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Stamina-स्टेमिना के लिए किस Oil से Massage करे

आयुर्वेद में सुगंधित तेलों(Oil)के प्रयोग पर जोर दिया गया है Massage-मसाज के लिए नारियल, तिल या जैतून का तेल अच्छा रहता है वैसे तेल का चुनाव मौसम को देखते हुए भी करना चाहिए-

Stamina-स्टेमिना के लिए किस Oil से Massage करे


आमतौर पर नारायण तेल, शतावरी तेल, चंदनबाला, दशमूल व लाक्षा तेल(Oil)के प्रयोग पर जोर दिया जाता है इन सुगंधित तेलों(Oil) के प्रयोग से दोहरा लाभ मिलता है मालिश(Massage)के लाभ के साथ-साथ इनकी खुशबू का भी असर होता है क्युकि सुगंधित चीजों से सेक्स इच्छा बढ़ जाती हैं और जिन पु्रूषों को सेक्स-संबंधी कोई कमजोरी है, वो इनके प्रयोग से बिना दवा के भी ठीक हो सकते हैं-

मसाज(Massage)का सही तरीका क्या है-

Massage-मसाज के लिए सबसे पहले सुगंधित तेल(Oil)हथेलियों पर लगाकर जिस अंग की मालिश करनी हो उस पर हल्के से दबाव डालकर मालिश करेंऔर यह मालिश तब तक करें, जब तक कि तेल पूरी तरह न सोख ले और अंग की त्वचा हल्की लाल न हो जाए। यह मालिश शीघ्रपतन के रोगियों के लिए काफी लाभदायक होती है-

मालिश इस तरह से करें कि रक्तप्रवाह ऊपर की ओर हो-लेकिन मालिश(Massage)की शुरूआत पैरों से करें और शरीर के अंगों को मसाज करते समय हाथों व मूवमेंट की दिशा नीचे से ऊपर की ओर होनी चाहिए-आप हाथों की मालिश उंगुलियो से शुरू करके कंधों की तरफ बढें-

मसाज की दिशा शरीर में हो रहे रक्तसंचार की दिशा से विपरीत नहीं होनी चाहिए-पैर के तलुओं से शुरू करके फिर पैर की उंगलियो, पिंडलियों, जांघो की मालिश करें और उसके बाद हाथों, भुजाओं, पेट, वक्षस्थल, पीठ, कंधो की मालिश करें-

जांघों के अंदरूनी भाग, हाथ-पैरों के उंगलियों के बीच में, स्तनों के आस-पास मालिश(Massage)करने से सेक्स उत्तेजना बढाने में विशेष लाभ मिलता है-इस प्रकार की मालिश से महिलाएं अपने शरीर को आकर्षक बना सकती हैं-

स्तनों का सेक्स में काफी महत्व है अत: महिलाओं के स्तन कम विकसित हैं तो वे स्तनों पर हल्के दबाव के साथ घर्षण करते हुए स्तनों की Massage(मालिश)करें और अच्छा होगा कि इस तरह कि मालिश खुद न करके किसी एक्सपर्ट से करवाएं या फिर एक बार एक्सपर्ट से समझने के बाद अपने सहयोगी या पार्टनर से भी आप करा सकती है -

मालिश(Massage)के अन्य उपाय -

आज अधिकतर लोग शीघ्रपतन और नपुंसकता से पीडित हैं। इसके कारण वो सेक्स सुख से वंचित रहते हैं, पति की कमजोरी के कारण स्त्रियाँ भी सेक्स सुख नहीं ले पातीं, ऎसी हालत में खास तरीके से बने तेल से मालिश करने से सेक्स प्रॉब्लम्स को दूर करके सुख की अनुभूति ली जा सकती है-

सेक्स बूस्टर तेल (चंदनादि तेल) बनाये-

श्वेत चंदन - 5 ग्राम
लाल चंदन - 5 ग्राम
पतंग - 5 ग्राम
कालीयक की लक़डी - 5 ग्राम
अगर - 5 ग्राम
देवदारू - 5 ग्राम
सरल काष्ठ - 5 ग्राम
पद्दाख - 5 ग्राम
तून की लक़डी - 5 ग्राम
कपूर - 5 ग्राम
कस्तूरी - 5 ग्राम
शिलारस -5 ग्राम
केशर - 5 ग्राम
जायफल -5 ग्राम
चमेली के पत्ते - 5 ग्राम
लौंग - 5 ग्राम
छोटी इलायची -5 ग्राम
ब़डी इलायची -5 ग्राम
शीतलचीनी -5 ग्राम
दालचीनी -5 ग्राम
तेजपाल -5 ग्राम
नागकेशर -5 ग्राम
सुगंधबाला -5 ग्राम
खस -5 ग्राम
जटामांसी -5 ग्राम
छैल छरीला -5 ग्राम
नागरमोथा -5 ग्राम
रेणुका -5 ग्राम
प्रियंगु -5 ग्राम
गंधबिरोजा -5 ग्राम
कपूर -5 ग्राम
गूगल -5 ग्राम
लाख -5 ग्राम
नखी -5 ग्राम
राल -5 ग्राम
धाय के फूल -5 ग्राम
गाठबन -5 ग्राम
मजीठ -5 ग्राम
तगर -5 ग्राम
मोम -5 ग्राम

उपरोक्त सभी सामग्री किसी पुराने आयुर्वेदिक दवा विक्रेता पंसारी से लाये सभी सामग्री का वजन 200 ग्राम होगा इनको लेके एक साथ पीसकर चटनी बना लें फिर इसे एक किलो तिल के तेल में मिलाकर तेल सिद्ध कर लें इसे महा-चंदानादि तेल कहते हैं यह तेल मेडिकल स्टोर्स पर भी उपलब्ध है इस तेल से मालिश करने से न सिर्फ सेक्स पावर बढ़ता है बल्कि यह तेल रक्तपित्त, क्षय, ज्वर, शरीर में जलन, प्रस्वेद, दुर्गध, कुष्ठ और खुजली को भी नष्ट करता है-

भल्लाताकाद्य तेल-

भिलवा - 100 ग्राम
बडी कटेरी - 100 ग्राम
अनार के फल का छिलका - 100 ग्राम

अब आप तीनों को समान मात्रा मे लेकर 300 ग्राम कल्क (पेस्ट ) बना लें फिर इसे चौगुने (1किलो) सरसों के तेल और चार लीटर पानी में मिलाकर पकाएं और जब केवल तेल रह जाए तो इसे उतारकर छान लें और शीशी में रख लें-पुरूष की जननेंद्रिय पर इस तेल से मालिश करने से कमजोरी दूर होगी और वह लंबे समय तक सेक्स कर पाएगा-

अश्वगंधा तेल-

अश्वगंधा
शतावरी
कूठ
जटामांसी
छोटी व बडी कटेरी के फू ल

इन सभी को समान मात्रा में लेकर 250 ग्राम कल्क बना लें-इसे एक किलों तिल का तेल और चार लीटर दूध में मिलाकर पका ले जब तेल बचे तो रख ले इस तेल की मालिश करने से पुरूषों की जननेंद्रिय व महिलाओं के स्तन दृढ होते हैं-

पुरुषो के लिए तिला का प्रयोग-

दालचीनी का तेल
बादाम का तेल
जमालगोटा का तेल
पिस्ता का तेल

सभी तेल समान मात्रा में लेकर एक साथ मिलाकर रख लें-इसे एक बूद की मात्रा में रात को सोेते समय अपनी इंद्रिय पर लगाये और ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं-इस तिला का प्रयोग एक महिने तक करने से पुरुष अंग का टेढापन, पतलापन एंव असमानता दूर हो जाती है और वो शक्तिशाली हो जाता है-
और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-
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क्या हम आज भी Owls-उल्लू है

           "हर डाल पे उल्लू बैठा हो तो अंजामे गुलिस्ता क्या होगा"

जिसने भी कहा यथार्थ सत्य ही कहा है हमारा देश जिसे कभी सोने की चिड़ियाँ कहा जाता था लोगों की बुरी नजर लग गई है पहले मुगलों ने लुटा फिर अंग्रेजो ने लुटा और जब थोडा बहुत बच गया था तो फिर इन राजनीति करने वालों ने लूटा-आखिर क्यों हुआ ऐसा इसका जवाब हमें ही अपने दिल पे हाथ रख कर पूछना होगा आज कल तो हर गाँव में शहर में चौक और गलियारों में राजनीति(Politics)के इन उल्लुओं(Owls)का ही गुणगान होता दिखता है कारण है हम सब उल्लू राजनीति के उल्लुओं(Owls)का गुणगान में लगे है-

