क्या आपके Toothpaste-टूथपेस्ट में नमक है

Toothpaste


क्या आपके Toothpaste-टूथपेस्ट में नमक है

हम भारतवासी हमेशा से विदेशी प्रोडक्ट के मोहताज बनते रहे है हमारे बुजुर्ग पहले जब Toothpaste की जगह नमक, नीम्बू, कोयले, नीम, बबूल, शीशम या किसी पेड़ की दातुन से अपने दांत साफ़ करते थे तब उनके दांत आज के लोगों की अपेक्षा जादा मजबूत हुआ करते थे आपने सुना होगा किसी-किसी के दांत पूरी आयु होने पर भी सही-सलामत रहा करते थे -

Toothpaste-टूथपेस्ट बनाने वाली कम्पनी आपसे पूछ रही है-


क्या कभी आपका ध्यान इस बात पर गया ? क्या पहले के लोग बेवकूफ थे ? क्या आज हम विदेशी प्रोडक्ट से अपने दांतों की पूर्ण सुरक्षा ले पा रहे है ? ये सवाल आपको अपने आप से करना है ? आप हर उस चीज के पीछे दौड़ लेते हो जिसका प्रचार प्रसार टी वी विज्ञापन से होता है ? आज Toothpaste-टूथपेस्ट बनाने वाली कम्पनी आपसे ही सवाल कर रही है ? क्या आपके टूथ पेस्ट में चारकोल हैं ? क्या आपके Toothpaste-टूथ पेस्ट में नमक है ?

आखिर बन गए न बेवकूफ जो विदेशी हमको अनपढ़-गंवार कहते थे आज चारकोल ढूढ रहे है ? अब इतने दिनों बाद इन कम्पनियों को समझ आया कि बढ़िया Toothpaste-टूथपेस्ट में नमक चाहिए-मेरा उद्देश्य किसी की आलोचना नहीं है मगर आज के भटके हुए युवा वर्ग का मार्गदर्शन है-युवावर्ग पढ़ा-लिखा होकर भी अपने ऋषियों के बताये मार्ग से भटक गया है-

ये हमारे ऋषियों की परम्परा है-


विदेशी कंपनिया हैं जो अब अपना Toothpaste ये कह कर बेच रही हैं हमारे प्रोडक्ट नमक, नीम, नीम्बू या चारकोल हैं-अरे अब उनको कौन बतलाये कि हमारे पूर्वज तो कब से इस रहस्य को जानते थे मगर तब उन्होंने हमको ये कह कर मुर्ख बनाया कि हम लोग कोयले से नमक से, नीम से, या नीम्बू से दांत को घिसते हैं और अब कोई उनसे ये पूछे कि अब दांत घिसने का ठेका उन कम्पनियों ने लिया है -

मूर्खताओं से बाहर आयें-



  1. सिर्फ हिन्दुस्तान ही है जहाँ ये विदेशी कम्पनियां हमको उल्लू बनाती है और हम पक्छिमी सभ्यता के इतने दीवाने है कि आँख बंद करके इनकी बातों में आ जाते है -
  2. आपने शायद ही कभी सोचा हो कि पहले हमारे यहाँ डॉक्टर वैध्य हकीम की जनसँख्या बहुत कम थी तब लोग स्वस्थ हुआ करते थे आज इनकी संख्या लाखों में है तो करोड़ों लोग किसी न किसी बिमारी के शिकार है-आपने शायद ही कभी इस कारण को जानने का प्रयास किया हो- हाँ -भला आपको समय कहाँ है सोचने का ?
  3. किसी ने सच ही कहा है मुर्ख बनाने की जरुरत नहीं है यहाँ तो बने-बनाये मिल जाते है बस कोई बनाने वाला चाहिए -
  4. हमें याद है आज से 50 साल पहले कानपुर में था इतना बड़ा शहर और नामचीन डेंटिस्ट थे सिर्फ सात-आठ -आज तो डेंटिस्ट ही डेंटिस्ट हैं और देशी से विदेशी कम्पनियो के उत्पादों की भरमार हैं फिर भी ना तो हमारे दांत स्वस्थ हैं ना ही हमारे बच्चो के- तो क्या हम ऊपर से ये लिखवा के लाये हैं कि हम हमेशा से बेवकूफ थे और बेवकूफ ही रहेंगे-
  5. भ्रस्टाचार कमीशन खोरी की जंग-भगवान् कहे जाने डॉक्टर को इतना लग गया है कि आज वो भी विदेशी कम्पनियों के प्रोडक्ट की सलाह देते नजर आते है-क्युकी सबसे जादा कमीशन वही से आता है-
  6. मान लो आप किसी कारण से बीमार हो गए और आप डॉक्टर को दिखाने गए तो उन मेडिकल के पैड पे दवा लिखी जाती है जो सिर्फ वही मिले मेडिकल वाला पर्चा देखते ही समझ जाता है कि डॉक्टर साहब की साझेदारी का पर्चा है और पक्का हो गया कमीशन-ये कमीशन 10 प्रतिशत से शुरू होकर 30 प्रतिशत तक का हो सकता है और ये बड़ी इमानदारी से दिया जाता है आखिर मेडिकल वाले ने दूकान जो खोल रक्खी है उसके बच्चे भी तो है-लेकिन आपको पता है दो रूपये में निर्मित होने वाली दवा आप के पास दस रूपये की पंहुचती है-सारा कमीशन तंत्र है- चाहे दवा का कमीशन हो या जांच का -
  7. विदेशी कम्पनियों के बहुत Toothpaste सेहत के लिए ऐसे घातक है के ये धीरे धीरे आपको मौत के मुह में ले कर जाते है आप अपने साथ अपने नौनिहालों को भी ये स्लो पाइजन दे रहे है ये विदेशी कम्पनियां अपने प्रोडक्ट को अपने ही देशों में नहीं बेच पाती है क्युकि इन के अंदर जो केमिकल है वो घातक है इसलिए वहां की सरकारें इन पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं और ये कंपनिया खुद भी मानती हैं के अगर कोई आदमी या बच्चा ये निगल ले तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए क्यों के इससे कैंसर तक हो सकता हैं फिर भी हम इन Toothpaste को अपने बच्चों को दिए जा रहे है-


