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28 अप्रैल 2017

थायराइड मरीज का डाईट चार्ट कैसा होना चाहियें

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लाइफ स्‍टाइल और खान-पान में अनियमितता बरतने के कारण ही लोगों को थायराइड(Thyroid)की समस्‍या होती है यदि अगर शुरूआत में ही खानपान का ध्‍यान रखा जाए तो थायराइड की समस्‍या होने की संभावना बहुत ही कम होती है थायराइड मरीज Diet Chart कैसा हो हम आपको उसकी जानकारी देते हैं-

थायराइड मरीज का डाईट चार्ट कैसा होना चाहियें

संक्षिप्त परिचय-


ये थायराइड(Thyroid)बहुत ही आवश्‍यक ग्रंथि है यह ग्रंथि गले के अगले-निचले हिस्‍से में होती है थायराइड(Thyroid)को साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्‍योंकि इसका लक्षण एक साथ नही दिखता है अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो आदमी की मौत हो सकती है यह ग्रंथि होती तो बहुत छोटी है लेकिन हमारे शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में इसका बहुत योगदान होता है-

Thyroid-थाइराइड एक प्रकार की इंडोक्राइन ग्रंथि(Indokrain gland) है जो कुछ हार्मोन के स्राव के लिए जिम्‍मेदार होती है यदि थाइराइड ग्रंथि अच्‍छे से काम करना बंद कर दे तो शरीर में कई समस्‍यायें शुरू हो जाती हैं शरीर से हार्मोन का स्राव प्रभावित हो जाता है लेकिन यदि Thyroid-थायराइड ग्रंथि कम या अधिक सक्रिय हो तब भी शरीर को प्रभावित करती है-

थायराइड(Thyroid)मरीज डाईट चार्ट-


1- आप अपनी डाइट चार्ट में ऐसे खाद्य-पदार्थों को शामिल कीजिए जिसमें आयोडीन(Iodine)की भरपूर मात्रा हो क्‍योंकि आयोडीन की मात्रा थायराइड फंक्‍शन(Thyroid Function)को प्रभावित करती है-

2- समुद्री जीवों में सबसे ज्‍यादा आयोडीन(Iodine)पाया जाता है समुद्री शैवाल, समुद्र की सब्जियों और मछलियों में आयोडीन की भरपूर मात्रा होती है-

3- कॉपर और आयरन(Iron) युक्‍त आहार के सेवन करने से भी थाडायराइड फंक्‍शन(Thyroid Function) में बढ़ोतरी होती है-काजू, बादाम और सूरजमुखी के बीज में कॉपर की मात्रा होती है और हरी और पत्‍तेदार सब्जियों में आयरन की भरपूर मात्रा होती है-

4- पनीर और हरी मिर्च तथा टमाटर थायराइड गंथि(Thyroid Gland)के लिए फायदेमंद हैं-

5- थायराइड मरीज को विटामिन और मिनरल्‍स युक्‍त आहार खाने से थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि होती है और प्‍याज, लहसुन, मशरूम में ज्‍यादा मात्रा में विटामिन पाया जाता है थायराइड मरीज(Thyroid Patients)को इसका सेवन अवश्य ही करना चाहिए-

6- कम वसायुक्‍त आइसक्रीम और दही का भी सेवन थायराइड के मरीजों के लिए फायदेमंद है गाय का दूध भी थायराइड के मरीजों को पीना चाहिए-

7- थायराइड मरीज के लिए नारियल का तेल(coconut oil) भी थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि करता है नारियल तेल का प्रयोग सब्‍जी बनाते वक्‍त भी किया जा सकता है-

थायराइड(Thyroid)के रोगी क्या न खायें-


1- सोया और उससे बने खाद्य-पदार्थों का सेवन बिलकुल मत कीजिए- जंक और फास्‍ट फूड(Junk and fast foods) भी थायराइड ग्रंथि को प्रभावित करते हैं- इसलिए फास्‍ट फूड को अपनी आदत मत बनाइए-

2- ब्राक्‍कोली, गोभी जैसे खाद्य-पदार्थ थायराइड फंक्‍शन को कमजोर करते हैं-

3- थायराइड के मरीजों को डाइट चार्ट का पालन करना चाहिए साथ ही नियमित रूप से योगा और एक्‍सरसाइज भी जरूरी है नियमित व्‍यायाम करने से भी थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि होती है थायराइड की समस्‍या बढ़ रही हो तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए-

4- जहाँ तक हो सके तो थायराइड में होम्योपैथी की दवा का सहारा लेना चाहिए- इससे जहां कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है वहीं इसके प्रभाव के बाद मरीज को जिंदगी भर दवा की जरूरत नहीं पड़ती-

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थायराइड की जांच आप कब कराये

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प्रत्येक व्यक्ति को पैंतीस वर्ष के बाद प्रत्येक पांच वर्षों में  एक बार स्वयं के थायराइड ग्रंथि(Thyroid gland)की कार्यकुशलता की जांच अवश्य ही करवा लेनी चाहिए खासकर उन लोगों में जिनमें इस समस्या के होने की संभावना अधिक हो उन्हें अक्सर जांच करवा लेनी चाहिए-

