Upcharऔर प्रयोग

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22 जुलाई 2017

सुरण कंद यानि जिमीकंद(Jimikand)बहुउपयोगी क्यों है

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आज हम आपसे एक ऐसी सब्जी की चर्चा करने जा रहे है जो सब्जी होने के साथ-साथ एक जड़ी-बूटी भी है जी हाँ हम सुरण कंद(जिमीकंद)की बात कर रहे है वैसे तो सुरण कंद(Jimikand)एक बहुत ही आम सी सब्जी है जो जमीन के नीचे उगती है जो कि सभी को स्वस्थ एवं निरोगी रखने में मदद करती है सुरण कंद की सब्जी में अच्छी मात्रा में ऊर्जा पाई जाती है इसमें खूब सारी मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी, फोलिक एसिड और नियासिन होता है और साथ ही मिनरल जैसे पोटाशियम, आयरन, मैगनीशियम, कैल्शियम और फासफोरस भी पाया जाता है- 

Why is it Very Useful Jimikand

सुरण कंद(Jimikand)एक गुणकारी सब्जी है इसके पत्ते 2-3 फुट लंबे, गहरे हरे रंग के व हल्के हरे धब्बे वाले होते हैं इसकी पत्तियां अनेक छोटी-छोटी लंबोतरी गोल पत्तियों से गुच्छों में घिरी होती हैं इसका कंद चपटा, अंडाकार और गहरे भूरे व बादामी रंग का होता है अनेक संप्रदायों में प्याज-लहसुन के साथ-साथ सुरण से दूर रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह कामुकता बढ़ाने वाला होता है-

इसमें विटामिन ए व बी भी होते हैं यह विटामिन बी-6 का एक अच्छा स्रोत है तथा रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है इसमें ओमेगा-3 काफी मात्रा में पाया जाता है यह खून के थक्के को जमने से भी रोकता है तथा इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकलों से लड़ने में सहायक होता है इसमें पोटैशियम होता है जिससे पाचन में सहायता मिलती है और इसमें तांबा पाया जाता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में रक्त के बहाव को दुरुस्त करता है-

आयुर्वेद के अनुसार इसे उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनको किसी भी प्रकार का चर्म या कुष्ठ रोग हो-सुरण कंद अग्निदीपक, रूखा, कसैला, खुजली करने वाला, रुचिकारक विष्टम्मी, चरपरा, कफ व बवासीर रोगनाशक है इसे आप कभी-कभार इसलिए खा सकते हैं क्योंकि इसमें ओमेगा-3 होता है और इसमें भरपूर मात्रा में तांबा पाया जाता है-


सुरण कंद(Jimikand)के फायदे-


1- सुरणकंद यनि जिमीकंद दिमाग तेज करने में भी आपकी मदद करता है अक्सर बहुत सी चीजें हम भूल जाते हैं लेकिन जिमीकंद खाने से याद करने की पावर बढती है और दिमाग तेज बनता है तथा साथ ही यह अल्जाइमर रोग होने से भी बचाता है अगर आप अपना दिमाग तेज करना चाहते हैं तो इस कंद को अपने आहार में शामिल करें-

2- सुरण में पाया जाने वाला कॉपर लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में खून के फ्लो को दुरुस्त करता है और आयरन ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में मदद करता है-

3- इस कंद में अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रैडिकल्स से लड़ने में सहायक होता है तथा साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह आहार गठिया और अस्थमा रोगियों के लिये सबसे अच्छा होता है-

4- सुरण में पोटैशियम की मौजूदगी के कारण यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है इसे नियमित खाने से कब्ज़ और खराब कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो जाती है-

5- शरीर में अच्छी मात्रा में बी 6 होने से दिल की बीमारी नहीं होती है यह ब्लड प्रेशर और हार्ट फेल के लिये भी लाभदायक है और सुरण में विटामिन बी भरपूर मात्रा में पाया जाता है ये रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है-इसमें ओमेगा-3 काफी मात्रा में पाया जाता है यह खून के थक्के जमने से रोकता है-