सोचो समझो जागो -बस यही सन्देश है -बाकी आपकी मर्जी 


नई पोस्ट के लिए आप हमारी नई वेवसाईट पर देखे - 

Read More »

दांतों की बेहतरी के लिए-Betterment Of Teeth

दांतों की बेहतरी के लिए-Betterment Of Teeth

अगर आप अपने दाँतो की अच्छे से Care नहीं करते तो दाँतो एवं मसूडों में होने वाली Diseases आपके दाँतो को समय से पहले Finished कर सकते हैं कुछ बहुत ही Simple से तरीकों से आपके दाँत आपके साथ बहुत Long time तक रह सकते हैं आइये जानते है दांतों की बेहतरी के लिए-Betterment Of Teeth क्या करें-

दांतों की बेहतरी के लिए-Betterment Of Teeth

दांतों की बेहतरी के लिए-Betterment Of Teeth क्या करें-

हम सबके मुंह में हमेशा लाखों Bacteria रहते हैं जिनका कि एक ही लक्ष्य होता है कि किसी तरह से कोई कड़ी सतह मिल जाए तो उस पर जाकर चिपक जाएँ और फिर एक बड़ा समूह बना लें-यह प्रक्रिया साल के 365 दिन, और चौबीसों घंटे हमारे मुंह में होती रहती है और इस Process को रोका नहीं जा सकता क्योंकि ये बैक्टीरिया हमारे शरीर का एक हिस्सा हैं जब ये बेक्टीरिया कड़ी सतह यानी हमारे दाँतो पर चिपकते हैं तो एक अदृश्य सतह, जिसको कि प्लेक कहते हैं हमारे दांतों के चारों ओर बना देते हैं आपने शायद सुबह को उठकर अपने दाँतो पर जीभ फिराते हुए कभी उस प्लेक को महसूस भी किया हो-

सबसे जरुरी है कि आप अपने दाँतो को दिन में कम से कम दो बार लगभग दो मिनट या इससे ज्यादा ब्रश करना चाहिए-ब्रश सभी दांतों के आगे पीछे सभी जगह करना चाहिए और जीभ को भी साफ़ रखना चाहिए-

सोने से पहले ब्रश करना सबसे ज्यादा Beneficial रहता है दिन में मुँह में रहने वाली राल भी हमारे दांतों को बचाती है जबकि रात में हमारा मुह सूखा रहता है और फंसा हुआ खाना उनको नुकसान पहुंचाता है अगर किसी कारण कभी आप रात में ब्रश न कर पाए तो आपको पानी से जोरदार कुल्ला जरूर करना चाहिए-

हमारे दाँतो की सभी सतहो तक ब्रश नहीं पहुँच पाता है दो दांतों के बाच की जगह में फंसा खाना दांतों को बहुत ही नुक्सान पहुंचाता है इसको निकालने के लिए बहुत ही पतले धागे का इस्तेमाल किया जाता है जिसको फ्लोस करना कहते हैं पुराने ज़माने में लोग खाना खाने के बाद दांत को कुरेदना अच्छा मानते थे-ऐसा करना दांतों के साथ मसूडो को भी बहुत फायदा पहुंचाता है-

मुँह को स्वस्थ रखने के लिए जीभ को साफ़ करना भी उसी तरह जरूरी है जैसे दाँतो को साफ़ करना जबकि हम अक्सर जीभ (Tongue) की तरफ ध्यान नहीं देते हैं मुँह में बदबू, मसूडों या जीभ पर जमी मैल के कारण ही होती है-आपकी साफ़ जीभ आपके दाँतो और मसूडो को तो स्वस्थ रखती ही है साथ ही साथ ये आपकी साँस को भी Freshness प्रदान करती है-

Snacks खाने से जितना बच सकें बचना चाहिए क्यूंकि Snacks में प्रयुक्त मसाले बहुत जल्दी ही दांतों में प्लेक को बनने  में मदद करते हैं जिससे जल्दी ही दाँतो में Cavity हो जाती है-

चॉकलेट (Chocolate)खाने से बचना चाहिए-चीज़ और दूध स्वस्थ दांतों के लिए अच्छे होते हैं- मीठा कम खाना चाहिए-Green vegetables खानी चाहियें -सोडा या जूस के स्थान पर पानी पीना चाहिए क्योंकि फलों के जूस में भी Acids and sugar होते हैं जो कि दांतों को नुक्सान पहुंचाते हैं-