क्या हम आज भी Owls-उल्लू है


आज हमारा संविधान(Constitution)भी इन्ही उल्लुओं(Owls)की जेब में है आम आदमी का भी कसूर है जो पहले इन्हें वोट देकर जिताता है फिर खुद-ब-खुद उल्लू(owl) बन जाता है जब जनमत(Public opinion) हम ही इन उल्लुओं(Owls)को देते है तो कसूर किस उल्लू का है -

सत्ता के लोलुप की जेब में जब जनमत(Public opinion)आ जाता है तो हमारा संविधान(Constitution)भी इनकी जेब में होता है और हम सिर्फ एक उल्लू(owl) बन खुद को सविंधान से आशा करते है कि हमें इंशाफ मिलेगा-परिणाम आज से वर्षो पहले भी यही था जब हमारे यहाँ राजे-रजवाड़े हुआ करते थे वो तो बस एशो-आराम -नाच गाने और झूठी शान में ही अपना समय गवां देते थे और लोग व्यापार और पनाह के नाम पर अपने हाथ -पाँव फैला कर हमें ही गुलाम बना लेते थे -और प्रजा सिर्फ उल्लुओं(Owls)की भाँती अपने राजा को देखता रह जाता था और विवश हो जाता था उल्लुओं की तरह जीने में -

आज भी हम नए युग के उल्लुओं(Owls)के गुलाम है एक सुप्रीमो या हाईकमान अपना ही वर्चस्व(Domination) रखना चाहता है और उसके नीचे तमाम उल्लू उसकी आज्ञा मानने को विवश है क्युकि हमारे संस्कार ही हो गए है उल्लुओं की तरह जीने के -

आज से पहले जो बलिदान हुए शहीद थे उनकी आत्मा भी कही न कही से हम सभी उल्लुओं(Owls)को देख कर धिक्कारती ही होगी और ये सोचती होगी कि काश क्या इसी लिए आजादी की जंग लड़ी थी जो आज भी ये गुलाम होकर जीने को विवश है वैसे भी देशभक्तों को इन उल्लुओं(Owls)ने हमेशा उल्लू माना जो कि राष्ट्राभिमान के कारण अंग्रेज सरकार के आगे टेढ़े हो जाने के कारण अपना उल्लू सीधा नहीं कर सके-हमारे शहीद दर-दर जान लेकर भटकते रहे और वंदेमातरम कहकर फांसी के फंदों पर लटकते रहे और जो आजादी के बाद बचे रहे गए-तो वे सपरिवार अपमान और उपेक्षा का जहर गटकते रहे-जबकि अंग्रेजियत से ओत-प्रोत कुछ उल्लू(Owls)भी समझदार निकले उनको पता था बलिदान देकर क्या मिलेगा सत्ता का सुख तो कोई और लेगा इसलिए उन्होंने अपनी समझदारी से अपना उल्लू सीधा किया -

खुद-ब-खुद जो आदमी उल्लू(Owls)बना रहना चाहता है उसका तो भगवान् भी कुछ नहीं कर सकते है- इसमें भी दो तरह के लोग पाए जाते है एक जो दूसरों को उल्लू बनाती है और दूसरी वो है जो खुद ही उल्लू बनती है- 

एक विशेष वर्ग जो पहले से ही उल्लू है उसे तो दूसरा कोई भला कैसे उल्लू बना सकता है-जब आजादी मिली तो अपने घोसले से चालाक उल्लू बाहर आये-चूँकि अब वातावरण उनके अनुकूल हो चुका था-घोंसले के चालाक उल्लुओं से खुद के पूर्वजों की ख्याति के गुणगान गाने शुरू किये उनके नाम पे जगह- जगह पत्थर से लेकर चिकित्सालय और विध्यालय से लेकर कई तरह की इमारतों पे भी पूर्वज उल्लुओं का नामकरण किया जाने लगा ताकि आने वाले वर्षो में नए जन्मे उल्लुओं(Owls)को सिर्फ यही लगे कि अगर कुछ किया है तो सिर्फ एक विशेष समुदाय वर्ग के उल्लुओं ने ही देश के लिए कुछ किया है -बाकी तो सब निम्नकोटि के उल्लू ही थे -

अमर शहीदों के बलिदानों को इनके दिव्य और भव्य कारनामों के आगे ऐसे प्रस्तुत किया गया जैसे सूरज के आगे सिगरेट लाइटर-और फिर शुरू हुआ एक महत्वपूर्ण कार्य और वो कार्य था दूसरे लोगो को उल्लू बनाओ और अपनी सत्ता की लोलुपता को-जांत-पांत-अमीरी-गरीबी में बाँट कर रक्खो -

भविष्य का नया अध्याय शुरू हो चुका था आदर्श और बलिदान खो चुका था बस भ्रष्टाचार के ही उल्लू बोल रहे थे अपने उल्लेखनीय उल्लुत्व के साथ- भारतीय जनमानस में विराट उल्लाप करते हुए ये अपना समुदाय बढ़ाने के लिए उल्लू चहुं ओर सक्रिय हो गए थे-देश के अलग-अलग राज्यों से महान उल्लुओं को ढूढू-कर मन्त्र-दीक्षा दी गई अपना समुदाय डेवलप करो और राज करो बस हम आपके राजा है इसलिए आप बस हमारा समर्थन करते रहे आप मजे ले और हमे भी लेने दे- 

अब क्या था-काठ के उल्लुओं(Owls)के कंधे पे अपना समुदाय बढाने का भार आ गया था और फिर शुरू हुआ तेजी से उल्लू बनाने का कार्यक्रम जो आज तक विद्यमान है बस सभी अपने-अपने स्वार्थवश एक दूसरे को उल्लू बनाए जा रहे है ये सिलसिला चल रहा है और अनवरत प्रगतिशील है -

भ्रष्टाचार कैसे बढे-उल्लू-संस्कृति का वर्चस्व बढे-इसके लिए तरह-तरह के प्रयोग किये जाने लगे बहुत कुछ परिवर्तन किये गए ताकि गरीब -गरीबी के स्तर से उपर न आये-जाति-बिभाजन तेजी से प्रखर हुआ ताकि कहीं फिर से कोई एकता का बिगुल न बजा सके-समुदायों में बंटवारा हुआ-देश का बंटवारा तो पहले भी हुआ आज भी कुछ उल्लू(Owls) इसी फिराक में लगे है -

'तमसोमाज्योतिर्गमय' को पलटकर 'ज्योतिर्मातमासोगमय' कर दिया गया-यानी कि उजाले से अंधेरे की ओर-उल्लुओं को उजाला पसंद नहीं होता है वे हमेशा अन्धकार को ही पसंद करते है और अगर कोई एक उजाले की तरफ ले जाने के लिए हंस रूपी मानव आ जाए तो फिर पेट में दर्द होना तो इन उल्लुओं को स्वाभाविक है -

आप सभी जानते ही है उल्लू लक्ष्मी का वाहन है इसलिए उल्लू शब्द बुरा नहीं-लक्ष्मी माता की सवारी को भला आप हेय द्रष्टि से कैसे देख सकते है आपको ये भी पता होगा तंत्र में भी उल्लू का बहुत महत्व है लक्ष्मी प्राप्ति के लिए भी लोग उल्लू तंत्र साधना में लगे रहते है वही हाल प्रजातंत्र में है आपको शोहरत और धन पाना है तो राजनीति के उल्लुओं को सिद्ध किये कुछ नहीं मिलेगा यदि ये नहीं कर पाए तो फिर रह जायेगे सिर्फ-

      'काठ के उल्लू '

जिसे सिर्फ शो केस में ही सजाया जा सकता है-ये लेख एक कटुब्यंग है- 
Upcharऔर प्रयोग-
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Love-प्रेम की Definition-परिभाषा मेरी नजरो में

कुछ दिन पहले किसी ने प्रश्न किया था कि "वास्तविक प्रेम" क्या है हमने कहा था इस पे एक पोस्ट लिखेगे आज बताना चाहता हूँ कि Love-प्रेम वास्तविक या अवास्तविक नहीं होता है प्रेम(Love)तो बस प्रेम होता है या तो प्रेम है या फिर नहीं है-प्रेम(Love)निस्वार्थ होता है और ये बिना किसी अपेक्षा के किया जाता है प्रेम में छल नहीं होता है Love(प्रेम)तो निश्छल होता है-

