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29 मई 2017

दूर्वा घास के बारे में जान कर चौंक जायेगें

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शास्त्रों में कहा जाता है कि समुद्र-मंथन के समय जब देवतागण अम्रत-कलश को ले कर जा रहे थे तो अम्रत-कलश से छलक कर कुछ बूंद प्रथ्वी के दूर्वाघास(Bermudagrass)पर गिर गई थी इसलिए दूर्वा घास अमर हो गई इसकी सबसे बड़ी खासियत है यदि दूर्वा घास को बारह साल आप उखाड़ के  अलग रख दे और बारह साल बाद भी अगर मिटटी में लगा दे तो भी ये पुनर्जीवित हो  जाती है जबकि और किसी भी वनस्पति में ऐसा नहीं है-

दूर्वा घास के बारे में जान कर चौंक जायेगें

भगवान् कृष्ण ने भी गीता में कहा है जो भी व्यक्ति भक्ति के साथ एक दूर्वाघास(Bermudagrass)की पत्ती एक फूल,एक फल,या पानी के साथ मेरी पूजा करता है में उसे दिल से स्वीकार करता हूँ-

यह दूर्वा घास(Bermudagrass)बारहमासी है और तेजी से बढ़ता है गहरे हरे रंग की होती है इस घास को पूरी तरह उखाड़ लेने के बाद भी वापस जल्दी ही दुबारा उग आती है इस तरह इसका बार-बार अंकुरित होना जीवन के उत्थान का एक शक्तिशाली प्रतीक, नवीकरण, पुनर्जन्म और प्रजनन क्षमता को परिलक्षित करता है-

भगवान गणेश और विश्व पालक नारायण की पूजा में-दूर्वा घास तो आवश्यक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है- लेकिन जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे हिन्दू सनातन धर्म में किसी भी परंपरा को बनाने से पीछे उसका एक ठोस वैज्ञानिक आधार हुआ करता है और दूर्वा घास(Bermudagrass)के साथ भी यही है-

पवित्र दूर्वा घास का आध्यात्मिक और औषधीय महत्व यह प्रत्येक और प्राचीन हिंदू धर्म में हर रस्म न केवल आध्यात्मिक महत्व का है लेकिन यह भी बहुत हमारे भौतिक जीवन में महत्व है कि यह भी रहते उदाहरणों में से एक है हिंदू अनुष्ठान में प्राचीन काल से ही दूर्वा घास एक महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है दूर्वाघास से बने छल्ले अक्सर या तो होम(हवन)की रस्म शुरू करने से पहले पहने जाते हैं -

प्रसाद के लिए आग और पूजा के लिए दूर्वाघास में किसी भी पूजा कार्य में प्रयोग होना सफाई के प्रभाव को बढ़ा देता है दूर्वा घास(Bermudagrass)भी गणेश मंदिरों में एक भेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है विशेषकर भगवान गणेश की पूजा तो बिना दूर्वा घास के हो ही नहीं सकता है-हमारे देश भारत में दूर्वा घास को पवित्र माना जाता है क्योंकि हिन्दूओं के लगभग हर पूजा में दूर्वा घास का इस्तेमाल किया जाता है-

इन सबके अलावा दूर्वा घास का एक अलग ही पहलू है आयुर्वेदिक दवा बनाने में दूर्वा घास(Bermudagrass)का प्रयोग किया जाता है दूर्वा घास कैल्सियम,फॉस्फोरस,फाइबर,पोटाशियम और प्रोटीन का स्रोत है इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी इसका योगदान अतुलनीय है-

दूर्वा घास(Bermudagrass)ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है कई प्रकार के अनुसंधान से यह पता चला है कि दूर्वा घास में ग्लासेमिक (रक्त में शुगर और ग्लूकोज़ होना)गुण होता है यानि इसमें रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को कम करने की क्षमता होती है जिसके कारण इससे संबंधित बीमारियाँ जैसे मधुमेह से लड़ने में कुछ हद तक मदद करती है-

दूर्वाघास शरीर में प्रतिरोधक क्षमता(इम्यून सिस्टेम)को उन्नत करने में भी सहायता करती है इसमें एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबायल(रोगाणुरोधी-बीमारी को रोकने की क्षमता)गुण होने के कारण यह शरीर के किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है-

दूर्वा घास फ्लेवनाइड का प्रधान स्रोत होता है जिसके कारण यह अल्सर को रोकने में मदद करती है यह सर्दी-खांसी के बीमारी से भी लड़ने में मदद करती है क्योंकि इसके सेवन से बलगम कम होता है-