थायराइड की जांच आप कब कराये

हायपो-थायराईडिज्म(Haypo-Thayraidijm) महिलाओं में 60  की उम्र को पार कर जाने पर अक्सर देखा जाता है जबकि हायपर-थायराईडिज्म 60 से ऊपर की महिलाओं और पुरुषों दोनों में  ही पाया जा सकता है- हाँ ,दोनों ही स्थितियों में रोगी  का  पारिवारिक इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू होता है-

थायराइड(Thyroid)नेक-टेस्ट क्या है-


आईने में अपने गर्दन के सामने वाले हिस्से पर अवश्य गौर करें और यदि आपको कुछ अलग सा महसूस हो रहा हो तो चिकित्सक से अवश्य ही परामर्श लें-अपनी गर्दन को पीछे की और झुकायें और थोड़ा पानी निगलें और कॉलर की हड्डी के ऊपर एडम्स-एप्पल से नीचे कोई उभार नजर आये तो इस प्रक्रिया को एक दो बार दुहरायें और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें-

थायराइड(Thyroid)की समस्या को कैसे जाने-


यदि आपके चिकित्सक को आपके थायराइड(Thyroid)ग्रंथि से सम्बंधित किसी समस्या से पीड़ित होने का शक उत्पन्न होता है तो आपके रक्त की जांच ही एकमात्र   सरल उपाय है -

टी .एस .एच  (थायराइड-स्टिमुलेटिंग-हारमोन ) के स्तर की जांच इस में महत्वपूर्ण मानी जाती है - टी .एस .एच. - एक मास्टर हार्मोन  है जो थायराईड ग्रंथि(Thyroid gland) पर अपना नियंत्रण बनाए रखता है  यदि टी. एस .एच .का स्तर अधिक है तो इसका मतलब है आपकी थायराइड ग्रंथि कम काम (हायपो-थायराडिज्म ) कर रही है   और इसके विपरीत  टी. एस .एच  का स्तर कम होना थायराइड ग्रंथि के हायपर-एक्टिव होने (हायपर-थायराईडिज्म) की स्थिति की और इंगित करता  है चिकित्सक इसके अलावा आपके रक्त में थायराइड हारमोन टी .थ्री .एवं टी .फोर . की जांच भी करा सकते है-

Hashimoto-Disease के कारण उत्पन्न Hypothyroidism-


हायपो-थारायडिज्म का एक प्रमुख कारण हाशिमोटो-डिजीज होता है यह एक ऑटो-इम्यून-डीजीज है जिसमें शरीर खुद ही थायराइड ग्रंथि को नष्ट करने लग जाता है जिस कारण  थायराइड(Thyroid)ग्रंथि “थायराक्सिन” का निर्माण नहीं कर पाती है-इस रोग का पारिवारिक इतिहास भी मिलता है -

Hypothyroidism के अन्य कारण-


पीयूष ग्रंथि (PITUITARY GLAND) टी. एस .एच (थायराइड-स्टिमुलेटिंग-हारमोन) को उत्पन्न करती है जो थायराइड की कार्यकुशलता के लिए जिम्मेदार होता है अतः पीयूष ग्रंथि (PITUITARY GLAND)के पर्याप्त मात्रा में  टी. एस .एच  उत्पन्न न कर पाने के कारण भी हायपो-थायराईडिज्म उत्पन्न हो सकता है इसके अलावा Thyroid-थायराइड ग्रंथि पर प्रतिकूल असर डालने वाली दवाएं भी इसका कारण हो सकती हैं -

Graves Disease के कारण हायपर-थायराईडिज्म-


हायपर-थायराईडिज्म का एक प्रमुख कारण ग्रेव्स डीजीज होता है यह भी एक ऑटो-इम्यून डीजीज है जो थायराइड ग्रंथि पर हमला करता है  इससे थायराइड ग्रंथि से “थायराक्सिन” हार्मोन का निर्माण बढ़ जाता है और हायपर-थायराईडिज्म की स्थिति पैदा हो जाती है जिसकी पहचान व्यक्ति की आँखों को देखकर की जा सकती है जो नेत्रगोलक से बाहर की ओर निकली सी प्रतीत होती हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन होना

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आधुनिक जीवन में व्यक्ति अनेक चिंताओं से ग्रसित है जैसे परिवार की चिंताएँ तथा आपसी स्त्री-पुरुषों के संबंध या आत्मसम्मान को बनाए रखना कि लोग क्या कहेंगे आदि अनेक चिंताओं के विषय हैं और इन्ही तनावग्रस्त जीवन शैली से थायराइड(Thyroid)का रोग बढ़ रहा है आज हम इसी गहन विषय को लेकर थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन(Imbalance of thyroid glands)पोस्ट आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे है-

थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन होना

व्यक्तिगत जीवन की चिंताएँ जैसे बच्चों का भविष्य-महँगाई में जीवन जीना- आतंक वाद तथा आपसी परिवार में संबंध आदि अनेक बातें व्यक्ति को चिंताओं से घेरे हुए हैं किशोरों की भी चिंताएँ हैं जैसे उनको माताओं से डर है कि कभी डायरियाँ, कॉपियाँ, एस एम एस न पढ़ लें तथा किशोरियों को वजन बढ़ने की चिंताएँ- किशोर मित्र(Boyfriend)बनाए रखने की चिंताएँ, सौंदर्य(Beauty)निखारने के लिए साधनों की प्राप्ति की चिंताएँ आदि चिंताएँ आत्मिक शक्ति को कम करती हैं ब़ड़ी आयु के लोग आने वाले बुढ़ापे से चिंतित हैं कई लोग स्वास्थ्य और भविष्य के प्रति चिंतित हैं ये सब लोग किसी न किसी रूप से मानसिक स्तर पर चिंतित हैं तो कुछ इनके विपरीत मिला जुला वर्ग है- जो कि आलस्य प्रेमी है-

अधिकतर ऊँचे तकिए लगाकर सोने या टी वी देखने- किताब पढ़ने से भी पीनियल(Pineal)और पिट्यूटरी ग्रंथियों(Pituitary glands) के कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जो Thyroid Glands-थायराइड ग्रन्थि पर परोक्ष रूप से दिखाई देता है इन स्थितियों में हाइपो थायराइड रोग होने की आशंका है-

यदि आपके वजन में अचानक घटने या बढ़ने जैसा परिवर्तन सामने आ रहा हो तो यह थायराइड ग्रंथि(Thyroid Gland)से समबन्धित समस्या की ओर आपका ध्यान दिला सकता है तथा वजन का अचानक बढ़ जाना थायरोक्सिन हार्मोन(Thyroxine hormone) की कमी(हायपो-थायराईडिज्म)के कारण उत्पन्न हो सकता है इसके विपरीत यदि "थायरोक्सिन" की आवश्यक मात्रा से अधिक  उत्पत्ति होने से(हायपर-थायराईडिज्म )की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसमें अचानक वजन कम होने लग जाता है  इन दोनों ही स्थितियों में  से हायपो-थायराईडिज्म एक आम समस्या के रूप में  सामने आता है-

थायरॉयड ग्रंथि(Thyroid Glands)से असंतुलन से होने वाले रोग-

अल्प स्राव (Hypothyrodism)-


Low secretion से शारीरिक व् मानसिक वृद्धि मंद हो जाती है -बच्चों में इसकी कमी से CRETINISM नामक रोग हो जाता है-12 से 14 वर्ष के बच्चे की शारीरिक वृद्धि 4 से 6 वर्ष के बच्चे जितनी ही रह जाती है-

ह्रदय स्पंदन एवं श्वास की गति मंद हो जाती है हड्डियों की वृद्धि रुक जाती है और वे झुकने लगती हैं तथा मेटाबालिज्म की क्रिया मंद हो जाती हैं  शरीर का वजन बढ़ने लगता है एवं शरीर में सुजन भी आ जाती है-

सोचने व बोलने की क्रिया मंद पड़ जाती है त्वचा रुखी हो जाती है तथा त्वचा के नीचे अधिक मात्रा में वसा एकत्र हो जाने के कारण आँख की पलकों में सूजन आ जाती है-शरीर का ताप कम हो जाता है और बाल झड़ने लगते हैं तथा ” गंजापन ” की स्थिति आ जाती है-

थायरायड ग्रंथि(Thyroid gland)का अतिस्राव-


शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है  ह्रदय की धड़कन व् श्वास की गति बढ़ जाती है तथा अनिद्रा, उत्तेजना तथा घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं शरीर का वजन कम होने लगता है-

कई लोगों की हाँथ-पैर की उँगलियों में कम्पन उत्पन्न हो जाता है  गर्मी सहन करने की क्षमता कम हो जाती है मधुमेह रोग(Diabetes)होने की प्रबल सम्भावना बन जाती है-घेंघा रोग(Goitre)उत्पन्न हो जाता है तथा शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है-

पैराथायरायड ग्रंथियों(Parathyroid glands)का असंतुलन-


पैराथायरायड ग्रंथियां पैराथार्मोन हार्मोन(Paratharmon hormones)स्रवित करती हैं यह हार्मोन रक्त और हड्डियों में कैल्शियम व् फास्फोरस की मात्रा को संतुलित रखता है इस हार्मोन की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं तथा जोड़ों के रोग भी उत्पन्न हो जाते हैं-

थायराइड होने पर क्या लक्षण होते हैं

पैराथार्मोन(Paratharmon)की अधिकता से रक्त से हड्डियों का कैल्शियम तेजी से मिलने लगता है फलस्वरूप हड्डियाँ अपना आकार खोने लगती हैं तथा रक्त में अधिक कैल्शियम(calcium)पहुँचने से गुर्दे की पथरी भी होनी प्रारंभ हो जाती है-