Love-प्रेम की Definition-परिभाषा मेरी नजरो में


वास्तविक प्रेम(Love)एक ऐसी भावना है जिससे सुधा रस छलकती है वास्तविक प्रेम की भावना केवल प्रेमी या प्रेमिका के लिए व्यक्तिगत नहीं होती बल्कि सार्वजनिक हो जाती है प्रेम(Love)में संलिप्त होकर व्यक्ति अपना सर्वश्व अपने प्रियतम के लिए न्योछावर कर देता है सच्चे प्रेम(True love)में स्वार्थ की भावना नहीं होती है -

आइये प्रेम(Love)को समझने के लिए हमें तीन बातों को समझना आवश्यक है प्रेम में किसी प्रकार का क्रय विक्रय नहीं होता है प्रेम की परिभाषा(Definition)तत्व की दृष्टि से "मैं" से परे हट जाना ही है-हम जब सोचते है कि ये व्यक्ति हमारा प्रेमी है इनसे हमें हर समय मदद की है या नहीं मैनें तो हमेशा इसकी मदद की है ऐसा सोचना भी प्रेम जगत में प्रेम(Love)को नहीं समझना है-

प्रेमी तो अपने प्रेमी के लिए सब कुछ न्यौछावर कर देता है उसके बदले में कोई चाह (इच्छा) नाम की बात ही नहीं होती है जैसे उदाहरण के तौर पर आप वीर हनुमान जी को ले ले-प्रेम में पुरस्कार भी नहीं होता है न प्रेमी पुरस्कार चाहता है और न प्रशंसा और न किसी प्रकार का आदान प्रदान-यही सच्चे प्रेमी का लक्षण है-प्रेम तो सदा प्रेमी के लिए रोता है वह अपने प्रेमी(Love)का सच्चा उत्थान चाहता है जिसमें यदि स्वयं को भी हानि हो तो भी परवाह नहीं होती है -

प्रेम का अब एक दूसरा तत्व है "भयवश प्रेम नहीं किया जाता है" भय वश प्रेम करना अधम का मार्ग है जैसे बहुत से लोग नरक के डर से भगवान से या हानि लाभ के डर से देवी देवताओं से प्रेम करते है-वह अधम मार्ग है- प्रेम में न तो कोई बड़ा होता है न कोई छोटा-

                         "प्रेम इसलिए करो कि परमात्मा प्रेमास्पद है"

प्रेम का तीसरा तत्व "प्रेम में कोई प्रतिद्वंदता नहीं होती है" सच्चा प्रेम उसी व्यक्ति से होता है जिसमें मन की शूरता, मन की सौंदर्यता और उदारता कूट-कूट कर भरी हो-सच्चा प्रेमी(lover)वह है जो अपने प्रेमी को जिताने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देता है स्वयं हार कर भी उसको जिताना चाहता है-

प्रेम की वाणी मौन होती है तथा आँखों से जल बरसता है और हाथ अपने प्रेमी की सेवा करने के लिए तत्पर रहते है जैसे "श्रीकृष्ण व सुदामा" -प्रेम तभी सफल होता है जब अपने हृदय के अंदर प्रेमी के प्रति प्रतिद्वंदता,भय या आदान प्रदान रहित होकर प्रेमास्पद बन जाए तो वही प्रेम आनंदमय हो जाता है-

जाने आज  का  प्रेम(Love)-

अब हम बीसवी और इक्कीसवी सदी के प्रेम की बात करें तो आज के इस आधुनिक समय मैं किसी को किसी के लिय समय ही कहाँ है तो ये प्रेम की व्याख्या प्रासंगिक नहीं है यहाँ  पर  उपरोक्त व्याख्या सटीक नहीं बैठती है आज कल के स्मार्ट युग में प्रेम(Love) भी स्मार्ट हो चुका है मोबाइल प्रेम(Mobile Love)से शुरू होकर वासनात्मक प्रेम(Sensual Love)पे ही जा के समाप्त होता है-प्रेम स्वार्थ रूपी हो चुका है एक दूसरे से अपेक्षाए जुडी है शारीरिक वासना(Physical lust)की अपेक्षा प्रथम द्रष्टिगोचर हो जाती है -

आज के स्मार्ट युग और इस भाग दौड़ भरी लाइफ में प्यार भी आजकल फ़ास्ट फ़ूड(fast food)की तरह होकर रह गया है इतना फ़ास्ट की जितनी जल्दी होता है उतनी जल्दी इसका भूत भी उतर जाता है  आपको यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन सच्चा प्यार करता है और कौन सिर्फ दिखावे के लिए आपके साथ मात्र टाइमपास कर रहा है-

कमियां तो सब में होती है आपकी सच्ची साथी वही है जो आपकी कमियों को जानती है और जानने के बाद भी आपसे दूर नहीं जाती वो बिना लड़ाई किये आपका साथ देती है हर कदम पे आपके साथ रह कर आपकी कमियों को दूर करने का प्रयास करती है और एक न एक दिन आपको अपने प्रति ही समर्पण करा लेती है-

वास्तविक प्रेम तो मन की एक उत्कृष्ट अभियक्ति है या फिर आप ये समझ ले कि एक सुखद अहसास है इसमें जब स्वार्थ,वासनात्मक आसक्ति,इर्ष्या,क्रोध का समावेश हो गया तो प्रेम का स्थान कहाँ बचा है-हम आजकल के लोगो को प्रेम का दंभ भरते हुए देखते है तो सोचने पे मजबूर हो जाता हूँ कि अगर आज कल का प्रेम अगर यही है तो फिर कृष्ण और गोपियों का प्रेम(love)क्या था-

श्री राधा और श्री कृष्ण का प्रेम भी एक उदाहरण है-राधे ने तो अपने आराध्य से कुछ भी नहीं चाहा-केवल मात्र अपने आराध्य की इच्छा में अपनी इच्छा को समर्पित किया-क्या आज किसी का प्यार उस सीमा तक है-शायद नहीं -

आज एक पत्नी का पति अगर दूसरे किसी और से प्यार कर ले तो कोई रुक्मणी नहीं चाहेगी कि उसके और उसके पति के बीच में कोई राधा आ जाए-साम,दाम,दंड,भेद,कोई भी जुगत लगानी पड़े पर उसे अपने पति को उस प्यार से वंचित ही करेगी-यदि सफल नहीं हुई तो बात तलाक तक भी पहुँच जाती है -

अब बात पतियों की भी ले लो वो भी निस्वार्थ रूप से बिना वासना आसक्ति के किसी को प्यार नहीं करते है तो फिर वो सिर्फ अपनी पत्नी से दगाबाजी ही कर रहे है ऐसे में पत्नी का पूर्ण रूपेण अधिकार बनता है कि वो कोई भी मार्ग आपनाए और आपको अपने वशीभूत करे- ये बात पति-पत्नी दोनों पे लागू होती है -

वास्तविक प्रेम मानव मन की  या फिर कहें तो एक सुखद अहसास है  प्रेम त्याग,समर्पण है,प्रेम आपको विनम्र बनाता है हम जब प्रेम से भरे होते हैं तो सभी के लिये हमारे दिल में प्रेम भरे भाव होते हैं जब किसी एक के लिये प्रेम व किसी अन्य के लिये दिल में नफरत भरी हो तो वो प्रेम का आभासी रूप होता है-हमें सिर्फ महसूस होता है कि हमारा प्रेम सच्चा है जबकी वो प्रेम होता ही नहीं है बल्कि सिर्फ आसक्ति होती है-

प्रेम व्यक्ति को साहस देता है-शक्ति प्रदान करता है और हमें जिम्मेदार बनता है-प्रेम की भी कुछ मर्यादाएं है प्रेम(love)में गुस्से  का कोई स्थान ही नहीं होता है -

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Woman-नारी Confidence-विश्वास के साथ जिये

आज समाज का परिवेश बदल गया है लेकिन फिर भी Woman-नारी आज भी अधिकतर खुद को असहाय और बेबस पाती है और कारण सिर्फ इतना है कि अपने अंदर हिम्मत नहीं जुटा पाती है नारी(Woman)कोई भी निर्णय नहीं ले पाती है Woman(नारी) आज भी डरी और सहमी सी रहती है Woman अभी भी खुद को पूर्णतया मजबूत नहीं कर पा रही है हमारा उद्देश्य ये कतई नहीं है कि नारी(Woman)बिलकुल बेबस है जबकि नारी अगर मन और आत्मा से चाह ले तो वो सब कुछ कर सकती है फिर भी कुछ कमियां है जिनको आपको अपने अंदर से निकालने की आवश्यकता है नारी को अपने अंदर Confidence-विश्वास लाने की विशेष आवश्यकता है-

