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26 अप्रैल 2017

गर्भावस्था में आप क्या खाए

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माँ बनने की सुखद अनुभूति सिर्फ एक माँ ही जान सकती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अपने गर्भ में पलते शिशु के लिए आपको जरुरी सभी पोषक तत्व मिल सकेंगे इसलिए ये यह जरुरी है कि आप ये भी जाने कि गर्भावस्था(Pregnancy)में क्या खाए-

गर्भावस्था में आप क्या खाए

गर्भावस्था में कैसा हो आहार-


1- आपको गर्भावस्था(Pregnancy)के दौरान कुछ और अधिक कैलोरी की भी ज़रूरत होगी-गर्भावस्था में सही आहार का मतलब है कि आप क्या खा रही हैं न कि ये कि आप कितना खा रही हैं सबसे पहले आप जंक फूड का सेवन सीमित मात्रा में करें-क्योंकि इसमें केवल कैलोरी(Calories) ज्यादा होती है और पोषक तत्व कम या न के बराबर होते हैं-

2- आपका आहार शुरुआत से ही ठीक नहीं है तो यह और भी महत्वपूर्ण है कि आप अब स्वस्थ आहार खाएं- आपको अब और अधिक विटामिन और खनिज- विशेष रूप से फॉलिक एसिड(Folic acid)और आयरन(iron) की जरूरत है-

3- आपको मलाईरहित (Skimmed) दूध, दही, छाछ, पनीर लेना चाहिए क्युकि इन खाद्य पदार्थों में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी -12 की उच्च मात्रा होती है अगर आपको लैक्टोज असहिष्णुता है या फिर दूध और दूध से बने उत्पाद नहीं पचते हैं तो अपने खाने के बारे में अपने डॉक्टर से अवश्य बात करें-

4- अगर आप मांस नहीं खाती हैं तो शाकाहारीयों को प्रोटीन के लिए प्रतिदिन 45 ग्राम मेवे और 2/3 कप फलियों की आवश्यकता होती है एक अंडा, 14 ग्राम मेवे या ¼ कप फलियां लगभग 28 ग्राम मांस, मुर्गी या मछली के बराबर मानी जाती हैं-

5- आप खासकर पानी और ताजा फलों के रस का अवश्य सेवन करे- ये भी सुनिश्चित करें कि आप साफ उबला हुआ या फ़िल्टर किया पानी ही पियें तथा घर से बाहर जाते समय अपना पानी साथ लेकर जाएं या फिर प्रतिष्ठित ब्रांड का बोतल बंद पानी ही पीएं क्युकि अधिकांश रोग जलजनित विषाणुओं की वजह से ही होते हैं आप डिब्बाबंद जूस का सेवन कम ही करें-क्योंकि इनमें बहुत अधिक चीनी होती है-

6- घी, मक्खन. नारियल के दूध और तेल में संतृप्त वसा(Saturated fat)की उच्च मात्रा होती है जो की अधिक गुणकारी नहीं होती है तथा वनस्पति घी में ट्रांसफैट अधिक होती है अत: वे संतृप्त वसा की तरह ही शरीर के लिए अच्छी नहीं हैं-वनस्पति तेल(Vegetable oil)वसा का एक बेहतर स्त्रोत है क्योंकि इसमें असंतृप्त वसा(Unsaturated fats)अधिक होती है।

7- अपने गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए आपको अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन शामिल करने की आवश्यकता है-

8- आपको कितना भोजन करने की जरुरत है इस बात का सर्वोत्तम संकेत आपकी अपनी भूख है और हो सकता है आप पाएं कि भोजन की मात्रा आपकी गर्भावस्था के दौरान बदलती रहती है-

9- ये हो सकता है पहले कुछ हफ्तों में आपको समुचित भोजन करने की इच्छा न हो जबकि विशेष तौर पर यदि आपको मिचली या या उल्टी हो रही है यदि ऐसा हो तो आप कोशिश करें की दिन भर में छोटी मात्रा में-लेकिन कई बार कुछ भोजन करती रहें-अपनी गर्भावस्था के मध्य हिस्से में आपको पहले की तरह ही भूख लग सकती है या फिर भूख में कुछ बढ़ोतरी भी हो सकती है और हो सकता है आप सामान्य से अधिक खाना चाहें-गर्भावस्था के अंत में आपकी भूख संभवत: बढ़ जाएगी और यदि आपको अम्लता, जलन या खाने के बाद पेट भारी सा महसूस होता है तो आपके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर छोटा-छोटा भोजन करना सही रहेगा तथा जब भूख लगे तब खाएं आप ज्यादा कैलोरी युक्त कम पोषण वाले व्यंजनों की बजाय स्वस्थ भोजन चुनें-

10- कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनसे गर्भावस्था के दौरान आपको दूर रहना चाहिए ये आपके शिशु के लिए असुरक्षित साबित हो सकते हैं जैसे-अपाश्च्युरिकृत दूध और इससे बने डेयरी उत्पादों का सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं है क्यूंकि इनमें ऐसे विषाणुओं के होने की संभावना रहती है जिनसे पेट के संक्रमण और तबियत खराब होने का खतरा रहता है-

11- गर्भावस्था के समय विषाक्त भोजन आपको बहुत बीमार कर सकता है क्योंकि संक्रमण के प्रति आप अधिक संवेदनशील होती हैं-कहीं बाहर खाना खाते समय भी पनीर से बने व्यंजनों जैसे टिक्का और कच्चे पनीर के सैंडविच आदि के सेवन से बचें क्योंकि पनीर ताजा है या नहीं आपको यह बता पाना मुश्किल हो सकता है-

12- सफेद, फफुंदीदार पपड़ी वाली चीज़ जैसे ब्री और कैमेम्बर्ट या फिर नीली (ब्लू वेन्ड)चीज़- इसके अलावा भेड़ या बकरी आदि के दूध से बनी अपाश्च्युरिकृत मुलामय चीज से भी दूर रहें-इन सभी तरह की चीज़ में लिस्टीरिया जीवाणु होने का खतरा रहता है जिससे लिस्टिरिओसिस(Listeriosis)नामक संक्रमण हो सकता है- यह संक्रमण आपके अजन्मे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है-

13- कच्चा या अधपका मांस- मुर्गी और अंडे-इन सभी में हानिकारक जीवाणु होने की संभावना रहती है इसलिए सभी किस्म के मांस को तब तक पकाएं-जब तक कि उनसे सभी गुलाबी निशान हट जाएं-अंडे भी सख्त होने तक अच्छी तरह पकाएं-

14- डिब्बाबंद मछली अक्सर नमक के घोल में संरक्षित करके रखी जाती हैं और अधिक नमक शरीर में पानी के अवधारण की वजह बन सकता है-इसलिए डिब्बाबंद मछली का पानी अच्छी तरह निकाल दें और प्रसंस्कृत मछली का सेवन कभी-कभी ही करें

15- गर्भावस्था में अत्याधिक शराब पीने से बच्चों में शारीरिक दोष, सीखने की अक्षमता और भावनात्मक समस्याएं पैदा हो सकती हैं-इसलिए यदि आप एल्कोहल का सेवन करती भी है तो गर्भावस्था के दौरान शराब छोड़ देनी चाहिए-

16- ध्यान रखें कि सभी महिलाओं में एक समान वजन नहीं बढ़ता है अपनी गर्भावस्था में आपका वजन कितना बढ़ता है यह कई कारणों पर निर्भर करता है इसलिए स्वस्थ आहार खाने की ओर ध्यान दें-स्टार्चयुक्त कार्बोहाइड्रेट, फल और सब्जियों, प्रोटीन की उचित मात्रा और दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन करें- वसा और शर्करा का कम मात्रा में उपभोग करें-

17- गर्भावस्था में जब आपका वजन बढ़ता है तो इसके साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि वजन कितनी मात्रा में बढ़ा है ये भी हो सकता है पहली तिमाही में आपका वजन कुछ ज्यादा नहीं बढ़े तथा फिर दूसरी तिमाही में इसमें निरंतर वृद्धि होनी चाहिए और तीसरी तिमाही में आपका वजन सबसे अधिक बढ़ता है-क्योंकि गर्भ में आपका शिशु भी सबसे ज्यादा इसी तिमाही में बढ़ता है-यदि आपका वजन 90 किलोग्राम से अधिक या 50 किलोग्राम से कम है तो आपकी डॉक्टर एक विशेष आहार की सलाह दे सकती है-