6- सुरण का अधिकतर उपयोग बवासीर, सांस रोग, खांसी, आमवात और कृमिरोगों आदि में किया जाता है सुरण के प्रमुख गुणों में से एक इसका उपयोग अर्श अथवा बवासीर में होना है और इसी वजह से इसे अर्शीघ्न भी कहते हैं जिन लोगों को लीवर या यकृत में समस्या हो उनके लिए भी सुरण एक वरदान है इसके सेवन से वातरोग में भी फायदा होता है-

7- फाइबर से भरपूर होने के कारण सुरण के सेवन से आपको भरा हुआ महसूस होता है जिससे आप आसानी से वजन कम कर सकते हैं अगर आप भी अपना वजन कम करना चाहते हैं तो इस कंद को अपने आहार में शामिल करें-

सावधानियां-


आयुर्वेद के अनुसार सुरण उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनको किसी भी प्रकार का चर्म या कुष्ठ रोग हो-जिमिकंद ड्राई, कसैला, खुजली करने वाला, रुचिकारक, चरपरा, कफ व बवासीर रोगनाशक है इसे आप कभी-कभार इसलिए खा सकते हैं क्योंकि इसमें ओमेगा-3 होता है और इसमें भरपूर मात्रा में आयरन भी पाया जाता है
आइए अब हम आपको इसके स्वास्थ्यकर योग बनाना बताते है-

घरेलू प्रयोग-


सुरण के छोटे छोटे टुकड़े कर, इसको गाय के घी में तल लें और इसमें धनिया पावडर, जीरा पावडर, हल्दी और सेंधा नमक डालकर खाए अथवा सुरण को उबाल कर उपरोक्त मसाले डालकर खाए तथा ऊपर से छाछ पिये दूसरा कुछ अन्न ना खाएं-

यह प्रयोग कम से कम 7 दिन करने से वाग्भट्ट के अनुसार रक्तशोधक, जठराग्नि प्रदीप्त होता है वायू दोष सम होते है अर्श मस्से मिटते है दस्त साफ आते है आतें मजबूत होती है तथा अरुचि और अपचन दूर होता है-

शास्त्रोक्त  प्रयोग-


पहला प्रयोग-

सुरण कंद को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण  100 ग्राम को गाय के घी में भून लें अब इसमें खड़ी शक्कर या मिश्री 75 ग्राम मिलाकर कैप्सूलों में भर ले और यह 2-2 केप्सुन सुबह शाम भोजन के बाद गर्म जल से लेने से आमवात मिटता है-

दूसरा प्रयोग-

सुरण का छाया शुष्क चूर्ण- 320 ग्राम
चित्रक मूल चूर्ण - 160 ग्राम
काली मिर्च का चूर्ण- 20 ग्राम
पुराना गुड़- 1 किलो

उपरोक्त सबको अच्छे से मिलाकर 5 ग्राम तक कि गोलियां बना ले यह गोली खाने से सर्व प्रकार के अर्श मस्से मिटते है-

प्रस्तुति-

Dr. Chetna Kanchan Bhagt

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Upcharऔर प्रयोग-

20 जुलाई 2017

कमर दर्द-पीठ दर्द-सायटिका व घुटनो के दर्द केे लिए प्रयोग

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कई लोगों को आजकल कमर दर्द(Waist Pain)पीठ दर्द-सायटिका व घुटनो के दर्द की शिकायत हो रही है तो मै आज आपके लिए एक अभ्यंगम दर्द निवारक तैल का प्रयोग बता रही हूँ ये एक अक्सीर चिकित्सा प्रयोग है जिसके प्रयोग से तुरंत ही लाभ होता है-

Waist Pain-Back Pain-Cytica-Knee Pain Oil

इस प्रयोग में(अभ्यंगम)दर्द निवारक तेल से मसाज की जाती है और उसके बाद(पिंड स्वेदनम)कल्क पोटली से मसाज की जाती है जिससे गर्मी व तेल तथा मसाज के गुण एक साथ मिलते है कमर दर्द(Waist Pain)पीठ दर्द(Back Pain)सायटिका(Cytica)व घुटनो का दर्द(Knee Pain)तुरंत गायब हो जाता है यह प्रयोग आप घर पर आसानी से कर सकते हैं व दर्द से राहत पॉ सकते हैं-