Woman-नारी Confidence-विश्वास के साथ जिये


सबसे नारी(Woman)को अपने आपको शंकाओं से खुद को बाहर लाना होगा किसी भी निर्णय को सावधानी व Confidence लेने की हिम्मत जुटानी चाहिए-मान लीजिये आप नौकरी करती है या कोई बिजनेस और वहां पर आपके सामने कई प्रकार की चुनौतियां आती है और आपका विश्वास(Confidence)डगमगाने लगता है तो आप खुद को मानसिक रूप से खुद को मजबूत करे बस अपने अंदर इस बात का विश्वास लाये कि बिना गलती के आप का कोई कुछ नहीं कर सकता है अपने काम पे अधिक तन्मयता से ध्यान दे काम से काम रक्खे-फ़ालतू न किसी के मुंह लगे न ही किसी को आगे बढ़ने का कोई मौका दे जो वो आपका लाभ ले सके-

नारी(Woman)अपने को एक पुरुष के मुकाबले में खुद को कम तर आंकने का प्रयास न करे आप भी वो सब कर सकती है जो पुरुष कर सकता है आवश्यकता है Woman सिर्फ मानसिक रूप से खुद को तैयार करने की-अपने खुद के महत्व को सभी के सामने लाने की आवश्यकता आप में मौजूद है-जरा सोचिये कि जब आप गृहस्थ में सभी की इक्षाए और जरूरतों को आप खुश रखने के लिए पूरा करती है-तो फिर आप अपनी पहचान बनाने के लिए क्यों नहीं कर सकती है-ये जरुरी नहीं है कि शारीरिक मेहनत से ही सब कुछ मिलेगा-आप में टेलेंट है तो आप अपनी कार्य शैली से भी सभी की कृपा के पात्र बन सकती है-

आप खुद के प्रति बस ईमानदार रहे भले ही रास्ता कठिन हो अडिग रह कर काम पे ध्यान दे-ये भी हो सकता है लोग आपका फैसला मानने से इनकार भी करते हो आप महिला(Woman)है ये सोच कर वो लोग आपको इग्नोर भी करे-तब भी आपको नार्मल तरीके से अपने सहकर्मी से अपनी बात को समझाने का गुण अपने अंदर विकसित करना होगा और फिर धीरे-धीरे एक समय ऐसा भी आएगा जब लोग आपकी बात को महत्व देगें-

आपके हर बात के साथ सहमति जताने का एक मतलब है खुद को सीमित करना-कई बार आपको सर्वश्रेष्ठ तक पहुंचने के लिए दूसरे अच्छे विकल्पों को भी ना कहना पड़ता है-घर-परिवार या कार्यस्थल पर काम करते हुए आपको अपनी प्राथमिकताएं हमेशा ध्यान रखनी चाहिए-ऐसे में यदि कोई बात ऐसी है-जो आपको पूरी तरह नामंजूर है या आपकी क्षमता से बाहर है-तो उसे अवश्य बताएं-अन्यथा हर चीज से तालमेल बना लेने के आपके स्वभाव का फायदा उठाने में लोगों को देर नहीं लगेगी-

आप अपनी समस्याओं(problems)से तब तक बाहर नहीं निकलेगी-जब तक आप उनके बारे में शिकायत(complaint)करती रहेंगी-आप क्या चाहती हैं-इस पर अपनी ऊर्जा लगाएं और बजाय इसके कि आप क्या नहीं चाहतीं-इसी तरह आप क्या कर सकती हैं-इस पर ध्यान दें बस दिमाक ये बात अच्छी तरह फिट करे कि पुरुष की तुलना में नारी(Woman)क्या नहीं कर सकतीं-

जितना आप सहती हैं उतना ही आपको सहने के लिए मजबूर किया जाता है यदि ऐसा कुछ है-जो आप सच में कहना या करना चाहती हैं तो अवश्य उन्हें बताएं-जो आपको समझते हैं-अपनी बात रखने से कभी भी पीछे न हटें और निर्भय(Fearless) होकर अपनी बात कहना सीखें-

आप मजबूत इरादों(Strong-willed)के साथ जीना सीखे-आपको अवश्य ही सफलता मिलेगी-एक बात ध्यान रक्खे मुश्किल परिस्थितियाँ आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है आप जितना ही चुनौतियों(Challenges) का सामना करेगी उतना ही सबके सामने खुद को मजबूती से रख सकेगी-
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Upcharऔर प्रयोग-
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Modern Woman-आधुनिक नारी बदलता परिवेश

आधुनिक कल्चर(Modern Culture)में प्रेम या दांपत्य संबंधों के मामले में Modern Woman-आधुनिक नारी की सोच में एक नया बदलाव नजर आ रहा है आज की शिक्षित और आत्मनिर्भर आधुनिक नारी(Modern Woman) को अपनी व्यक्तिगत आजादी(Individual freedom)इतनी पसंद है कि वह उसे किसी भी कीमत पर-यहां तक कि प्यार(love)पाने के लिए भी खोना नहीं चाहती है-

Modern Woman-आधुनिक नारी बदलता परिवेश


अब वो पिछली पीढी की स्त्री की तरह वह प्यार में अपना सर्वस्व त्यागने को तैयार नहीं है Modern Woman का स्वतंत्र व्यक्तित्व है उसकी अपनी पसंद-नापसंद, रुचियां और इच्छाएं हैं-आधुनिक नारी(Modern Woman)को अपनी पसंद का साथी चुनने की पूरी आजादी है-ऐसी स्थिति में उसके पास विकल्पों(Options)की कमी नहीं है- अब Modern Woman अपने आप को बदलने की कोई वैसी मजबूरी भी नहीं है जैसी कि उसकी पिछली पीढी की स्त्रियों की हुआ करती थी कि एक बार किसी पुरुष के साथ शादी या प्रेम के बंधन में बंध जाने के बाद उसके पास अपने साथी अनुरूप खुद को ढालने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता था-

आज वक्त के साथ स्थितियां तेजी से बदल रही हैं ऐसा नहीं है आधुनिक युवती(Modern woman)अपनी शर्तो पर प्रेम करती है और अपने प्यार की खातिर खुद को बदलने के लिए जरा भी तैयार नहीं है आज भी प्रेम के प्रति उसका समर्पण कम नहीं हुआ है बस फर्क सिर्फ इतना है कि आज उसकी जीवन स्थितियां उसके अपने नियंत्रण में हैं वह जिससे प्यार करती है उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार है लेकिन वह अपनी निजी स्वतंत्रता(Personal freedom) को बरकरार रखना चाहती है-

इसलिए उसे प्रेम या दांपत्य संबंध के मामले में भी थोडे-से पर्सनल स्पेस की जरूरत महसूस होती है वह जिससे प्यार करती है उसका केयरिंग होना तो उसे अच्छा लगता है लेकिन उसे यह बात जरा भी पसंद नहीं आती कि उसका साथी उसे छोटी-छोटी बातों पर उसे रोके-टोके या उसकी पसंद-नापसंद पर अपनी मर्जी थोपने की कोशिश करें-शायद यह पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित व्यक्तिवादी सोच की ही देन है जिसके अंतर्गत इंसान अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी की भी दखलंदाजी पसंद नहीं करता-चाहे वह उसका प्रेमी या जीवन साथी ही क्यों न हो-अब भारतीय स्त्री भी इस विदेशी संस्कृति के इस प्रभाव से अछूती नहीं है-वह जिससे प्रेम करती है उससे इस बात की उम्मीद रखती है कि वह उसकी व्यक्तिगत आजादी की भावना का सम्मान करे-

Upcharऔर प्रयोग-
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Love-प्यार और Woman

Love-प्यार का रहस्य इतना गहरा है जितना समझने की कोशिश की इन्शान ने उतना ही उलझता गया इसके रहस्य को जानने के लिए बहुत से प्रेमी दार्शनिक और कवि बन गए है पुरुष के लिए बस एक बार इसमें डूबना और फिर उससे निकल पाना बहुत मुसकिल है प्यार(Love)से शायद ही कोई निकल पाता है जब तक उसके अहम को ठेस न लगे आखिर क्यों है मुशकिल स्त्री(Woman)को जान पाना -आखिर एक Woman पुरुष से क्या अपेक्षा रखती है -