18- ये भी हो सकता है की आपको भूख न हो, परन्तु यह संभावना है कि आपका शिशु भूखा हो इसलिए हर चार घंटे कुछ खाने की कोशिश करनी चाहिए तथा कभी-कभी सुबह या फिर सारे दिन की मिचली, कुछ खाद्य पदार्थों को नापसंद करना, अम्लता या अपच के कारण खाना खाने में मुश्किल हो सकती है इसलिए आप दिन में तीन बार बड़े भोजन करने की बजाय पांच या छह बार कम मात्रा में भोजन का सेवन करने की कोशिश करें- आपके शिशु को नियमित रूप से आहार की जरूरत है और आपको अपनी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने की जरूरत है तो कोशिश करें की सही समय पर खाना ज़रूर खाएं- उच्च फाइबर और पूर्ण अनाज के भोजन खाने से आपका पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ रहेगा और ये अधिक पौष्टिक भी होंगे-

19- आप गर्भवती हैं इसलिए आपको अपने सभी पंसदीदा खाद्य पदार्थ छोड़ने की आवश्यकता नहीं है परन्तु प्रसंस्कृत(PROCESSED)या अत्याधिक तला हुआ भोजन एवं स्नैक्स तथा चीनी से भरे मिष्ठान आपके आहार का मुख्य हिस्सा नहीं होने चाहिए-आईसक्रीम की बजाय एक केला खाएं अथवा कैलोरियों से भरपूर जलेबी की जगह बादाम या केसर का दूध पीएं-यदि आपको कभी-कभी चॉकलेट या गुलाब जामुन खाने का मन हो-तो संकोच न करें बल्कि उसके हर एक निवाले का आनंद भी लें-


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25 अप्रैल 2017

बच्चों-को सही दस्त नही होने पर क्या करें

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कभी-कभी माता के अनुचित आहार-विहार के कारण बच्चों का दूध दूषित हो जाता है जिससे छोटे बच्चों की पाचन शक्ति खराब होकर वायु विकारयुक्त हो जाती है इससे बच्चों का मल का सूख जाना(Constipation in children)अथवा सही दस्त का अभाव पेट में दर्द गुडगुडाहट उल्टी आदि होते है और छोटा बच्चा रोते-रोते बेहाल हो जाता है छोटे बच्चे को होने वाले मल में गेंद जैसे गोल-गोल तथा छोटे-छोटे ढेले होते है-

बच्चों-को सही दस्त नही होने पर क्या करें

इस अवस्था को संस्थम्भी कब्ज(Constipated constipation)कहते है तथा बच्चों को इस अवस्था में बहुत तेज दर्द होता है जिसके कारण वह अपने मल को रोक लेते है और उन्हे कब्ज की शिकायत हो जाती है 

आपके बच्चे भी एक छोटे व्यस्क है इसलिए उन्हें भी वयस्कों के रूप में ही व्यवहार करना चाहिए बच्चों को कब्ज़ समान है इसलिए माता-पिता को दवाइयों की सहायता नहीं लेनी चाहिए इसकी बजाय कई तुरंत घरेलू उपाय हैं जिनसे कब्ज में आराम दिलाया जा सकता है और परिणामस्वरुप दवाइयां खाने के बजाए माता-पिता अपने बच्चों को विभिन्न घरेलू उपचार से इस समस्या से निजात दिला सकते हैं-

क्या उपाय करें-


1- नीम के तेल का फ़ाहा गुदा मार्ग में लगाने से भी बच्चों का मलावरोध दूर हो जाता है-

2- रात को बीज निकाला हुआ छुहारा पानी में भिगो दें और सुबह उसे पानी में मसल कर निचोड लें तथा छुहारे को फ़ेंक दें तथा वह पानी बच्चे को आवश्यकता के अनुसार देने से मलावरोध दूर हो जाता है-

3- बडी हरड को पानी के साथ पत्थर पर घिसकर उसमें मूंग के दाने के बराबर काला नमक डालें तथा उसे गुनगुना गरम करके बच्चे को एक चम्मच दिन में तीन बार देने से मलावरोध दूर हो जाता है-

4- जैतून का तेल वसा का सबसे अच्छा स्रोत के नाम से जाने जाने वाला जैतून के तेल का स्वस्थ भोजन में योगदान नकारा नहीं जा सकता है इसलिए यह बच्चों की कब्ज से लड़ सकता है जैतून का तेल खाने में तेल या मक्खन की जगह ले सकते हैं यही सही रुप में या मलाशय की गति को ठीक करता है और बच्चों सुलभ मल त्यागने में सहायता करता है ये बड़े लोगों के लिए भी लाभदायक है-

5- वसायुक्त खाना बच्चों के नियमित शौच के लिए अत्यंत जरुरी है इस प्रकार के भोजन में आप सेब, गाजर, मिला सकते हैं

एक छीली हुई गाजर
एक छीली हुआ सेब
एक मुट्ठी नट्स
एक संतरे का रस
एक संतरा
½ कप दुध

फूड प्रोसेसर में सारी वस्तुओं को मिलाकर मुलायम होने तक चलाएं आप यदि चाहे जो कुछ चीनी भी मिला सकते हैं आप इसे बच्चों को पीने को दें जमा हुआ मल आसानी से निकल जाएगा आप चाहे तो अपने बच्चों को नियमित भी दें सकते है-


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जीवन रक्षक घोल क्या है कैसे घर पर बनायें

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हमारे सभी के शरीर में प्राकृतिक रूप से जलीय अंश की एक सामान्य मात्रा होती है और जब किसी भी कारण से जब यही जल की मात्रा सामान्य रूप से कम हो जाती है तो इसे ही मेडिकल भाषा में निर्जलीकरण या डिहायड्रेशन(Dihayadration)कहते है और इस कमी का जल्द ही सुधार किया जाना आवश्यक होता है इस स्थिति को सुधारने की क्रिया को हम पुनर्जलन(Rehydration)करना कहते है आप सभी को इस जीवन रक्षक घोल(O.R.S)की जानकारी अवश्य होनी चाहिए ताकि उल्टी-दस्त होते ही आप घर पर तुरंत ही जीवन रक्षक घोल रोगी को पिला सकें और उसके शरीर में पानी की कमी को पूरा कर सकें-

जीवन रक्षक घोल क्या है कैसे घर पर बनायें

जीवन रक्षक घोल(O.R.S)घर पर बनाने की विधि-


सादा नमक(Plain salt)- एक चाय का चम्मच 
खाने का सोडा(Baking Soda)- एक चम्मच 
पानी उबाल कर ठंडा किया हुआ(Boiling Cold water) -आठ गिलास या तीन लोटा 
नीबू का रस(Lemon juice)-1/2 नीबू 
शक्कर(Sugar)- 1/4चम्मच 

1- ठन्डे किये पानी में सभी उपरोक्त चीजो को मिला कर कांच या मिटटी के बर्तन में रक्खें बर्तन साफ़ होना चाहिए भूल कर भी आप इसे ताबें या पीतल के बर्तन में न रक्खें और 12 घंटे के बाद इस घोल को दुबारा ही बनाना चाहिए-

2- बच्चों को जब भी उल्टी-दस्त शुरू होते ही जीवन रक्षक घोल(O.R.S) देना शुरू कर देना चाहिए देर करने से हालत बिगड़ सकती है पानी की कमी से मृत्यु तक हो सकती है इसलिए लापरवाही उचित नहीं है-

3- उम्र के अनुसार आप इसकी मात्रा निर्धारित कर सकते है अगर बच्चा दूध पीता है तो उसे माँ का दूध नहीं बंद करे साथ ही इस घोल को चम्मच द्वारा अवश्य थोड़ी-थोड़ी देर से देते रहे-

4- ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट्स (ओआरएस) डिहाइड्रेशन यानी निर्जलीकरण को दूर करने का ये सबसे किफायती और प्रभावशाली उपाय है इसके जरिये शरीर को इलेक्ट्रॉल्स ग्लूजकोज और जल की पर्याप्‍त मात्रा मिलती है ये बच्चों के दस्त लगने पर किसी संजीवनी से कम नहीं है इससे बच्चों का दस्त ठीक हो जाता है डायरिया की चपेट में आने वाले बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के भी ओआरएस का घोल दिया जा सकता है इसके कारण बच्चों की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ने से भी बच सकती है-

5- ओआरएस(O.R.S)को दुनिया भर में सराहा जाता है इसे इस सदी की सबसे बड़ी चिकित्सीय उपलब्धि भी माना जाता है अगर डायरिया बढ़ जाए या दस्त के साथ खून आए तो भी डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए- अगर बच्‍चे को दस्‍त के साथ लगातार उल्टियां भी हो रही हों तो भी आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए-

6- आज-कल बाजार में ओआरएस(O.R.S) के पैकेट उपलब्ध है लेकिन कभी-कभी अचानक जब रात को ये परेशानी हो और आपको मेडिकल न खुला हो तो आप इसे तुरंत घर पे बना सकते है-

मात्रा-

बच्चे की उम्र 6 महीने से कम है तब 10 मिलीग्राम और 6 महीने से ज्यादा है तब उसे 20 मिलीग्राम ORS घोल देना चाहिए-इसी तरह 2 साल से छोटे बच्चों को दस्त के बाद कम से कम 75 से 125 मिलीग्राम ORS घोल देना चाहिए और अगर बच्चा 2 साल से बड़ा है तब उसे 125 से 250 मिलीग्राम घोल रोजाना देना चाहिए-


Upcharऔर प्रयोग-

आप अपने बच्चों में इम्युनिटी पावर बढायें

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बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को लेकर काफी संवेदनशील देखे जा सकते है जरा सा बच्चे को सर्दी, फ्लू या गले में हल्की खराश होता है तो चिकित्सक को आग्रह करते हुए एक एंटी-बायोटिक(Anti-biotic)देने को कहते है अधिकतर बच्चो को जुकाम खांसी और बुखार की समस्या का सामना मौसम बदलने से कम लेकिन संक्रमण से अधिक होता है लेकिन अगर आप अपने बच्चे की इम्युनिटी(Immunity)को बढ़ावा दें तो ऐसी संक्रमण वाली बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है-
आप अपने बच्चों में इम्युनिटी पावर बढायें


सर्दी के मौसम में जुकाम खांसी और बुखार होने जीवन की सच्चाई व आम बात है लेकिन जीवन में अगर स्मार्ट कदम उठाए जाएँ तो सर्दी के दिनों में इन बीमारियों को कमी जरुर की जा सकती है जबकि निश्चित ही बच्चे सारा दिन कीटाणुओं और विषाणुओं के सम्पर्क में रहते है और इसी वजह से सर्दी का मौसम आते ही वह दुर्भाग्य से जुकाम खांसी जैसी बीमारियों का शिकार हो जाते है बचपन में अधिकतर बीमारियां वायरस के कारण होती है-आइये जानते है कि बच्चे की इम्युनिटी(Immunity)को बढ़ावा देने के लिए कौन-कौन से स्वस्थ आदतों को अपनाना पड़ेगा-

इम्युनिटी(Immunity)बढाने के लिए क्या करें- 


1- ये भी एक कटुसत्य है कि मां के दूध में इम्युनिटी को चार्ज कर उनके मजबूत बनाने के सारे गुण मौजूद होते है माँ का दूध बच्चो को कान में संक्रमण, एलर्जी, दस्त, निमोनिया, दिमागी बुखार, मूत्र-मार्ग में संक्रमण और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूत बनाता है बच्चे के मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाने और इंसुलिन निर्भर मधुमेह ,कोलाइटिस और कैंसर से रक्षा में मदद मिलती है बच्चे को जन्म लेने के साथ-साथ ही स्तनों से बहने वाले गाढे पतले पीले दूध को कम से कम दो-तीन महीने तक स्तन फ़ीड(Breast-feed)जरुर कराएं कम से कम आप आधुनिकता की दौड़ में या फिर सौन्दर्य के लिए अपने बच्चो को कमजोर न बनाये-

2- गाजर, हरी बीन्स, संतरे, स्ट्रॉबेरी ये सभी विटामिन सी और कैरोटीन युक्त होते है और इनमे आपके बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ाने वाला पिटोनुट्रिएंट्स भी होता है पिटोनुट्रिएंट्स कैंसर और हृदय रोग जैसे पुराने रोगों के खिलाफ हमारी रक्षा कर सकते हैं एक दिन में बच्चो को पांच बार में फलों और सब्जियों को उनकी भूख अनुसार खिलाने का प्रयास करते है तो बच्चे की इम्युनिटी(Immunity)को संक्रमण से लड़ने के लिए मजबूत बना सकते है मतलब ये जितना जादा हो सके अपने बच्चो को फल और सब्ब्जियाँ अधिकतर मात्रा में सेवन कराये -

3- फिटनेस के लिए ये जरुरी है खुद व्यायाम करे और ये आदत अपने बच्चों को देना भी जरूरी है परिवार की बड़े सदस्य उनके रोल मॉडल बनें अब तो कई शोधो से यह बात साबित हो चुकी है कि नियमित व्यायाम से कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और इसके फायदा बच्चों को स्वस्थ रखने में मिलेगा समस्त परिवार चाहे तो बाइक की सवारी, लंबी पैदल यात्रा, लाइन स्केटिंग, बास्केटबॉल और टेनिस आदि खेल को शामिल करके भी कसरत का लाभ ले सकते है-

4- अपने बच्चे को जुकाम खांसी और बुखार जैसी संक्रमण जैसी बीमारियों से बचाने के लिए संक्रमण(Infection) वाले जीवाणु से हमेशा बचा कर रखें और इसके लिए आपको बड़ी बातों के साथ-साथ छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे-परिवार के अन्य सदस्यों को संक्रमित, टूथब्रश आदि के साथ-साथ बच्चों के तौलिया रुमाल और खिलौनों की सफाई हमेशा समय-समय पर करते रहें आप बच्चों को कीटाणुओं से बचाने के लिए बचपन से ही हाथ धोने के बाद ही हाथों को होठों के पास लाने और कुछ खाने का ज्ञान दें- इसके अतिरिक्त नाक बहने पर सही तरीके से रुमाल का इस्तेमाल,पालतू जानवर हैंडलिंग, बाहर खेलते समय बाथरूम का उपयोग ,स्कूल और खेल के मैदान से घर पहुंचने के बाद उनकी स्वच्छता की ओर विशेष ध्यान दें-

5- बच्चो के सोने के समय को अवस्य बढाए क्युकि नींद पूर्ण न होने पर इम्युनिटी तो कमजोर होती ही साथ में आपका बच्चा बीमारी का अधिक शिकार होने लगता है और कई बार तो रोगाणु कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर बड़ी बीमारियों को निमंत्रण देते है जिससे स्वास्थ्य मुश्किलें बढ़ जाती है होने वाले नवजात बच्चों को एक दिन में 18 घंटे की नींद तो वही छोटे बच्चों को 12 से 13 घंटे की नींद की आवश्यकता पड़ती है इसके अलावा उभरते युवा बच्चे रोजाना 10 घंटे की नींद लेते है तो उनके इम्युन सिस्टम(Immunity System)मजबूत है और नियमित रूप से अगर नींद पूरी होती रहें तो इम्युनिटी मजबूत हो जाती है छोटे बच्चे अगर दिन में नही सोते है तो उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए शाम को जल्दी बिस्तर पर सुला दें-

6- आपके घर में कोई सदस्य धूम्रपान(Smoking)करता है तो बच्चों की सेहत का ध्यान रखते हुए उसे छोड़ दें सिगरेट के धुआं शरीर में कोशिकाओं को मार सकते हैं इसके अलावा सिगरेट बीड़ी में कई अधिक विषाक्त पदार्थों शामिल होते है जो अतिसंवेदनशील बच्चों के रोग नियंत्रण शक्ति को प्रभावित कर इम्युनिटी(Immunity)को कमजोर करते है जब धूम्रपान करने वाला व्यक्ति धुआं छोड़ता है तो बच्चें जो तेज दर से साँस लेते है उनको अस्थमा कान में संक्रमण तंत्रिका(Transition nerve) संबंधी परेशानी से जूझना पड़ सकता है-

