित क्षेत्र में इसे लगायें तो अतिरिक्त सावधानी रखें इस पर बहुत अधिक दबाव न डालें तथा अपने मसूड़ों पर धीरे धीरे मालिश करें अन्यथा अधिक दर्द होगा या फिर आप अपनी ऊँगली से मसूड़ों पर लौंग के तेल की कुछ मात्रा लगायें तथा धीरे धीरे मालिश करें-

    3- आईल पुलिंग यह एक घरेलू उपचार बहुत ही सहायक है इसमें आपको सिर्फ नारियल के तेल की आवश्यकता होती है आप एक टेबलस्पून(चम्मच)नारियल का तेल लें और इसे अपने मुंह में चलायें बस इसे निगले नहीं तथा इसे लगभग 30 मिनिट तक अपने मुंह में रखें रहें फिर आप इसे थूक दें और मुंह धो लें-आपको निश्चित रूप से आराम मिलेगा-

    4- दांत के दर्द में पेपरमिंट आईल जादू की तरह काम करता है आप अपनी उँगलियों के पोरों पर कुछ तेल लें तथा इसे धीरे धीरे प्रभावित क्षेत्र पर मलें इससे आपको दांत के दर्द से तुरंत आराम मिलेगा-

    5- दांतों में पस होने पर ऐप्पल सीडर विनेगर(सेब का सिरका)एक अन्य प्रभावशाली उपचार है चाहे वह प्राकृतिक हो या ऑर्गेनिक, यह बहुत अधिक प्रभावशाली है-एक टेबलस्पून ऐप्पल सीडर विनेगर लें-इसे कुछ समय के लिए अपने मुंह में रखें और फिर इसे थूक दें-इसे निगलें नहीं- इससे प्रभावित क्षेत्र रोगाणुओं से मुक्त हो जाएगा-इससे सूजन भी कम होती है-

    चमकते सफेद दांतों के लिए क्‍या करें और क्‍या न करें-


    आप जितना मुश्किल समझते है उससे कहीं ज्‍यादा आसान होता है दांतों की सफेदी और चमक को बरकरार रखना जानिए कैसे-दांतों की सही तरीके से देखभाल करने से न सिर्फ दांत का स्‍वस्‍थ रहना आवश्यक है बल्कि उनकी चमक को भी बरकरार रखना जरुरी है आइये इस बारे में आपको कुछ टिप्‍स बताते है-

    आप क्‍या न करें-


    1- बेकिंग सोडा के ज्‍यादा सेवन या इस्‍तेमाल से बचाव करें-पहले तो आपको इसके इस्‍तेमाल से दांत सफेद और चमकदार लग सकते है लेकिन बाद में दांतों में पीलापन आ जाता है-

    2- आप ज्‍यादा गाढ़े रंग वाले फलों या खाद्य सामग्रियों के सेवन से बचें जैसे-सोया सॉस, मरिनारा सॉस आदि दांतों पर दाग छोड़ देते है-नूडल आदि खाने से परहेज करें-

    3- आप बहुत ज्‍यादा मात्रा में एनर्जी ड्रिंक न पिएं-इसमें मिला हुआ एसिड दांतों को नुकसान पहुंचाता है और दातों की सफेदी चली जाती है-

    आप क्‍या करें-


    1- आप समय-समय पर अपने ब्रश को बदलते रहें-हर तीन महीने में ब्रश को बदलना सही रहता है-ब्रश अच्‍छी क्‍वालिटी का होना चाहिये ताकि दातों और मसूडों को नुकसान न पहुंचे-

    2- आप अपनी जीभ को भी साफ रखें तथा जब भी ब्रश करें आप अपनी जीभ को साफ करना कतई न भूलें-इससे सांसों में बदबू नहीं आएगी और आपका मुंह फ्रेश रहेगा-

    3- फल को काटकर खाने से बेहतर है कि आप उसे यूं ही खाएं-इससे दांतों में मजबूती आएगी और आपके दांत भी साफ रहेगें तथा स्‍ट्रांग बनेगें-

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    क्या आपके दांतों में भी ठंडा-गर्म की शिकायत है

    By With 1 टिप्पणी:
    इनेमल हमारे दांतों का सुरक्षा कवच होता है जो हमारे दांतो को कठोर चीजों से पूर्णतया सुरक्षा प्रदान करती है जो लोग काफी जोर लगाकर टूथब्रश करते हैं तो उनके दांतों का संवेदनशील(Sensitive)होना भी लाज़मी है और जब किसी कारण से दांतों से इनेमल(Enamel)की कोटिंग हट जाती है तो फिर दांतों में कुछ भी ठंडा या गर्म खाने पर काफी तेज़ की टीस होती है-