तैल(Oil)बनाने की विधि-


लहसुन- 50 ग्राम
अदरक- 50 ग्राम
मेथी दाना- 50 ग्राम
हल्दी- 50 ग्राम
एलोवेरा गुदा- 50 ग्राम
आक के पत्ते- 20 पीस
नीलगिरी के पत्ते- 30-40 पीस
तिल तैल- 500 ml
सरसो का तेल- 500 ml


बनाने की विधि- 


सबसे पहले आप रात को मेथी ओर हल्दी को 100ml पानी मे भिगो दें फिर सुबह बड़े पात्र में दोनों तैल(तिल व सरसों)तथा भिगोई मेथी के साथ डाले तथा अदरक,लहसुन को मोटा-मोटा कूट कर डाले और एलोवेरा गुदा और दोनों पत्तो को छोटे-छोटे टुकड़े इसी तैल में डाले-

अब इस सामग्री को आप 3 घण्टे तक पड़ा रहने दें और फिर तीन घंटे के बाद धीमी आंच पर पकाएं और जब सारा पानी जल जाए और सारी सामग्री तैल में पक कर कड़क हो जाए और तेल उबल जाए तब तक आप इसे पकाएं फिर ठंडा करके साफ बड़े कपड़े से इसे छान लें और छानने पर कपड़े में जो चूरा शेष बचे उसे उसी कपड़े में पोटली बांधकर किसी पात्र में सुरक्षित रख दे-


प्रयोग विधि-


अब आप दर्द वाले स्थान पर ऊपर बनाए गए तैल से मसाज करें तथा मसाज के बाद रक्खी हुई चूरे की पोटली को तवे पर हल्का गर्म करके दर्द के स्थान पर सेक करे-

इस पोटली में बंधे औषधि चुरा ओर उसमे बचा हुआ तेल सेक के दौरान त्वचा में आसानी से जब्ज हो जाता है और दर्द निवारण होता है-


प्रस्तुति-

Dr. Chetna Kanchan Bhagt

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Upcharऔर प्रयोग-

बच्चों का देरी से बोलना या तुतलाहट(Stutter)पर अनुभूत प्रयोग

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कई लोगों के सवाल आते है कि हमारा बच्चा तुतलाता(Stutter)है जुबान लडखडाती है सही उच्चारण नहीं करता है तो वैसे तो सामान्यतः शिशु आठ से नौ महिने से बोलना शुरू कर देते है और दो ढाई साल के होने तक तो अच्छे से बोलना भी सीख जाते है किन्तु कभी-कभी किन्ही वजहों से बोलने में देरी या तुतलाहट होती है और इन समस्याओं को अगर बचपन मे सुलझाया ना जाए तो फिर  बड़े होकर उपहास का पात्र बनना पड़ता है-

Treatment of Stutter

बच्चों के तुतलापन पर एक अनुभूत प्रयोग-


हकलाना या तुतलाना जिसे Stammering या Stutter के नाम से भी जाना जाता है अगर सीधे सीधे शब्द में समझे तो हकलाने का मतलब होता है रुक-रुक कर बोलना और ये परेशानी आमतौर पर 3 से 5 साल के बच्चो में पाई जाती है बहुत लोग डॉक्टर स्पीच थेरेपी की सलाह देते है किंतु आप इस समस्या का इलाज घर पर भी कर सकते हो आज हम आपको इस पर अनुभूत योग बता रहे है जिसके प्रयोग से आपका बच्चा अवश्य ही सही प्रकार से बोलने लगेगा-

सबसे पहले आप एक पीपल का माध्यम आकार का पत्ता ले आइये और इसे धो कर उल्टा याने जिस तरफ हरी शिराएं होती है उस तरफ ताजा बनाया हुआ गर्म भात या चावल जितनी मात्रा में बच्चा खा सके रखे और ऊपर से एक चम्मच देशी घी डालकर 5 मिनिट ठंडा होने दे-