यह मसूड़ों से रक्त बहने और मुँह से दुर्गंध निकलने की समस्या से भी राहत दिलाती है दूर्वा घास त्वचा संबंधी समस्या से भी राहत दिलाने में सहायता करती है-इसमें एन्टी-इन्फ्लैमटेरी(सूजन और जलन को कम करता है),एन्टीसेप्टिक(रोगाणु को रोकने की क्षमता)गुण होने के कारण त्वचा संबंधी कई समस्याओं जैसे-खुजली, त्वचा पर चकत्ते और एक्जिमा आदि समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है-

दूर्वा घास को हल्दी के साथ पीसकर पेस्ट बनाकर त्वचा के ऊपर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं से कुछ हद तक राहत मिल सकती है कुष्ठ रोग और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायता करती है-

दूर्वा घास रक्त को शुद्ध करने में अहम् भूमिका निभाती है यह रक्त की क्षारियता को बनाये रखने में मदद करती है यह लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करती है जिसके कारण हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है जब किसी दुर्घटना के कारण, अत्यधिक मासिक स्राव या नाक से रक्त बहने के कारण रक्त की कमी हो जाती है तो यह उस कमी को पूरा करने में मदद करती है-

दूर्वा घास हृदय के स्वास्थ्य को उन्नत करने में भी मदद करती है क्योंकि यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में अहम् भूमिका निभाती है-

दूर्वा घास महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं-विशेषकर यू.टी.आई-यूरेनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन(मूत्र मार्ग संक्रमण)के उपचार में प्रभावकारी रूप से काम करती है-

महिलाओं में बवासीर और सफ़ेद योनि स्राव जैसी समस्याएं आम होती हैं,इससे राहत पाने के लिए दही के साथ दूर्वा घास को मिलाकर खा सकते हैं जो माँ बच्चों को दूध पिला रही हैं उनके लिए भी लाभकारी होता है क्योंकि यह प्रोलेक्टिन हॉर्मोन को उन्नत करने में भी मदद करती है तथा साथ ही पी.सी.ओ.एस. यानि पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम(सेक्स हॉर्मोन में असंतुलन)के खतरे को कम करने में भी प्राकृतिक रूप से सहायता करती है-

दूर्वा घास(Bermudagrass)पेट संबंधी समस्या में भी अहम् भूमिका निभाती है अनियोजित जीवनशैली के कारण हजम की समस्या भी आम बन गई है लेकिन दूर्वा घास के लगातार सेवन से पेट की बीमारी का खतरा कुछ हद तक कम होने के साथ हजम शक्ति को भी उन्नत करती है कब्ज़ से राहत दिलाने में भी मदद करती है।यह प्राकृतिक रूप से शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करती है और एसिडटी से भी राहत दिलाती है-

दूर्वा घास पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण शरीर को सक्रिय और ऊर्जायुक्त बनाये रखने में बहुत सहायता करती है यह अनिद्रा रोग, थकान, तनाव जैसे रोगों में प्राकृतिक उपचार के रूप में प्रभावकारी साबित हुआ है इसके नियमित सेवन से शरीर और मन में नया जीवन लौट आता है-

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भृंगराज के अदभुत प्रयोग क्या हैं

Upcharऔर प्रयोग-

भृंगराज के अदभुत प्रयोग क्या हैं

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भृंगराज केशों के लिए यह महत्वपूर्ण तो है ही लेकिन इसके अन्य औषधीय गुण शायद और ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं क्या आप जानते है कि भृंगराज(False daisy)आपका कायाकल्प करने में भी सक्षम है यदि सही तरीके से प्रयोग किया जाये तो यहाँ तक कि कैंसर से आप इसके सहारे लड़ सकते हैं और जीत भी सकते हैं-
भृंगराज के अदभुत प्रयोग क्या हैं

भृंगराज(False daisy)के प्रयोग-


1- यदि आपको बाल काले रखने हैं तो भृंगराज(False daisy)की ताजी पत्तियों का रस रोजाना सिर पर मल कर सोयें-

2- गुदाभ्रंश हो गया हो तो भृंगराज की जड़ और हल्दी की चटनी को मलहम की तरह मलद्वार पर लगाए इससे कीड़ी काटने की बीमारी में भी आराम मिलता है गुदा भ्रंश में मल द्वार थोड़ा बाहर निकल आता है-

3- यदि पेट बहुत खराब हो तो भृंगराज की पत्तियों का रस या चूर्ण दस ग्राम लीजिये उसे एक कटोरी दही में मिला कर खा जाएँ इसे दो बार तीन दिनों लेना है-