7- उपरोक्त सुझाव का पालन करते हुए बच्चों के साथ-साथ कुछ हद तक बड़ों की इम्युनिटी सिस्टम(Immunity System)को मजबूत किया जा सकता है और कई सक्रमण तथा मौसम परिवर्तन वाली बीमारियों से बचा जा सकता है-


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आप अपने बच्चो को मनमानी से कैसे रोकें

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ये जरुरी नहीं है आप दुनियां के सबसे अच्छे माँ-बाप है और ये भी जरुरी नहीं है कि आप अपने बच्चों(Children)को सही प्रकार से गाइड कर रहे है वैसे तो हर माँ-पिता अपने बच्चो के लिए अच्छा बनाने के लिए न जाने क्या-क्या प्रयास करते है लेकिन तब भी ये जरुरी नहीं है कि सभी माता-पिता परफेक्ट ही होगें ये भी तो हो सकता है कि बच्चों को सही मार्ग दिखाने की आपकी गाइड-लाइन गलत हो क्यूंकि आखिर बच्चे तो जिद्दी होते ही है-

आप अपने बच्चो को मनमानी से कैसे रोकें

बच्चों को सुधरने के टिप्स(Tips)अपनाएँ-


1- यदि आपका बच्चा(child)आपसे सीधी जिद करे तो कुछ माता-पिता सीधा-सीधा एक फरमान जारी कर देते हैं कि तुम जो मांग रहे हो वह तुम्हें नहीं मिलेगा लेकिन कई बार बच्चे की मांग जायज भी होती है अगर साथ में कोई-कोई माता-पिता तो अक्सर बिना सोचे-समझे बच्चे की इच्छा पूरी भी कर देते हैं ताकि उनकी बातचीत में दखल न हो या फिर दूसरों के सामने उनकी इमेज खराब न हो-लेकिन हो सकता है कि बच्चे की हर जिद को पूरी करना आगे चल-कर आपके और आपके बच्चे के लिए दुखदाई साबित हो-

2- वैसे बच्चे को हमेशा जादा रोकें-टोकें नहीं लेकिन हर बात के लिए "हां" करना भी गलत है और हमेशा न करना भी सही नहीं है यानि 'डोंट डू दिस, डोंट टू दैट' का रवैया सही नहीं है-जो बात मानने वाली है उसे मान लेना भी चाहिए क्युकि अगर उसकी कुछ बातें मान ली जाएंगी तो वह जिद कम करेगा-मसलन कभी-कभी खिलौना दिलाना-उसकी पसंद की चीजें खिलाना जैसी बातें मान सकते हैं-

3- ध्यान रहे कि अगर एक बार इनकार कर दिया तो फिर बच्चे की जिद के सामने झुककर हां न करें यदि बच्चे को अगर यह मालूम हो कि मां या पापा की 'हां' का मतलब 'हां' और 'ना' का मतलब 'ना' है तो वह जिद नहीं करेगा-

4- ये भी एक जरुरी बात ध्यान रखें कि बच्चे के किसी भी मसले पर मां-पापा दोनों की सहमति होनी जरूरी है-ऐसा न हो कि एक इनकार करे और दूसरा उस बात के लिए मान जाए-अगर एक सख्त है और दूसरा नरम है तो बच्चा इसका फायदा उठाता है-जो बात नहीं माननी है उसके लिए बिल्कुल साफ इनकार करें और पुरजोर देकर करें और ये काम आप दोनों पति-पत्नी मिलकर करें तथा अगर घर में बाकी लोग हैं तो वे भी बच्चे की तरफदारी न करें-तभी आपके बच्चे में कुछ दिनों बाद सुधार आएगा-

5- आप अपने बच्चे के सामने खुद को कमजोर बनकर न दिखाएं और न ही उसके सामने रोएं-इससे बच्चा ब्लैकमेलिंग सीख लेता है और बार-बार इस हथियार का इस्तेमाल करने लगता है आप यह न कहें कि अगर तुम यह काम करोगे तो हम वैसा करेंगे-मसलन अगर तुम होमवर्क पूरा करोगे तो आइसक्रीम खाने चलेंगे-उससे कहें कि पहले होमवर्क पूरा कर लो-फिर आइसक्रीम खाने चलेंगे-इससे उसे पता रहेगा कि अपना काम करना जरूरी है बच्चा भी समझ जाता है कि ऐसे में फिजूल जिद बेकार है- 

6- आप बच्चे से बहस की बजाय कई बार समझौता कर सकते हैं कि चलो तुम थोड़ी देर कंप्यूटर पर गेम्स खेल लो और फिर थोड़ी देर पढ़ाई कर लेना-इससे बच्चा दुनिया के साथ भी Negotiate करना सीख जाता है-हालांकि ऐसा हर बार न हो वरना बच्चे में ज्यादा चालाकी आ जाती है-

7- यह भी देखें कि बच्चा जिद कर रहा है या आप जिद कर रहे हैं क्योंकि कई बार पैरंट्स भी बच्चे की किसी बात को लेकर ईगो इशू बना लेते हैं तो यह सरासर गलत है-

8- आपका बच्चा  टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर, गेम्स से चिपका रहे तो कई पैरंट्स सीधे टीवी या कंप्यूटर ऑफ कर देते हैं और कई माता-पिता रिमोट छीनकर अपना सीरियल या न्यूज देखने लगते हैं-इसी तरह कुछ मोबाइल छीनने लगते हैं और कुछ इतने बेपरवाह होते हैं कि ध्यान ही नहीं देते कि बच्चा कितनी देर से टीवी देख रहा है या गेम्स खेल रहा है- 

9- कई बार मां अपनी बातचीत या काम में दखलंदाजी से बचने से लिए बच्चों से खुद ही बेवक्त टीवी देखने को कह देती हैं बच्चे से रिमोट छीनकर बंद न करें और न ही अपनी पसंद का प्रोग्राम लगाकर देखने बैठ जाएं आप अपने बच्चे को कुछ बनाना चाहते है तो अपना टीवी देखना कम करें क्युकि अक्सर बच्चे स्कूल से आते हैं तो मां टीवी देखती मिलती है-

10- बच्चे की पसंद के हर प्रोग्राम में कमी न निकालें कि यह खराब है-उससे पूछें कि वह जो देख रहा है उससे उसने क्या सीखा और हम भी वह प्रोग्राम देखेंगे-  

11- अखबार देखें और बच्चे के साथ बैठकर तय करें कि वह कितने बजे, कौन-सा प्रोग्राम देखेगा और आप कौन-सा प्रोग्राम देखेंगे-इससे बच्चा सिलेक्टिव हो जाता है-तब उसके कमरे में टाइम टेबल लगा दें कि वह किस वक्त टीवी देखेगा और कब गेम्स खेलेगा? अगर वह एक दिन ज्यादा देखता है तो निशान लगा दें और अगले दिन कटौती कर दें-

12- विडियो गेम्स आदि के लिए हफ्ते में कोई खास दिन या वक्त तय करें-आप खुद भी हर वक्त फोन पर बिजी न रहें वरना बच्चे से इनकार करना मुश्किल होगा- हां, उसे मोबाइल देते वक्त ही मोबाइल बिल की लिमिट तय करें कि महीने में उसे इतने रुपए का ही मोबाइल खर्च मिलेगा-दूसरों को दिखाने के लिए उसे महंगा फोन न दिलाएं और उसे बताएं कि ज्यादा लंबी बातचीत से शरीर को क्या नुकसान हो सकते हैं..? इतना वक्त खराब करने से पढ़ाई का नुकसान हो सकता है आदि-इसी तरह बताएं कि चैटिंग करें लेकिन बाद में-

12- अकेले में बच्चे का मोबाइल अवस्य चेक करें-उसमें गलत एमएमएस नजर आएं या ज्यादातर मेसेज डिलीट मिलें तो कुछ गड़बड़ हो सकती है-  

