24 सितंबर 2018

नशे की लत उपचार करें

Addiction Treatment


आज समाज में हमारी युवा पीढ़ी दिनों-दिन नशे (Intoxicate) की ओर अग्रसर होती जा रही है और दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस  सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं लेकिन कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं-

नशे की लत उपचार करें

आजकल के कालेज लाइफ में ये रोग हमारी युवा पीढ़ी (Young Generation) को इस प्रकार लग गया है कि अनेको घर के बच्चे बर्बादी की कगार पे पहुँच गए है और घर वालो को तब पता चलता है जब वो पूरी तरह लिप्त हो जाते है इससे जादा गंभीर परिणाम यहाँ तक देखने को मिला है कि नशे (Intoxicate) की लत पूरी करने के लिए राहजनी, चोरी इत्यादि करने लगते है कालेज में लड़कियां भी खुद को स्मार्ट (Smart) बताने के लिए भी नशे का सहारा ले रही है-जिसके गंभीर परिणाम शादी के बाद गर्भवती होने पे बच्चे पे भी पड़ते है-

नशे की लत उपचार करें

हर कोई इस बुरी लत से अपने बच्चों और अन्य सदस्यों को बचाना चाहेगा-खुद नशे (Intoxicate) की लत के शिकार कुछ लोग यही चाहते हैं की किसी तरह से इस लत से छुटकारा मिल जाए परन्तु उनका इस पर कोई वश नहीं-नशा व्यक्ति की रगों में पहुँच कर व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेता है व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है-

यदि हर माँ बाप को यह जब यह ज्ञान हो जाये कि उनका बच्चा  नशा कर रह है तो शायद कुछ जिंदगियां बचा सकें मेरा अभिप्राय केवल इंतना है कि घरवालों को इसकी खबर ही नही लग पाती कि कब और कैसे उनके परिवार का सदस्य नशा करने लग गया है- नशे की लत को छुड़ाने के लिय सरकार ने नशा मुक्ति केन्द्र (De-Addiction Center) खोल रखे हैं-पता चलते ही वहां से मदद लेनी चाहिए-

यथासंभव यह प्रयास करना चाहिये जो कि नशा मुक्ति के लिए सीधा और सरल रास्ता है-मेरा यह लेख उन लोगो के लिए है जो नशा (Intoxicate) छोड़ना चाहते है लेकिन छोड़ नही पाते नशे का संबंध मन मस्तिष्क से है-

शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर, महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है-ऐसे बुरे व्यसन (आदत) एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है-वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है-पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है तथा कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है -

लेकिन आप इसका इलाज आयुर्वेद के माध्यम से कर सकते है और इसे बनाने के लिए 18-20 जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है-सभी औषधियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर यह दवा तैयार की जाती है इस दवा का कोई बुरा प्रभाव नहीं है यदि इसे शरीर के वजन और स्वास्थ्य अनुसार दवा की मात्रा तयकर लिया जाता है-इस दवा का प्रयोग किसी का शराब का नशा छुड़ाने, धूम्रपान का नशा छुड़ाने, और अन्य का नशा छुड़ाने (जैसे गुटका, तम्बाकू) में प्रयोग किया जा सकता है-

जड़ी बूटियों का विवरण और मात्रा निम्न है-


गुलबनफशा- 2 ग्राम
निशोध- 4 ग्राम
विदारीकन्द (कुटज)- 15 ग्राम
गिलोय- 4 ग्राम
नागकेसर- 3 ग्राम
कुटकी- 2 ग्राम
कालमेघ- 1 ग्राम
भ्रिगराज- 6 ग्राम
कसनी- 6 ग्राम
ब्राम्ही- 6 ग्राम
भुईआमला- 4 ग्राम
आमला- 11 ग्राम
काली हर्र- 11 ग्राम
लौंग- 1 ग्राम
अर्जुन- 6 ग्राम
नीम- 7 ग्राम
पुनर्नवा- 11 ग्राम

कैसे प्रयोग करे-


उपर दी गयी सभी जड़ी-बूटियों को कूट और पीसकर पाऊडर बना लें-एक चम्मच दवा पाऊडर को एक दिन में दो बार खाना खाने के बाद पानी के साथ ले-इस दवा को खाने में मिलाकर भी दिया जा सकता है-जैसे-जैसे नशे की लत कम होने लगे इस दवा की मात्रा धीरे-धीरे कम कर दे-इस दवा का असर फ़ौरन पता चलने लगता है और लगभग दो माह में पूरी तरह से नशे की लत खत्म हो जाती है लेकिन दवा को कम मात्रा में और 2-3 दिन के अंतर के लगभग 6 माह दे जिससे नशे की लत जड़ से खत्म हो जाए-


ये दवा विज्ञापन वाले बना कर टी वी में आपको ही उलटे सीधे और मनमाने दामो पे बेचते है जबकि आप इसे घर पे ही बना सकते है-

एक और नशा मुक्ति उपाय-


प्रस्तुत लेख- राजीव दीक्षित द्वारा

एक आयुर्वेदिक ओषधि है जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं हमारे राजीव भाई ने उसका बहुत इस्तेमाल किया है लोगो का नशा छुडवाने के लिए और उस ओषधि का नाम है "अदरक"  और ये आसानी से सबके घर मे होती है- 

आप इस अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो  सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो- 

यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी-तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा-जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका, तंबाकू शराब -बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी- 

आप इसे सुबह से शाम तक चूसते रहो और आप ने ये 10-15-20 दिन लगातार कर लिया तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा-