आज कल करीब 90 फीसदी लोगों को दांतों से जुड़ी कोई न कोई बीमारी या परेशानी होती है लेकिन ज्यादातर लोग बहुत ज्यादा दिक्कत होने पर ही Dentist के पास जाना पसंद करते हैं इससे कई बार छोटी बीमारी सीरियस बन जाती है अगर सही ढंग से साफ-सफाई के अलावा हर 6 महीने में रेग्युलर चेकअप कराते रहें तो दांतों की ज्यादातर बीमारियों को काफी हद तक Serious बनने रोका जा सकता है-

दांतों में ठंडा-गरम लगना, कीड़ा लगना(कैविटी) ,पायरिया(मसूड़ों से खून आना) ,मुंह से बदबू आना और दांतों का Discolouration होना जैसी बीमारियां सबसे कॉमन हैं-

Read More »

नींद लाने का आयुर्वेदिक प्रयोग-Ayurvedic Sleepiness

नींद लाने का आयुर्वेदिक प्रयोग-Ayurvedic Sleepiness

सर्पगंधा(Rauvolfia serpentina)की जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं ले पाते हैं जिस घर के अहाते में सर्पगंधा का पौधा लगा हो वहां विषैले जीव-जंतु प्रवेश नहीं करते है ये पौधा विषैले जीवों का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है इसके प्रभाव से सांप, बि'छू दूर भागते हैं यह जहां उगता है वहां जहरीले सर्प नहीं रहते है वैसे भी गर्मी के दिनों में बिच्छू अधिक निकलते हैं जिसके डंक से आदमी की हालत बिगड़ जाती है लेकिन इस पौधे को लगाकर इनसे बचा जा सकता है-

नींद लाने का आयुर्वेदिक प्रयोग-Ayurvedic Sleepiness

हमारे भारतवर्ष में जड़ी-बूटियों का खजाना है इसमें मानव को स्वस्थ रखने की पूरी क्षमता है इसी में एक नाम है सर्पगंधा-औषधियों में सर्पगन्धा एक प्रमुख औषधि है भारत में इसके प्रयोग का इतिहास 3000 वर्ष पुराना है सर्पगन्धा के पौधे की ऊँचाई 6 इंच से 2 फुट तक होती है इसकी प्रधान जड़ प्रायः 20 से. मी. तक लम्बी होती है इसकी जड़ में कोई भी शाखा नहीं होती है 

सर्पगन्धा के नाम से ज्ञात होता है कि यह सर्प के काटने पर दवा के नाम पर प्रयोग में आता है सर्प काटने के अलावा इसे बिच्छू काटने के स्थान पर भी लगाने से राहत मिलती है इस पौधे की जड़, तना तथा पत्ती से दवा का निर्माण होता है सर्पगंधा को आयुर्वेद में निद्राजनक कहा जाता है-इस पौधों को गमला में भी लगाया जा सकता है इसके तने को रोपने से ये पौधा लग जाता है-

इसके दो-तीन साल पुराने पौधे की जड़ को उखाड़ कर किसी सूखे स्थान पर रखते है तथा इससे जो दवाएँ निर्मित होती हैं इनका उपयोग उच्च रक्तचाप, गर्भाशय की दीवार में संकुचन के उपचार में किया जाता हैं इसकी पत्ती के रस को निचोड़ कर आँख में दवा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है इसका उपयोग मस्तिष्क के लिए औषधि बनाने के काम आता है अनिद्रा, हिस्टीरिया और मानसिक तनाव को दूर करने में सर्पगन्धा की जड़ का रस, काफी उपयोगी है-

नींद लाने का आयुर्वेदिक प्रयोग-Ayurvedic Sleepiness

इसकी जड़ भी बहुत उपयोगी मानी जाती है जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या होती है, उनके लिए तो ये जड़ी वरदान है यदि इसकी जड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहें तो इसकी जड़ को खूब बारीक पीसकर कपड़े से छानकर महीन पावडर बना लें अनिद्रा दूर कर नींद लाने के लिए इसे 2 ग्राम मात्रा में सोने से घण्टेभर पहले ठण्डे पानी के साथ ले लेना चाहिए-

अगर आप अनिद्रा के रोगी हैं तो रात को सोने के समय 1/4 छोटा चम्मच सर्पगंधा की जड़ का पावडर घी के साथ मिला कर खा लें आपको नींद आ जायेगी-खांसी वाले रोगियों की अनिद्रा में भी यह लाभदायक है-

सर्पगंधा का प्रयोग पागलपन की दवा के रूप में भी किया जाता रहा है उन्माद और अपस्मार में जब रोगी बहुत अधिक उत्तेजना का शिकार हो जाता है तो एक ग्राम चूर्ण 250 मि लि० बकरी के दूध के साथ खिलाएं चूर्ण में गुड मिला लें ,यह दिन में दो बार दीजिये -आराम दिखायी देगा-

सावधानी- 

यही मात्रा मानसिक उत्तेजना व उन्माद को शान्त करने के लिए सेवन योग्य है इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए और बहुत कमजोर शरीर वाले व्यक्ति को भी इसका सेवन किसी वैद्य से परामर्श करके ही करना चाहिए-