4- पीलिया एक जानलेवा रोग है लेकिन रोगी को पूरे भृंगराज के पौधे का चूर्ण मिश्री के साथ खिला दीजिये 100 ग्राम चूर्ण पेट में पहुंचाते ही पीलिया ख़त्म  या फिर भृंगराज के पौधे को ही क्रश करके 10 ग्राम रस निकालिए और उसमें एक ग्राम काली मिर्च का पावडर मिलाकर मरीज को पिला दीजिये दिन में 3 बार 3 दिनों तक इस मिश्रण में थोड़ा मिश्री का चूर्ण भी मिला ले-

5- भृंगराज सफ़ेद दाग का भी इलाज करता है मगर काली पत्तियो और काली शाखाओं वाला भृंगराज चाहिए इसे आग पर सेंक कर रोज खाना होगा एक दिन में एक पौधा लगभग चार माह तक लगातार खाए-

6- जिन महिलाओं को गर्भस्राव की बीमारी है उन्हें गर्भाशय को शक्तिशाली बनाने के लिए भृंगराज की ताजी पत्तियों का 5-6 ग्राम रस रोज पीना चाहिये-

7- आँखों की रोशनी तेज रखनी है तो भृंगराज की पत्तियों का 3 ग्राम पाउडर एक चम्मच शहद में मिला कर रोज सुबह खाली पेट खाएं-

8- अगर कोई तुतलाता हो तो इसके पौधे के रस में देशी घी मिला कर पका कर दस ग्राम रोज पिलाना चाहिए बस एक माह तक लगातार दे -

9- त्रिफला के चूर्ण को भृंगराज के रस की 3 बार भावना देकर सुखा कर रोज आधा चम्मच पानी के साथ निगलने से बाल कभी सफ़ेद होते ही नही है पर इसे किसी जानकार वैद्य से ही तैयार कराइये-

10- इसके रस में यकृत की सारी बीमारियाँ ठीक कर देने का गुण मौजूद है लेकिन जिस दिन इसका ताजा रस दस ग्राम पीजिये उस दिन सिर्फ दूध पीकर रहिये भोजन नहीं करना है यदि यह काम एक माह तक लगातार कर लिया जाय तो कायाकल्प भी सम्भव है लेकिन यह एक बहुत कठिन तपस्या है-

महत्वपूर्ण प्रयोग-


1- बच्चा पैदा होने के बाद महिलाओं को योनिशूल बहुत परेशान करता है उस दशा में भृंगराज के पौधे की जड़ और बेल के पौधे की जड़ का पाउडर बराबर मात्रा में लीजिये और शहद के साथ खिलाइये 5 ग्राम पाउडर काफी होगा दिन में एक बार खाली पेट लेना है सिर्फ केवल 7 दिनों तक ही काफी है-

2- इसका तेल बालों के लिये बहुत उपयोगी माना जाता है बालों को घने, काले और सुंदर बनाने के लिए भृंगराज का उपयोग कई तरह से किया जाता है भृंगराज के पत्तों का रस निकालकर बराबर का नारियल तेल लें और धीमी आंच पर रखें जब केवल तेल रह जाए तो बन जाता है "भृंगराज केश तेल"-अगर धीमी आंच पर रखने से पहले आंवले का रस मिला लिया जाए तो और भी अच्छा तेल बनेगा-बालों में रूसी हो या फिर बाल झड़ते हों तो इसके पत्तों का रस 15-20 ग्राम लें-

3- एसिडिटी होने पर भृंगराज के पौधे को सुखाकर चूर्ण बना लिया जाए और हर्रा के फलों के चूर्ण के साथ समान मात्रा में लेकर गुड के साथ सेवन कर लिया जाए तो एसिडिटी की समस्या से निजात मिल सकती है-

4- माईग्रेन या आधा सीसी दर्द होने पर भृंगराज की पत्तियों को बकरी के दूध में उबाला जाए व इस दूध की कुछ बूँदें नाक में डाली जाए तो आराम मिलता है-

5- भृंगराज एवं आंवले लें के ताजे पत्तों को पीस कर बालों की जड़ों में लगायें साथ ही नीम-शिकाकाई- आंवला-कालातिल-रीठा इन सब को साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें यह आपके लिए एक हर्बल शैम्पू का काम करेगा जो बालों को कंडिशनिंग के साथ ही जड़ों को मजबूत बनाता है-

6- अब तो आपको पता ही हो गया है इसके गुण तो आपको अपने घर में नर्सरी से लाकर गमले में इस पौधे को अवश्य लगा लेना चाहियें ये महिलाओं के लिए तो बड़े काम का पौधा है-