अब फिर घी और चावल को आपस में अच्छे से मिला ले ताकि उसमे पत्ते का भी अर्क मिक्स हो जाए अब आप यह चावल बच्चे को खिला दे ध्यान रहे कि आप यह प्रयोग मंगलवार और गुरुवार को ही करे इससे बच्चे की जिव्हा हल्की हो जाती है और वाचा(आवाज का खुलना)आती है तथा शब्दोच्चारण स्पष्ट और शुध्द होते है-

प्रस्तुति-

Dr. Chetna kanchan Bhagt


एक और प्रयोग-


दरअसल ये प्रयोग एक प्रकार का टोटका ही है लेकिन हर माँ बाप अपने बच्चे के लिए सब कुछ करता है इसलिए आप रविवार के दिन एक कटोरी खीर बनायें और उसे ऐसी जगह रक्खे जहाँ बहुत कौवे आते हो आपको दूर से नजर रखनी है कि कौवा कब खीर को झूठा करता है जैसे ही वो खीर को जूठा करे आप उस खीर को ला कर बच्चे को खिला दें बस आपको ये तीन या पांच रविवार ही करना पड़ेगा और आप देखेगें कि आपका बच्चा शुद्ध और स्पष्ट बोलने लगा है आगे चल कर ये बच्चे किसी भी समारोह में स्पष्टवक्ता भी हो जाते है-

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18 जुलाई 2017

मुहाँसे के लिए एक हर्बल फेसबार(Herbal facebar)बनायें

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मुहाँसे(Pimple)एक आम किंतु जटिल समस्या है और चहेरे की त्वचा(Skin)से जुड़ी होने की वजह से इसकी खास ख्याल रखने से ही इस समस्या से मुक्ति मिल सकती है युवावस्था में हार्मोन्स के बदलाव के कारण त्वचा तैलीय बनती है और वो तैलीय रोमकुपो में बाहर की धूल मिट्टी प्रदूषण से बैक्टीरिया इंफेक्शन हो जाता है इससे त्वचा पर फुंसी ओर सूजन पैदा होती है उन बैक्टीरिया को मिटाने शरीर वहां पस निर्माण करता है ओर इस तरह पिम्पल्स बनते है-


मुहाँसे के लिए एक हर्बल फेसबार(Herbal facebar)बनायें

इसलिए चहेरे पर लगाने वाले साबुन जब त्वचा का तेल सोख नही पाते हैं व इंफेक्शन को रोक नही पाते तब पिम्पल्स बार-बार उठते है आज हम आपको मुहांसों के लिए एक हर्बल फेस बार बताने जा रहे है-

सामग्री-


मुल्तानी मिट्टी- 100 ग्राम
केओलिन क्ले- 100 ग्राम
ग्लिसरीन- 15 ml
हल्दी- 5 ग्राम
चंदन- 5 ग्राम
बोरेक्स- 5 ग्राम
टी ट्री आयल- 5 ml
ऑरेंज पिल पावडर- 25 ग्राम
निम पावडर- 25 ग्राम
एलोवेरा रस- 15 ml


उपरोक्त सभी सामग्री को अच्छे से आप मिक्स करके अपनी जरूरत के हिसाब से पानी मिलाकर गाढ़ा लेप बनाए अब इसे सोप मोल्डिंग में डालकर 6-7 घण्टे के लिए सेट होने दे यानि कि सूखने पर ही आप इसे अनमोल्ड करे-


अब यह फेस बार आप चहेरा धोने के लिए यूज करें चहेरे को ऒर फेसबार को गीला करे और फेसबार को चहेरे पर हल्के-हल्के मले जब पूरे चहेरे पर परत लग जाए तब इसे 5 मिनिट चहेरे पर रखे और फिर छुडाले और पानी से धो ले इसके नियमित प्रयोग से आपके चेहरे के पिम्पल्स दूर होंगे और साथ मे आपके दाग धब्बे और कालापन भी मिटेगा तथा चेहरे की त्वचा भी नर्म और मुलायम भी होगी-

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चूहा(Rat)मारना नहीं चाहते है तो फिर ये उपाय करें