Love-प्यार और Woman


प्यार(Love)हर व्यक्ति के अंदर रचा बसा होता है बस आवश्यकता है कि उसे कब एहसास होता है और जब उसे प्यार एहसास होता है समझ ले दुनियां और जहान उसे खुबसूरत नजर आने लगती है इन्शान से लेकर पेड़-पौधे-पशु-पक्षी तथा निर्जीव वस्तुओं में भी उसे खूबसूरती का एहसास होने लगता है-स्त्री(Woman)के जीवन में पहला प्यार(Love)बहुत महत्व-पूर्ण होता है-वो अपनी जिन्दगी का पहला प्यार कभी नहीं भूल सकती है भले उसे पहला प्यार नसीब न हो और उसे अनमने मन से शादी करनी पड़े लेकिन पहले प्यार(Love)की कल्पना को वो पूरी जिन्दगी में अपने दिलो-दिमाक से नहीं निकाल पाती है-

लेकिन पुरुष स्त्री(Woman)के मन में क्या है इसको समझ पाना बहुत ही मुसकिल है इस रहस्य को न समझ पाने के कारण ही इस श्लोक की रचना की गई है -

                   " स्त्रियश्चरित्रं पुरुषस्य भाग्यं दैवो न जानाति कुतो मनुष्य:।"

अब प्रश्न ये है कि क्या पुरुष स्त्री(Woman)के अंतर्मन को क्यों नहीं समझ पाता है बात ये है? स्त्री का मनोविज्ञान ही कुछ ऐसा है हमारे भारतीय समाज की परम्परा में लड़कियों की परवरिस का बहुत प्रभाव है उन्हें छोटी-छोटी बातों के प्रति सतर्क किया जाता है बचपन से ही माँ-बाप उसे कम बोलना सिखाते है -इसलिए ही लड़कियां(Girls)जादा शर्मीली स्वभाव की होती है इसी कारण वे अपनी प्यार की भावनाओं को व्यक्त नहीं करती है और हमेशा ये अपेक्षा वे पुरुषों से करती आई है कि प्यार का इजहार पहले पुरुष करे -वैसे भी प्यार के मामले में स्त्री(Woman)के ना-नुकुर का मतलब हाँ ही होता है लेकिन पुरुष स्त्री के सामने खुद की पहल करने में काफी डरा और सहमा सा रहता है-वैसे अब वक्त बदल गया है आज लडकियाँ(Girls)पहले जैसे नहीं रही है-फिर भी अधिकतर लड़कियां आज भी अपने प्रेमी से ही ये अपेक्षा करती है -

आज से तीस साल पहले का एक वाकया है मेरी शादी हो चुकी थी लेकिन हमारे एक मित्र की शादी नहीं हुई थी जब उनकी शादी हुई तो भाभी श्री ने बताया कि कैसे हम दोनों मिले दरअसल दोनों एक ही कालेज में थे और दोनों ही अच्छे दोस्त थे दोनों की दोस्ती कब प्यार(Love)में बदल गई भाभी बताती है कि अब मै इन्तजार कर रही थी कि ये कब प्यार का इजहार करेगे और वक्त गुजरता गया साल गुजरे-अब तो इस बात की खीज भी होने लगी थी कि क्यों ये मेरी भावनाओं को नहीं समझ पा रहे है-चार साल तक बस एक अच्छे दोस्त बने रहे मन ही मन एक दूसरे को चाहते रहे लेकिन किसी ने पहल नहीं की-अचानक ही एक दिन मेरी कालेज की सहेली ने जब इनसे ये कहा-ये दोस्ती कब शादी(wedding)में बदलेगी-तब जाकर इन्होने जुबान खोली-कहा-प्यार तो करता हूँ लेकिन कहने की हिम्मत नहीं है-फिर हिम्मत जुटा कर एक दिन बोल ही दिया-क्या हम लोग हमेशा के लिए एक सूत्र में बंध सकते है और उसका परिणाम आज ये है कि हम अब जाके दाम्पत्य जीवन में बंध सके-हम दोनों आज भी जब याद करते है हंसी आती है-अगर ये मुझे प्रपोज नहीं करते तो शायद ये बात दिल में ही दबी रह जाती -

इस आधुनिक युग में पढी-लिखी लडकियां भी प्रेम(Love)के मामले में अपने प्रेमी से ही इस बात की उम्मीद करती हैं कि पहले उनका प्रेमी उनके सामने अपने प्यार का इजहार करे-

जिन छोटी-छोटी बातों को कभी हम नहीं समझते या फिर समझना नहीं चाहते है वो कभी-कभी प्यार(Love) के बीच दूरियां बढ़ा देती है और कभी -कभी ये दूरियां इतनी बढ़ जाती है कि एक दूसरे से अलग हो जाते है प्यार है तो स्वार्थ से उपर उठ कर सोचो-एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करो -बेतकल्लुफ़ होकर हर छोटी-से-छोटी बातों को शेयर करें-ये जीवन की खुशियाँ बरकरार रहने के लिए आवश्यक है-वर्ना फिर आगे चल कर परेशानी का सबब न बन जाए-

शादी के बाद पत्नी को गुलाम नहीं समझें वो आपकी अर्धागिनी है आप का आधा अंग-मतलब आपके यदि आधे शरीर को कोई परेशानी या रोग हो तो जिस तरह आप अपनी परेशानी समझ कर उसका इलाज करते है-उसी तरह पत्नी भी आपका आधा अंग है उसकी परेशानियों को नजर अंदाज करना उचित नहीं है-जिस तरह वो आपका ख्याल रखती है उसी तरह उसके हर काम में सहयोग करना आपकी भी जिम्मेदारी बनती है-आखिर वो भी हाड-मांस से बनी एक इन्शान है जो दिन भर आपके घर के लोगों की सेवा करती है आपकी जिम्मेदारियां और बच्चों की जिम्मेदारियां उठाती है उसमे आपका एक सहयोग उसके मन की और शरीर की थकान दूर करने के साथ आपसी प्यार को भी मजबूती प्रदान करता है-पत्नी को भी ये एहसास हो कि जिसे वो प्यार करती है उसको भी उसकी फ़िक्र रहती है-

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Women-स्त्रियों की Durability-सहनशीलता

Women-महिलाओं को ईश्वर ने पुरुषों की अपेक्षा सहन-शक्ति(durability)कई गुना जादा दी है महिलाओं की तुलना में पुरुष की सहनशक्ति न के बराबर ही है-पुरुष सिर्फ अपनी एक ही शक्ति का हिसाब लगता रहता है वो शक्ति है मसल्स(Muscles)की -

Women-स्त्रियों की Durability-सहनशीलता


लड़कियां पहले बोलना शुरू करती हैं और बुद्धिमत्ता(Intelligence)लड़कियों में पहले प्रकट होती है- लड़कियां ज्यादा तेज होती हैं- विश्वविद्यालयों में भी प्रतिस्पर्धा(Competition)में लड़कियां आगे होती हैं-लड़के तो बस दोस्तों में ही अपना समय गवातें है लेकिन लड़कियां घर के काम में भागीदारी करती हुई भी लड़कों से आगे निकल जाती है-

स्त्रियां(Women)काफी समय तक युवा(Young)रहती हैं अगर उन्हें  बच्चे पैदा न करना पड़ें तो-जबकि पुरुष जल्दी बूढ़े हो जाते हैं स्त्रियां देर तक युवा और ताजी रहती हैं-

स्त्रियों की सहनशीलता(durability)भी बड़ी शक्ति है यही कारण है स्त्री जीवन के दुखों को बर्दास्त कर जाती है नौ माह के कष्ट को भी स्त्री की सहनशीलता ही कहा जा सकता है-इसलिए हमारे विद्वानों ने स्त्री(Women)को महानता की मूर्ति भी कहा है-

जब भी स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है-यदि कोई स्त्री(Women)आपके पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो आप घबरा जाओगे आप भागोगे- क्योंकि आप सोचेगें कि क्यों ये स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है मर्यादित क्यों नहीं है-

स्त्री का मर्यादित होना ही उसका माधुर्य(Pleasantness)है वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है-वह आपको उकसाती है लेकिन स्वयं आक्रमण नहीं करती-वह आपको बुलाती है लेकिन चिल्लाती नहीं-उसका बुलाना भी बड़ा मौन है- स्त्री आपको सब तरफ से घेर लेती है जबकि वास्तविकता ये है कि इसका आपको पता भी नहीं चलता है स्त्री की मायायुक्त जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं वे आपको दिखाई भी नहीं पड़तीं है-क्युकि वह प्रेम के बड़े पतले धागों से बनी है यही प्रेम रूपी सूक्ष्म धागों से आपको सब तरफ से बांध लेती है और उसका ये बंधन आपको कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता है-