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सनाय के उपचार और प्रयोग

Upcharऔर प्रयोग-

सनाय के उपचार और प्रयोग

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सनाय(Cassia Angustifolia)के विभिन्न नाम हैं कुछ इलाकों में इसे स्वर्णमुखी कहते हैं तो कहीं सोनामुखी तो कहीं सुनामुखी यह स्वास्थ के लिए बहुत उपयोगी है इसकी पत्तियों से आयुर्वेदिक औषधियां बनती हैं सनाय रेचक, रोगाणु रोधक और शरीर की सफाई करने वाली वनस्पति है-

सनाय के उपचार और प्रयोग

सनाय(Cassia Angustifolia)कब्ज को दूर करने वाली औषधि है और पेट की पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करती है इसके सेवन से बुखार कम हो जाता है और गले की खिच खिच दूर हो जाती है स्वर्णमुखी के चूर्ण को चाय की तरह पीते हैं-

किसी भी तरह के संक्रमण को रोकने में सनाय(Cassia angustifolia)लाभदायक औषधि है एलोपैथिक दवाएं यदि एक रोग दूर करती हैं तो साथ में छोटी मोटी और समस्याएं पैदा करती हैं जिन्हें हम साइड इफैक्ट कहते हैं ऐसी कोई समस्या इस वनस्पति के सेवन से नहीं होती है भारतीय जड़ी बूटियों की यह विशेषता है कि उनके सेवन से किसी और प्रकार का कष्ट रोगी को नहीं होता है स्वर्णमुखी में यह गुण भरपूर है इससे किसी भी प्रकार का अन्य बुरा असर भी नहीं होता है-

लेकिन इसके अधिक सेवन करने से पोटाशियम का स्तर कम हो जाता है वजन भी कम हो सकता है तथा भूख भी कम हो जाती है जोड़ो और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है इसलिए प्राकृतिक चिकित्सक की परामर्श के बिना कोई औषधि नहीं लेनी चाहिए-किसी भी औषिधि के प्रयोग में ये बात हमेशा ही याद रखनी चाहिए-

 अति सर्वत्र वर्जयते....!

कब्ज(Constipation)के लिए-


गुलाब की पत्तियों का चूर्ण, सोंठ या सूखी अदरक, सोनामुखी की पत्तियां, सैंधा नमक, किशमिश इन्हें पीसकर शहद में मिलालें और सोने से पहले इस चटनी या लेह का सेवन करें-

विरेचक(Ecchymosis)-


सनाय में विरेचक का गुण है सनाय की तीन औन्स पत्तियों को, एक चाय का चम्मच धनिया और एक चाय का चम्मच सोंठ को चौथाई पानी में 15 मिनट तक गर्म करें तथा एक बार में एक से चार टेबुल चम्मच भर कर पीयें-यह पेय ठंडा होकर अधिक स्वादिष्ट हो जाता है-

वृद्धों और बच्चों के लिए सनाय की फलियां बहुत लाभदायक हैं यदि बच्चों के लिए पेय बनायें तो चार फलियों में ठंडे पानी की चार से पांच तक चम्मच डालें-बच्चे को एक बार में एक या दो चम्मच पिलायें-वयस्कों के लिए बनायें तो 6 या 12 फलियों में उतना ही पानी डालें-

पेट(Abdominal)और छाती का दर्द-


बहुत से लोगों को पेट में गैस बनने पर छाती में दर्द होने लगता है इसके लिए आप तीन ग्राम सनाय चूर्ण और एक चम्मच मिश्री का चूर्ण एक गिलास पानी में मिलायें तथा इसे सुबह नाश्ते करने से पहले पीयें जरूरत पड़े तो रात में भोजन से पहले भी पीयें-यह आपके पेट में गैस को दूर करके दर्द से आराम देता है-

शरीर दर्द(BodyPain)-


सनाय शरीर के तीन गुणों वात,कफ और पित्त को प्रभावित करती है आप इसके लिए सनाय की पत्तियों को साफ कर सुखा लें फिर उसका चूर्ण यानी पाउडर बनाकर रख लें अब आप इस चूर्ण को भोजन से पहले दिन में दो बार लें लेकिन चूर्ण की मात्रा पांच ग्राम हो इसे घी के साथ लें-इस के सेवन से शरीर का दर्द दूर होता है तथा आपकी पाचन शक्ति और आंतें भी सुदृढ़ होती है-

