19 जनवरी 2017

तुलसी और रोग का उपचार

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मनुष्य पर बुखार का हमला कभी भी हो सकता है मौसम बदलना शुरू हुआ नहीं कि आपको बुखार ने आ घेरा तथा कभी-कभी मच्छरों का आक्रमण भी मलेरिया जैसे जानलेवा बुखार को आमिन्त्रत कर देता है ऐसे में आवश्यकता होती है हम घरेलू तुलसी(Tulsi)के प्रयोग से अपने आपको इन रोगों से कैसे बचायें तो हम आपको नीचे तुलसी के प्रयोग की कुछ जानकारी दे  रहे है-

तुलसी और रोग का उपचार

सामान्य ज्वर(General fever)का उपचार-


सामान्य बुखार में शरीर का तापमान 102-103 डिग्री हो जाता है और बैचैनी, शरीर में दर्द, प्यास का अधिक लगना, सिर-हाथ-पैरों में पीड़ा आदि की शिकायत हो जाती है ये गर्मी या धूप में अधिक घूमना, थकावट, पेट में दर्द, सर्दी-गर्मी के प्रभाव से भी यह रोग हो सकता है तो आप दस तुलसी के पत्ते, बीस काली मिर्च, पांच लौंग, थोड़ी-सी सोंठ पीसकर ढाई सौ मिलीलीटर पानी में उबाल लें और शक्कर मिलाकर रोगी को पिला दें और अगर रोगी को ज्वर के कारण घबराहट महसूस होती हो तो तुलसी के रस में शक्कर डालकर शरबत बना लें और रोगी को पिला दें इससे रोगी को शीघ्र आराम मिलता है-

मौसमी बुखार(Seasonal flu)काउपचार-


बरसात या मौसम बदलने से रक्त संचार पर भला-बुरा असर पड़ता ही है और ज्वर के रूप में हमारे अंदर घंटी बजा देता है-तो मौसमी बुखार(Seasonal flu)में तुलसी की दस ग्राम जड़ लेकर पानी में उबालिए और इसे गुनगुना ही पी जाइए बस दो-तीन दिन सुबह-शाम इस उपचार से रक्त-साफ स्वच्छ हो जाएगा-

पुराना बुखार(Old fever)का उपचार-


यदि पुराना बुखार हो तो फेफड़े कमजोर होने लगते हैं और खांसी उठती रहती है तथा छाती में दर्द भी होता है-तो आप तुलसी रस में मिश्री घोलकर तीन-तीन घंटे बाद तीन दिन तक रोगी को पिलाए इससे ज्वर भी उतर जाएगा और खांसी व दर्द भी जाते रहेंगे-

सर्दी बुखार(Cold Fever)उपचार-


सर्दी बुखार(Cold Fever)होने पर रोगी को पांच तुलसी-दल और पांच काली मिर्च पानी में पीसकर पिलाएं या फिर तुलसी-मिर्च का वह चूर्ण ढाई सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से तुरन्त असर होता है इसे आप आधे-आधे घंटे बाद दो बडे़ चम्मच पिलाते रहे  इससे निश्चित लाभ होता है-

खांसी बुखार(Cough fever)उपचार-


1- दस ग्राम तुलसी-रस, बीस ग्राम शहद और पांच ग्राम अदरक का रस मिलाकर एक बड़ा चम्मच भर कर पिला दे ये एक अद्भुत योग है आजमाकर देख लें-

2- ग्यारह पत्ते तुलसी और ग्यारह दाने काली मिर्च, दोनों को पानी में पीसकर छान लें फिर आप आग पर मिट्टी का खाली सकोरा पकाकर लाल कर दें और उसमें तुलसी काली मिर्च का घोल छौंक दें यह घोल गुनगुना रह जाने पर काला नमक मिलाकर पिला दें-खांसी बुखार समूल निकल भागेंगे-

3- दो ग्राम तुलसी पत्ते, दो ग्राम अजवायन पीसकर पचास ग्राम पानी में घोलकर पिला दें ये आप सुबह-शाम पिलाएं-

मलेरिया बुखार(Malaria fever)का उपचार-


1- मलेरिया बुखार के लक्षण हैं कि ठंड लगकर बुखार आना, कंपकपी लगना, शरीर में दर्द, घबराहट, भोजन में अरुचि, आंखों में लाली, मुंह सूख जाना-मौसमी बुखार, बदहजमी, पेट के विकार, कब्ज लू लगने आदि विकारों से ग्रस्त रोगियों का खून जब मच्छरों द्वारा फैलता है तो अच्छे-अच्छों को चारपाई पर पटक देता है इसी को मलेरिया कहते हैं-

2- तुलसी का रस, मंजरी, तुलसी-माला, तुलसी के पौधे और तुलसी-बीज मलेरिया को काटकर फेंक देते हैं आप तुलसी-रस दस ग्राम और पिसी काली मिर्च एक ग्राम मिलाकर रोगी को दिन में पांच-छह बार दो-दो घंटे बाद पिलाते रहें यदि आप इस परेशानी से पहले से ही बचना चाहें तो तुलसी के दो सौ ग्राम रस में सौ ग्राम काली मिर्च मिलाकर रख दें-सुबह-दोपहर-शाम एक-एक चम्मच पिलाएं-