मेरा खुद का अनुभव-


बहुत साल पहले मुझे भी गुटखा खाने की आदत जाने कैसे पड़ गई थी तब जब ये मेरी आदत गंभीर रूप लेने लगी तो हमने भी छुड़ाने के लिए ये प्रयोग अदरक का किया-हमने पांच साल पहले इसका उपयोग किया था मै पूरा दिन गुटका खाता था और कभी-कभी रात को भी खा के सोता था एक समय ये भी आया जब मुझे खाना खाने में तकलीफ होने लगी-

आप यकीन करे परिक्षण के लिए ये प्रयोग हमने स्वयं पे आजमाया और सिर्फ तीन दिन में ही मुझे गुटके से नफरत होने लगी लेकिन हमने इसे एक माह जारी रखा और तब से आज तक कभी भी मेरा मन नहीं हुआ है -

यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र मे इसे सल्फर कहते है- "अदरक" मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है-जो हमारे नशा करने की इच्छा को खत्म कर देता है और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती है तो उसको बार-बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की-तो सल्फर की मात्रा आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी-इसका राजीव भाई ने हजारो लोगो पर परीक्षण किया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है-बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता है-तो आप इसका प्रयोग करे -

अब आप ये सब नहीं कर सकते है तो होमिओपेथी की भी दवा है लीजिए अब इसके उपयोग का एक दूसरे उपयोग का तरीका भी जाने-

"अदरक" के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया है और सस्ता भी है इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं-आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम की दवा लें-सल्फर नाम की दवा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम  घोल (Dilution) भी कहते है अँग्रेजी मे -

यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ये 5 मिली लीटर दवा की शीशी पचास या साठ रूपये की आती है और उस दवा का एक बूंद जीभ पर डाल लो-सवेरे-सवेरे खाली पेट फिर अगले दिन और एक बूंद डाल लो-ये 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है और जो ज्यादा पियक्कड  है जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है वो लोग हफ्ते मे दो-दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक करे बड़े-बड़े पियक्कड की दारू छूट जाएगी-

बस हो सकता है कि दो या तीन महीने का समय लगे-यही सल्फर अदरक मे होता  है और इसका अर्क ही होमिओपेथी की दुकान मे भी उपलब्ध है आप आसानी से खरीद सकते है लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको पुछेगा कितनी ताकत (पोटेंसी) की दवा दूँ आप उसको कहे 200 potency की दवा दे दो या आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते है.लेकिन जो बहुत ही पियककड़ है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले-लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले और अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे-

बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे आर्सेनिक (ARSENIC) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप ARSENIC- 200 का प्रयोग करे-चाय और काफी भी छुट जायेगी-

गुटका, तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी पीने वालों के शरीर मे फास्फोरस (PHOSPHORUS) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप PHOSPHORUS 200 का प्रयोग करे ये गुटका, तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी इत्यादि छुडा देगा -


शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा सल्फर (SULPHUR) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप SULPHUR 200 का प्रयोग करे ये शराब को छुडा देता है लेकिन हो सके तो आप बाज़ार में मिलने वाली अदरक से ही शुरुवात करे आप को इससे ही पूरा लाभ मिल जाएगा-


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ल्यूकोडर्मा या सफ़ेद दाग नाशक लेप

Destroyer Leucoderma or White Stain


सफेद दाग (Leukoderma) या श्वेत कुष्ठ एक त्‍वचा रोग है इस रोग के रोगी  के बदन पर अलग-अलग स्‍थानों पर अलग-अलग आकार के सफेद दाग आ जाते हैं पूरे वि‍श्‍व में एक से दो से तीन प्रति‍शत लोग इस रोग से प्रभावि‍त हैं लेकि‍न इसके विपरीत भारत में इस रोग के शि‍कार लोगों का प्रति‍शत चार से पांच है शरीर पर सफेद दाग आ जाने को लोग एक कलंक के रूप में देखने लगते हैं और कुछ लोग भ्रम-वश इसे कुष्‍ठ रोग मान बैठते हैं-

ल्यूकोडर्मा या सफ़ेद दाग नाशक लेप

रक्षा अनुसंधान विकास संस्थान (DRDO) ने सफेद दाग के निदान के लिए आयुर्वेद में रिसर्च को बढ़ावा दिया है हि‍मालय की जड़ी-बूटि‍यों पर व्‍यापक वैज्ञानि‍क अनुसंधान करके एक समग्र सूत्र तैयार कि‍या है इसके परि‍णामस्‍वरूप एक सुरक्षि‍त और कारगर उत्‍पाद ल्‍यूकोस्‍कि‍न (lokoskin) वि‍कसि‍त कि‍या जा सका है इलाज की दृष्‍टि‍से ल्‍यूकोस्‍कि‍न (lokoskin) बहुत प्रभावी है और यह शरीर के प्रभावि‍त स्‍थान पर त्‍वचा के सफ़ेद धब्बे को सामान्‍य बना देता है इससे रोगी का मानसि‍क तनाव समाप्‍त हो जाता है और उसके अंदर आत्‍मवि‍श्‍वास बढ़ जाता है-ल्यूकोस्किन को तैयार करने में जिन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है वे हैं- विषनाग, बाकुची, कौंच, मंडूकपणीर्, अर्क और एलोविरा आदि -