संक्रमण(Infection)-


एक चम्मच शहद में 2 ग्राम सोनामुखी पाउडर को 250 मि. पानी में मिलायें तथा इसे सुबह इस पेय को खाली पेट पीयें-इसका प्रयोग एक साल तक करें इससे शरीर संक्रमण से दूर रहता है और शरीर ताकतवर बनता है और संक्रमण वाले रोग दूर रहते हैं-

बलगम(Mucus)-


ठंडे पेय आइसक्रीम, फ्रिज का ठंडा पानी, चाकलेट अधिक लेने से और रात में दोबारा गर्म करके खाना खाने से शरीर में कफ या बलगम अधिक बनने लगता है जिससे फेफड़े कमजोर हो जाते हैं इस समस्या को दूर करने के लिए आप सोनामुखी का प्रयोग करें-एक कप अनार के रस में सोनामुखी का तीन ग्राम चूर्ण मिलायें और इसे दिन में दो बार पियें इससे फेफड़े साफ हो जाते है और अस्थमा दूर होता है-

पथरी(Calculus)-


किडनी की पथरी दूर करने के लिए पीलें खीरे के बीजों से 150 मि. रस में तीन ग्राम सोनामुखी का पाउडर मिलायें इसे दिन में दो बार पीने से किडनी की पथरी घुल जाती है तथा इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है-

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28 मई 2017

बेच फ्लावर चिकित्सा से पढाई में एकाग्रता बढ़ाए

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आज हम एक ऐसे केस की चर्चा करते है जो एक छात्रा का है सिमरन आयु सोलह वर्ष वाशिम महाराष्ट्र से हैं सिमरन की पढ़ाई लिखाई बहुत अच्छी थी वह बिना रोक टोक खुद ही पढ़ने बैठ जाती थी और अच्छे नम्बर्स से पास होना उसकी आदत में शुमार था उसके अभिभावक और टीचर भी उसकी परफॉर्मन्स से काफी सन्तुष्ट थे-

बेच फ्लावर चिकित्सा से पढाई में एकाग्रता बढ़ाए

बचपन से ही सिमरन पढने में कुशाग्र बुद्धि की थी लेकिन जब 9 वी कक्षा में 97% परसेंट लेकर जब सिमरन 10वी में आई और यूनिट टेस्ट में उसे 56% मिले तब उसके अभिभावक ओर टीचर्स यह परिणाम देखकर चौक गए और इसके बाद सिमरन ने पढाई जैसे छोड़ ही दी थी वह बेमन से स्कूल जाती ओर काफी डांटने पर पढाई करती थी-

उसके इस वर्ताव में फर्क दूसरे लोगों को भी महसूस होने लगा था चूँकि सिमरन की बुआ मेरी सहेली है उन्होंने एक दिन बातों बातों में मुझे यह बात बताई तो मैने तुरन्त सिमरन कि माताजी से फोन पर बात करके सारी डिटेल्स ओर सिम्पटम्स की जानकारी ली और फिर सिमरन को बेच फ्लावर का कॉम्बिनेशन बना कर दिया-

फिर एक हफ्ते बाद खुद सिमरन ने मुझसे बात की और मुझसे कहा कि मै 10वीं बोर्ड इक्जाम तक यह दवाई लेना चाहूंगी क्योकि इससे मुझे बहोत फर्क है तब हमने उससे कहा कि बोर्ड एग्जाम को अभी 4 महिने बाकी है और आपकी समस्या तो एक महीने में ही खत्म हो जाएगी-

आज सिमरन स्वस्थ है और बैच फ्लावर रेमिडीज पर उसका भरोषा इतना अधिक है कि उसने और भी अपनी सहेलियों को भी इस कम्बीनेशन से अवगत कराया- यदि आप भी इस तरह की व्याधि से ग्रसित है तो आप मुझसे निसंकोच संपर्क कर सकतें है-


डाo चेतना कंचन भगत का सम्पर्क विवरण-
Dr.Chetna Kanchan Bhagat
704- Solitaire Heights
New Golden Nest Phase-12
Near MithaLal Jain Banglow.
Bhayander(East)
Dist-Thane
Mumbai- 401105(Maharashtra)

Phone Numbers-

08425904420, 08779397519

Timing- 11Am To 7 Pm

E-mailbhagatchetna@gmail.com

सम्पर्क करने से पहले-

1-रोगी की परेशानी, उम्र,लिंग,वजन बताए-

2- पैथोलोजिकल रिपोर्ट्स हो तो वह भी बताए-

3- रोगी के मानसिक लक्षण, स्वभाव, पसन्द, नापसन्द,यह सब नोट करके जब भी काल करे तब अवश्य बताए-