नोट-

थायरायड के कई टेस्ट हैं जैसे - T -3 , T -4 , FTI , तथा TSH -इनके द्वारा थायरायड ग्रंथि की स्थिति का पता चल जाता है लेकिन कई बार थायरायड ग्रंथि में कोई विकार नहीं होता परन्तु पियुष ग्रंथि के ठीक प्रकार से कार्य न करने के कारण थायरायड ग्रंथि को उत्तेजित करने वाले हार्मोन -TSH (Thyroid Stimulating hormone) ठीक प्रकार नहीं बनते और थायरायड से होने वाले रोग लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं-

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27 अप्रैल 2017

योग द्वारा थायराइड चिकित्सा कैसे करें

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थायराइड(Thyroid)की योग चिकित्सा के लिए आप सबसे पहले किसी जानकार योगाचार्य से सम्पर्क करे और कुछ दिन उनके सानिध्य में रह कर सभी प्रणायाम को सही तरीके से सीख ले फिर आप इसे स्वयं भी कर सकते है यदि आप इन बताये गए प्रणायाम का विधिवत प्रयोग करते है तो यकीन जानिये कि थायरायड(Thyroid)से आपको अवश्य मुक्ति मिल जायेगी ये सभी प्राणायाम प्रातः नित्यकर्म से निवृत्त होकर खाली पेट ही करें-

योग द्वारा थायराइड चिकित्सा कैसे करें

उज्जायी प्राणायाम(Uzzayi Pranayama)-


सबसे पहले आप पद्मासन या सुखासन में बैठकर आँखें बंद कर लें और अपनी जिह्वा को तालू से सटा दें अब कंठ से श्वास को इस प्रकार खींचे कि गले से ध्वनि व् कम्पन उत्पन्न होने लगे-इस प्राणायाम को दस से बढाकर बीस बार तक प्रति-दिन करें-

नाड़ीशोधन प्राणायाम(Nadhishodn Pranayama)-


कमर-गर्दन सीधी रखकर एक नाक से धीरे-धीरे लंबी गहरी श्वास लेकर दूसरे स्वर से निकालें फिर उसी स्वर से श्वास लेकर दूसरी नाक से छोड़ें आप 10 बार यह प्रक्रिया करें-

ध्यानयोग(Yoga meditation)-


इसमें आप आँखें बंद कर मन को सामान्य श्वास-प्रश्वास पर ध्यान करते हुए मन में श्वास भीतर आने पर 'सो' और श्वास बाहर निकालते समय 'हम' का विचार 5 से 10 मिनट करें-

ब्रह्ममुद्रा(Brhmmudra)-


वज्रासन में या कमर सीधी रखकर बैठें और गर्दन को 10 बार ऊपर-नीचे चलाएँ- दाएँ-बाएँ 10 बार चलाएँ और 10 बार सीधे-उल्टे घुमाएँ-

मांजरासन(Manjrasn)-


चौपाये की तरह होकर गर्दन-कमर ऊपर-नीचे 10 बार चलाना चाहिए-

उष्ट्रासन(Ustrasana)-


घुटनों पर खड़े होकर पीछे झुकते हुए एड़ियों को दोनों हाथों से पकड़कर गर्दन पीछे झुकाएँ और पेट को आगे की तरफ उठाएँ इस तरह 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

शशकासन(Shashcasn)-


वज्रासन में बैठकर सामने झुककर 10-15 बार श्वास -प्रश्वास करें-

मत्स्यासन(Mtsyasn)-


वज्रासन या पद्मासन में बैठकर कोहनियों की मदद से पीछे झुककर गर्दन लटकाते हुए सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन से स्पर्श करें और 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

सर्वांगासन(Srwangasn)-


पीठ के बल लेटकर हाथों की मदद से पैर उठाते हुए शरीर को काँधों पर रोकें इस तरह 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

भुजंगासन(Bhujangasan)-


पीठ के बल लेटकर हथेलियाँ कंधों के नीचे जमाकर नाभि तक उठाकर 10- 15 श्वास-प्रश्वास करें-

धनुरासन(Dhanurasana)-


पेट के बल लेटकर दोनों टखनों को पकड़कर गर्दन, सिर, छाती और घुटनों को ऊपर उठाकर 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

शवासन(Shavasana)-


पीठ के बल लेटकर, शरीर ढीला छोड़कर 10-15 श्वास-प्रश्वास लंबी-गहरी श्वास लेकर छोड़ें तथा 30 साधारण श्वास करें और आँखें बंद रखें-


नोट- किसी योग्य योग शिक्षक से सभी आसन की जानकारी ले के ही करे-

थायरायड की एक्युप्रेशर(Accupressure)चिकित्सा-


एक्युप्रेशर चिकित्सा के अनुसार थायरायड व् पैराथायरायड के प्रतिबिम्ब केंद्र दोनों हांथो एवं पैरों के अंगूठे के बिलकुल नीचे व् अंगूठे की जड़ के नीचे ऊँचे उठे हुए भाग में स्थित हैं-