ल्यूकोस्किन (Lokoskin) ओरल लिक्विड और ऑइन्टमेंट दोनों रूप में मौजूद है ओरल लिक्विड का फायदा यह है कि इससे नए सफेद दाग (New white stains) न हीं बनते है और शरीर की इम्यूनिटी (Immunity) बढ़ती है और स्ट्रेस (Stress) में कमी आती है-जबकि ऑइन्टमेंट से मौजूदा सफेद दाग ठीक होते हैं-

ल्यूकोस्किन (lokoskin) के अच्छे नतीजे तीन महीने में दिखने लगते हैं जबकि पूरी तरह ठीक होने में दो साल तक का वक्त लग सकता है लिक्विड और ऑइन्टमेंट पर एक महीने का खर्च करीब 700 से 800 रुपए के बीच आता है-

आयुर्वेद मानता है कि सफेद त्वचा के धब्बे (Leukoderma) ठीक होना इस बात पर बहुत हद तक निर्भर करता है कि आप कुछ जरूरी हिदायतों और खान-पान को लेकर सतर्क रहें-

क्या करे और क्या न करे-


1- हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, लौकी, सोयाबीन, दालें ज्यादा खाएं-

2- 30 ग्राम भीगे हुए काले चने और 3-4 बादाम हर रोज खाएं-

3- रात को तांबे के बर्तन में पानी को आठ घंटे रखने के बाद सुबह पीएं-

4- नित्यप्रति ताजा गिलोय या एलोविरा जूस पीना चाहिए इससे आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है-

5- नमक, मूली और मांस के साथ दूध न पीएं- मांसाहार और फास्ट फूड कम खाएं-

6- तेज केमिकल वाले साबुन और डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें-

7- खट्टी चीजें जैस नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, उड़द दाल न खाएं-

8- पर्फ्यूम, डियोड्रेंट, हेयर डाई, पेस्टिसाइड को शरीर को सीधे शरीर के संपर्क में आने से बचाएं-

नोट- 

आप ल्यूकोस्किन (Lokoskin) ओरल लिक्विड और ऑइन्टमेंट यदि चाहें तो यहाँ से डायरेक्ट मंगा सकते है-

AIMIL PHARMACEUTICALS

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ल्यूकोडर्मा या विटिलिगो क्या है

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ल्यूकोडर्मा-सफेद दागकी बैच फ्लावर चिकित्सा

Bach Flower Medicine of Leucoderma


आज हम आपसे अपने दो उन केस की चर्चा कर रही हूँ जो रोगी सफ़ेद दाग यानि ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) से परेशान थे पहले रोगी का नाम शीतल मेडतीया उम्र 36 वर्ष थीं शीतल जी को शरीर पर कही-कही सफेद दाग थे ये सफ़ेद दाग उनकों तीन साल से थे और सबसे बड़ी परेशानी थी कि सफ़ेद दाग दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे थे-

ल्यूकोडर्मा-सफेद दागकी बैच फ्लावर चिकित्सा

शीतल जी चूंकि आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट ले रही थी पर दवाओं तथा पथ्य-अपथ्य का सख्ती से पालन करने के बावजूद उनको असर नही हो रहा था जब वो मेरे पास आई तब वो काफी परेशान थी वो अपना आत्मविश्वास खोने की कगार पर थी और बड़ी ही ना उम्मीद हो चुकी थी तब मैने उनके लक्षणों के हिसाब से बेचफ्लॉवर कॉम्बिनेशन दिया और साथ मे आयुर्वेदिक चिकित्सा व पथ्य अपथ्य भी जारी रखने को कहा लगभग 2 महीनों में ही उनके दाग हल्के होना शुरू हो गए और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा हुआ महसूस हुआ-

दूसरा केस मनीष भट्ट उम्र 48 वर्ष का था मनीष जी मुझसे किसी अन्य समस्या की दवा ले रहे थे तभी उनकी केस हिस्ट्री लेते समय देखा कि उनको 10 साल पुराने सफेद दाग भी थे और उन्होंने थक हार कर ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) की दवा लेना बंद कर दिया था पर जब उन्होंने बेचफ्लॉवर चिकित्सा शुरू की तब उनके दाग अपने आप हल्के होना शुरू हो गए और तीन महिनों में काफी कम भी हो गए तब मैंने उनको आयुर्वेद  उपचार वापस शुरू करने का सुझाव दिया और उनको अपेक्षाकृत लाभ भी हुआ-

दरअसल सफ़ेद दाग में चमड़ी का रंग अचानक सफेद या चितकबरा हो जाता है यह असाध्य तो नही किन्तु लंबी चिकित्सा वाली बीमारी है इसमें रोगी शारीरिक जलन, खुजली या दर्द नही किन्तु बहुत मानसिक दुख ओर सामाजिक दुख भुगतता है इसी वजह से उनके मन मे डर, तनाव, शर्म व हीनभावना भर जाती है और रोगी जल्द से जल्द इससे पीछा छुड़ाना चाहता है इस मर्ज की सबसे तकलीफदेह बात है कि मरीज हर वक्त यही डर में जीता है कि यह कही और बढ़ ना जाए-किन्तु योग्य पथ्य अपथ्य, औषधीय प्रयोग से शारीरिक और् बेचफ्लॉवर से मानसिक चिकित्सा से इस बीमारी से निजात मिल सकती है-

बैच फ्लावर चिकित्सा में इस प्रकार के रोगों का निदान बिना किसी साइड इफेक्ट के है और ये सबसे उत्तम चिकित्सा है अगर आपके समाज या परिवार में इस प्रकार की कोई समस्या है तो आप मुझसे निसंकोच मेरे पते पर सम्पर्क कर सकते है नीचे मेरा पता है-