स्त्री(Women)अपने को नीचे रखती है-लोग गलत सोचते हैं कि पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया-जी नहीं-स्त्री का दासी(female slave)बनना भी एक कला है- ये शायद आपको पता नहीं- उसकी यह कला बड़ी महत्वपूर्ण है- दासी बने रहने से फायदे ही है जबकि नुकसान नहीं है-वह दासी रहकर भी आपसे हर काम आपसे करवा लेती है इसलिए स्वयं ही दासी बनती है - कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता है- स्त्री यदि स्वयं पे आ जाए आप उससे कुछ भी नहीं करवा सकते हो -बिना बल प्रयोग के-

दुनिया के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है-तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है-क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है-स्त्री जीवन के इस राज को समझती है-

स्त्री(Women)अपने को नीचे रखती है-चरणों में रखती है और आपने देखा है कि जब भी कोई स्त्री स्वयं को आपके चरणों में रख देती है लेकिन आपको पता भी नहीं चलता है कि कब आपके सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है-

वो रखती खुद को आपके चरणों में है पर पहुंच जाती है बहुत गहरे-बहुत ऊपर-आप चौबीस घंटे उसी का चिंतन करने लगते हो-छोड़ देती है अपने को आपके चरणों में और आपकी ही छाया बन जाती है आपको पता भी नहीं चलता कि छाया को आप चलाते हो या फिर आप ही अपनी छाया के इशारे पे चलने लगते हो-

स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि यह करो-लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है वह कभी नहीं कहती कि यह ऐसा ही हो-लेकिन वह जैसा चाहती है वैसा करवा लेती है-यही उसकी शक्ति बड़ी है और उसकी शक्ति राज क्या है? क्योंकि वह दासी है-उसमे सहनशक्ति(durability)है-इसी शक्ति में बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं और एकदम अशक्त हो जाते हैं-


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Brain-दिमाक को प्रदूषित न करें

आप जब भी कुछ खाते है तो खाने का माध्यम आपका मुंह है और जब भी आप कुछ सोचते है तब सोच से आपका Brain-मस्तिष्क प्रभावित होता है जब भी आप कुछ पढ़ते है दिमाक(Brain)में स्थापित होता है तो यदि आप अपने दिमाक(Brain)को स्वस्थ ही रखना चाहते है तो फिर उसमे कचड़ा(Garbage)मत डाले-

Brain-दिमाक को प्रदूषित न करें


आइये आपको बताता हूँ कि कचड़ा(Garbage)क्या करता है जब आप कभी सड़क पर जाते है रास्ते भर लगे बैनर और पोस्टर आदि भी पढ़ते ही होगें कभी सोचा है कि आप बेमतलब में क्यों पढ़ते है-इससे क्या कोई लाभ मिलता है-सुबह से शाम तक पेपर से लेकर मैगजीन तक आप जानकारी के लिए तो कम पढ़ते है मगर टाइम-पास(time pass)के लिए पढ़े जा रहे है-किसने कहा है कि आप बेफालतू का कचड़ा(Garbage)अपने दिमाक(Brain)में डालो-लेकिन लोग डाल रहे है-न्यूज-पेपर लिया एक कोने से दुसरे कोने तक पढ़ डाला-फायदा क्या हुआ जानकारी तो कम मिली लेकिन कचड़ा दिमाक(Brain)में जादा गया-

भगवान् ने स्वस्थ दिमाक(Brain)दिया था आपने तो उसे कूड़ाघर(Leftovers home)जादा बना दिया-आज तभी आप देख रहे है लोगों की याददास्त कम होती जा रही है पहले के समय में स्वस्थ भोजन,शुद्ध वायु,शुद्ध जल तथा शुद्ध फल,सब्जी इत्यादि खाने को मिलता था-तब लोगों का मस्तिष्क(Brain)भी कुशाग्र हुआ करता था-लोग किसी भी बात को कंठाग्र कर लेते थे-आप जरा सोचे पुरातन काल में हमारे-ऋषि-मुनि अपने शिष्यों को कंठाग्र किया हुआ ज्ञान दिया करते थे और शिष्य भी सुनकर ही कंठाग्र कर लेते थे-आज रटने के बाद भी याद नहीं रहता है-कारण आप खुद समझ सकते है यदि अब भी नहीं समझे तो फिर आपको कोई नहीं समझा सकता है -

ये बेफालतू का कचड़ा क्या आपको क्या-क्या नुकसान देता है क्या कभी सोचा है-जिस तरह आप भोजन करते है उससे रक्त,मज्जा,वीर्य का निर्माण होता है यदि आप शुद्ध भोजन की जगह कंकड़-पत्थर आदि खाए तो क्या होगा आपका पेट तो भर सकता है लेकिन नुकसान क्या होगा इस बात को आप अच्छी तरह जानते है-उसी तरह आप मस्तिस्क(Brain)में जो भी बात सोचेगें या डालेगे-वो मना तो नहीं करेगा लेकिन आपके दिमाक को कमजोर ही करता जाएगा और फिर जब कोई बर्तन किसी भी वस्तु से पूर्ण-रूप से भर जाता है और अधिक डालने का प्रयास किया जाता है तो वो चीज बाहर आ जाती है-ठीक यही प्रक्रिया दिमाक की भी है अर्थात आप बातों को भूलने लगते है -

जो लोग रात-दिन सोचते रहते है इसी कारण डिप्रेशन(depression)का शिकार हो जाते है-आपका सोचना भी मस्तिष्क का सूक्ष्म आहार ही है आँखों से कुछ भी देखने की क्रिया से सूचना दिमाक को जाती है और एक जगह स्थाईत्व गृहण कर लेता है-मतलब आप खाली स्थान को भरते जा रहे है धीरे-धीरे ये खाली स्थान भरता ही जाएगा और फिर एक समय आएगा जब ये बेफालतू का कचड़ा(Garbage)आपके दिमाक को अधिक कमजोर बना देगा -

आज-कल जिसको देखो कान पे हेडफोन लगाए है-कोई गाना सुन रहा है,कोई बात कर रहा है आखिर तरंगे तो आपके दिमाक में ही जायेगी अभी तो आप स्मार्ट बन कर घूम रहे है-मगर भगवान् न करे कि कुछ समय बाद आपकी श्रवण-इन्द्रिय कमजोर हो जाए-आँखों को टी.वी. के सामने गडाये बैठे है उसकी तरंगों से आपकी आँखों के साथ-साथ आपका दिमाक भी कमजोर हो रहा है-इसलिए आजकल के बच्चों को द्रष्टि-दोष(visual impairments)असमय हो रहा है -

हमारे वैज्ञानिक अपने दिमाक को शांत रखते हुए सिर्फ अन्वेषण पे कार्य करते है इसलिए उनका दिमाक स्थाई रूप से कुशाग्र होता है और आज-कल के युवा शिक्षा से जादा फ़ालतू कचड़ा  दिमाक में देख कर सोच कर या पढ़ कर डालते है इसलिए डिग्री जैसी चीज तो हासिल किसी भी तरह मिल ही जाती है लेकिन जब कौशल उपयोग का समय आता है-उनके हाथों के तोते उड़ जाते है तब उनको लगता है हम अभी अधूरे है-

जिस तरह आयुर्वेद कहता है कि अत्यधिक भोजन कब्ज पैदा करता है उसी तरह अत्यधिक बेफालतू की सोच भी मस्तिष्क में कब्ज ही पैदा करेगा-

भोजन अधिक हो जाए तो परगेटिव्स उपलब्ध है लेकिन अभी तक मस्तिष्क के लिए परगेटिव्स(Prgetiv) उपलब्ध नहीं हैं इसलिए मस्तिष्क में कब्ज न पैदा हो जाए इसका विशेष रूप से ख्याल रक्खें-यदि दिमाक के अंदर कब्ज हो गया तो फिर दुनियां की कोई दवा आपके काम नहीं आएगी और अनेक रोग होगे जिनका इलाज सिर्फ ईश्वर की मर्जी है-


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Lifestyle-जीवनशैली बदलें Disease Resistance Power बढायें