थायरायड के अल्पस्राव की अवस्था में इन केन्द्रों पर घडी की सुई की दिशा में अर्थात बाएं से दायें प्रेशर दें तथा अतिस्राव की स्थिति में प्रेशर दायें से बाएं(घडी की सुई की उलटी दिशा में)देना चाहिए-इसके साथ ही पियुष ग्रंथि के भी प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर भी प्रेशर देना चाहिए-

विशेष-


प्रत्येक केंद्र पर एक से तीन मिनट तक प्रतिदिन दो बार प्रेशर दें-पियुष ग्रंथि के केंद्र पर पम्पिंग मैथेड(पम्प की तरह दो-तीन सेकेण्ड के लिए दबाएँ फिर एक दो सेकेण्ड के लिए ढीला छोड़ दें)से प्रेशर देना चाहिए-

आप किसी एक्युप्रेशर चिकित्सक से संपर्क करके आप उन केन्द्रों को एक बार समझ सकते है और फिर स्वयं भी कर सकते है-

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26 अप्रैल 2017

थायरायड की प्राकृतिक चिकित्सा कैसे करें

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आज थायरायड(Thyroid)की प्राकृतिक चिकित्सा के लिए हम आज आपको आहार-चिकित्सा ठंडा-गर्म सेक और स्नान तथा गले पर मिट्टी द्वारा किए गए उपचार से अवगत करायेगें इस पोस्ट को समझ कर आप ये घरेलू उपचार स्वयं भी कर सकते है थायरायड(Thyroid)चिकित्सा के दौरान आप किस-किस चीज का परहेज करे ये भी बताएगें-

थायरायड की प्राकृतिक चिकित्सा कैसे करें

आहार चिकित्सा(Diet therapy)-


थायरायड रोगी सादा सुपाच्य भोजन,मट्ठा,दही,नारियल का पानी,मौसमी फल, ताज़ी  हरी साग-सब्जियां, अंकुरित गेंहूँ, चोकर सहित आंटे की रोटी को अपने भोजन में अवस्य ही शामिल करें-

क्या करें परहेज-


मिर्च-मसाला,तेल,अधिक नमक, चीनी, खटाई, चावल, मैदा, चाय, काफी, नशीली वस्तुओं, तली-भुनी चीजों, रबड़ी,मलाई, मांस, अंडा जैसे खाद्यों से परहेज रखें-अगर आप सफ़ेद नमक (समुन्द्री नमक) खाते है तो उसे तुरन्त बंद कर दे और सैंधा नमक ही खाने में प्रयोग करे- सिर्फ़ और सिर्फ सैंधा नमक ही खाए सब जगह-

गले की गर्म-ठंडी(Warm-cold)सेंक के लिए-


एक गर्म पानी की रबड़ की थैली, गर्म पानी, एक छोटा तौलिया, एक भगौने में ठण्डा पानी आदि व्यवस्था करें-

कैसे करें-

सर्वप्रथम रबड़ की थैली में गर्म पानी भर लें -ठण्डे पानी के भगौने में छोटा तौलिया डाल लें-गर्म सेंक बोतल से एवं ठण्डी सेंक तौलिया को ठण्डे पानी में भिगोकर-निचोड़कर निम्न क्रम से गले के ऊपर गर्म-ठण्डी सेंक करें -

3 मिनट गर्म -1 मिनट ठण्डी
3 मिनट गर्म -1 मिनट ठण्डी
3 मिनट गर्म -1 मिनट ठण्डी
3 मिनट गर्म -3 मिनट ठण्डी

इस प्रकार कुल 18 मिनट तक यह उपचार करें-आप इसे दिन में दो बार प्रातः और सांय कर सकते हैं-

गले की पट्टी लपेट उपचार-


एक सूती मार्किन का कपडा, लगभग 4 इंच चौड़ा एवं इतना लम्बा कि गर्दन पर तीन लपेटे लग जाएँ और इतनी ही लम्बी एवं 5-6 इंच चौड़ी गर्म कपडे की पट्टी लें-

कैसे करें-

सर्वप्रथम सूती कपडे को ठण्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें तत्पश्चात गले में लपेट दें इसके ऊपर से गर्म कपडे की पट्टी को इस तरह से लपेटें कि नीचे वाली सूती पट्टी पूरी तरह से ढक जाये -इस प्रयोग को रात्रि सोने से पहले आप 45 मिनट के लिए करें-

गले पर मिटटी कि पट्टी-


आप जमीन से लगभग तीन फिट नीचे की साफ मिटटी की व्यवस्था करें और एक गर्म कपडे का टुकड़ा रख ले-

कैसे करें-

लगभग चार इंच लम्बी व् तीन इंच चौड़ी एवं एक इंच मोटी मिटटी की पट्टी को बनाकर गले पर रखें तथा गर्म कपडे से मिटटी की पट्टी को पूरी तरह से ढक दें - इस प्रयोग को दोपहर को 45 मिनट के लिए करें-

विशेष-

आप मिटटी को 6-7 घंटे पहले पानी में भिगो दें- तत्पश्चात उसकी लुगदी जैसी बनाकर पट्टी बनायें-