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सफ़ेद दाग नाशक लेप

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ल्यूकोडर्मा पर लगाने व खाने की दवा

Apply on and Taking Medicine for Leucoderma


वैसे तो सफ़ेद दाग यनि ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) मे लगाने की दवाइयाँ प्रायः जलन ही पैदा करती हैं परंतु यह दवाई बिलकुल भी जलन पैदा नहीं करती है खाने की दवाइयों के साथ लगाने के लिए यह प्रयोग करे और यदि किसी कि आँख के पास या अन्य किसी कोमल अंग पर सफ़ेद दाग हो तब यह जरूर प्रयोग करें यह भी बहुत सफल दवाई है-

ल्यूकोडर्मा पर लगाने व खाने की दवा

सफेद दाग की समस्या कोई लाइलाज बीमारी नहीं है आयुर्वेदिक उपायों एवं बैच फ्लावर की चिकित्सा के जरिए इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है साथ ही यह बीमारी छूने से किसी से हाथ मिलाने से या फिर शररिक संबंध बनाने से भी नहीं फैलती है-

सामग्री-


सरसों का तेल (Mustard oil)- 250 ग्राम (कच्ची घानी का अधिक लाभदायक है)

हल्दी- एक किलो (साबुत कच्ची हल्दी ले) 

(यदि कच्ची हल्दी मिल जाए जो आधिक गुणकारी है लेकिन यदि कच्ची हल्दी ना मिले तो सुखी साबुत हल्दी 500 ग्राम ले बस ध्यान दे कि साबुत सुखी हल्दी मे घुन ना लगा हो)

बनाने का तरीका-


एक  किलो कच्ची या गीली हल्दी को या 500 ग्राम सुखी साबुत हल्दी को मोटा मोटा कूट ले अब आप इसे 4 किलो पानी मे उबाले तथा जब एक  किलो पानी बचे तब छान कर इस हल्दी के पानी को रख ले अब एक लौहे कि कड़ाही ले जिसमे 4 किलो पानी आ सके तथा इसमे 250 ग्राम सरसों का तेल व 1 किलो हल्दी का पानी मिलाकर धीमी आग पर पकाए तथा जब हल्दी का पानी खत्म हो जाए व कड़ाही मे नीचे कीचड़ सा बच जाए तब आग बंद कर दे और ठंडा होने पर तेल को सावधानी से अलग कर ले-यदि आप अधिक प्रभावशाली दवाई बनाना चाहते हैं तो इस तेल मे 3 बार 1-1 किलो हल्दी का पानी मिलाकर पकाए-यह तेल लगाने पर धीरे धीरे सफ़ेद दाग को खत्म कर देता है साथ मे खाने की दवाई भी जरूर खाए-

एक और सरल प्रयोग (Simple Use)-


बावची का एक  दाना सुबह पानी से खाली पेट ले फिर अगले दिन दो  दाने ले और इसी तरह 1-1 दाने को बढ़ाते हुए आप इसे 21 दाने तक बढ़ाए तथा फिर 1-1 दाने को कम करते हुए वापस 1 दाने पर ले आए और फिर दोबारा बढ़ाते हुए 1 से 21 तक व 21 से 1 तक ले आए आप यह प्रयोग 3-4 बार करें ऐसा करने से सफ़ेद दाग ठीक हो जाते हैं इस प्रयोग से यदि कभी कभी बीच मे गर्मी लगने लगे तो फिर आप आगे ना बढ़ाए बस वहीं से कम करना शुरू कर दे-

नारियल का पानी पीने व नारियल की गिरि खाने से गर्मी लगने कि समस्या कम हो जाती है अधिक लाभ के लिए रात को 2 कप पानी मे 2 चम्मच आंवला चूर्ण डाल दे तथा सुबह छान कर इस पानी से बावची के दाने ले तो फिर गर्मी नहीं लगती है-

अन्य प्रयोग-


1- 100 ग्राम तिल व 100 ग्राम बावची मिलाकर बारीक कूट ले तथा एक चम्मच सुबह हर दिन पानी से ले यदि बीच मे यदि गर्मी लगे तो कुछ दिन बंद कर दे तथा फिर दोबारा शुरू कर दे इससे भी सफ़ेद दाग ठीक हो जाते हैं-

2- बाबची और इमली के बीज बराबर बराबर मात्रा में पानी में 3-4 दिन भिगोकर रखे फिर छाया में सुखा दे अब इसका पेस्ट बनाकर सफ़ेद दाग पर नियमित लगाये-

3- बावची 100 ग्राम व चित्रक मूल 100 ग्राम ले तथा मोटा-मोटा कूट ले फिर रात को 2 चम्मच यह मिश्रण +1 कप पानी +2 कप दूध के साथ उबाले और जब केवल दूध बच जाए तब इसे छान कर आप दही जमा दे और इस दही मे ½ कप पानी मिलाकर लस्सी बना ले आप इसमे नमक या चीनी ना मिलाए इसे ऐसे प्रतिदिन पिए तथा कभी-कभी इसमे से मक्खन निकाल कर उस मक्खन को सफ़ेद दागों पर लगाए व लस्सी पी ले-

4- रिजका और खीर ककड़ी का रस 100-100 ग्राम मात्रा में मिलाकर सुबह शाम कुछ महीनों तक नियमित सेवन करे-