आज लोगों की Lifestyle-जीवनशैली में बहुत बड़ा परिवर्तन हो चुका है हम सभी अपनी जीवनशैली(Lifestyle) को इतना बदल चुके है कि ये सोचना भी आवश्यक नहीं समझते है कि हमें स्वस्थ रहने के लिए कौन सी उपयुक्त है या कौन सी वस्तु अनुउपयुक्त है खुद को अपने विवेक से सोचने का काम मार्केट में बैठे दुकानदारों को सौंप दिया है यही कारण है जो हम दिनो-दिन रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)खोते जा रहे है-

Lifestyle-जीवनशैली बदलें Disease Resistance Power बढायें


आज की परिस्थितियां ये है कि हमें बाज़ार में शुद्ध वस्तुए प्राप्त नहीं होती है मिलावट के कारण इसका प्रभाव भी हमारे जीवनशैली(Lifestyle)पे विपरीत असर डाल रहा है रोगों की संख्या में दिनों-दिन इजाफा हुआ है इसलिए जब हम मार्केट से खाने-पीने की वस्तु खरीदे तो जांच परख के ले क्युकि दुकानदार हमें कोई वस्तु फ्री में नहीं दे रहा है- 

रिफाइंड तेल लेने जाओ तो दुकानदार हमें वही चीज बेचना चाहता है जिसमे उसे जादा मुनाफा मिल रहा है वो उस चीज की इतनी तारीफ़  करेगा कि आपको असली वस्तु नकली नजर आने लगेगी वो आपको ये नहीं कहेगा कि इसमें हमें मुनाफा जादा  है सबसे पहले रिफाइंड आयल से बचे और अगर खाना मज़बूरी है तो सिर्फ सूर्यमुखी या मोमफली का तेल ही सेवन करे वैसे शुद्ध तो सिर्फ सरसों का तेल ही है वो भी अगर घानी का हो-लेकिन सरसों में भी मिलावट हो रही है इसमें भी बिनौला नामक चीज मिला देते है जो हमारे नेत्रों के लिए अहितकारी है-

तेल का सेवन सब्जी में नाम मात्र और वनस्पति तेलों का प्रयोग भी कम करे ये आपको कोलेस्ट्रोल से बचाएगा और चावल बहुत ही चमकदार लेना-मतलब उसमे अब कुछ नहीं बचा है-मिल में इतनी पालिस की गई है कि अब आप सिर्फ भूसा ही खा रहे है-

आटा भी छिलका उतारा आपके हेल्थ के लिए बेकार है उसमे जब फाइबर ही नहीं है तो कब्ज तो होगा ही-सफ़ेद रोटी बने इसलिए महिलाए प्रभावित होती है लेकिन आप अपने पतियों और बच्चो को बीमार बना रही है इसमें आपका भी योगदान है-पहले स्त्रियाँ गेहूं ले के धोके चक्की में पिसवाया करती थी मगर अब "टी.वी.सीरियल" के लिए समय जादा  है इसलिए समय अभाव के कारण पेकिंग वाले आटे की  तरफ प्रभावित है-आप ही अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं है-

यदि थोडा भी समझदार गृहणी है तो शुद्ध वस्तु भी खरीद सकती है और धन भी बचा सकती है आपको हमेशा सीजन में कुछ वस्तुओ को खरीद लेना चाहिए उस समय सस्ता मिल जाता है हल्दी,धनिया,लाल मिर्च,इत्यादि सीजन में लेके पिसवा ले शुद्ध भी  होगा और धन का अपव्यय भी नहीं होगा-

सरसों का तेल सीजन में सरसों लेके उसका तेल भी निकालवा के हम रख सकते है-कुछ वस्तुओ से अगर हम बच सकते है तो फिर क्यों नहीं करते है बीमारियों से निजात के लिए अगर थोडा समय लगाना भी आवश्यक है तो हमें करना चाहिए-कम से कम डॉक्टर पे जाना पड़े आखिर ये शरीर तो अपना है -

फास्ट फ़ूड कभी भी किसी भी कीमत पे आपके लिए लाभदायक नहीं हो सकता है इनसे बचना आपकी समझदारी है-स्मार्ट  बनो मगर आधुनिक युग में अपने शरीर को सुरक्षित रखते हुए-बाज़ार की वस्तुयों में प्रयोग होने वाला तेल बार-बार एक टेम्प्रेचर पे इतना गर्म हो जाता है कि उसमे तली गई वस्तु जहर में तली गई के सामान है जो हमें हानि पहुंचती है हमारे शरीर की सफ़ेद रक्त कणिकाओ की जीवाणुओ से लड़ने की भी एक सीमा है-अगर वो सीमा ख़तम तो समझे आप भी अंदर से ख़त्म हो चुके है-

हमारे शरीर के आस पास हर समय करोडो बैक्टीरिया और वायरस मौजूद होते है हमारे शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)या प्रतिरक्षा प्रणाली(Immune System)इन खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस से हमारे शरीर कि रक्षण करती है आपने देखा होंगा कि-समान परिस्थिति में भी कुछ व्यक्ति अक्सर जल्दी बीमार हो जाते है तो कुछ व्यक्ति अच्छी रोग प्रतिकार शक्ति होने की वजह से लम्बे समय तक बीमार नहीं होते है हमारे शरीर कि रोग प्रतिकार शक्ति कई चीजो पर निर्भर करती है जैसे कि हमारा खान-पान और हमारी जीवनशैली(Lifestyle)है शरीर को स्वस्थ और रोग मुक्त बनाने के लिए अच्छी सशक्त रोग प्रतिकार शक्ति होना बेहद आवश्यक है-

रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)कैसे बढ़ाये-

हमारे शरीर के साथ साथ हमारे शरीर के रोग प्रतिकार शक्ति के लड़ाकू टी कोशिकाओं और मैक्रोफेज को भी नियमित पौष्टिक समतोल आहार कि आवश्यकता होती है-आपने देखा होंगे कि समतोल आहार लेने वाले बच्चो कि तुलना में कुपोषित बच्चे जल्दी बीमार पड़ जाते है-शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)बढ़ाने के लिए जिंक, आयरन, सेलेनियम, तांबा, फोलिक एसिड और विटामिन ए, बी -6, सी, ई जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों और विरोधी oxidants कि जरुरत होती है-

आहार में ज्यादा प्रमाण में पौष्टिक फल, सब्जी और प्रोटीन युक्त चीजो का समावेश करे और वसायुक्त चीजे कम रखे-

आहार में कौन सी चीज कितनी मात्रा में लें-

बीटा कैरोटीन(beta carotene)-

यह खुबानी, हरी फूलगोभी (ब्रोकोली),चुकंदर,पालक,टमाटर, मक्का और गाजर में पाया जाता है-

सेलेनियम(Selenium)-

यह जौ, प्याज,सूरजमुखी के बीज,मशरूम,भूरे चावल(ब्राउन राइस),अंडा,मछली और मटन में पाया जाता है यह कई प्रकार के कैंसर से शरीर को बचाने में मदद करता है-

विटामिन ए(Vitamin A)-

यह शक्कर कंद,गाजर, खुबानी, हरी सब्जिया,लाल मिर्च,खरबूजा में अधिक पाया जाता है-

विटामिन बी 2(Vitamin B2)-

यह पालक,बादाम, सोयाबीन, मशरूम,गाय का दूध में पाया जाता है-

विटामिन बी -6(Vitamin B6)-

यह पालक,केला,आलू,सूरजमुखी के बीज में पाया जाता है-

विटामिन सी(vitamin C)-

यह संतरे, टमाटर, पपीता,स्ट्रॉबेरी,पत्तागोभी में पाया जाता है-

विटामिन ई(Vitamin E)-

यह गाजर,पपीता,पालक,सूरजमुखी के बीज,बादाम में पाया जाता है-

विटामिन डी(vitamin D)-

यह दूध,मशरूम,अंडा, सामन,सार्डिन मछली में पाया जाता है-

जिंक(Zinc)-

यह कद्दू के बीज,तिल के बीज,जौ,दही,झींगा,कस्तूरी, मटन में पाया जाता है-

आप क्या करें-

दिन भर में कम से कम 8 ग्लास पानी लेना चाहिए-योग्य प्रमाण में पानी पिने से शरीर को बल प्राप्त होता है और पाचन ठीक से होता है-पानी शरीर के अनावश्यक पदार्थो को शरीर से बाहर निकलता है-   