13- आप कंप्यूटर ऐसी जगह पर रखें-जहां से उस पर सबकी निगाह पड़ती हो-इससे पता चलता रहेगा कि वह किस वेबसाइट पर क्या कर रहा है तथा इंटरनेट की हिस्ट्री चेक करें- 

14- कंप्यूटर यदि घर पर है तो बच्चे को फोटोशॉप या पेंट आदि सिखाएं-इससे वह कंप्यूटर का रचनात्मक इस्तेमाल कर सकेगा और अगर पता लग जाए कि बच्चे में बुरी आदतें पड़ गई हैं तो उसे एकदम डांटें नहीं लेकिन अपने बर्ताव में सख्ती जरूर ले आएं और उसे साफ-साफ बताएं कि आगे से ऐसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा लेकिन ध्यान रहे कि उसकी गलती का बार-बार जिक्र न करें-बच्चे की अटेंशन डायवर्ट करें-उसे खेल खिलाने पार्क आदि ले जाएं-उसकी Energy का इस्तेमाल सही दिशा में नहीं होगा-तो वह भटक सकता है-

15- कुछ माता-पिता अपने बच्चों से घर के काम के लिए कहती है और बच्चा यदि  घर के कामों में हाथ न बंटाए तो अक्सर माताएं बच्चों से कहती हैं कि मेरे होते हुए तुम्हें काम करने की क्या जरूरत है और बाद में जब आपका बच्चा काम से जी चुराने लगता है तो आप उसे कामचोर कहने लगती हैं जो सरासर ही गलत है-

16- कई माता-पिता लड़के-लड़की में भेद करते हुए कहती हैं कि यह काम लड़के नहीं करते है सिर्फ लड़कियां करती हैं और कई बार माँ सजा के तौर पर काम कराती हैं-जैसे- यदि पढ़ नहीं रहे हो तो चलो घर की सफाई करो या किचन में हेल्प करो आदि-बच्चे को लगातार सलाह भी देती रहती हैं संभलकर गिर जाएगा या टूट जाएगा-जबकि ये गलत है-

17- आप बच्चे को काम बताएं और बार-बार टोकें नहीं कि गिर जाएगा या तुमसे होगा नहीं-बड़ों से भी चीजें गिर जाती हैं जबकि बार-बार टोकने से बच्चे का आत्मसम्मान और इच्छा दोनों खत्म हो जाती हैं-इसके बजाय उसे प्रोत्साहित करें-

18- आप अपने बच्चे से थोडा काम भी करवाएं जैसे-आप बच्चे से पानी मंगवाएं और थोड़ा बड़ा होने पर चाय बनवाएं बल्कि सबके सामने उसकी तारीफ भी करें कि वह कितनी अच्छी चाय बनाता है-इससे बच्चे की घर के कामों में दिलचस्पी बनने लगती है क्योंकि आज के वक्त में यह एक जरूरत भी बन गई है उल्टे दूसरों के सामने बार-बार शान से यह न कहें कि मैं अपने बच्चे से घर का कोई काम नहीं कराती हूँ इससे उसे लगेगा कि घर का काम नहीं करना एक शान की बात है-

19- प्यार-दुलार के दबाव में बच्चा महंगी चीजों की डिमांड करे तो महंगी चीजें मांगने पर या तो बच्चों को डांट पड़ती है या फिर माता-पिता अपनी बेचारगी दिखाते हैं कि हम तो गरीब हैं-हम तुम्हें दूसरों की तरह महंगी चीजें नहीं दिला सकते है जबकि आप बल्कि बच्चे के सामने बैठकर बातें करें कि आपके पास कितना पैसा है और उसे कहां खर्च करना है तथा उसके साथ बैठकर प्लानिंग करें कि इस महीने तुम्हें नए कपड़े मिलेंगे और अगले महीने मैं खरीद लूंगा-इससे उसे आपकी कमाई का आइडिया रहेगा-अक्सर पैरंट्स अपनी कटौती कर बच्चे की सारी इच्छाएं पूरी करते हैं तो हर बार ऐसा न करें वरना उसकी डिमांड बढ़ती जाएगी और वह स्वार्थी हो सकता है उसके सामने यह न करें कि तुम्हारा वह दोस्त फिजूलखर्च है या वह बड़े बाप का बेटा है आदि-बल्कि सामने घर खर्च का हिसाब करने से आपका बच्चा पैसे के महत्व और उसके खर्च की उपयोगिता को समझ सकेगे-

20- ध्यान रक्खें कि बच्चों को अपने दोस्तों की बुराई पसंद नहीं आती है यदि कुछ कहना भी है तो घुमाकर अच्छे शब्दों में कहें कि तुम्हारा दोस्त बहुत अच्छा है लेकिन कभी-कभी थोड़ा ज्यादा खर्च कर देता है जो बिलकुल भी सही नहीं है-  

21- बच्चे की नींव इस तरह तैयार करें कि उसकी संगत भी अच्छी हो और उसके दोस्तों पर निगाह रखें और उन्हें अपने घर बुलाते रहें तथा बच्चे को ऐसे बच्चों के साथ ही दोस्ती करने को प्रेरित करें जिनकी वैल्यू आपके परिवार के साथ मैच करें-

22- आपका बच्चा जब दूसरे बच्चों से मारपीट करे तो-कई पैरंट्स इस बात पर बहुत खुश होते हैं कि उनका बच्चा मार खाकर नहीं आता है बल्कि दूसरे बच्चों को मारकर आता है और वे इसके लिए अपने बच्चे की तारीफ भी करते हैं जब दूसरे लोग शिकायत करते हैं तो उलटा पैरंट्स उनसे लड़ने को उतारू हो जाते हैं कि हमारा बच्चा ऐसा नहीं कर सकता है-

23- कुछ माताएं ये भी कहती हैं कि तुम दूसरे बच्चों को मारोगे तो इंजेक्शन लगवा दूंगी या टीचर से डांट पड़वा दूंगी या झोलीवाला बाबा ले जाएगा जबकि थोड़े दिन बाद बच्चा जान जाता है ये सारी बातें झूठ हैं तब वह और ज्यादा पीटने लगता है यानी निडर बन जाता है-

24- अगर घर में बच्चे आपस में लड़ते हैं तो लड़ने दें-आखिर में जब दोनों शिकायत लेकर आएं तो बताएं कि जो भी बड़ा भाई/बहन है वह खुद आपके आप आकर बात करेगा आप दोनों में से किसी का भी पक्ष न लें और कोई दूसरा शिकायत लेकर आएं तो सुनें आप उनसे कह सकते हैं कि मैं बच्चे को समझाऊंगी वैसे, बच्चे तो आपस में लड़ते ही रहते हैं-उनकी बातों में न आएं-इससे लड़ने के बावजूद बच्चों में दोस्ती बनी रहती है-बच्चे को सामने बिठाकर समझाएं कि अगर आप मारपीट करोगे तो कोई आपसे बात नहीं करेगा-कोई आपसे दोस्ती नहीं करेगा-आप उसे गलती के नतीजे बताएं-इसके लिए उसे सजा जरूर दें लेकिन सजा मारपीट या डांट के बजाय दूसरी तरह से दी जाए जैसे कि मां आपसे दो घंटे बात नहीं करेंगी या पसंद का खाना नहीं मिलेगा आदि-

25- अक्सर बहुत सी मां को लगता है मेरा बच्चा तो कुछ खाता ही नहीं है और वह जबरन उसे खिलाने की कोशिश भी करती है अगर वह हेल्दी खाना नहीं खाना चाहता तो मां उसे मैगी, पिज्जा, बर्गर आदि खिला देती है-उसे लगता है कि इस बहाने वह कुछ तो खाएगा-कई पैरंट्स खुद खूब फास्ट फूड खाते हैं या इनाम के तौर पर बच्चे को बार-बार फास्ट फूड की ट्रीट देते हैं बल्कि आप बच्चे के साथ बैठकर हफ्ते भर का घर का मेन्यू तय करें कि किस दिन कब क्या बनेगा-इसमें एक-आध दिन नूडल्स जैसी चीजें शामिल कर सकते हैं-अगर बच्चा रूल बनाने में शामिल रहेगा तो वह उन्हें फॉलो भी करेगा-यह काम तीन-चार साल के बच्चे के साथ भी बखूबी कर सकते हैं-