5- हरड का पावडर और लहसुन का रस मिलाकर सफ़ेद दाग पर लगायें-

6- तांबे के बर्तन में रात को पानी भरकर उसका सुबह सेवन करें तथा गाजर, लौकी और दालें अधिक से अधिक सेवन करें-एलोवेरा का जूस पीएं दो से चार बादाम डेली सेवन करें तथा सफेद तिल को खाने में अवश्य ही इस्तेमाल करें-पालक, गाय का घी, खजूर का इस्तेमाल करते रहें-

7- अदरख का जूस सफ़ेद दाग में रक्तसंचार (Circulatory) बढ़ाने एवं शक्तिवर्धक होता है-सफ़ेद दाग पर अदरख (Ginger) की पत्तियों को घिस कर लगाना लाभदायक रहता है-

8- 100 ग्राम बावची को लाकर साफ करके कूट ले तथा इसमे खैर व विजयसार का काढ़ा डाल कर धूप मे सुखाए आप काढ़ा इतना ही डालें कि एक दिन मे सुख जाए-इस तरह कम से कम 10 दिन करे-यदि इस तरह 21 बार काढ़ा डालकर सूखा ले तो अधिक अच्छा होगा उसके बाद इस बावची को बारीक पीस ले तथा ½ चम्मच इस बावची पाउडर को सुबह शाम आंवले के पानी से ले इससे भी बहुत जल्दी लाभ होता है ख़ैर व विजयसार का काढ़ा कैसे बनायें तथा आंवले के पानी के लिए नीचे देखे-

खैर विजयसार का काढ़ा बनाने की विधि-


जड़ी बूटी वाले से 250 ग्राम खैर की छाल व 250 ग्राम विजयसार की लकड़ी ले आए तथा कूट कर आपस में मिला ले फिर 50 ग्राम इस मिश्रण को 400 ग्राम पानी मे पकाए आप इसे धीमी आग पर पकाए और जब लगभग 100 ग्राम पानी रह जाए तब इसे छान ले तथा ठंडा होने पर जो बचा हुआ अंश है उसे कपड़े मे से निचोड़ ले-यह काढ़ा साफ बर्तन मे एक रात के लिए रख ले और सुबह ऊपर का साफ पानी निथार ले-जो अंश नीचे बैठ जाए उसे छोड़ दे (छानने के बाद जो बचता है उसे कचरे मे ना फेंके किसी पेड़ की जड़ में डाल दे ये बढ़िया खाद का काम करेगी) आप यह काढ़ा प्रतिदिन ताजा बनाए-

आंवले का पानी बनाने की विधि- 


रात को 2 कप पानी मे 2 चम्मच आंवला चूर्ण डाल दे तथा सुबह छान कर ही इस पानी का प्रयोग करे-


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सफेद दाग-ल्यूकोडर्मा की बैच फ्लावर चिकित्सा

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ल्यूकोडर्मा का होम्योपैथी इलाज

Homeopathy Treatment of Leukoderma


एक बार सफेद दाग (Leukoderma) होने पर इसके फैलने की आशंका बनी रहती है होम्योपैथी इसलिए इसके सिस्टमैटिक इलाज पर जोर देती है यानी इलाज सही कारण के आधार पर हो और पूरा हो आपको पहले ये जान लेना जरूरी है कि होम्योपैथी इलाज में अमूमन 2 से 3 साल तक का समय लगता है और होम्योपैथी से 100 में से 70 मामलों में सफेद दाग को पूरी तरह से ठीक होते पाया गया है-

ल्यूकोडर्मा का होम्योपैथी इलाज

ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) का होम्योपैथी इलाज-


अगर सफेद दाग ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर (Auto-Immune Disorders) की वजह से हुआ है तो शरीर के बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाकर इलाज शुरू किया जाता है ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर के कई कारणों में से एक स्ट्रेस और इमोशनल सेट बैक (Emotional set back) भी हो सकता है इसके लिए जो दवाइयां दी जाती हैं वे निम्न प्रकार से हैं-

1- इग्नेशिया (Ignatia-30)

2- नेट्रम म्यूर (Natrum mur-30)

3- पल्सेटिल्ला (Pulsatilla-30)

4- नक्स वॉमिका (Nux vomica-30)- (खासतौर से स्ट्रेस की वजह से सफेद दाग पनपने पर)

केमिकल एक्सपोजर से सफेद दाग (Leukoderma) हुआ है तो ये फिर दवाइयां दी जाती हैं-

1- सल्फर (Sulphur-30)

2- आर्सेनिक एल्बम (Arsenic album-30)

3-अगर यह जिनेटिक कारणों से है तो सिफलिनम (Syphllinum-200) भी कारगर है

4- आर्सेनिक सल्फ फ्लेवम-6 (Arsenic sulph Flevum-6) -ऐसी दवा है जिसे किसी भी कारण से सफेद दाग होने पर दिया जा सकता है-

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ल्यूकोडर्मा पर लगाने व खाने की दवा

विशेष सूचना-

सभी मेम्बर ध्यान दें कि हम अपनी नई प्रकाशित पोस्ट अपनी साइट के "उपचार और प्रयोग का संकलन" में जोड़ देते है कृपया सबसे नीचे दिए "सभी प्रकाशित पोस्ट" के पोस्टर या लिंक पर क्लिक करके नई जोड़ी गई जानकारी को सूची के सबसे ऊपर टॉप पर दिए टायटल पर क्लिक करके ब्राउज़र में खोल कर पढ़ सकते है....