4- रोगी की भूख, प्यास,नींद, मल मूत्र नॉर्मल है या नहीं तथा स्त्रियों में माहवारी कम ज्यादा हो तो यह भी बताए-

5- सुबह ब्रश करने से पहले की जीभ की फ़ोटो हमें जीभ बाहर की तरफ निकाल कर भेजे-

आपके द्वारा भेजी गई यह सारी डिटेल्स आपका डायग्नोसिस करने में हमें सहायक होगी-इसलिए फोन और वोट्सएप पर यह फॉरवर्ड करना ही आपको बेहतर होगा अगर आपके पास वॉट्सप की सुविधा ना होतो आप यह सब नोट करके हमे फोन पर भी बता सकते है-

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 बेच फ्लावर रेमिडीज से बढायें अपना आत्मविश्वास-कल पोस्ट 
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अपनी सेक्स लाइफ को आप कैसे बढायें

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क्या आप जानते है कि आज का युवा क्यों कमजोर होता जा रहा है क्यूंकि सबसे पहली बात ये है कि आज अपने शरीरिक स्वास्थ को कैसे बनायें रक्खें इस पर किसी का ध्यान नहीं है अपना पूरा समय मौज मस्ती की दुनिया में गवां बैठते है और जब उन्हें होश आता है कि तो वो सेक्स लाइफ(Sex Life)से कमजोर हो चुके है तब इधर उधर भागदौड करने लग जाते है लेकिन-

अपनी सेक्स लाइफ को आप कैसे बढायें

सच यही है "अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत"

आज के युग में हमारे प्रदूषित खान पान की वजह से और स्वयं के गलत हरकतों के कारण युवक-युवतियां असमय ही दुर्बलता के शिकार होते जा रहे है और फिर इस तरह की समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने से भी घबराते हैं इस बात को आप अपने घर के लोगों से भी शेयर करने में हिचकिचाते हैं मेरे पास रोज बहुत लोगों से इस बात की जानकारी भी मांगी जाती है यदि आपको भी इस प्रकार की कोई समस्या है या आप शादी शुदा है तथा शरीरिक स्टेमिना नहीं है तो कुछ घरेलू उपाय को अपनाकर आप अपनी सेक्स लाइफ को बुस्ट अप कर सकते हैं-

सेक्स लाइफ(Sex life)बढाने के लिए क्या करें-


1- जो लोग गरीब है और जादा धन नहीं खर्च कर सकते है उनके लिए एक सुंदर उपाय है कि आप बाजार से एक सेब लाकर जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए और इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए तथा इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए अब दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए फिर एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें अब पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें तथा दूसरे दिन सेब वाले लौंग को गाय के दूध से सेवन करें इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है-

2- पन्द्रह ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए फिर आप इसे यौन-टौनिक के रूप मे इस्तेमाल करें तथा इसके अलावा आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा इन सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करें आपकी सेक्स छमता में काफी इजाफा होगा-

3- आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें फिर इन बीजों को आठ-दस दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें तथा फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें आप इसे आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है-

4- 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर आपस में चूर्ण बनाएं फिर आप उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें अब आप 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे आपकी यौन दुर्बलता दूर होती है तथा शुक्राणु की संख्या में भी इजाफा होता है-

5- देशी गाय के घी के साथ धुली उड़द की दाल को पीसकर हल्का भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर आप इसकी खीर तैयार कर लें इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करें मानसिक कमजोरी के साथ साथ ये आपके वीर्य में भी काफी बढ़ोत्तरी करता है तथा नियमित प्रयोग करने से संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है-

6- 5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें फिर आप इस मिश्रण को 7 दिनों तक सेवन करें इसको पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है-

7- यदि आपके घर के आस-पास कही बरगद का पेड़ लगा हो तो सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से आप उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर रखकर खाएं इसके प्रयोग से भी आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी-

8- आपको चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू तथा दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है-

9- यदि आपका वीर्य अधिक पतला है तो एक  चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है-

10- लहसुन आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपकी सेक्स लाइफ को भी बढाता है यदि आप लहसुन नहीं खा रहे हैं तो आज से ही खाना शुरू कर दीजिये क्योंकि लहसुन की 2-3 कलियां और प्याज का प्रतिदिन सेवन से यौन-शाक्ति बढ़ती है ऐसे में अगर आप सप्ताह में दो से तीन बार काले चने से बने खाद्य पदार्थों को प्रयोग में ला रहे है तो आपके लिए यह और भी अधिक लाभकारी है-