26- कभी-कभी बच्चे की पसंद की चीजें बना दें लेकिन हमेशा ऐसा न करें-पसंद की चीजों में भी ध्यान रहे कि पौष्टिक खाना जरूर हो-इस डर से कि खा नहीं रहा है तो कुछ तो खा ले इसलिए नूडल्स, सैंडविच, पिज्जा जैसी चीजें बार-बार न बनाएं वरना वह जान-बूझकर भूखा रहने लगेगा और सोचेगा कि आखिर में उसे पसंद की चीज मिल जाएगी-जब भूख लगेगी तो बच्चा नॉर्मल खाना खा लेगा-  

27- छोटे बच्चों को खाने में क्रिएटिविटी अच्छी लगती है इसलिए उनके लिए जैम, सॉस आदि से डिजाइन बना दें सलाद भी अगर फूल,चिड़िया, फिश आदि की शेप में काटकर देंगे तो वह खुश होकर उसे भी खा लेगा-

28- बच्चे टीचर्स की बातें मानते हैं इसलिए टीचर से बात करके टिफिन में ज्यादा और पौष्टिक खाना पैक कर सकते हैं ताकि वह स्कूल में खा ले-बच्चे को हर वक्त जंक फूड खाने से न रोकें बल्कि उसके साथ बैठकर तय करें कि वह हफ्ते में एक दिन जंक फूड खा सकता है तथा इसके अलावा, दोस्तों के साथ पार्टी आदि के मौके पर इसकी छूट होगी-नहीं खाना है ये कहने के बजाय उसे समझाएं कि ज्यादा जंक फूड खाने के क्या नुकसान हो सकते हैं- और लॉजिक देकर समझाने से वह खाने की जिद नहीं करेगा लेकिन पैरंट्स खुद भी जंक फूड न खाएं तथा इसके अलावा, जिस चीज के बारे में एक बार कह दिया कि इसे खाना गलत है तो बाद में किसी बात से खुश होकर बच्चे को उसे खाने की छूट न दें-

29-आप ध्यान दें कि दुनिया में कोई भी पैरंट्स परफेक्ट नहीं होते है कभी यह न सोचें कि हम परफेक्टली बच्चों को हैंडल करेंगे तो वे गलती नहीं करेंगे- बच्चे ही नहीं-बड़े लोग भी गलती करते हैं अगर बच्चे को कुछ सिखा नहीं पा रहे हैं या कुछ दे नहीं पा रहे हैं तो यह न सोचें कि एक टीचर या प्रवाइडर के रूप में हम फेल हो गए हैं-बच्चों के फ्रेंड्स बनने की कोशिश न करें क्योंकि वे उनके पास काफी होते हैं-उन्हें आपकी जरूरत पैरंट्स के तौर पर है इसलिए पेरेंट्स ही बने दोस्त नहीं-

30- हमने जितना लिखना था उपर लिख दिया है बाकी आप खुद ही समझदार है वैसे ये बच्चा आपका है और नेतिक जिम्मेदारी भी आपकी है-


Upcharऔर प्रयोग-

क्या आपका बच्चा जादा गुस्सा करता है

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वैसे तो हर माता-पिता  की चाहत होती है कि वे अपने बच्चों(Child)को बेहतरीन परवरिश दें और हर माता-पिता ये कोशिश भी करते हैं फिर भी ज्यादातर माता-पिता बच्चों के व्यवहार और प्रदर्शन(Performance)से खुश नहीं होते है उन्हें अक्सर शिकायत करते सुना जा सकता है कि बच्चे ने ऐसा कर दिया बच्चे ने वैसा कर दिया लेकिन इसके लिए काफी हद तक पैरंट्स ही जिम्मेदार होते हैं क्योंकि अक्सर किस हालात में क्या कदम उठाना है यह वे स्वयं तय ही नहीं कर पाते है कि किस स्थिति में पैरंट्स(Parents)को क्या करना चाहिए-

क्या आपका बच्चा जादा गुस्सा करता है

जब भी आपका बच्चा स्कूल जाने या पढ़ाई करने से बचे तो आप क्या करते हैं अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे पर गुस्सा ही करते हैं कोई-कोई मां कहती हैं कि तुमसे बात नहीं करूंगी और पापा कहते हैं कि बाहर खाने खिलाने नहीं ले जाऊंगा तथा खिलौना खरीदकर नहीं दूंगा और जब यही बच्चा(Child)जब थोड़ा बड़ा होता है तो पैरंट्स उससे कहते हैं कि कंप्यूटर वापस कर और मोबाइल वापस कर या तुम बेकार लड़के हो या तुम बेवकूफ हो तुम अपने भाई-बहन को देखो-वह पढ़ने में कितना अच्छा है और तुम बुद्धू तथा कभी-कभार गुस्से में थप्पड़ भी मार देते हैं-आप इसकी वजह(Reason)जाने-

आखिर हमें क्या करना चाहिए-


सबसे पहले हम वजह जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा पढ़ने से क्यों बच रहा है इसकी कई वजहें हो सकती हैं जैसे कि हो सकता है उसका आईक्यू लेवल(IQ Level)कम हो सकता है या फिर कोई टीचर नापसंद हो सकता है वह उस वक्त नहीं बाद में पढ़ना चाहता हो आदि कई कारण हो सकते है-  

बच्चा स्कूल जाने लगे तो उसके साथ बैठकर आप Discus करें कि कितने दिन स्कूल जाना है और कितनी देर पढ़ना है आदि-इससे बच्चे को clear रहेगा कि उसे स्कूल जाना है कोई बहाना नहीं चलेगा और उसे यह भी बताएं कि स्कूल में दोस्त मिलेंगे जो उनके साथ खेलेंगे-

अगर बच्चा स्कूल से उदास लौटता है तो प्यार से पूछें कि क्या बात है-क्या टीचर ने डांटा या साथियों से लड़ाई हुई है अगर बच्चा बताए कि फलां टीचर या बच्चा परेशान करता है तो उससे कहें कि हम स्कूल जाकर बात करेंगे और लापरवाही न करें बल्कि आप स्कूल जाकर बात करें भी लेकिन सीधे आप टीचर को दोष कभी न दें-जो बच्चे हाइपरऐक्टिव(Hyper Active)होते हैं उन्हें अक्सर टीचर शैतान मानकर Ignore करने लगती हैं-ऐसे में टीचर से रिक्वेस्ट करें कि बच्चे को Activities में शामिल करें और उसे मॉनिटर(Monitor)जैसी जिम्मेदारी दें-इससे वही बच्चा जिम्मेदार बनता है-

आप क्या करें-


1- जिस वक्त आपका बच्चा नहीं पढ़ना चाहता है उस वक्त आप बच्चे को बिलकुल भी मजबूर न करें वरना वह बच्चा(Child)जिद्दी हो जाएगा और पढ़ाई से बचने लगेगा कुछ देर रुक कर फिर थोड़ी देर बाद पढ़ने को कहें-

2- आप उसके पास बैठें और उसकी पढ़ाई में खुद अपने आप को शामिल करें और उससे पूछें कि आज क्लास में क्या-क्या हुआ है बच्चा थोड़ा बड़ा है तो आप उससे कह सकते हैं कि तुम मुझे यह चीज सिखाओ क्योंकि यह तुम्हें अच्छी तरह आता है इससे वह खुश होकर सिखाएगा और साथ ही साथ खुद भी सीखेगा-

3- छोटे बच्चों को किस्से-कहानियों के रूप में काफी कुछ सिखा सकते हैं और उसे बातों-बातों और खेल-खेल में सिखाएं जैसे किचन में आलू गिनवाएं,बिंदी से डिजाइन बनवाएं आदि-आदि यानि कि पढ़ाई को थोड़ा दिलचस्प तरीके से आप पेश करें-

4- हर बच्चे की पसंद और नापसंद होती है उसकी पसंद के सब्जेक्ट पर ज्यादा फोकस करें और कभी-कभी उसके फ्रेंड्स को घर बुलाकर उनको साथ पढ़ने बैठाएं-इससे पढ़ाई में उसका मन जादा लगेगा-

बच्चे(Child)के साथ क्या न करें-


1- अगर आपका बच्चा उलटा बोले या गालीगलौच करे तो फिर अक्सर पैरंट्स बुरी तरह रिएक्ट करते हैं और बच्चे को उलटा-सीधा बोलने लगते हैं या फिर उस पर चिल्लाते हैं कि फिर से बोलकर दिखा और कई माताएं तो रोने लगती हैं या फिर बातचीत बंद कर देती हैं या फिर ताने मार देती कि मैं तो बुरी हूं और अब क्यों आए हो मेरे पास...? 