किसी भी लेख को पढ़ने के बाद अपने निकटवर्ती डॉक्टर या वैद्य के परमर्श के अनुसार ही प्रयोग करें-  धन्यवाद। 

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23 सितंबर 2018

ल्यूकोडर्मा का आयुर्वेदिक उपचार

Ayurvedic Treatment of Leukoderma


ल्यूकोडर्मा (Leucoderma) एक प्रकार का त्वचा का रोग है जिसमें त्वचा के रंग में सफेद चकते पड़ जाते हैं ल्यूकोडर्मा यानी की सफेद दाग के नाम से भी जानते है धीरे-धीरे यह दाग बढ़ने लगते हैं यह दाग हाथों, पैरों, चेहरे, होठों आदि पर छोटे रूप में होते हैं फिर ये बडे़ सफेद दाग का रूप ले लेते हैं-


ल्यूकोडर्मा का आयुर्वेदिक उपचार

हमने पिछली पोस्ट में आपको बताया था कि ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) क्या है इसके लक्षण कारण और क्या आहार लें इस पोस्ट में हम आपको इसके इलाज के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपचार से अवगत कराते है-जब आप सभी प्रकार से और हर तरह से इलाज करके निराश हो गए हों तब आप ये दवाई जरूर एक बार प्रयोग करे-

सफ़ेद दाग (Leucodermaके कुछ आयुर्वेदिक प्रयोग-


सामग्री-

बावची (Psoralea Corylifolia)150 ग्राम
खैर की छाल (Catechu Bark)- 650 ग्राम
परवल की जड़- 300 ग्राम
देशी गाय का घी- 800 ग्राम
भृंगराज- 40 ग्राम
जवासा- 40 ग्राम
कुटकी- 40 ग्राम
गूगल- 80 ग्राम

बनाने की विधि-


1- सबसे पहले आप 650 ग्राम खैर की छाल व 150 ग्राम बावची (Psoralea Corylifoliaको मोटा-मोटा कूट कर रख ले अब इसके बाद 150 ग्राम बावची, भृंगराज, परवल व जवासे को भी बारीक पीस ले और अब गूगल के छोटे टुकड़े बना ले-

2- इसके बाद 650 ग्राम खैर की छाल + 150 ग्राम बावची को 6.500 किलो पानी मे पकाए आप इसे धीमी आग पर पकाए और जब लगभग 1/500 (डेढ़ किलो) ग्राम पानी रह जाए तब आप इसे छान ले तथा ठंडा होने पर जो बचा हुआ अंश है उसे कपड़े मे से निचोड़ ले अब यह काढ़ा साफ बर्तन मे एक रात के लिए रख ले तथा सुबह ऊपर का साफ पानी निथार ले और जो अंश नीचे बैठ जाए उसे आप छोड़ दे-

3- अब एक पीतल की कली की हुई कड़ाही(ना मिले तो लौहे की कड़ाही)मे 800 ग्राम देशी घी व का 1/500 (डेढकिलो) काढ़ा व बाकी बारीक पीसा हुआ पाउडर व गूगल के टुकड़े मिलाकर धीमी आग पर फिर पकाए तथा बीच-बीच में इसे कड़छी से हिलाते रहे-कुछ समय बाद कड़ाही मे नीचे काला काला चिपचिपा अंश दिखाई देगा इसे एक सलाई पर रुई लपेट कर इस पर घी लगाए तथा इस घी लगी रुई को जलाए-यदि चटर-चटर की आवाज आए तो समझे अभी पकाना बाकी है और यदि बिना किसी आवाज के रुई जल जाए तो फिर आग बंद कर दे-जब लगभग सारा पानी जल जाए और केवल घी रह जाए तो आग बंद कर दे-उसके बाद कड़ाही के हल्का ठंडा होने पर ध्यान से घी को एक सूखे बर्तन मे निकाल ले-

4- ध्यान ये रखना होगा कि घी पकाते समय मिश्रण पूरी तरह न जले और जब तली मे शहद जैसा गाढ़ा बच जाए तब आग बंद करके घी को आप अलग कर ले-घी अलग करते समय बर्तन मे जरा सा काले रंग का काढ़ा भी आ जाता है इसलिए बर्तन से घी को एक चौड़े मुंह की काँच की शीशी मे डाल ले-

प्रयोग विधि-

यह घी लगाने व खाने मे प्रयोग करे जिसको रोग कम हो उसे एक समय व जिसे रोग अधिक हो उसे सुबह नाश्ते के बाद व रात को सोने से पहले प्रयोग करे-

मात्रा (Quantity)-

आप 10 ग्राम छोटे बच्चो को भी दे सकते हैं या कम मात्रा मे तथा इसको लगाने से कुछ दिन के बाद दाग का रंग बदलने लगता है यदि इसको लगाने से जलन हो तो बीच-बीच मे इसका प्रयोग बंद कर दे उस समय नारियल का तेल लगाए तथा बाद मे जब जलन शांत हो जाए तब फिर दवाई लगाना शुरू कर दे यदि दाग पर दवाई लगाकर ऊपर किसी भी पेड़ का पत्ता रख कर बांधने से जल्दी लाभ होता है- 

किसी किसी को इस दवाई के लगभग 20 दिन के प्रयोग के बाद शरीर मे जलन व गर्मी महसूस होने लगती है तब इसे बीच मे बन्द कर दे इस दवाई के समय नारियल खाने व नारियल का पानी पीने से जलन नहीं होती है-