सर्पगंधा के अन्य औषधीय उपयोग-

सर्पगंधा की जड़े तिक्त पौष्टिक, ज्वरहर, निद्राकर, शामक, गर्भाशय उत्तेजक तथा विषहर होती हैं भारत में प्राचीन काल में सर्पगंधा की जड़ों का उपयोग प्रभावी विषनाशक के रूप में सर्पदंश तथा कीटदंश के उपचार में होता था 

पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में सर्पगंधा की जड़ों का उपयोग उच्च-रक्तचाप, ज्वर, वातातिसार, अतिसार, अनिद्रा, उदरशूल, हैजा आदि के उपचार में होता है-

हांई ब्लड प्रेशर के उपचार हेतु सर्पगंधा एक सर्वोत्तम औषधि मानी जाती है  इसके उपयोग से उच्च रक्तचाप में जादुई कमी आती है तथा नींद भी अच्छी आती है तथा भ्रम आदि मानसिक विकारों में भी आराम मिलता है यदि आपको उपरोक्त तकलीफें हैं तो सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण का आधा छोटा चम्मच दिन में दो या तीन बार सेवन कीजिये आपको अवश्य ही लाभ मिलेगा-

इसका उपयोग वातातिसार एवं हैजा में ईश्वर मूल के साथ, उदरशूल में जंगली अरण्ड के साथ, अतिसार में कुटज के साथ तथा ज्वर में मिरिच तथा चिरायता के साथ किया जाता है-

जड़ का रस अथवा अर्क उच्च-रक्तचाप की बहुमूल्य औषधि है-

जड़ों के अर्क का उपयोग फोड़े-फुन्सियों (pimples & boils) के उपचार में भी होता है- 

जड़ों का अर्क प्रसव पीड़ा के दौरान बच्चे के जन्म को सुलभ बनाने हेतु दिया जाता है- 

जड़ों के अर्क का प्रयोग हिस्टीरीया (hysteria) तथा मिर्गी (epilepsy) के उपचार में भी होता है इसके अतिरिक्त, घबराहट तथा पागलपन के उपचार में भी सर्पगंधा की जड़ों का प्रयोग किया जाता है-

सर्पगंधा की पत्तियों का रस नेत्र ज्योति बढ़ाने हेतु प्रयोग किया जाता है- 

सर्पगंधा का प्रयोग त्वचा बिमारियां जैसे सोरेसिस (psoriasis)तथा खुजली (itching) के उपचार में भी किया जाता है-

परंपरागत रुप से औरतें सर्पगंधा का प्रयोग रोते हुए बच्चों को सुलाने हेतु भी करती हैं-

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में जड़ों से निर्मित औषधियों का उपयोग उच्च-रक्तचाप को कम करने तथा स्वापक के रुप में अनिद्रा के उपचार में किया जाता है-

इसके अतिरिक्त अतिचिन्ता रोग (hypochondria) तथा अन्य प्रकार के मानसिक विकारों के उपचार में भी किया जाता है-

सर्पगंधा से निर्मित औषधियों का प्रयोग एलोपैथ में तन्त्रिकामनोरोग (neuropsychiatrics) वृद्धावस्था से संबद्धरोग, मासिकधर्म मोलिनिमिया (menstrual molinimia)एवं रजनोवृत्ति सिण्ड्रोम(menopausal syndrome) के उपचार में किया जाता है-

सावधानी- यह दवा लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए नहीं है-




Read More »

डायबिटीज मरीज मीठा स्टेविया खाएं-Diabetes Patient eat Sweet Steevia

डायबिटीज मरीज मीठा स्टेविया खाएं-Diabetes Patient eat Sweet Steevia 

डॉक्टर हमेशा शुगर-Diabetes के मरीज को चीनी का सेवन न करने की सलाह देते है और बेचारे मीठे के शौकीन लोग मिठास के लिए तरस जाते है किन्तु अब टेंसन छोड़े और मीठा कैसे खाएं-

डायबिटीज मरीज मीठा स्टीविया खाएं-Diabetes Patient eat Sweet Steevia

जी हाँ अब ये पोस्ट आपके लिए है चलिए आप मीठा खाएं और साथ ही शुगर पर भी नियंत्रण पायें ये मोटापे के लिए भी लाभदायक है जी हाँ स्टेविया नाम का पौधा मधुमेह रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है स्टेविया(Steevia)बहुत मीठा होता है लेकिन शुगर फ्री(sugarfree)होता है-स्टेविया(Steevia)खाने से पैंक्रियाज से इंसुलिन(insulin)आसानी से मुक्त होता है जाने कि डायबिटीज मरीज मीठा स्टेविया खाएं-Diabetes Patient eat Sweet Steevia और इसके लाभ-

मौजूदा समय में शुगर, मोटापा, कैलोरी आदि रोग आम हो चुके है- रोगियों की संख्या भी बढ़ने लगी है और इस रोग से निजात पाने को पीड़ित लोग उपचार के लिए अंग्रेजी दवाओं का सहारा ले रहे है तो दूसरी ओर कई तरह के परहेज कर राहत पाने के प्रयास करते है किन्तु आयुर्वेद में तीनों मर्ज के हरबल प्लांट स्टेविया पौधे का उल्लेख किया गया है जिस पर आयुर्वेद चिकित्सकों को अभी भी विश्वास कायम है उनकी माने तो स्टीविया साइट नाम का एक रसायन होता है जो कि चीनी से तीन सौ गुना अधिक मीठा होता है इसे पचाने से शरीर में एंजाइम नहीं होता और न ही ग्लूकोस की मात्रा बढ़ती है-