पुराना मलेरिया(Old Malaria)का उपचार-


अगर आपको पुराना मलेरिया है तो तुलसी-दल और सात काली मिर्च दोनों दाढ़ के नीचे रखकर चूसते रहें दिन में तीन-चार बार यही प्रक्रिया दोहराने से महीनों पुराना मलेरिया भी भाग जाएगा-

लगातार बुखार रहने का उपचार-


1- जलकुम्भी के फूल, काली मिर्च और तुलसी-दल, तीनों समान मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें और प्रातः-सायं पिलाएं-

2- तुलसी-दल दस ग्राम लेकर पांच दाने काली मिर्च के साथ घोट लें और दिन में तीन बार सेवन कराएं शरीर की आन्तरिक सफाई होते ही बुखार का नामोनिशान भी नहीं रहेगा-

सन्निपात ज्वर(Typhus fever)का उपचार-


ज्वर इतने जोर का बढ़ जाए कि आदमी बड़बड़ाने लगे तो ऐसी स्थिति में तुलसी, बेल (बिल्व) और पीपल के पत्तों का काढ़ा उबालें और जब पानी ढाई-तीन सौ ग्राम बच जाए तो आप इसे शीशी में भर लें तथा दस-दस ग्राम दो-दो घंटे बाद रोगी का पिलाते रहें इसमें निश्चित ही लाभ होगा-

लू लगने(Sunstroke)का उपचार-


एक चम्मच तुलसी-रस में देशी शक्कर मिलाकर एक-एक घंटे बाद देते रहें-यह न समझें कि तुलसी-रस गर्म होने से हानि पहुंचाएगा-संजीवनी शक्ति जिस कन्दमूल में भी होगी वह गर्म ही होगा-आराम आने के बाद भी धूप में निकलना हो तो तुलसी रस में नमक मिलाकर पीएं इससे लू लगने की आशंका ही नहीं रहेगी-प्यास भी कम लगेगी और चक्कर भी नहीं आएंगे-

टूटा-टूटा बदन-


तुलसी दल की चाय बनाकर पीएं आपके बदन में ताजगी की लहरें दौड़ने लगेंगी यदि आप घर में अगर चाय की पत्ती की जगह तुलसी दल सुखाकर रख लें तो कफ, सर्दी, जुकाम, थकान और बुखार या सिर-दर्द पास भी नहीं फटकेंगे-

जुकाम(Common cold)का उपचार-


1- जुकाम के लक्षण हैं-नाक में खुश्की या श्लेष्मा अधिक बहना, खांसी के साथ कफ का निकलना, कान बंद हो जाना, छींक आना, आंखों से पानी आना, सिरदर्द-यह ऋतु के बदलने, अत्यधिक ठण्डे पेय पदार्थों के प्रयोग, पानी में भीगने, अत्यधिक मदिरापान, धूम्रपान तम्बाकू-गुटखे का सेवन करने से हो जाता है-

2- छोटी इलायची के कुल दो दाने और एक ग्राम तुलसी बौर(मंजरी)डालकर काढ़ा बनाएं और चाय की तरह दूध-चीनी डालकर पिला दें यदि दिन में चार-पांच बार भी पिला देंगे तो खुश्की नहीं करेगी मगर सर्दी-जुकाम को जड़ से ही गायब कर देगी-

3- तुलसी के पत्ते छः ग्राम सोंठ और छोटी इलायची छः-छः ग्राम, दालचीनी एक ग्राम पीसकर चाय की तरह उबाल लें अब थोड़ी-सी शक्कर डाल लें तथा दिन में इस चाय का चार बार बनाकर पीएं-कुछ खाएं नहीं जुकाम कैसा भी हो ठीक हो जाएगा-

4- यदि जुकाम के साथ बुखार भी हो तो चाय के अलावा तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर दिन में चार बार सेवन करें-जुकाम के कारण होने वाला ज्वर शान्त हो जाएगा-

5- दालचीनीं, सोंठ और छोटी इलायची, कुल एक ग्राम, तुलसी-दल, छह ग्राम, इन्हें पीसकर चाय बनाएं और पीएं-दिन में ऐसी चाय चार बार भी ले सकते हैं तथा उस रात पेट भरकर खाना न खाएं फिर अगली सुबह आराम आ जाएगा-

शीघ्रपतन(Premature Ejaculation)एवं वीर्य की कमी-


शीघ्रपतन एवं वीर्य की कमी की समस्या तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से दूर होती है-

नपुंसकता(Impotence)-


तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढोतरी होती है-

मासिक धर्म(Menstrual)में अनियमियता-


1- जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो भी ठीक होती है-

2- तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा(तुलसी के बीज)शीतल होता है इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां दाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है यह पित्त घटाता है ये त्रीदोषनाशक, क्षुधावर्धक भी है-