विटिलिगो (Vitiligo) के लिए आयुर्वेदिक योग-


40 ग्राम मूली के पिसे हुए बीज को 60 ग्राम सिरके में एक कांच के बर्तन में डाले तथा इसमें एक ग्राम संखिया भी पीस कर डाल दे अब इसे रात भर खुले आसमान के नीचे खुला रक्खे ताकि ओस की बुँदे इसमें गिरते रहे और सुबह इस बर्तन को उठा ले अब इस दवा को सोते समय सफ़ेद दागो पर लगाए बस ध्यान रहे इसे आँखों के आस पास न लगाए न हो होठो पे लगाए क्युकि इसमें संखिया है जो कि एक विष है -

होठो पर सफ़ेद दाग (Leukoderma) प्रयोग करे-


गंधक, लाल चीता (चित्रक) की जड़, हरताल, त्रिफला बराबर की मात्रा में ले इन सब को जल में घोटकर गोली बना ले और छाया में सुखा ले और अब इस गोली को जल में घिस कर लेप को दाग पर रोज लगाए-

श्वेत कुष्ठ (Leukoderma) पर एक अन्य प्रयोग-


100 ग्राम हल्दी तथा 100 ग्राम बाकुची (Psoralea Corylifoliaके बीज को पीस कर 1500 मिलीलीटर पानी में पकाए जब पानी लगभग 300 ग्राम बचे तब इसमें 150 ग्राम सरसों का तेल डालकर फिर पकाए जब सारा पानी जल जाए और तेल मात्र बचे तब उतार ले तथा ठंडा होने पर कांच की शीशी में भर कर रख ले सुबह-शाम इस तेल को सफ़ेद दागों पर लगाने से लाभ  होता है-

एक और सरल प्रयोग-


आप बावची (Psoralea Corylifolia) का एक  दाना सुबह पानी से खाली पेट ले फिर अगले दिन दो  दाने ले बस इसी तरह एक-एक करके आप बढ़ाते हुए 21 तक बढ़ाए तथा फिर एक-एक कम करते हुए वापस एक दाने पर ले आए फिर दोबारा बढ़ाते हुए एक से 21 तक व 21 से 1 तक ले आए-यह प्रयोग 3-4 बार करने से सफ़ेद दाग ठीक हो जाते हैं इस प्रयोग से कभी कभी बीच मे गर्मी लगने लगे तो फिर आगे ना बढ़ाए बस आप वहीं से कम करना शुरू कर दे वैसे नारियल का पानी पीने व नारियल की गिरि खाने से गर्मी लगने कि समस्या कम हो जाती है अधिक लाभ के लिए रात को 2 कप पानी मे 2 चम्मच आंवला चूर्ण डाल दे और सुबह छान कर इस पानी से बावची के दाने ले तो गर्मी नहीं लगती-

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ल्यूकोडर्मा का होम्योपैथी इलाज

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ल्यूकोडर्मा होने पर आहार और योग

Diet and Yoga on Leucoderma


ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) क्या है और होने के क्या लक्षण और कारण होते है इसके बारे में हमने अपनी पिछली पोस्ट में आपको अवगत कराया था कई रोगी जानना चाहते है कि ल्यूकोडर्मा होने पर किन-किन चीजों को खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करें तो आपकी जानकारी के लिए हम इस लेख में आपको बता रहें है-

ल्यूकोडर्मा होने पर आहार और योग

ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) पर क्या आहार लें-


1- ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) होने पर रोगी को लगभग एक हफ्ते तक सिर्फ फलों के रस पर आधारित रहना चाहिए तथा एक हफ्ते बाद रोगी को ताज़े फल, सब्जियां या उबली हुई सब्जियां और अनाज पर आधारित रहना चाहिए लेकिन आप दूध व दही कुछ दिनों बाद ही आहार में सम्मिलित कर सकते हैं इसके बाद रोगी अपने आहार में बीज़, अनाज़, फल व सब्जियों को सम्मिलित करें आप अपने आहार में शहद का उपयोग भी कर सकते हैं अब यह पूरा आहार चक्र हर दो महीनों में रिपीट करें-

2- आप अपने आहार में पालक, सोया मिल्क, अदरक, मेवे आदि भी प्रचुर मात्रा में ले सकते है-


ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) पर क्या आहार न लें-


ल्यूकोडर्मा से पीड़ित रोगी को बेरी और नाशपाती तथा माँसाहारी भोजन और जंक फ़ूड, चाय और कॉफ़ी, शराब, खट्टे आहार, सुगन्धयुक्त पेय, शक्कर, मैदे की बनी वस्तुओं के सेवन से बचना चाहिए-

योग और व्यायाम करें-


1- शारीरिक गतिविधि स्वच्छता में सहायक होती है इससे संतुलन आता है और तनाव घटता है इसके लिए पैदल चलना, दौड़ना, नृत्य करना, एरोबिक्स, जिमनास्टिक्स, स्ट्रेचिंग आदि करें तथा आप क्लोरीन रहित पानी में तैराकी भी कर सकते हैं-

2- गोमुखासन, वृक्षासन, प्राणायाम भी करें इससे आपको आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा व्यायाम नियमित करें एवं स्वस्थ आहार लें इसके लिए आप अपने स्वास्थ्य सलाहकार से मिलें और सहयोग लें-

लाल मिटटी का प्रयोग-


रेड क्ले (लाल मिट्टी) के नाम से मिलने वाली नदी किनारे या पहाड़ी इलाकों से मिल जाती है यह भी श्वेतदाग को कम करने के लिए एक असरदार उपाय है आप इस मिट्टी को अदरक के रस में 1:1 की मात्रा में मिलाएं और श्वेतदाग की जगह पर दिन में एक बार लगाएं इस मिट्टी के अंदर कॉपर स्किन के पिगमेंट को वापस लाने में मदद करता है तथा अदरक का रस उस जगह पर रक्त संचार बढ़ाता है साथ ही तांबे के बर्तन में रात भर रखा हुआ पानी भी पीने से इस रोग को कम करने में मदद मिलती है-