    क्या आपके दांतों में भी ठंडा-गर्म की शिकायत है

    दांतों के संवेदनशील(Sensitive)लिए ध्यान रक्खें-


    दांतों में संवेदनशीलता(Sensitivity)की ये समस्या महीने भर से लेकर सालों-साल तक रह सकती है दरअसल संवेदनशील दांतों के पीछे मुंह के बैक्‍टीरिया और प्‍लेग भी कफी हद तक जिम्‍मेदार होते हैं संवेदनशील(Sensitive)दांतों के लिए बाजार में कई खास तरह के टूथपेस्ट(Toothpaste)भी आज मौजूद हैं तो आपको चाहिए कि दातों में ठंडा-गरम लगने पर साधारण टूथपेस्ट की जगह आप इन  टूथपेस्ट का भी उपयोग कर सकते है-

    आप ध्यान रक्खें कि व्हाइटनर युक्त टूथपेस्ट(Whitener Toothpaste)का उपयोग न करें चूँकि ये टूथपेस्ट आपके दांतों पर कठोरता से काम करते हैं जिससे आपकी तकलीफ और भी बढ़ जाती है तथा साथ ही आप हमेशा नरम टूथब्रश(Toothbrush)का सही प्रकार से इस्तेमाल करें ताकी आपके दांतों और मसूढ़ों पर ज्यादा जोर ना पड़े साथ ही ब्रश को भी हल्‍के हल्‍के हाथों से ही दांतों पर चलाएं-

    यदि फिर भी आपको भी दांतों में ठंडा या गरम महसूस होता हो तो आप अपने बचाव के लिये निम्न घरेलू उपचार भी अपना सकते हैं-

    1- सबसे पहले आप के लिए जरुरी है कि आप संवेदनशीलता(Sensitivity)पहुंचाने वाले बहुत ज्‍यादा ठंडा या गरम आहार ना खाएं-

    2- अम्लीय खाद्य पदार्थ जैसे फलों के रस, शीतल पेय, सिरका, रेड वाइन, चाय, आइसक्रीम और अम्लीय खट्टे फल टमाटर, सलाद ड्रेसिंग और अचार आदि न खाएं और अगर आप इन्‍हें खाते भी हैं तो फिर खाने के बाद में टूथब्रश कर लें चूँकि ये आहार आपके दांतों के इनेमल को घिस देते हैं

    3- आप अधिक चीनी युक्‍त आहार न खाएं क्‍योंकि यह दांतों में बड़ी ही तेजी के साथ लगती है आप ऐसे आहारों को पहचाने जो आपके दांतों में लगते हैं उनसे दूर ही रहने का प्रयास करें- 

    4- हल्‍के गरम पानी में दो चम्‍मच नमक डालकर घोल बनाएं अब इस घोल से सुबह और रात को सोने से पहले कुल्‍ला करें-यह एक आयुर्वेदिक उपचार है जो काफी काम आता है- 

    5- एक चम्‍मच सरसों के तेल में एक छोटा चम्‍मच सेंधा नमक मिलाएं अब आप इस मिश्रण से दांतों और मसूढ़ों की हल्‍के-हल्‍के हाथों की उँगलियों से मसाज करें कम-से कम ऐसा आप पांच मिनट अवश्य ही करे फिर आप साफ़ जल से कुल्ला करें-

    6- यदि आपको जादा ही संवेदनशीलता(Sensitivity)है तो आप दिन में दो बार एक-एक चम्मच काले तिल को अवश्य पूरे मुंह में चबाते हुए घुमाएं इससे संवेदनशीलता में काफी आराम मिलता है-

    7- तिल, सरसों का तेल और नारियल का तेल तीनो का एक-एक चम्मच करके अच्छी तरह मिला लें तथा इस तेल से दांतों और मसूड़ों की मसाज करें-उसके बाद गुनगुने पानी से मुंह साफ कर लें-कुछ दिन ऐसा करने पर आपको खुद ही फर्क नजर आने लगेगा-

    8- जब आपके दांतों डेंटीन की परत भी खत्म हो जाए और नस बाहर आ जाए तो फिर आपको रूट कैनाल कराना पड़ता है या फिर जब दांत में कीड़ा गहरा सुराख कर देता है और संक्रमण जड़ों तक फैल जाता है तो रूट कैनाल किया जाता है जिन टिश्यू में संक्रमण हो जाता है फिर उन्हें स्टरलाइज्ड करके दांत में एक मैटीरियल भर दिया जाता है इसमें दांत ऊपर से पहले जैसा ही रहता है लेकिन दांत की रक्त आपूर्ति काट दी जाती है इससे दांत में किसी भी तरह की बीमारी या संक्रमण की आशंका समाप्त हो जाती है-

    9- डेंटीन(दंत धातु)के बाहर आ जाने पर फिलिंग करना जरूरी हो जाता है। फिलिंग न कराने पर दांत में ठंडा-गरम व खट्टा-मीठा लगता रहता है जिससे दांत में दर्द होने लगता है और पस बन जाती है दांतों में तात्कालिक, सिल्वर, कंपोजिट, जीआईसी फिलिंग करवा सकते हैं लेकिन डॉक्टर स्थिति देखने के बाद ही निर्णय लेते हैं कि कौन-सी फिलिंग करनी है-


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