Upcharऔर प्रयोग-

18 जनवरी 2017

तुलसी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

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आपने शायद कभी इस बात पर ध्यान दिया होगा कि जब भी आपके घर या परिवार पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी(Tulsi)के पौधे पर होता है आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें लेकिन तुलसी का पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है-

तुलसी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

क्यों मुरझाता है तुलसी का पौधाशायद कभी किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि चाहे तुलसी के पौधे पर कितना ही पानी क्यों ना डाला जाए और उसकी कितनी ही देखभाल क्यों ना की जाए लेकिन वह अचानक मुरझाने या सूखने क्यों लगता है?आपको यकीन नहीं होगा लेकिन तुलसी का मुरझाया हुआ पौधा आपको यह बताने की कोशिश कर रहा होता है कि जल्द ही परिवार पर किसी विपत्ति का साया मंडरा सकता है यानि कहने का अर्थ यह है परिवार के किसी भी सदस्य पर कोई मुश्किल आने वाली है तो उसकी सबसे पहली नजर घर में मौजूद तुलसी के पौधे पर पड़ती है-

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार ऐसा इसलिए होता है कि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी(Tulsi)चली जाती है क्योंकि दरिद्रता,अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास नहीं होता है-

तुलसी(Tulsi)से जुड़े कुछ रोचक तथ्य-


1- यदि ज्योतिष के अनुसार समझें तो ऐसा बुध के कारण होता है चूँकि बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है और बुध को पेड़ पौधों का कारक ग्रह माना जाता है जबकि बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुंचाता है अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध के कारक वस्तुओं पर भी होता है अगर कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा बढ़ता रहता है-

2- घर में तुलसी के पौधे की उपस्थिति एक वैद्य के समान है शायद आपने इस बात पर ध्यान ना दिया हो लेकिन मामूली सी दिखने वाली यह तुलसी हमारे घर के समस्त दोष को दूर कर हमारे जीवन को निरोग और सुखमय बनाने में सक्षम है-

3- तुलसी का गमला रसोई के पास रखने से पारिवारिक कलह समाप्त होता है तथा पूर्व दिशा की खिड़की के पास तुलसी का पौधा रखने से पुत्र यदि जिद्दी हो तो उसका हठ दूर होता है-

4- कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो अग्नि कोण में तुलसी के पौधे को कन्या नित्य जल अर्पण कर एक प्रदक्षिणा करे तो विवाह जल्दी होता है और बाधाएं दूर होती हैं-

5- यदि कारोबार ठीक नहीं चल रहा तो दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखे तुलसी के पौधे में हर शुक्रवार कच्चा दूध अर्पण करें और किसी सुहागिन स्त्री को मीठी वस्तु दें-इससे व्यवसाय में सफलता मिलती है-

6- नौकरी में यदि उच्चाधिकारी की वजह से परेशानी हो तो ऑफिस में खाली जमीन या किसी गमले में सोमवार को तुलसी के 16 बीज किसी सफेद कपड़े में बांधकर दबा दें आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी-

7- प्रतिदिन अगर तुलसी के सामने कुछ समय के लिए बैठा जाए तो अस्थमा आदि जैसे श्वास के रोगों से जल्दी छुटकारा मिलता है-

8- आधुनिक रसायन शास्त्र भी यह बात स्वीकारता है कि तुलसी का सेवन, इसका स्पर्श, दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होता है-







Upcharऔर प्रयोग-

17 जनवरी 2017

तुलसी के नाम और माहात्म्य

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जीवन की सफलता मन की एकाग्रता पर बहुत कुछ निर्भर करती है यदि मन एकाग्र न हो तो मनुष्य न तो भजन, पूजन, आराधना और चिन्तन-मनन कर सकता है न ही अध्ययन कर सकता है शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय, पवित्र और देवी स्वरूप माना गया है इस कारण घर में तुलसी(Tulsi)हो तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए और यदि ये बातें ध्यान रखी जाती हैं तो सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा हमारे घर पर बनी रहती है-

तुलसी के नाम और माहात्म्य


हमारे भारतीय चिकित्सा विज्ञान(आयुर्वेद)का सबसे प्राचीन और मान्य ग्रंथ चरक संहिता में तुलसी के गुणों का वर्णन करते हुए कहा गया है-

                         हिक्काल विषश्वास पार्श्व शूल विनाशिनः।
                         पितकृतात्कफवातघ्र सुरसः पूर्ति गंधहा।।

अर्थात् तुलसी हिचकी, खांसी, विष विकार, पसली के दाह को मिटाने वाली होती है इससे पित्त की वृद्धि और दूषित कफ तथा वायु का शमन होता है-

भाव प्रकाश में तुलसी को रोगनाशक, हृदयोष्णा, दाहिपितकृत शक्तियों के सम्बन्ध में लिखा है-