मेहन स्नान(Mehn bath)-


कैसे करें-

आप सबसे पहले एक बड़े टब में खूब ठण्डा पानी भर कर उसमें एक बैठने की चौकी रख लें-ध्यान रहे कि टब में पानी इतना न भरें कि चौकी डूब जाये और अब आप उस टब के अन्दर चौकी पर बैठ जाएँ तथा पैर टब के बाहर एवं सूखे रहें फिर एक सूती कपडे की डेढ़-दो फिट लम्बी पट्टी लेकर अपनी जननेंद्रिय के अग्रभाग पर लपेट दें एवं बाकी बची पट्टी को टब में इस प्रकार डालें कि उसका कुछ हिस्सा पानी में डूबा रहे-अब इस पट्टी को जिसे आपने जननेंद्रिय पर लपेटा था-टब से पानी ले-लेकर लगातार भिगोते रहें-इस प्रयोग को पांच से दस मिनट तक करें- तत्पश्चात शरीर में गर्मी लाने के लिए 10-15 मिनट तेजी से टहलें-

थायरायड  के लिए हरे पत्ते वाले धनिये(Coriander leaf)की ताजा चटनी बना कर एक बडा चम्मच एक गिलास पानी में घोल कर पीना चाहिए-ये एक दम ठीक हो जाएगा-बस धनिया देसी हो उसकी सुगन्ध अच्छी हो-

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गर्भावस्था में आप क्या खाए

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माँ बनने की सुखद अनुभूति सिर्फ एक माँ ही जान सकती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अपने गर्भ में पलते शिशु के लिए आपको जरुरी सभी पोषक तत्व मिल सकेंगे इसलिए ये यह जरुरी है कि आप ये भी जाने कि गर्भावस्था(Pregnancy)में क्या खाए-

गर्भावस्था में आप क्या खाए

गर्भावस्था में कैसा हो आहार-


1- आपको गर्भावस्था(Pregnancy)के दौरान कुछ और अधिक कैलोरी की भी ज़रूरत होगी-गर्भावस्था में सही आहार का मतलब है कि आप क्या खा रही हैं न कि ये कि आप कितना खा रही हैं सबसे पहले आप जंक फूड का सेवन सीमित मात्रा में करें-क्योंकि इसमें केवल कैलोरी(Calories) ज्यादा होती है और पोषक तत्व कम या न के बराबर होते हैं-

2- आपका आहार शुरुआत से ही ठीक नहीं है तो यह और भी महत्वपूर्ण है कि आप अब स्वस्थ आहार खाएं- आपको अब और अधिक विटामिन और खनिज- विशेष रूप से फॉलिक एसिड(Folic acid)और आयरन(iron) की जरूरत है-

3- आपको मलाईरहित (Skimmed) दूध, दही, छाछ, पनीर लेना चाहिए क्युकि इन खाद्य पदार्थों में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी -12 की उच्च मात्रा होती है अगर आपको लैक्टोज असहिष्णुता है या फिर दूध और दूध से बने उत्पाद नहीं पचते हैं तो अपने खाने के बारे में अपने डॉक्टर से अवश्य बात करें-

4- अगर आप मांस नहीं खाती हैं तो शाकाहारीयों को प्रोटीन के लिए प्रतिदिन 45 ग्राम मेवे और 2/3 कप फलियों की आवश्यकता होती है एक अंडा, 14 ग्राम मेवे या ¼ कप फलियां लगभग 28 ग्राम मांस, मुर्गी या मछली के बराबर मानी जाती हैं-

5- आप खासकर पानी और ताजा फलों के रस का अवश्य सेवन करे- ये भी सुनिश्चित करें कि आप साफ उबला हुआ या फ़िल्टर किया पानी ही पियें तथा घर से बाहर जाते समय अपना पानी साथ लेकर जाएं या फिर प्रतिष्ठित ब्रांड का बोतल बंद पानी ही पीएं क्युकि अधिकांश रोग जलजनित विषाणुओं की वजह से ही होते हैं आप डिब्बाबंद जूस का सेवन कम ही करें-क्योंकि इनमें बहुत अधिक चीनी होती है-

6- घी, मक्खन. नारियल के दूध और तेल में संतृप्त वसा(Saturated fat)की उच्च मात्रा होती है जो की अधिक गुणकारी नहीं होती है तथा वनस्पति घी में ट्रांसफैट अधिक होती है अत: वे संतृप्त वसा की तरह ही शरीर के लिए अच्छी नहीं हैं-वनस्पति तेल(Vegetable oil)वसा का एक बेहतर स्त्रोत है क्योंकि इसमें असंतृप्त वसा(Unsaturated fats)अधिक होती है।

7- अपने गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए आपको अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन शामिल करने की आवश्यकता है-

8- आपको कितना भोजन करने की जरुरत है इस बात का सर्वोत्तम संकेत आपकी अपनी भूख है और हो सकता है आप पाएं कि भोजन की मात्रा आपकी गर्भावस्था के दौरान बदलती रहती है-