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मुंह और गले में कड़वा स्वाद क्या करें

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कभी कभी कई कारणों से व्यक्ति के मुंह का स्वाद(Mouth taste)खराब हो जाता है वैसे बुखार के कारण भी मुंह का स्वाद खराब हो जाता है और भी अनेक कारणों से आपको भोजन के स्वाद के प्रति असंवेदनशील(Insensitive)बना देता है इसलिए सबसे पहले आपको मुँह में कड़वे स्वाद(Bitter taste)के कारणों का पता लगाने की जरूरत है-

मुंह और गले में कड़वा स्वाद क्या करें

मुँह में कड़वे स्वाद के सामान्य कारणों में दवायें, मसूड़े की सूजन या किसी अन्य गॅस्ट्रो-एसॉफेगियाल रिफ्लक्स डिसीज़ है जिसके कारण गला और मुंह खट्टे और कड़वे हो जाते हैं ये कभी कभी यह खाना खाने की इच्छा को भी ख़त्म कर देती है आइये पहले समझते है क्यों होता है आपके मुंह के स्वाद बिगड़ने का कारण-

मुंह के कड़वे स्वाद(Bitter Taste)का कारण-


1- आपको  बुखार की दवाएं या प्रसव पूर्व विटामिन, एंटीबायोटिक, अवसाद विरोधी, फोलिक एसिड और कुछ अन्य गर्भावस्था संबंधित दवाइयां आपके मुंह का कड़वा स्वाद करती है-

2- यदि हमेशा ही आपके मुंह में कड़वे स्वाद(Bitter Taste)का एक आम कारण है तो आप हर बार भोजन के बाद अपनी जीभ को साफ करें या माउथवाश का उपयोग करें-

3- एसिड रिफ्लक्स या गॅस्ट्रो-एसॉफेगियाल रिफ्लक्स डिसीज़ की वजह से अनुचित समय पर मसालेदार भोजन, ज्यादा खाना, उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ खाना कड़वे स्वाद(Bitter Taste)का कारण बनती है इस वजह पेट के रस का वापस गले में रिसाव होना है-

4- गॅस्ट्रो-एसॉफेगियाल रिफ्लक्स डिसीज़ के लक्षण से सीने में जलन, सिर दर्द, गैस, गले में खराश, मुंह की दुर्गन्ध, सूजन, और जी मिचलाना हैं-

5- दंत समस्याये जैसे पायरिया,  दंत फोड़े,  मसूड़ों में संक्रमण, अल्सर, और दंत फिलिंग से भी मुँह में कड़वा स्वाद हो सकता है-

6- गर्भावस्था के बाद हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं में एस्ट्रोजेन के स्तर में परिवर्तन कड़वा स्वाद(Bitter Taste) पैदा होती हैं-


मुँह में कड़वे स्वाद(Bitter Taste)के लिए-


1- यदि आपके दांत में किसी प्रकार का संक्रमण है तो आप आधा चम्मच नमक और चौथाई चम्मच सोडा को आपस में मिला ले फिर थोडा सा पानी डालकर एक पेस्ट सा बना लें और फिर अपने दांतों को इस पेस्ट से ब्रश करें इन दोनों का संयोजन किसी भी दंत संक्रमण को खत्म करने में मदद करता है इसे दिन में दो बार  दोहराएँ सुबह में और रात को सोते समय-

2- आप दिन में ढेर सारा पानी पिएं जो मुंह के कड़वे स्वाद को दूर करने में आपकी मदद करते है आपको कम से कम छ-सात गिलास पानी प्रतिदिन पीना चाहिए जिससे आपके पेट में विषाक्त अम्ल न बने चूँकि जल आपकी जीभ से बुरे स्वाद को खत्म करने के साथ मुंह के कडवेपन को भी खत्म करता है-

3- यदि आपके मुंह का स्वाद कडवा रहता है तो आप लौंग और दालचीनी को मिलाकर एक महीन में पाउडर पीस लें और इस पाउडर का एक चम्मच ले और अपने मुँह में रखें मुंह के कड़वे स्वाद को हटाने के लिए इस सरल घरेलु उपाय को एक दिन में कई बार दोहराएँ यह एक त्वरित, आसान और स्वाभाविक रूप से घर पर उपलब्ध उपाय है-

4- घर से निकलते समय आप अपने मुंह में एक लौंग डाल लीजिए और यह आपके मुंह को पूरे दिन के लिए ताजा रखने में मदद करता है अगर हो सके तो आप लौंग और दालचीनी का मिश्रण बना कर भी अपने पास रख सकते है जिसे आप थोड़ी थोड़ी सेर से सेवन कर सकते है-