                       तुलसी कटुका तिक्ता हृदयोष्णा दाहिपितकृत।
                       दीपना कष्टकृच्छ् स्त्रार्श्व रुककफवातेजित।।

अर्थात् तुलसी कटु, तिक्त, हृदय के लिए हितकर, त्वचा के रोगों में लाभदायक, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली मूत्रकृच्छ के कष्ट को मिटाने वाली होती है यह कफ और वात सम्बन्धी विकारों को ठीक करती है-

धन्वंतरि निघुंट में कहा गया है-

                         तुलसी लघु उष्णाच्य रूक्ष कफ विनाशिनी।
                        क्रिमिमदोषं निहंत्यैषा रुचि वृद्वंहिदीपनी।।

तुलसी, हल्की, उष्ण रूक्ष, कफ दोषों और कृमि दोषों को मिटाने वाली अग्नि दीपक होती है-

1- सामान्य रूप से तुलसी के दो ही भेद जाने जाते हैं जिन्हें रामा और श्यामा कहते हैं-रामा के पत्तों का रंग हलका होता है जिससे उसका नाम गौरी पड़ गया है तथा श्यामा अथवा कृष्णा तुलसी के पत्तों का रंग गहरा होता है और उसमें कफनाशक गुण अधिक होता है इसलिए औषधि के रूप में प्रायः कृष्णा तुलसी का ही प्रयोग किया जाता है इसकी गंध व रस में तीक्ष्णता होती है-

2- तुलसी की अन्य कई प्रजातियाँ होती हैं एक प्रजाति ‘वन तुलसी’ है जिसे ‘कठेरक’ भी कहते हैं इसकी गंध घरेलू तुलसी की अपेक्षा कम होती है और इसमें विष का प्रभाव नष्ट करने की क्षमता होती है-रक्त दोष, नेत्रविकार, प्रसवकालीन रोगों की चिकित्सा में यह विशेष उपयोगी होती है-

3- दूसरी जाति को ‘मरुवक’ कहते हैं-राजा मार्तण्ड ग्रन्थ में इसके लाभों की जानकारी देते हुए लिखा गया है कि हथियार से कट जाने या रगड़ लगकर घाव हो जाने पर इसका रस लाभकारी होता है तथा किसी विषैले जीव के डंक मार देने पर भी इसका रस लाभकारी होता है-

4- तीसरी जाति बर्बरी या बुबई तुलसी की होती है इसकी मंजरी की गंध अधिक तेज होती है तथा इसके बीज अत्यधिक वाजीकरण माने गए हैं-

5- अनेक हकीमी नुस्खों में बर्बरी प्रयोग होता है वीर्य की वृद्धि करने व पतलापन दूर करने के लिए बर्बरी जाति की तुलसी के बीजों का प्रयोग किया जाता है इसके अलावा तुलसी की एक कृमिनाशक जाति भी होती है-

तुलसी के अन्य नाम-


तुलसी के कई नाम हैं जो इसके गुणों का इतिहास बताते हैं वेदों, औषधि-विज्ञान के ग्रंथों और पुराणों में इसके कुछ प्रमुख नाम-गुण इस प्रकार हैं-

कायस्था- क्योंकि यह काया को स्थिर रखती है-

तीव्रा- क्योंकि यह तीव्रता से असर करती है-

देव-दुन्दुभि- इसमें देव-गुणों का निवास होता है-

दैत्यघि- रोग-रूपी दैत्यों का संहार करती है-

पावनी- मन, वाणी और कर्म से पवित्र करती है-

पूतपत्री- इसके पत्र(पत्ते) पूत (पवित्र) कर देते हैं-

सरला- हर कोई आसानी से प्राप्त कर सकता है-

सुभगा- महिलाओं के यौनांग निर्मल-पुष्ट बनाती है-

सुरसा- यह अपने रस (लालारस) से ग्रन्थियों को सचेतन करती है-

तुलसी(Tulsi)का माहात्म्य-


1- तुलसी आपके  मन में बुरे विचार नहीं आने देती और रक्त-विकार शान्त करती है तथा त्वचा और छूत के रोग नहीं होने देती-

2- तुलसी की कंठी माला आपको सभी प्रकार के कंठ रोगों से आपको बचाती है-

3- तुलसी आपके शरीर में कामोत्तेजना नहीं होने देती है लेकिन ये आपको  नपुंसक भी नहीं बनाती है-

4- तुलसी-दल चबाने वाले के दांतों को कीड़ा नहीं लगता है लेकिन इसे चबाने के बाद आपको तुरंत कुल्ला करना चाहिए क्युकि तुलसी में पारे की मात्रा होती है जो आपके दांतों के इनेमल के लिए नुकसान दायक है-

5- तुलसी की सेवा करने वाले मनुष्य को क्रोध कम आता है यानी ये आपको मन और बुधि से शांत-चित्त बनाती है-

6- तुलसी की माला, कंठी, गजरा और करधनी पहनना शरीर को निर्मल, रोगमुक्त और सात्विक बनाता है इसलिए वैष्णव भक्त तुलसी की माला गले में धारण करते है-