खाना बनाते समय और खाना खाते समय सफाई का विशेष ख्याल रखे-बाहर का चटपटा खाने कि जगह पर घर के स्वच्छ और स्वादिष्ट खाने को प्राथमिकता देना चाहिएअस्वच्छ और बासी खाना खाने से कई अनचाही पाचन से जुडी बीमारी हो सकती है जो कि आपके रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)को कमजोर कर देती है-

जड़ी बूटी(Herb)-

अपनी रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)बढ़ाने के लिए आप कुछ प्रख्यात जड़ी बूटियों का भी उपयोग कर सकते है जैसे कि गुडूची सत्व, अश्वगंधा चूर्ण, लहसुन, अदरक, जिनसेंग, हल्दी इत्यादि-

सर्दी का मौसम रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)बढाने के लिए सबसे उत्तम समय होता है-इस मौसम में आप नियमित व्यायाम और साथ में रोज सुबह और रात में गरम दूध के साथ 1 चमच्च च्यवनप्राश लेकर अपनी रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power) को बल दे सकते है-

अपनी जीवन शैली(Lifestyle)को भी बदले-

Disease Resistance Power बढ़ने के लिए आहार के साथ साथ हमारे दिनचर्या में बदलाव करना भी जरुरी है अगर हम अपनी कुछ बुरी आदते बदल दे तो, कुछ बीमारियो से बच सकते है और अपनी रोग प्रतिकार शक्ति भी बढ़ा सकते है-

कोशिश करे कि आप भय, क्रोध, चिंता और तनाव इन शरीर के मानसिक शत्रुओ से दूर रहे-जब हम तनावग्रस्त रहते है तब हमारे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन(Cortisol hormone)का ज्यादा मात्रा में निर्माण होता है इस हार्मोन के कारण मोटापा, हृदयरोग, कर्करोग जैसी कई समस्या पैदा हो सकती है-आप तनावमुक्त रहने के लिए योगा, प्राणायाम, ध्यान या अपना पसंदीदा काम कर सकते है-ज्यादा तनाव होने पर किसी मनोचिकित्सक कि सलाह लेना चाहिए-

जो लोग सप्ताह में 5 दिन नियमित 30 से 40 मिनिट तक व्यायाम करते है वह लोग अन्य लोगो कि तुलना में 50 से 60% कम बीमार पड़ते है-नियमित व्यायाम करने से आपका वजन भी नियंत्रित रहता है और रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)भी बढती है-नियमित व्यायाम असल में एक स्वस्थ जीवन कि कुंजी है-

आज के युग में मोटापे कि समस्या एक महामारी कि तरह फ़ैल रही है-मोटापा अपने साथ कई गम्भीर बीमारियो को आमंत्रण देता है-अपनी रोगप्रतिकार शक्ति बढ़ाने के लिए और स्वस्थ रहने के लिए वजन को काबू में रखना बेहद जरुरी है-

वजन प्रबंधन(Weight management)-

दिन भर काम करने के बाद आपके मन और शरीर के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे कि नींद जरुरी है. जो लोग अपने मन और शरीर को पर्याप्त आराम देते है वे अधिक कार्यक्षम और निरोगी रहते है-   

स्वस्थ और निरोगी शरीर के लिए शराब, धूम्रपान, गुटखा और तंबाखू सेवन इत्यादि बुरी आदतो का त्याग करे इन आदतो से आपको कुछ क्षण के लिए सुख कि अनुभूति होती होंगी पर आपके सेहत और आपके परिवार के लिए यह आदते किसी जहर से कम नहीं है-जिन लोगो को ऐसी बुरी आदते होती है वह जल्दी बीमार होते है और इन्हे होने वाली बीमारी सामान्य व्यक्ति को होनेवाली बीमारी से गम्भीर होती है-

अपने शरीर के साथ-साथ अपने आस-पास के माहौल को स्वच्छ रखे-केवल स्वच्छता रखने से ही, आप लगभग 50% बीमारियो को दूर भगा सकते है-खुद स्वच्छ रहे और बाकि लोगो को भी स्वच्छता रखने के लिए प्रेरित करे, जिससे आप बाकि लोगो से होनेवाली बीमारियो से बच सके-

रोजाना स्नान करे तथा दिन में दो बार दात साफ करे और हमेशा अच्छे से हाथ साफ करे अगर आप कही बाहर जाते है या सफ़र कर रहे है तो जीवाणुरोधी हाथ प्रक्षालक साथ रखे  हफ्ते दो बार हर्बल शैम्पू करे-

आहार, दिनचर्या और व्यायाम संबंधी सलाह का अनुकरण कर आप अपनी रोग प्रतिकार शक्ति(Disease Resistance Power)बढ़ा सकते है और साथ ही निरोगी स्वस्थ जीवन का आनंद उठा सकते है-


Upcharऔर प्रयोग-
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Bajikarn-बाजीकरण औषधियां सभी के लिए

जिन औषधियों के सेवन से व्यक्ति अश्व शक्ति और पौरुष को प्राप्त करता है ऐसी औषधियां बाजीकरण(Bajikarn)की श्रेणी में आती हैं यौन आनंद एवं शरीरिक क्षमता जीवन की गाड़ी को सुचारू रूप से चलाने के लिए इनका सेवन भी नितांत आवश्यक है-आचार्यों ने Bajikarn-बाजीकरण औषधियों को लेने से पूर्व रसायन औषधियों को लेना उदधृत किया है-

Bajikarn-बाजीकरण औषधियां सभी के लिए


उत्तम बाजीकारक(Bajikarn)के रूप में-

  1. शतावरी की ताजी जड़ को मोटा कूट कर दस से बीस ग्राम की मात्रा में लेकर 150 मिली दूध में पकाएं इसमें लगभग 250 मिली पानी भी मिला दें और जब उबालते-उबालते पानी समाप्त हो जाए और केवल दूध शेष रहे तो इसे छान कर खांड मिला कर सुबह शाम लेने से मैथुन शक्ति(Sexual power)बढ़ती है-
  2. विदारीकन्द का चूर्ण 2.5 ग्राम को गूलर के 15 मिली रस में मिलाकर सुबह शाम दूध से लेने पर अधिक उम्र वाले पुरुष भी मैथुन में सक्षम हो जाते हैं-
  3. उड़द को घी में भून लें और फिर दूध में पकाकर खीर बना लें- अब इस खीर में खांड मिलाकर ग्रहण करें और खुद ही पौरुष्य लाभ देखें-उड़द बाजीकरण(Bajikrn)के लिए उत्तम है-
  4. गोखरू बीज+तालमखाना बीज+शतावरी+कौंच बीज+नागबला की जड़+अतिबला की जड़ इन सब को बराबर मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूटकर कर 250 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सुबह शाम लेने से पौरुष शक्ति(Masculine power)में बढ़ोत्तरी होती है-
  5. शतावरी, गोखरू, वरादीकंद, शुद्ध भल्लातक, गिलोय, चित्रक, त्रिकटु, तिल, विदारीकन्द और मिश्री मिलाकर बनाया गया चूर्ण, जिसे नरसिंह चूर्ण के नाम से जाना जाता है- यह एक उत्तम वाजीकारक(Bajikarn)औषधि है-
  6. केवांच के बीज, खजूर, सिंघाड़ा, दाख और उड़द इन सब को बीस-बीस ग्राम की मात्रा में लेकर 250 मिली पानी में मिलाकर पकाएं और जब पानी समाप्त हो जाए तो इसमें खांड, वंशलोचन, शुद्ध घी एवं शहद मिलाकर सेवन करने से शुक्र(semen) के निर्बलता में लाभ मिलता है-
  7. मकरध्वज रस 250 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह शाम अदरख स्वरस एवं शहद के साथ लेना शरीर में स्फूर्ति एवं उत्साह को बढ़ाता है तथा शुक्र सम्बन्धी दोषों को दूर करता है-
  8. मुलेठी चूर्ण 1.5 ग्राम को शुद्ध घी और शहद के साथ सेवन करने से भी कामेच्छा(Sexual desire)बढ़ती है-
  9. आंवले के चूर्ण को आंवले के रस में सात भावनाएं देकर (सात बार घोंटकर) पांच ग्राम चूर्ण में शहद और शुद्ध घी मिलाकर सेवन करने से कामेच्छा(Sexual desire)में बढ़ोत्तरी होती है-
  10. शतावरी घृत में 2.5 से 5 ग्राम की मात्रा में पिप्पली चूर्ण 1.5 ग्राम मिलाकर खांड और शहद के साथ लेना भी पौरुष बल(Masculine force)देता है-
  11. इसे भी देखे-

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