9- ये हो सकता है पहले कुछ हफ्तों में आपको समुचित भोजन करने की इच्छा न हो जबकि विशेष तौर पर यदि आपको मिचली या या उल्टी हो रही है यदि ऐसा हो तो आप कोशिश करें की दिन भर में छोटी मात्रा में-लेकिन कई बार कुछ भोजन करती रहें-अपनी गर्भावस्था के मध्य हिस्से में आपको पहले की तरह ही भूख लग सकती है या फिर भूख में कुछ बढ़ोतरी भी हो सकती है और हो सकता है आप सामान्य से अधिक खाना चाहें-गर्भावस्था के अंत में आपकी भूख संभवत: बढ़ जाएगी और यदि आपको अम्लता, जलन या खाने के बाद पेट भारी सा महसूस होता है तो आपके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर छोटा-छोटा भोजन करना सही रहेगा तथा जब भूख लगे तब खाएं आप ज्यादा कैलोरी युक्त कम पोषण वाले व्यंजनों की बजाय स्वस्थ भोजन चुनें-

10- कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनसे गर्भावस्था के दौरान आपको दूर रहना चाहिए ये आपके शिशु के लिए असुरक्षित साबित हो सकते हैं जैसे-अपाश्च्युरिकृत दूध और इससे बने डेयरी उत्पादों का सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं है क्यूंकि इनमें ऐसे विषाणुओं के होने की संभावना रहती है जिनसे पेट के संक्रमण और तबियत खराब होने का खतरा रहता है-

11- गर्भावस्था के समय विषाक्त भोजन आपको बहुत बीमार कर सकता है क्योंकि संक्रमण के प्रति आप अधिक संवेदनशील होती हैं-कहीं बाहर खाना खाते समय भी पनीर से बने व्यंजनों जैसे टिक्का और कच्चे पनीर के सैंडविच आदि के सेवन से बचें क्योंकि पनीर ताजा है या नहीं आपको यह बता पाना मुश्किल हो सकता है-

12- सफेद, फफुंदीदार पपड़ी वाली चीज़ जैसे ब्री और कैमेम्बर्ट या फिर नीली (ब्लू वेन्ड)चीज़- इसके अलावा भेड़ या बकरी आदि के दूध से बनी अपाश्च्युरिकृत मुलामय चीज से भी दूर रहें-इन सभी तरह की चीज़ में लिस्टीरिया जीवाणु होने का खतरा रहता है जिससे लिस्टिरिओसिस(Listeriosis)नामक संक्रमण हो सकता है- यह संक्रमण आपके अजन्मे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है-

13- कच्चा या अधपका मांस- मुर्गी और अंडे-इन सभी में हानिकारक जीवाणु होने की संभावना रहती है इसलिए सभी किस्म के मांस को तब तक पकाएं-जब तक कि उनसे सभी गुलाबी निशान हट जाएं-अंडे भी सख्त होने तक अच्छी तरह पकाएं-

14- डिब्बाबंद मछली अक्सर नमक के घोल में संरक्षित करके रखी जाती हैं और अधिक नमक शरीर में पानी के अवधारण की वजह बन सकता है-इसलिए डिब्बाबंद मछली का पानी अच्छी तरह निकाल दें और प्रसंस्कृत मछली का सेवन कभी-कभी ही करें

15- गर्भावस्था में अत्याधिक शराब पीने से बच्चों में शारीरिक दोष, सीखने की अक्षमता और भावनात्मक समस्याएं पैदा हो सकती हैं-इसलिए यदि आप एल्कोहल का सेवन करती भी है तो गर्भावस्था के दौरान शराब छोड़ देनी चाहिए-

16- ध्यान रखें कि सभी महिलाओं में एक समान वजन नहीं बढ़ता है अपनी गर्भावस्था में आपका वजन कितना बढ़ता है यह कई कारणों पर निर्भर करता है इसलिए स्वस्थ आहार खाने की ओर ध्यान दें-स्टार्चयुक्त कार्बोहाइड्रेट, फल और सब्जियों, प्रोटीन की उचित मात्रा और दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन करें- वसा और शर्करा का कम मात्रा में उपभोग करें-

17- गर्भावस्था में जब आपका वजन बढ़ता है तो इसके साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि वजन कितनी मात्रा में बढ़ा है ये भी हो सकता है पहली तिमाही में आपका वजन कुछ ज्यादा नहीं बढ़े तथा फिर दूसरी तिमाही में इसमें निरंतर वृद्धि होनी चाहिए और तीसरी तिमाही में आपका वजन सबसे अधिक बढ़ता है-क्योंकि गर्भ में आपका शिशु भी सबसे ज्यादा इसी तिमाही में बढ़ता है-यदि आपका वजन 90 किलोग्राम से अधिक या 50 किलोग्राम से कम है तो आपकी डॉक्टर एक विशेष आहार की सलाह दे सकती है-