7- कार्तिक महीने में जो तुलसी का सेवन करता है उसे साल भर तक डॉक्टर-वैद्य, हकीम के पास जाने की जरूरत नहीं पड़तीं है-

8- तुलसी को अंधेरे में तोड़ने से शरीर में विकार आ सकते हैं क्योंकि अंधकार में इसकी विद्युत लहरें प्रखर हो जाती हैं-

9- तुलसी का सेवन करने के बाद दूध न पीएं इससे आपको चर्म-रोग हो सकते हैं-

10- कार्तिक महीने में यदि तुलसी-दल या तुलसी-रस ले चुकें हों तो उसके बाद पान न खाएं-ये दोनों गर्म हैं और कार्तिक में रक्त-संचार भी प्रबलता से होता है इसलिए तुलसी के बाद पान खाने से परेशानी में पड़ सकते हैं-

11- तुलसी-दल के जल से स्नान करके कोढ़ नहीं होता है-

12- सूर्य-चन्द्र ग्रहण के दौरान अन्न-सब्जी में तुलसी-दल इसलिए रखा जाता है कि सौरमण्डल की विनाशक गैसों से खाद्यान्न दूषित न हो-

13- जीरे के स्थान पर पुलाव आदि में तुलसी रस के छींटे देने से पौष्टिकता और महक में दस गुना वृद्धि हो जाती है-

14- तेजपात की जगह शाक-सब्जी आदि में तुलसी-दल डालने से मुखड़े पर आभा, आंखों में रोशनी और वाणी में तेजस्विता आती है-

15- तेल, साबुन, क्रीम और उबटन में तुलसी, दल और तुलसी रस का उपयोग, तन-बदन को निरोग, सुवासित, चैतन्य और कांतिमय बनाता है-

16- आपके स्वभाव में सात्विकता लाने वाला केवल यही पौधा है-तुलसी केवल शाखा-पत्तों का ढेर नहीं ये आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है-

17- तुलसी के आगे खड़े होकर पढ़ने, विचारने दीप जलाने और पौधे की परिक्रमा करने से दसों इन्द्रियों के विकार दूर होकर मानसिक चेतना मिलती है-






Upcharऔर प्रयोग-

16 जनवरी 2017

तुलसी को बनाए आप अपने आँगन की शोभा

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तुलसी घर की शोभा-सुगन्धि और पवित्रता की प्रतीक है तुलसी(Tulsi)का पौधा जिस आंगन में लहलहाता है बस जान ले उस घर की शोभा और सुगन्धि में पवित्रता होती है और महिलाएं अपना चरित्र तुलसी जैसा बनाने में ही अपना जीवन सार्थक मानती हैं इसीलिए विनम्र भाव से वे कहती हैं- ‘‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’’

तुलसी को बनाए आप अपने आँगन की शोभा

अगर आपके घर में तुलसी का पौधा है तो इसके बीजो को संभाल के रख ले क्युकि ये आपके बड़े काम की चीज है जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए वरना तुलसी के झाड में चीटियाँ और कीड़ें लग जाते है और उसे समाप्त कर देते है आप इन पकी हुई मंजिरियों को रख ले तथा इनमे से काले-काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर ले बस यही सब्जा है अगर आपके घर में नही है तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकान पर भी ये आपको मिल जाएंगे-

http://www.upcharaurprayog.com

1- हमारे दैनिक जीवन में तुलसी का बहुत ही व्यापक उपयोग है आजकल शहरों में घर में हम अन्य फूलदार पौधे गमलों में लगाते हैं क्योंकि हर घर में कच्ची जमीन नहीं होती है हमें गमलों में तुलसी के भी दो-चार पौधे लगाने चाहिए-हालांकि जमीन में तुलसी का पौधा जिस तेजी से पनपता और विकसित होता है गमले में नहीं हो पाता है लेकिन इससे उसके गुणों में कोई अन्तर नहीं आता है-

2- कुछ वर्ष पहले मलाया में मलेरिया की अधिकता को देखकर वहां की सरकार ने पार्कों में वनों में खाली जमीन जहां भी थी वहां तुलसी के पौधे रोपने का एक जोरदार अभियान चलाया था और उसके परिणाम-स्वरूप महामारी के रूप में कुख्यात मलेरिया धीरे-धीरे कम होते हुए अब बिलकुल समाप्त हो गया है अब वहां के निवासी तुलसी के गुणों से भली-भांति परिचित हो चुके हैं और आज उनके घरों में तुलसी के एक-दो नहीं कई-कई पौधे लहलहाते दिखाई देते हैं-

3- अनेक होमियोपैथिक दवाइयां तुलसी के रस से तैयार की जाती हैं मेटेरिया मेडिका में तुलसी के अनेक गुणों का उल्लेख किया गया है-