What is Stevia -क्या है स्टेविया-

स्टेविया पौधा (Stevia plant)एक शाकीय पौधा है तथा इसको खेत में उगाया जाता है और इसकी पत्तियों का उपयोग होता है आइ एच बी टी ने इसकी सुधरी हुई संकर प्रजातियां विकसित की हैं जिन्हें बीज से उगाया है व्यावसायिक तौर पर इस पौधे की पत्तियों से स्टीवियोसाइड(Stivia Side), रेबाडियोसाइड व यौगिकों के मिश्रण को निष्पादन कर उपयोग में लाया जाता है वैज्ञानिकों ने इसके परिशोधन करने के लिए ऑन विनिमन रेजिन एवं पोलिमेरिक एडजौंरेंट रेजिन(Polimerik Adjunrent resins) प्रक्रियाओं का विकास किया है-

दक्षिण अमेरिका में इस Steevia की उत्पत्ति हुई थी इसके बाद जापान, चीन, ताइवान, थाईलैंड, कोरिया, मैक्सिको, मलेशिया, इंडोनेशिया, तंजानिया, कनाडा व अमेरिका में इसकी खेती की जा रही है भारत में साल 2000 से इसकी व्यावसायिक खेती शुरू हुई थी-इसके पौधे में कई औषधीय व जीवाणुरोधी गुण हैं हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर (आइएचबीटी) ने 2000 में इसका अनुसंधान व शोध कार्य शुरू किया था इसके पत्तों को सीधे उपभोक्ताओं को देना संभव नहीं था इसलिए संस्थान ने इसके ऐसे उत्पाद बाजार में उतारे है जिन्हें सीधे प्रयोग में लाया जा सकता है-

स्टेविया(Steevia) की फसल को बहुवर्षीय फसल के रूप में उगाया जा सकता है लेकिन यह सूखे को सहन नहीं करती है इसको बार-बार सिंचाई की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई के दो या तीन दिन के बाद दूसरी बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है-

ये गन्ने से तीन सौ गुणा अधिक मीठा होने के बावजूद भी स्टेविया पौधे फैट(fat) व शुगर से फ्री(sugar free) है डायबिटीज के मरीजों के लिए अब मीठा खाना जहर नहीं बनेगा बशर्ते वह मीठा खाने के तुरंत बाद आयुर्वेदिक पौधे स्टेविया की कुछ पत्तियों को चबा लें इतना अधिक मीठा होने के बावजूद यह शुगर को कम तो करता ही है साथ ही इसे रोकने में भी सहायक है-खाना खाने से बीस मिनट पहले स्टीविया की पत्तियों का सेवन अत्यधिक फायदेमंद होता है अद्भुत गुणों का संगम आयुर्वेदिक पौधा घर में भी लगाया जा सकता है एक बार लगाया गया पौधा पांच वर्ष तक प्रयोग में लाया जा सकता है यदि रोजाना स्टेविया के चार पत्तों का चाय पत्ती के रूप में सेवन किया जाए तो यह रामबाण की तरह साबित होगा-

स्टेविया उत्पाद(Stevia Products)-

बाजार में स्टेविया यानी मधुरगुणा(Madhurguna)पाउडर डिप पैकेट में उपलब्ध है इसका मूल्य 100 रुपये प्रति पैकेट के लगभग है यह पानी में शीघ्र ही घुल जाता है इसे हिम स्टीविया, जीरो क्लोरीज व स्टीविया स्वीटर के नाम से जाना जाता है इसके अलावा स्टीविया गोलियां भी बाजार में उपलब्ध हैं-

मोटापा(Obesity) भी होगा दूर-

आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार स्टेविया से शुगर के अलावा मोटापे से भी निजात पाई जा सकती है मोटापे के शिकार व्यक्तियों के लिए भी यह पौधा किसी वरदान से कम नहीं है शुगर ही मोटापे का कारण बनती दिखाई दे रही है यदि शुगर न भी हो और इसका सेवन किया जाए तो न ही शुगर होने की कभी नौबत बन पाएगी और न ही मोटापा होगा-

आमतौर पर शुगर के मरीज को मीठा खाने से ग्लूकोस बढ़ता है इसी कारण उसे तकलीफ होती है ऐसे में यदि वह मीठे के स्थान पर स्टीविया का सेवन करता है तो इसमें ग्लूकोस की मात्रा नहीं होती और साथ ही यह मीठे का काम भी करता है ऐसे में इसका सेवन शुगर के रोगियों के लिए लाभकारी साबित होता है-

आज कैलोरी की प्रोबलम भी काफी बढने लगी है ऐसे में भले ही स्टेविया चीनी से अधिक मीठा हो किंतु इसमें ग्लूकोस की मात्रा न होने के चलते इससे कैलोरी के अनियंत्रित होने की संभावना नहीं रहती है यही कारण है कि स्टेविया का मौजूदा समय में कई शुगर फ्री पदार्थो को बनाने के लिए भी प्रयोग किया जाने लगा है-