18- ये भी हो सकता है की आपको भूख न हो, परन्तु यह संभावना है कि आपका शिशु भूखा हो इसलिए हर चार घंटे कुछ खाने की कोशिश करनी चाहिए तथा कभी-कभी सुबह या फिर सारे दिन की मिचली, कुछ खाद्य पदार्थों को नापसंद करना, अम्लता या अपच के कारण खाना खाने में मुश्किल हो सकती है इसलिए आप दिन में तीन बार बड़े भोजन करने की बजाय पांच या छह बार कम मात्रा में भोजन का सेवन करने की कोशिश करें- आपके शिशु को नियमित रूप से आहार की जरूरत है और आपको अपनी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने की जरूरत है तो कोशिश करें की सही समय पर खाना ज़रूर खाएं- उच्च फाइबर और पूर्ण अनाज के भोजन खाने से आपका पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ रहेगा और ये अधिक पौष्टिक भी होंगे-

19- आप गर्भवती हैं इसलिए आपको अपने सभी पंसदीदा खाद्य पदार्थ छोड़ने की आवश्यकता नहीं है परन्तु प्रसंस्कृत(PROCESSED)या अत्याधिक तला हुआ भोजन एवं स्नैक्स तथा चीनी से भरे मिष्ठान आपके आहार का मुख्य हिस्सा नहीं होने चाहिए-आईसक्रीम की बजाय एक केला खाएं अथवा कैलोरियों से भरपूर जलेबी की जगह बादाम या केसर का दूध पीएं-यदि आपको कभी-कभी चॉकलेट या गुलाब जामुन खाने का मन हो-तो संकोच न करें बल्कि उसके हर एक निवाले का आनंद भी लें-


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25 अप्रैल 2017

बच्चों-को सही दस्त नही होने पर क्या करें

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कभी-कभी माता के अनुचित आहार-विहार के कारण बच्चों का दूध दूषित हो जाता है जिससे छोटे बच्चों की पाचन शक्ति खराब होकर वायु विकारयुक्त हो जाती है इससे बच्चों का मल का सूख जाना(Constipation in children)अथवा सही दस्त का अभाव पेट में दर्द गुडगुडाहट उल्टी आदि होते है और छोटा बच्चा रोते-रोते बेहाल हो जाता है छोटे बच्चे को होने वाले मल में गेंद जैसे गोल-गोल तथा छोटे-छोटे ढेले होते है-

बच्चों-को सही दस्त नही होने पर क्या करें

इस अवस्था को संस्थम्भी कब्ज(Constipated constipation)कहते है तथा बच्चों को इस अवस्था में बहुत तेज दर्द होता है जिसके कारण वह अपने मल को रोक लेते है और उन्हे कब्ज की शिकायत हो जाती है 

आपके बच्चे भी एक छोटे व्यस्क है इसलिए उन्हें भी वयस्कों के रूप में ही व्यवहार करना चाहिए बच्चों को कब्ज़ समान है इसलिए माता-पिता को दवाइयों की सहायता नहीं लेनी चाहिए इसकी बजाय कई तुरंत घरेलू उपाय हैं जिनसे कब्ज में आराम दिलाया जा सकता है और परिणामस्वरुप दवाइयां खाने के बजाए माता-पिता अपने बच्चों को विभिन्न घरेलू उपचार से इस समस्या से निजात दिला सकते हैं-

क्या उपाय करें-


1- नीम के तेल का फ़ाहा गुदा मार्ग में लगाने से भी बच्चों का मलावरोध दूर हो जाता है-

2- रात को बीज निकाला हुआ छुहारा पानी में भिगो दें और सुबह उसे पानी में मसल कर निचोड लें तथा छुहारे को फ़ेंक दें तथा वह पानी बच्चे को आवश्यकता के अनुसार देने से मलावरोध दूर हो जाता है-

3- बडी हरड को पानी के साथ पत्थर पर घिसकर उसमें मूंग के दाने के बराबर काला नमक डालें तथा उसे गुनगुना गरम करके बच्चे को एक चम्मच दिन में तीन बार देने से मलावरोध दूर हो जाता है-

4- जैतून का तेल वसा का सबसे अच्छा स्रोत के नाम से जाने जाने वाला जैतून के तेल का स्वस्थ भोजन में योगदान नकारा नहीं जा सकता है इसलिए यह बच्चों की कब्ज से लड़ सकता है जैतून का तेल खाने में तेल या मक्खन की जगह ले सकते हैं यही सही रुप में या मलाशय की गति को ठीक करता है और बच्चों सुलभ मल त्यागने में सहायता करता है ये बड़े लोगों के लिए भी लाभदायक है-

5- वसायुक्त खाना बच्चों के नियमित शौच के लिए अत्यंत जरुरी है इस प्रकार के भोजन में आप सेब, गाजर, मिला सकते हैं

एक छीली हुई गाजर
एक छीली हुआ सेब
एक मुट्ठी नट्स
एक संतरे का रस
एक संतरा
½ कप दुध

फूड प्रोसेसर में सारी वस्तुओं को मिलाकर मुलायम होने तक चलाएं आप यदि चाहे जो कुछ चीनी भी मिला सकते हैं आप इसे बच्चों को पीने को दें जमा हुआ मल आसानी से निकल जाएगा आप चाहे तो अपने बच्चों को नियमित भी दें सकते है-


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