4- तुलसी के सेवन का मनुष्य के चरित्र पर गहरा प्रभाव पड़ता है तुलसी के सेवन से विचार शुद्ध और पवित्र रहते हैं आध्यात्मिक विचार उत्पन्न होते हैं तथा वासना की ओर मन आकृष्ट नहीं हो पाता है मन में न तो वासनात्मक विचार उत्पन्न होते हैं न ही जल्द क्रोध आता है तथा तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में चुस्ती-फुर्ती पैदा होती है और चेहरा कान्तिपूर्ण बन जाता है-

तुलसी(Tulsi)से होने वाले लाभ-


1- तुलसी के पौधे आंखों की ज्योति और मन को शान्ति प्रदान करते हैं वातावरण में सात्विकता की सृष्टि करते हैं तुलसी आपके ह्रदय को सात्विक बनाती है और मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने की प्रेरणा के लिए तुलसी प्रयोग की जाती है-

2- तुलसी रक्त विकार का सबसे बड़ा शत्रु है यदि रक्त में किसी भी कारण से विकार उत्पन्न हो गए हों धोखे या जानबूझकर विष खा लेने पर विष रक्त में घुलमिल गया हो तो तुलसी के नियमित प्रयोग से वह विष रक्त से निकल जाता है-

3- आयुर्वेद के मतानुसार यदि कार्तिक मास में प्रातःकाल निराहार तुलसी के कुछ पत्तों का सेवन किया जाए तो मनुष्य वर्ष भर रोगों से सुरक्षित रहता है-

4- क्षय(टी.बी)और मलेरिया के कीटाणु तुलसी की गंध से समाप्त हो जाते है तथा इसके सम्पर्क मात्र से अन्य रोगों के कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं-

5- चूँकि तुलसी रोगाणुनाशक पौधा है इसलिए हिन्दू घरों में यह मिलता है और इसकी पूजा होती है-

6- तुलसी का सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है तुलसी का उपयोग करने के तत्काल बाद दूध नहीं पीना चाहिए-उससे कई रोग पैदा हो जाते हैं अनेक आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन दूध के साथ बताया गया है लेकिन तुलसी का सेवन गंगाजल, शहद या फिर सामान्य पानी के साथ करना बताया गया है-


Upcharऔर प्रयोग-

तुलसी एक साधारण पौधा नहीं है

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तुलसी(Tulsi)का पौधा अपने दिव्य गुणों के लिए प्रतिष्ठित है लेकिन क्या आप जानते हैं तुलसी(Tulsi)से कई गंभीर समस्याओं को ठीक किया जा सकता है आइये आप जाने इसके आध्यत्मिक और आयुर्वेदिक प्रयोग-

तुलसी एक साधारण पौधा नहीं है

तुलसी(Tulsi)के आध्यत्मिक प्रयोग-


1- तुलसी(Tulsi)के निकट जिस मन्त्र-स्तोत्र आदि का जप-पाठ किया जाता है वो सब अनंत गुना फल देने वाला होता है प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, भूत, दैत्य आदि सब तुलसी(Tulsi)के पौधे से दूर भागते है -

2- ब्रह्महत्या आदि पाप तथा पाप और खोटे विचार से उत्पन्न होनेवाले रोग तुलसी(Tulsi)के सामीप्य एवं सेवन से नष्ट हो जाते है तुलसी का पूजन, रोपण व धारण पाप को जलाता है और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदायक है-

3- श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी-Tulsi का एक पत्ता भी महान पुण्य देनेवाला है जो चोटी में Tulsi-तुलसी स्थापित करके प्राणों का परित्याग करता है वह पापराशि से मुक्त हो जाता है -

4- तुलसी(Tulsi)के नाम-उच्चारण से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तुलसी ग्रहण करके मनुष्य पातकों से मुक्त हो जाता है -

5- तुलसी पत्ते से टपकता हुआ जल जो अपने सिर पर धारण करता है उसे गंगास्नान और 10 गोदान का फल प्राप्त होता है -

तुलसी(Tulsi)के आयुर्वेदिक प्रयोग-


1- शिवलिंगी के बीजों को तुलसी(Tulsi))और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाता है तो महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है-

2- किडनी की पथरी में तुलसी(Tulsi))की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है-किडनी स्टोन को खत्म करने के साथ-साथ तुलसी त्वचा को साफ करने में भी मददगार है-

3- औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी दिल संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है इससे ना सिर्फ कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रि‍त किया जा सकता है बल्कि ब्लड प्रेशर को भी ये कंट्रोल करने की क्षमता रखता है रोजाना खाली पेट तुलसी(Tulsi))की कुछ पत्तियां चबाने से दिल की बीमारियों से बचा जा सकता है-

4- तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई भी स्वस्थ व्यक्ति सेवन में ला सकता है-

5- तुलसी से स्ट्रेस हार्मोंन को नॉर्मल किया जा सकता है रक्त के प्रवाह को सामान्‍य करने में भी तुलसी बहुत मददगार है जो लोग बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं उन्‍हें दिन में 2 बार तुलसी की 12 पत्तियां चबानी चाहिए-

6- इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण ब्रेस्ट कैंसर और ओरल कैंसर से बचने के लिए तुलसी खाना फायदेमंद है-

7- तुलसी(Tulsi))में पाए जाने वाले तत्वों से त्वचा को खूबसूरत बनाया जा सकता है एक्‍ने से बचने और त्वचा को फ्रेश रखने में भी तुलसी फायदेमंद है बालों से खुजली को मिटाना हो या झड़ते बालों को रोकना हो तुलसी दोनों में फायदेमंद है नारियल के तेल में तुलसी मिलाकर लगाने से बालों की खुजली मिटती हैं और बाल भी नहीं झड़ते-

8- एलर्जी, साइनस, जुकाम और सिरदर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए तुलसी का सेवन करना चाहिए तुलसी की पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाकर गर्म करें और सामान्‍य तापमान पर आने पर तौलियों पर ये पानी रखकर सिर में लगाएं  चुटकियों में सिरदर्द भाग जाएगा-

9- औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है हर्बल जानकारों के अनुसार तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है-

10- इसकी पत्तियों का रस निकाल कर बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलायें और रात को चेहरे पर लगाये तो झाईयां नहीं रहती, फुंसियां ठीक होती है और चेहरे की रंगत में निखार आता है-

11- तुलसी से माइग्रेन के निवारण में मदद मिलती है प्रतिदिन दिन में 4-5 बार तुलसी से 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माईग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है-

12- फ्लू रोग में तुलसी(Tulsi))के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता है फ्लु के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक का सेवन लाभदायक है-






Upcharऔर प्रयोग-

तुलसी प्रकृति का एक अदभुत उपहार है

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तुलसी(Tulsi)एक राम बाण औषधि है यह प्रकृति की अनूठी देन है इसका जड़, तना, पत्तियां तथा बीज उपयोगी होते हैं इसमें कीटाणुनाशक अपार शक्ति हैं रासायनिक द्रव्यों एवं गुणों से भरपूर, मानव हितकारी तुलसी रूखी गर्म उत्तेजक, रक्त शोधक, कफ व शोधहर चर्म रोग निवारक एवं बलदायक होती है-

तुलसी प्रकृति का एक अदभुत उपहार है


तुलसी तपेदिक, मलेरिया व प्लेग के कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता तुलसी में विद्यमान है शरीर की रक्त शुद्धि, विभिन्न प्रकार के विषों की शामक, अग्निदीपक आदि गुणों से परिपूर्ण है यह कुष्ठ रोग का शमन करती है इसको छू कर आने वाली वायु स्वच्छता दायक एवं स्वास्थ्य कारक होती है ये  घरों में हरे और काले पत्तों वाली तुलसी पाई जाती है तथा दोनों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है एक वर्ष तक निरंतर इसका सेवन करने से शरीर के सभी प्रकार के रोग दूर हो सकते हैं तुलसी का पौधा जिस घर में हो वहाँ जीवाणु को पनपने नहीं देता है जो जीवाणु स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते है-

कुष्ठनाशक तुलसी का तेल(Basil oil)कैसे बनायें-


जड़ सहित तुलसी का हरा भरा पौधा लेकर धो लें फिर इसे पीसकर इसका रस निकालें और आधा लीटर पानी- आधा लीटर तेल डालकर हल्की आंच पर इसे पकाएं और जब केवल तेल रह जाए तो छानकर शीशी में भर कर रख दें ये आपका कुष्ठ नाशक तेल बन गया अब आप इसे सफेद दाग़ पर लगाएं लेकिन इन सब इलाज के लिए आपको धैर्य की जरूरत है क्युकि कारण ये है कि सफ़ेद दाग ठीक होने में समय लगता है

तुलसी(Tulsi)का सामान्य प्रयोग-


तुलसी की पाँच पत्तियॉं, दो नग काली मिर्च का चूर्ण, रात को पानी में भीगी हुई दो नग बादाम का छिलका निकालकर फिर उसकी चटनी बनाकर एक चम्मच शहद के साथ सेवन करें एवं लगभग आधा घण्टा अन्न-जल ग्रहण ना करे-

तुलसी के पत्तों को साफ़ पानी में उबाल ले उबाले जल को पीने में उपयोग करें तथा कुल्ला करने में भी इसका उपयोग कर सकते है आप दो-तीन पत्तिया ले और छाछ या दही के साथ सेवन करें-आयुर्वेदिक कम्पनियां अपने जीवनदायी औषधीयों में तुलसी का उपयोग करती है-

व्यावहारिक प्रयोग में तुलसी का जड़, पत्र, बीज व पंचांग प्रयुक्त करते हैं तथा इसकी मात्रा-

तुलसी का स्वरस- दस से बीस ग्राम ले

तुलसी के बीज चूर्ण- एक  से दो  ग्राम  ले

तुलसी का क्वाथ- एक से दो औंस ले

तुलसी(Tulsi)का रोगों में उपयोग-


1- अदरक या सोंठ, तुलसी, कालीमिर्च, दालचीनी थोड़ा-थोडा सबको मिलाकर एक ग्लास पानी में उबालें और जब पानी आधा रह जाए तो शक्कर नमक मिलाकर पी जाएं-इससे फ्लू, खांसी, सर्दी, जुकाम ठीक होता है-