स्टेविया से लाभ(stevia benefits)-


स्टेविया में शुगर, मोटापा, कैलोरी को दूर करने के अलावा कई खूबियों का वर्णन आयुर्वेद में मिलता है आइये जाने-

शक्कर से 25 गुना ज्यादा मीठा है परंतु ये शक्कर रहित है- इसमें 15 आवश्यक खनिज तथा विटामिन्स होते है तथा पूर्णतया कैलोरी शून्य उत्पाद है इसे पकाया जा सकता है अर्थात इसे चाय, काफी, दूध आदि के साथ उबालकर भी प्रयोग किया जा सकता है-

इसे भी देखे- मधुमेह-Diabetes को बाय-बाय कहें-


मधुमेह रोगियों के लिए सबसे उपयुक्त उत्पाद है क्योकि यह पेनक्रियाज की बीटा कोशिकाओं पर अपना प्रभाव डालकर उन्हें इन्सुलिन तैयार करने में मदद करता है-

दांतो की केवेटीज, बैक्टीरिया, सड़न आदि को भी रोकता है तथा ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है-

इसमें एंटी एजिंग, एंटी डैंड्रफ जैसे गुण पाये जाता है तथा नॉन फर्मन्टेबल होता है-

डायबिटीज(मधुमेह)के सभी पोस्ट यहाँ देखे-


देखे - Amazing Experiment



Read More »

मधुमेह-Diabetes को बाय-बाय कहें-

मधुमेह-Diabetes को बाय-बाय कहें

What is diabetes -सभी जानते है कि मधुमेह- Diabetes एक खतरनाक बीमारी है इसमें blood sugar levels -रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है हमारे द्वारा किया गया भोजन glucose -ग्लूकोज में बदलता है जो एक प्रकार की शर्करा है यही ग्लूकोज हमारे रक्त में मिलकर शरीर की सभी कोशिकाओं में पँहुच जाता है जब आपके रक्त में वसा LDL यानी गंदा कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ जाती है तब रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों तरफ चिपक जाता है फिर खून में मोजूद जो insulin -इन्सुलिन है कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है-



मधुमेह-Diabetes को बाय-बाय कहें-


आपके शरीर का वो इन्सुलिन किसी भी काम में नही आता है जिस कारण जब हम Sugar levels-शुगर लेवल चैक करते हैं शरीर में हमेशा Sugar level-शुगर का स्तर हमेशा ही बढा हुआ होता है क्यूंकि वो कोशिकाओ तक नहीं पंहुंच पाता है वहाँ LDL VLDL -गंदा कोलेस्ट्रोल जमा हुआ है जबकि जब हम बाहर से Insulin-इन्सुलिन लेते है तब वो नया इन्सुलिन तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है इसलिए अगर मधुमेह को कंट्रोल करना है तो आपको कोलेस्ट्रोल को साथ-साथ कंट्रोल करना होगा-रक्त मे गंदा कोलेस्ट्रॉल के तत्व के बढने से मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है- 

Symptoms of diabetes-मधुमेह के लक्षण-

  1. Diabetes -डायबिटीज के रोगी को बार-बार बहुत अधिक प्यास लगती है और अधिक पेशाब आता है तथा उसके पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाता है पेशाब की जगह पर चींटियाँ लग जाती है तथा रोगी का वजन कम होता जाता है-
  2. इस रोग में शुरू में तो भूख बहुत जादा लगती है लेकिन ये धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है तथा शरीर सूखने लगता है और फिर रोगी को कब्ज की शिकायत रहने लगती है-
  3. पत्नी के साथ सम्भोग के समय आपस में रूचि में अंतर आता जाता है या सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है-
  4. Diabetes Patient -डायबिटीज रोगी के शरीर में कहीं भी जख्म या घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता है-
  5. पैरों में सुन्नपन आना, थकान, कमजोरी, शरीर में खुजली का बढ़ जाना, त्वचा रोग होना आदि लक्षण दिखाई देने लगते है-

क्या खाएं-

  1. सबसे पहले अगर आप मोटे है या आपका वजन अधिक है तो आपको मधुमेह जैसी बीमारी में अपने वजन को कंट्रोल में रखना बहुत जरुरी है क्योंकी डायबिटीज ज्यादातर मोटापे की वजह से ही होती है-
  2. यदि आपको डायबिटीज की शिकायत है तो आप अपने जीवन व्यायाम को अपना अभिन्न अंग बना ले क्युकि व्यायाम से आपका मटैबलिज़म ठीक रहता है और डायबिटीज की रिस्क को कम करता है-
  3. आप यदि मधुमेह से पीड़ित है तो अपने खाने में शुगर यानी चीनी का कम से कम इस्तमाल करे या फिर इसे त्याग ही दें इससे शरीर में इन्सुलिन को संतुलित करना आसान होता है-
  4. ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए सफ़ेद चावल,पास्ता,पापकार्न,राईस पफ,वाईट फ्लोर आदि से बचें आपका शरीर डायबिटीज होने पर आपका शरीर कार्बोहाइड्रेट्स को पचा नहीं पता है जिस की वजह से शुगर आपके शरीर में तेज़ी से जमा होने लगती है-
  5. फाइबर युक्त आहार लें ये आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है अवशोषित फाइबर ब्लड में शुगर की अधिक से अधिक मात्रा को अब्ज़ोर्ब(अवशोषित) कर लेता है और इन्सुलिन को नार्मल करके मधुमेह को नियंत्रित करता है-
  6. केले का सेवन करे क्युकि फलों में प्राकृतिक चीनी अच्छी मात्रा में है जो की आपकी मिनरल्स और विटामिन्स की कमी को पूरा करेंगे साथी आपकी शुगर को भी कंट्रोल करती है-