5- हर्बल माउथ वॉश भी आपके  दांतों के बीच वाले हिस्से को साफ़ करने में मदद करता है इससे जीवाणु और रोगाणु जो कि आपके दांतों के बीच संचित हो सकते है उनको भी रोका जा सकता है तथा लंबे समय तक फंसे खाद्य कण दांत आपके मसूड़ों के लिए खतरनाक होते हैं और मुंह में बैक्टीरिया विकसित करने में मदद करते हैं इसलिए यह बेहतर है कि बैक्टीरिया की वृद्धि को रोका जाए इसके लिए आप जीभ को स्क्रेपर की मदद से जमे हुए कीटाणुओं को भी साफ़ अवश्य करें-

6- यदि आप नियमित अंतराल पर थोड़ी मात्रा में खाते हैं तो आपको यकीन भूख महसूस नहीं होगी और इस तरह से आप मुंह के भीतर बुरी गंध समाप्त कर सकते हैं इसलिए आपके लिए यह बेहतर है कि आप अपने खाने की आदतों को अनुकूलित कर लें यह सबसे अच्छा है कि आप कम मात्रा में खाना खाएं तथा तला हुआ और मसालेदार भोजन करना अच्छा नहीं है-

7- नमक के पानी के गरारे मुँह में कड़वे स्वाद को कम करने में मदद करते है एक गिलास पानी में एक चम्मच नमक घोल लें फिर इस घोल का प्रयोग गरारे करके अपने मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को मारने के लिए करें आप अपने मुंह से संक्रमण को दूर करने के लिए इसे एक दिन में दो बार दोहरायें यदि आप इस उपाय को गर्म पानी के साथ करते है तो सामान्य पानी की तुलना में ज्यादा बेहतर है क्योंकि वे जीभ और गले पर बैक्टीरिया और संक्रमण को दूर करने में मदद करता है-

8- पिपरमिंट या श्वास वाले पुदीने के मिंट भी मुँह में कड़वा स्वाद को दूर करने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं यह सरल, आसान घरेलु  उपाय कड़वे स्वाद को अस्थायी रुप से समाप्त करते हैं और त्वरित राहत देते है-

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Upcharऔर प्रयोग-

27 मई 2017

कैसे आप तनाव से मुक्त हो सकते है

By With 2 टिप्‍पणियां:
आज लोगों की तनाव(Stress)भरी जिन्दगी है जिन्दगी में काम की भागदौड है या फिर पारिवारिक क्लेश है या मानसिक चिंता से पीड़ित है तो इसका आपके मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है जिससे कारण स्मरण शक्ति(Memory)का हास होना स्वाभाविक है और धीरे-धीरे समयानुसार आपके आत्म-विश्वास में कमी होने लगती है-

कैसे आप तनाव से मुक्त हो सकते है

तो आपको भागमभाग जिन्दगी में इन सभी कमियों को दूर करना भी आवश्यक है वर्ना कुछ समय बाद आपको भूलने जैसी बीमारी से दो-चार होना पड़ता है इस प्रकार का व्यक्ति क्रोध,बैचेनी,सिरदर्द ,आत्म-ग्लानी आदि का भी शिकार हो जाता है तो आप सभी के लिए एक नुस्खा है जिसे प्रयोग करके आप अपने मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाए-

आवश्यक सामग्री-


शंखपुष्पी - 100 ग्राम
ब्राह्मी     - 100 ग्राम
गिलोय    - 100 ग्राम
आंवला    - 100 ग्राम (सूखा हुआ)
जटामासी - 100 ग्राम (सभी सामग्री आयुर्वेद जड़ी-बूटी विक्रेता से आसानी से प्राप्त)

प्रयोग विधि-


उपरोक्त सभी सामग्री को महीन कूट-पीस करछान कर एक एयर टाईट कांच के बर्तन में रख ले और प्रतिदिन इसकी एक-एक चम्मच मात्रा शहद या जल या आंवले के शरबत के साथ दिन में तीन बार ले तथा बच्चो को इसकी मात्रा आधा चम्मच दे - गर्भवती महिला यदि गर्भ-काल में नियमित सेवन करती है तो होने वाला बच्चा हर प्रकार से स्वस्थ और मानसिक रोगों मुक्त रहता है-वृद्ध भी इसका सेवन कर सकते है  और ये पूर्ण रूप से सुरक्षित प्रयोग है -

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