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ल्यूकोडर्मा होने के कारण और लक्षण

Causes and symptoms of Leucoderma


हर मनुष्य की स्किन के अंदर एक वर्णक होता है जिसे मेलेनिन (Melanin) कहते हैं इसी मेलेनिन के कारण आपकी स्किन का रंग निर्धारित होता है जादा वर्णक होने से आपका रंग काला होता है और इसकी कमी के कारण आपका कलर गोरा या साफ़ रंग का होता है यही मेलेनिन आपकी स्किन और आपकी बॉडी के दूसरे अंगों को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचा कर आपको स्किन कैंसर जैसे बीमारी से भी बचाता है-

ल्यूकोडर्मा होने के कारण और लक्षण

विटिलिगो तब होता है जब मेलेनिन उत्पादन करने वाली कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं या और अधिक मेलेनिन उत्पादित नहीं करतीं हैं जिसके कारण त्वचा पर असमान आकृति के धीमे-धीमे बढ़ते हुए सफ़ेद दाग दिखाई देते हैं यही विटिलिगो (Vitiligo) या ल्यूकोडर्मा (Leucoderma) होने के पीछे का कारण होता है इस मेलेनिन की कमी होने के लिए कई कारण और कारक जिम्मेदार होते हैं-आइये जानते है मुख्य कारण और लक्षण के बारे में-

वैसे इस चर्म रोग का सही कारण आज भी किसी को नहीं पता है लेकिन कुछ लोग इसे ख़राब खान-पान  ग़लत फ़ूड कम्बीनेशन (food combination) के कारण भी होना मानते हैं जैसे-मछली के साथ दूध का सेवन, कददू  के साथ दूध पीना,  प्याज़ के साथ दूध पीना आदि-

ऐसा सोचना ग़लत भी नहीं है किसी हद तक ये बात सही भी है कि सही खान पान न होने से भी ये प्राब्लम आपको हो सकती है क्योंकि जो आप खाते हैं उसका असर आपकी त्वचा की सेहत पर भी पड़ता है-

आनुवांशिक या जेनेटिक  कारण-


1- तीस से पैतीस प्रतिशत लोगो में  विटिलिगो (Vitiligo) का कारण आनुवंशिक गुण ही होता है तथा कुछ लोगों में सूर्य की हानिकारक किरणों के कारण भी ये होता है -

2- मानसिक तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) और डिप्रेशन (Depression) या स्किन पर चोट लगने से तथा पेट की गड़बड़ी के कारण भी विटिलिगो होता है-

3- लिवर की कार्यक्षमता में कमी या पीलिया (Jaundice) या लिवर प्राब्लम होना या पाचन तंत्र में कीड़े होना भी इसका एक कारण होता है-

4- कुछ लोगों में अत्यधिक पसीना आने से या कार्य पर्णाली में गड़बड़ी होने से भी ये रोग पाया जाता है-

5- मधुमेह, अतिगलग्रंथिता, एडिसन रोग या कोई और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के कारण भी पाया जाता है-

6- जलने के कारण स्किन को होने वाले नुकसान के कारण विटिलिगो (Vitiligoहोता है-

7- खून में खराबी या कैल्शियम की कमी अथवा त्वचा पर टैटू या स्टीकर का प्रयोग करवाना, स्टेरॉयड के इंजेक्शन का प्रयोग, तंग, चुस्त कपड़े पहनना भी इसका एक कारण होता है-

ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) या होने के लक्षण-


1- त्वचा पर छोटा सफेद दाग जो समय के साथ बढ़ता जाता हो या बालों का समय के पहले सफ़ेद होना या बालों का झड़ना-

2- सूर्य के प्रकाश के सामने आने पर त्वचा में उत्तेजना का होना-

3- दाग पर स्थित बालों का भी सफ़ेद हो जाना तथा ठन्डक के प्रति संवेदनशीलता, अवसाद तथा कमजोरी और थकावट-

सफ़ेद दाग (Leucoderma) में ध्यान दें-


1- कॉस्मेटिक प्रसाधन जैसे क्रीम और पाउडर के प्रयोग बंद कर दे ध्यान रहें पर्फ्यूम, डियोड्रेंट, हेयर डाई, पेस्टिसाइड को शरीर को सीधे शरीर के संपर्क में आने से बचाएं-

2- तेज केमिकल वाले साबुन और डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें पीड़ित व्यक्ति तनाव से बचे और आराम करे तथा नहाते समय अत्यधिक साबुन के प्रयोग से बचे सुबह के समय 20 से 30 मिनिट धुप का सेवन (धुप स्नान) करे-

3- खाने में लोहतत्व युक्त पदार्थ जैसे मांस, अनाज, फलीदार सब्जियां, दालें व हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करे-

4- खट्टी चीजें जैसे- नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, उड़द दाल न खाएं-

5- सफ़ेद दाग के इलाज के दौरान नमक और खारयुक्त पदार्थों का सेवन भी पूरी तरह बंद रखे-नमक, मूली और मांस के साथ दूध न पीएं तथा मांसाहार और फास्ट फूड भी कम खाएं-

6- नित्यप्रति ताजा गिलोय या एलोविरा जूस पीना चाहिए इससे आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है-

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ल्यूकोडर्मा होने पर आहार और योग

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