Diabetes Treatment (मधुमेह उपचार)-


Homeopathic Remedies(होम्योपैथी उपचार )-

आप शुगर और कोलेस्ट्रोल दोनों की दवा एक साथ ले आपको होम्यो-मेडिकल से दो दवा लानी है पहली दवा है Acid Phos 1000 इसे आप हफ्ते में एक बार लें -इसकी पहली खुराक की चार-पांच बूंद जीभ पर ले ले और फिर दूसरी खुराक आधे घंटे बाद ले इसे हफ्ते में एक बार ही लेना है 

दूसरी दवा है Natrum Sulph 30 इसकी चार-पांच बूंद आप दिन में चार बार ले ये आपको नियमित रखना है बीस दिन बाद आप अपना शुगर लेवल अवश्य ही चेक करा सकते है जब तक नार्मल नहीं होता इसे लेते रहे इसके बाद आप Acid Phos 1000 को एक माह में एक बार रिपीट कर सकते है और Natrum Sulph 30 को आप सुबह-शाम दो बार कर दे दो माह के सेवन के बाद चेक अप करा कर रिपोर्ट मुझे मेल कर सकते है या नीचे कमेन्ट बॉक्स में भी कमेन्ट कर सकते है-

Home remedies(घरेलू उपचार )-

  • बेलपत्र के पत्ते(Belptr leaves)-250 Gram
  • जामुन की गुठली(Berries kernels)-150 Gram
  • तेजपत्ता(Cinnamon leaves)- 100 Gram
  • मेथीदाना(Fenugreek seeds)-100 Gram

  • उपरोक्त सभी चीजें आसानी से आप आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से लें ले और अब इन सभी को हो सके तो धूप में रख कर सुखा ले और किसी पत्थर पे पीस कर इसका पावडर बना ले सभी वस्तुओं को अलग-अलग पीसें और जब पावडर तैयार हो जाए इसे छान कर आपस में मिला कर एक आंच के बर्तन में रख लें-ये दवा अब तैयार है-

Dose(मात्रा)-

नित्य क्रिया से निवृत होने के बाद आप इसे सुबह-शाम जब खाली पेट हो एक से ढेढ़ चम्मच गर्म पानी के साथ लें यदि आप इसे आधे गिलास पानी में घोल कर भी पीना चाहें तो भी ले सकते है इसका प्रयोग दो-तीन माह करे और मधुमेह को बाय-बाय करे-


इसे भी देखे- डायबिटीज मरीज मीठा स्टेविया खाएं-Diabetes Patient eat Sweet Steevia 



डायबिटीज(मधुमेह)के सभी पोस्ट यहाँ देखे-


देखे - Amazing Experiment


Read More »

रामबाण है गिलोय-RamBaan Hai Giloy-

रामबाण है गिलोय-RamBaan Hai Giloy-Tinospora Kardifolia

प्रकृति ने आयुर्वेद में बुखार की एक महान और उत्तम प्रकार की जड़ी-बूटी के रूप में हमें Tinospora Kardifolia-गिलोय उपहार स्वरूप प्रदान की है इसकी लता नीम के पेड़ पे चढ़ती हुई आप को दिख जायेगी इसके पत्ते पान के आकार के होते है जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनती है-उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं -इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय Best Drug-श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है बहुत से लोग इसे विभिन्न नाम से भी जानते है-अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी आदि-बुखार के लिए रामबाण है गिलोय-RamBaan Hai Giloy-Tinospora Kardifolia-


रामबाण है गिलोय-RamBaan Hai Giloy-Tinospora Kardifolia

आप गिलोय को अपने घर के गमले में लगा कर रस्सी से उसकी लता को बांध सकते हैं इसके बाद इसके रस का प्रयोग कर सकते हैं- गिलोय एक दवाई के रूप में जानी जाती है जिसका रस पीने से शरीर के अनेको प्रकार के कष्ट और बीमारियां दूर हो जाती हैं-

आजकल  तो बाजार में गिलोय की गोलियां, सीरप, पाउडर आदि भी मिलना शुरु हो चुके हैं-गिलोय शरीर के दोषों (कफ ,वात और पित्त) को संतुलित करती है और शरीर का कायाकल्प करने की क्षमता रखती है- 

Tinospora Kardifolia-गिलोय का उल्टी-बेहोशी-कफ-पीलिया-धातू विकार-सिफलिस-एलर्जी सहित अन्य त्वचा विकार-चर्म रोग-झाइयां-झुर्रियां-कमजोरी-गले के संक्रमण-खाँसी-छींक-विषम ज्वर नाशक-टाइफायड-मलेरिया-डेंगू-पेट कृमि-पेट के रोग-सीने में जकड़न-जोडों में दर्द-रक्त विकार-निम्न रक्तचाप-हृदयदौर्बल्य-(टीबी)-लीवर-किडनी-मूत्ररोग-मधुमेह-रक्तशोधक- रोग प्रतिरोधक-गैस-बुढापा रोकने वाली-खांसी मिटाने वाली-भूख बढ़ाने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में खूब प्रयोग होता है-