2- यदि बच्चा आप पर चीखे-चिल्लाए तो भी आप उस पर चिल्लाएं नहीं आप उस वक्त छोड़ दें लेकिन खुद को पूरी तरह नॉर्मल भी न दिखाएं-वरना वह सोचेगा कि वह कुछ भी करेगा तो आप पर कोई फर्क नहीं पड़ता है आप बाद में जब उसका गुस्सा शांत हो जाए तो बैठकर बात करें कि इस तरह बात करना आपको बुरा लगा और इससे उसके दोस्त, टीचर सभी उसे बुरा बच्चा मानेंगे यह कह कर उसे टाल दें आप इसे लेकर बार-बार बच्चे को कुरेदे नहीं अगर बार-बार बोलेंगे तो उसकी Ego हर्ट होगी-हां, कहानी के जरिए बता सकते हैं कि एक बच्चा था जो गंदी बातें करता था-सबने उससे दोस्ती खत्म कर ली आदि-आदि-

3- आप अपने बच्चे के सामने गाली या खराब भाषा का इस्तेमाल न करें क्युकि वह जो सुनेगा आपसे वही सीखेगा बल्कि उसे बताएं कि ऐसी भाषा तो गलत लोग बोलते हैं उनका Background और Work Culture बिल्कुल अलग है और तुम्हारा बिल्कुल अलग है-  

4- पांच-छह साल से बड़ा बच्चा जान-बूझकर पैरंट्स की मानहानि करने और खुद को Powerful दिखाने के लिए बोलता है कि आप अच्छे नहीं हैं और पैरंट्स भी बहुत आसानी से हर्ट हो जाते हैं बल्कि आप इसके बजाय कह सकते हैं कि तुम इतने अनलकी हो कि तुम्हारी मां गंदी है इससे उसका पावरफुल वाला अहसास खत्म होगा-

5- आपका बच्चा यदि चोरी करे या किसी की चीजें उठा लाए तो पैरंट्स बच्चे को पीटने या डांटने लगते हैं और भाई बहनों के आगे उसे जलील करते हैं कि अपनी चीजें संभालकर रखना क्योंकि यह चोर है तथा कई बार कहते हैं कि तुम हमारे बच्चे नहीं हो सकते हो और अगर कोई दूसरा ऐसी शिकायत लाता है तो वे मानने को तैयार नहीं होते कि हमारा बच्चा ऐसा कर सकता है बल्कि वे पर्दा डालने की कोशिश करने लगते हैं- 

6- आप बच्चे को चोरी करने पर सजा जरूर दें लेकिन सजा मार-पीट के रूप में नहीं बल्कि बच्चे को पसंदीदा प्रोग्राम नहीं देखने देना-उसे आउटिंग पर नहीं ले जाना या फिर खेलने नहीं देना जैसी सजा दे सकते हैं या जो चीज उसे जादा पसंद है उसे कुछ देर के लिए उससे दूर कर दें-

कुछ चीजों पर आप छुप कर नजर रक्खें-


1- आप बच्चे(Child)का बैग रेग्युलर चेक करें लेकिन ऐसा उसके सामने कभी न करें-

2- उसमें कोई भी नई चीज नजर आए तो पूछें कि कहां से आई है और यदि बच्चा झूठ बोले तो प्यार से पूछें-उसकी बेइज्जती न करें और न ही उसके साथ मारपीट करें बल्कि चीज लौटाने को कहें लेकिन पूरी क्लास के सामने माफी न मंगवाएं और अगर बच्चा अगर पांच साल से बड़ा है तब तो बिल्कुल भी नहीं-वह क्लास के सामने बोल सकता है कि यह चीज मुझे मिल गई थी-हाँ उसे अकेले में सख्ती से जरूर समझाएं कि उसने गलत किया है ये चोरी की आदत बहुत बुरी बात है और अगली बार ऐसा नहीं होना चाहिए- क्युकि कभी भी बच्चे को झूठी पनाह नहीं देनी चाहिए-

3- अगर कोई कहता है कि आपके बच्चे ने चोरी की है तो यह न कहें कि वह ऐसा नहीं कर सकता है इससे उसे शह मिलती है बल्कि ये कहें कि हम अकेले में पूछेंगे और सबके सामने न पूछें लेकिन अकेले में आप पूरी इंक्वायरी करें और बच्चे को मोरल एजुकेशन दें तथा उसे बताएं कि आप कोई चीज उठाकर लाएंगे तो आप टेंशन में रहेंगे कि कोई देख न ले-इस टेंशन से बचने का अच्छा तरीका है कि चोरी न की जाए-

4- पैरंट्स की जिम्मेदारी है कि वे बच्चे को जरूरत की सारी चीजें उपलब्ध कराएं-इससे उसका झुकाव चोरी की ओर नहीं होगा-यदि आपका बच्चा झूठ बोले तो अक्सर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं तथा खुद को कोसने लगते हैं कि हमारी तो किस्मत ही खराब है उन्हें लगता है कि बच्चे ने बहुत बड़ा पाप कर दिया है उसके दोस्तों को फोन करके पूछते हैं कि सच क्या है-जब दूसरा कोई शिकायत करता है तो बिना सच जाने बच्चे की ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं कि हमारा बच्चा ऐसा नहीं कर सकता है वे दूसरों के सामने अपनी ईगो को हर्ट नहीं होने देना चाहते है-

तब क्या करना चाहिए-


जब आपका बच्चा झूठ बोले तो ओवर-रिएक्ट न करें और सबसे सामने न डांटें और न ही उसे सही-गलत का पाठ पढ़ाएं आप इसके बजाय उसे उदाहरण देकर उस काम के नेगेटिव पक्ष बताएं तथा उदाहरण में खुद को सामने रखें जैसे-मैं जब छोटा था तो क्लास बंक करता था और घर में झूठ बोलता था लेकिन बाद में मैं पढ़ाई में पीछे रह गया या बाद में ढेर सारा काम करना पड़ता था तथा साथ ही, झूठ बोलने की टेंशन अलग होती थी-इस तरह से बात करने से वह खुद को कठघरे में खड़ा महसूस नहीं करेगा-

उसे समझाएं कि खुद में सच सुनने की हिम्मत पैदा करें और हालात का सामना करें तथा घर में ऐसा माहौल रखें कि बच्चा बड़ी से बड़ी गलती के बारे में बताने से डरे नहीं-बच्चा झूठ तभी बोलता है जब उसे मालूम होता है कि सच कोई सुनेगा नहीं-उसे आप भरोसा दिलाएं कि उसकी गलती माफ हो सकती है-


Upcharऔर प्रयोग-

24 अप्रैल 2017

आप अपने बच्चे का विकास कैसे करें

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माता-पिता बनना एक सुखद अनुभूति है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप बच्चे के माँ-बाप बन जाते है तो अपने बच्चे का विकास(Child Development) कैसे करेंगें जी हाँ ये बात वो माता-पिता ही समझ सकते है जिन्होंने पहले ये अनुभव लिया है लेकिन यदि आप पहली बार ये सुखद अनुभव लेने जा रहे है तो एक बार अवश्य ही इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें-

आप अपने बच्चे का विकास कैसे करें

वैसे जो लोग माँ-बाप बन भी चुके है वो लोग भी आज भी सीखनें का प्रयास ही कर रहें है और हो सकता है कि आपने पहले जो बच्चे अच्छी तरह पाले हों लेकिन अब आने वाले में आपको परेशानी हो सकती है अगर थोडा सा प्रयास करेगें हो सकता है इस बार आप अपने बच्चे(Child)को और अच्छी तरह लालन-पालन कर सकेंगे-