2- दस ग्राम तुलसी के रस को पांच ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी, अस्थमा एवं श्वांस रोगों को ठीक किया जा सकता है जुकाम में तुलसी का पंचांग व अदरक समान भाग लेकर क्वाथ(काढ़ा)बनाते हैं और इसे दिन में तीन बार लेते हैं-

3- शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में काफी राहत मिलती है-क़रीब सभी कफ सीरप को बनाने में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है तुलसी की पत्तियां कफ साफ़ करने में मदद करती हैं-तुलसी के सूखे पत्ते ना फेंके इसलिए  ये कफ नाशक के रूप में काम में लाये जा सकते हैं-

4- काली तुलसी का स्वरस लगभग डेढ़ चम्मच काली मिर्च के साथ देने से खाँसी का वेग एकदम शान्त हो जाता है या फिर आप खांसी होने पर तुलसी के पत्ते 10, काली मिर्च 5 ग्राम, सोंठ 15 ग्राम, सिके चने का आटा 50 ग्राम और गुड़ 50 ग्राम, इन सबको पान व अदरक में घोंट लें तथा एक एक ग्राम की गोलियां बना लें तथा दिन में दो-तीन बार चुसे-

5- नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा में फौरन राहत देता है जब भी खांसी हो सेवन करें-

6- तुलसी व अदरक का रस एक एक चम्मच, शहद एक चम्मच, मुलेठी का चूर्ण एक चम्मच मिलाकर सुबह शाम चाटें आपके लिए यह खांसी की एक अचूक दवा है-

7- तुलसी के पत्तों का रस, शहद, प्याज का रस और अदरक का रस सभी चाय का एक-एक चम्मच भर लेकर मिला लें इसे आवश्यकता के अनुसार दिन में तीन-चार बार लें इसके प्रयोग से जमा हुआ बलगम बाहर निकल जाता है और रोग ठीक हो जाता है-

8- दस-बारह तुलसी के पत्ते तथा आठ-दस काली मिर्च डालकर चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम, बुखार ठीक होता है-फ्लू रोग तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता है-

9- फेफड़ों में खरखराहट की आवाज़ आने व खाँसी होने पर तुलसी की सूखी पत्तियाँ चार ग्राम मिश्री के साथ देते हैं-

10- तुलसी दमा टीबी में अत्यंत लाभकारी हैं तुलसी के नियमित सेवन से दमा, टीबी नहीं होती हैं क्यूँकि यह बीमारी के जिम्मेदार कारक जीवाणु को बढ़ने से रोकती हैं चरक संहिता के अनुसार तुलसी को दमा की औषधि बताया गया हैं-

11- तुलसी की हरी पत्तियों को आग पर सेंक कर नमक के साथ खाने से खांसी तथा गला बैठना ठीक हो जाता है तुलसी के पत्तों के साथ चार भुनी लौंग चबाने से खांसी जाती है तथा तुलसी के कोमल पत्तों को चबाने से खांसी और नजले से राहत मिलती है-

12- हल्के ज्वर में कब्ज भी साथ हो तो काली तुलसी का स्वरस(10 ग्राम)एवं गौ घृत(10 ग्राम)दोनों को एक कटोरी में गुनगुना करके इस पूरी मात्रा को दिन में दो या तीन बार लेने से कब्ज भी मिटता है और ज्वर भी समाप्त होता है ज्वर से जुड़ी समस्या ज्वर यदि विषम प्रकार का हो तो तुलसी पत्र का क्वाथ तीन-तीन  घंटे पश्चात सेवन करने का विधान है अथवा तीन ग्राम स्वरस शहद के साथ तीन-तीन  घंटे में लेंते रहें-

13- तुलसी की जड़ का काढ़ा भी आधे औंस की मात्रा में दो बार लेने से ज्वर में लाभ पहुँचाता है तुलसी के पत्ते का रस यदि एक-दो ग्राम रोज पिएं तो फिर आपको कभी बुखार नहीं होगा लेकिन एक सामान्य नियम सभी प्रकार के ज्वरों के लिए यह है कि बीस तुलसी दल एवं दस काली मिर्च मिलाकर क्वाथ पिलाने से तुरन्त ज्वर उतर जाता है-

14- मोतीझरा(टायफाइड)में दस तुलसी पत्र एक माशा जावित्री के साथ पानी में पीसकर शहद के साथ दिन में चार बार देते हैं-तुलसी सौंठ के साथ सेवन करने से लगातार आने वाला बुखार ठीक होता है-

15- यदि तुलसी की 11 पत्तियों का 4 खड़ी कालीमिर्च के साथ सेवन किया जाए तो मलेरिया एवं मियादी बुखार ठीक किए जा सकते हैं-


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