टाइफायड, मलेरिया, डेंगू, एलीफेंटिएसिस, विषम ज्वर, उल्टी, बेहोशी, कफ, पीलिया, तिल्ली बढऩा, सिफलिस, एलर्जी सहित अन्य त्वचा विकार, झाइयां, झुर्रियां, कुष्ठ आदि में गिलोय का सेवन आश्चर्यजनक परिणाम देता है-यह शरीर में इंसुलिन उत्पादन क्षमता बढ़ाती है-गिलोय बीमारियों से लडऩे, उन्हें मिटाने और रोगी में शक्ति के संचरण में यह अपनी विशिष्ट भूमिका निभाती है-

डाले एक नजर इसके प्रयोग पर -


  1. बुखार को ठीक करने का इसमें अद्भुत गुण है पर यह मलेरिया पर अधिक प्रभावी नहीं है लेकिन शरीर की समस्त मेटाबोलिक क्रियाओं को व्यवस्थित करने के साथ सिनकोना चूर्ण या कुनाईनं (कोई भी एंटी मलेरियल) औषधि के साथ देने पर उसके घातक प्रभावों को रोक कर शीघ्र लाभ देती है -
  2. दीर्घायु प्रदान करने वाली अमृत तुल्य गिलोय और गेहूं के ज्वारे के रस के साथ तुलसी के 7 पत्ते तथा नीम के पत्ते खाने से कैंसर जैसे रोग में भी लाभ होता है-गिलोय की जड़ें शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है-यह कैंसर की रोकथाम और उपचार में प्रयोग की जाती है-
  3. गिलोय और पुनर्नवा मिर्गी में लाभप्रद होती है-इसे आवश्यकतानुसार अकेले या अन्य औषधियों के साथ दिया जाता है- अनेक रोगों में इसे पशुओं के रोगों में भी दिया जाता है-
  4. गिलोय उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए, शर्करा का स्तर बनाए रखने में मदद करता है- यह शरीर को दिल से संबंधित बीमारियों से बचाए रखता है-
  5. गिलोय एक रसायन है-यह रक्तशोधक- ओजवर्धक- ह्रुदयरोग नाशक -शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है-यह पीलिया और जीर्ण ज्वर का नाश करती है अग्नि को तीव्र करती है- वातरक्त और आमवात के लिये तो यह महा विनाशक है-गिलोय की बेल गले में लपेटने से भी पीलिया में लाभ होता है गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है-गिलोय के पत्तों को पीसकर एक गिलास मट्ठा में मिलाकर सुबह सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है-
  6. गिलोय के 6 इंच तने को लेकर कुचल कर उसमे 4 या 5 पत्तियां तुलसी की मिला ले तथा इसको एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर इसका काढा बनाकर पीजिये और इसके साथ ही तीन चम्मच एलोवेरा का गूदा पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करते रहने से जिन्दगी भर आपको कोई भी बीमारी नहीं आती है और यदि इसमें पपीता के 3-4 पत्तो का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है-यह चिकन गुनियां डेंगू स्वायन फ्लू और बर्ड फ्लू में रामबाण होता है-
  7. गिलोय का चूर्ण शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ आमवात से सम्बंधित बीमारीयां (गठिया) रोग ठीक होता है-गैस-जोडों का दर्द-शरीर का टूटना-असमय बुढापा-वात असंतुलित होने का लक्षण हैं तो गिलोय का एक चम्मच चूर्ण को घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है-
  8. गिलोय और अश्वगंधा को दूध में पकाकर नियमित खिलाने से स्त्रियों को बाँझपन से मुक्ति मिलती हैं-
  9. क्षय (टी .बी .) रोग में गिलोय सत्व-इलायची तथा वंशलोचन को शहद के साथ लेने से लाभ होता है-गिलोय सत्व को कुचल कर बारीक पीस कर पानी में घोल ले और छान कर किसी बर्तन में धूप में रख दे जब सारा पानी उड़ जाए तो नीचे सफ़ेद पर्दार्थ प्राप्त होगा यही गिलोय सत्व है -
  10. प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी में मिलाकर या शहद गुड़ या मिश्री के साथ गिलोय का रस मिलकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है-
  11. गिलोय रस में खाण्ड डालकर पीने से पित्त का बुखार ठीक होता है और गिलोय का रस शहद में मिलाकर सेवन करने से पित्त का बढ़ना रुकता है-तथा कब्ज दूर होती है-
  12. फटी त्वचा के लिए गिलोय का तेल दूध में मिलाकर गर्म करके ठंडा करें- इस तेल को फटी त्वचा पर लगाए वातरक्त दोष दूर होकर त्वचा कोमल और साफ होती है-
  13. गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानो में दिन में सिर्फ दो बार डालने से कान का मैल निकल जाता है और गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है-
  14. मट्ठे के साथ गिलोय का एक चम्मच चूर्ण सुबह शाम लेने से बवासीर में लाभ होता है-
  15. मुंहासे-फोड़े-फुंसियां और झाइयो पर गिलोय के फलों को पीसकर लगाये मुंहासे-फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है-

Read More »
-->