बच्चे के विकास(Child Development) के लिए क्या करें- 


1- सबसे पहले आने वाले बच्चे के लिए आप को एक ऐसा माहौल बनाना आवश्यक है जिससे इंसानों की अगली पीढ़ी आपसे और हमसे कम से कम एक कदम आगे हो आपको ऐसा माहौल तैयार करना बच्चों(Child)के पालन-पोषण में एक बड़ी भूमिका निभाता है इसलिए आपको बच्चे के लिए सही तरह का माहौल तैयार करना चाहिए- जहां खुशी, प्यार, परवाह और अनुशासन की एक भावना आपके अंदर भी और आपके घर में भी हो-ऐसा प्यार भरा माहौल बनाएं जहां बुद्धि का विकास कुदरती तौर पर हो-

2- आपका आने वाला बच्चा जीवन को बुनियादी रूप में देखता है इसलिए आप उसके साथ बैठकर जीवन को बिल्कुल नये पन के साथ देखें जिस तरह बच्चा देखता है आपके बच्चे को कुछ ऐसा करना चाहिए जिसके बारे में सोचने की भी आपकी हिम्मत नहीं हुई और ये बिलकुल भी जरूरी नहीं है कि आपका बच्चा जीवन में वही करेगा-जो आपने किया हो ये भी हो सकता है आपका बच्चा(Child)आपसे जादा सफलता की ऊँचाइयों को छुये-

3- कुछ माता-पिता अपने बच्चों को खूब मजबूत बनाने की इच्छा या चाह के चलते उन्हें बहुत ज्यादा कष्ट में डाल देते हैं और वे चाहते हैं कि उनके बच्चे वह बनें जो वे खुद नहीं बन पाए तथा अपने बच्चों के जरिये अपनी महत्वाकांक्षाएं पूरी करने की कोशिश में कुछ माता-पिता अपने बच्चों के प्रति बहुत सख्त हो जाते हैं तथा दूसरे प्रकार के माता-पिता मानते हैं कि वे अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं और अपने बच्चों को इतना सिर चढ़ा लेते हैं कि उन्हें इस दुनिया में लाचार और बेकार बना देते हैं-

4- आपको इसी लक्ष्य को लेकर चलना चाहिए और अगली पीढ़ी के लिए आपका योगदान यह होना चाहिए कि आप इस दुनिया में कोई बिगड़ैल बच्चा(Child) न छोड़ कर जाएं बल्कि आप अपने बच्चे को एक ऐसा इंसान बनाकर छोड़ कर जाएं जो आपसे कम से कम थोड़ा बेहतर हो-

5- बहुत से लोग अपने बच्चों को लाड़-प्यार में बना देते हैं और परिणाम स्वरूप बच्चे अपने जीवन में ऊँचाइयों को नहीं छू पाते है हमारे एक जान-पहचान के मित्र थे उनके दो बच्चे बचपन में ही लाड-प्यार में पले-बढे थे यदि रात को भी बच्चा किसी चीज की जिद कर दे तो भले वो वस्तु उनको पांच किलोमीटर दूर से लानी हो बेचारे पैदल ही चल देते थे लेने के लिए और आखिर अपने बच्चे के लिए वो ले ही आते थे कोई भी उनका मिलने वाला कितना भी विशिस्ट व्यक्ति हो घर आ जाए अगर बच्चे ने जिद कर दी मुझे अभी ये लाकर दो -सारे काम-काज छोडकर और विशिस्ट व्यक्ति को भी बाद में मिलने के लिए कह कर चले जाते थे-परिणाम स्वरूप इसी जिद को पूरी करने के कारण लड़का धीरे-धीरे बिगड़ता ही चला गया और जब कुछ बड़ा हुआ तो अपने ही गली-मुहल्ले में बदतमीजी करने लगा-तब भी वो हमेशा उसकी गलतियों पर पर्दा ही डालते रहे-अंत में जब बीस वर्ष का हुआ-कालेज में बात-बात में लडको से मार-पीट हुई और गुस्से में आखिर उसके हाथ में एक हाकी थी दुसरे लड़के का सर फूट गया और हास्पीटल जाते-जाते आखिर पडोस का दूसरा लड़का जीवित नहीं बचा-चूँकि ये घटना सिर्फ एक प्रेरणा है दो घर बर्बाद हुए-आखिर कसूर के जिम्मेदार आप भी है जिस कोरे कागज पे आपने बच्चे की हर जिद पूरी करने का इतिहास लिखा था - 

6- हाँलाकि सभी बच्चों पर एक ही नियम लागू नहीं होता है हर बच्चा(Child)अलग होता है यह एक खास विवेक है-इस बारे में कोई सटीक रेखा नहीं खींची जा सकती कि कितना करना है और कितना नहीं करना है-अलग-अलग बच्चों को ध्यान, प्यार और सख्ती के अलग-अलग पैमानों की जरूरत पड़ सकती है-हम सभी को इस बात पे अवश्य गौर करना होगा कि प्यार,जिद,के कारण आगे चलकर आपका बच्चा कहीं इतना उद्दण्ड न हो जाए कि आपके साथ-साथ समाज के लिए भी अभिशाप बन जाए-

7- जन्म के बाद ही आप अपने बच्चे के लिए एक अच्छे शिक्षक बन कर यदि उसके साथ बर्ताव करेगे तो आप अपने बच्चे को आगे चलकर उसका ही मार्ग आसान करेगे ध्यान रहे कि बच्चा एक कोरी मिट्टी है आप उसे जिस प्रकार के सांचे में ढालेगें उसी तरह बन जाएगा-मगर आप ऐसा भी कदापि न करे कि बच्चे को ये लगने लगे कि उस पर आप अपनी इक्षाए थोपना चाहते है-बच्चे को बस एक चीज सिखा सकते हैं जो आपको कुछ हद तक सिखाना पड़ता है कि दुनिया में किस तरह जीवन यापन से जुड़े काम करें-

8- माता-पिता अपने बच्चों की वाकई परवाह करते हैं-तो उन्हें अपने बच्चों को इस तरह पालना चाहिए कि बच्चे को माता-पिता की कभी जरूरत न हो-प्यार की प्रक्रिया हमेशा आजाद करने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए न उलझाने वाली-इसलिए जब बच्चा पैदा होता है तो बच्चे को चारों ओर देखने-परखने, प्रकृति के साथ और खुद अपने साथ समय बिताने दें-प्यार और सहयोग का माहौल बनाएं-

9- एक इंसान के रूप में उसकी अपनी शर्तों पर जीवन की ओर देखने में उसकी मदद करें, परिवार या आपकी धन-दौलत या किसी और चीज से उसकी पहचान न बनने दें-एक इंसान के रूप में जीवन की ओर देखने में उसकी मदद करना उसकी खुशहाली और दुनिया की खुशहाली के लिए बहुत जरूरी है-यह आपके बच्चे के लिए सबसे अच्छा निवेश होगा अगर आप अपने बच्चे को प्रोत्साहित करें कि वह अपने बारे में सोचना सीखे-उसके लिए क्या बेहतर है यह जानने के लिए अपनी बुद्धि और समझ का इस्तेमाल करना सीखे-अगर आप ऐसा करते हैं तो आप निश्चिंत रह सकते हैं कि आपका बच्चा(Child)सही तरीके से विकसित होगा-

10- अपने बच्चे को अच्छी तरह पालना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए कि क्या हम खुद को रूपांतरित कर सकते हैं-जो भी माता-पिता बनना चाहते हैं उन्हें एक साधारण सा प्रयोग करना चाहिए-उन्हें बैठकर देखना चाहिए कि उनके जीवन में क्या ठीक नहीं है और उनकी जिंदगी के लिए क्या अच्छा होगा-बाहरी दुनिया के लिए नहीं-बल्कि खुद उनके लिए-अगर आप अपने बारे में अपना व्यवहार, बातचीत, रवैया और आदतें तीन महीने में बदल सकते हैं तो आप अपने बच्चे को भी समझदारी से संभाल सकते हैं-

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