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अधिकांश घर ऐसे हैं जहां चूहों(Rat)की समस्या एक आम बात है चूहों के कारण कई बार अनाज के साथ ही कपड़ों और अन्य मूल्यवान चीजों का नुकसान हो जाता है ऐसे में काफी लोग चूहों को मारने के लिए बाजार में मिलने वाली दवा का प्रयोग करते हैं और ये दवा खाकर चूहे घर में ही इधर-उधर मर जाते हैं जिसकी बदबू पूरे घर में फैल जाती है इस समस्या से बचने के लिए यहां बताया जा रहा एक तांत्रिक उपाय करें जिससे आपके घर से चूहे(Rat)भाग जाएंगे-

चूहा(Rat)मारना नहीं चाहते है तो फिर ये उपाय करें

प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश का वाहन चूहा ही है इसी वजह से अकारण चूहों को मारने से जीव हत्या पाप भी लगता है अत: आपको कोशिश यही करना चाहिए चूहों को घर से भगा दिया जाए-उन्हें मारना उचित नहीं है-यदि चूहे घर में ही मर जाते हैं तो घर में दुर्गंध फैल जाती है जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है तथा मरे हुए चूहों की बदबू से घर का वातावरण भी प्रदुषित हो जाता है-

यदि आपके घर में चूहों के कारण अत्यधिक नुकसान होता है और उन्हें मारने से फैलने वाली बदबू से भी मुक्ति पाना चाहते हैं तो यह उपाय करें इस उपाय के अनुसार बाजार से मिट्टी का एक घड़ा या मटका लेकर आएं इसके बाद यह मटका घर लाकर इस प्रकार फोड़ें कि उसके कम से कम चार टुकड़े हो जाएं फिर मटके के चार टुकड़े लेकर काजल से उनके ऊपर चूहे(Rat)भगाने का निम्नलिखित चमत्कारी मंत्र लिखें-

चूहे(Rat)भगाने का मंत्र-


" ऊँ क्रौं क्रां "

यह मंत्र मटके के टुकड़ों पर लिखने के बाद चारों टुकड़े घर के चारों कोनों में रख दें या यदि कच्चा मकान है तो फिर गाड़ दें यह एक तांत्रिक उपाय है लेकिन इस संबंध में किसी भी प्रकार की शंका या संदेह न करें अन्यथा इसका प्रभाव निष्फल हो जाता है-

चूहे(Rat)भगाने के कुछ उपाय-


1- दो चम्मच और दो कप अमोनिया में एक-तिहाई गिलास पानी मिलाकर घोल तैयार करे घोल को उन जगहों पर रखें जहाँ से चूहे आते हैं वे इसकी खुशबू से वे भाग जाएँगे-

2- प्याज की खुशबू चूहों से बर्दाश्त नही होतीं है इसलिए उन जगहों पर प्याज के टुकड़े डाल दें जहाँ से चूहें आते हैं-

3- फिनाइल की गोलियों को उन जगहों पर रखें जहाँ से चूहें आते हैं इसकी खुशबू से चूहें वहाँ से चले जाएँगे-

4- जहाँ से चूहे आते हैं वहाँ लाल मिर्च पाउडर डाल सकते हैं इसकी खुशबू से इनका दम घुटने लगता है और ये घर से निकल भाग जाते हैं-

5- जहाँ से चूहें आते हैं वहाँ इंसान के बाल डाल देने से वे भाग जाते हैं और अगर गलती से भी ये बाल को खा लें तो उनकी मौत हो जाती हैं-

6- जिस घर में चूहों(Rat)के कारण परेशानियां रहती हैं और बार-बार वस्तुओं का नुकसान होता है उन्हें ऊंट के दाएं पैर का नाखुन का उपाय करना चाहिए-यदि कहीं से आपको ऊंट के दाएं पैर का नाखुन मिल जाए तो उसे अपने घर ले आएं और घर में जहां चूहे रहते हैं उस स्थान पर वह नाखुन रख दें-इस नाखुन को स्पर्श करते ही चूहे आपके घर से भागने लगेंगे-

चूहा क्या सन्देश देता है-


चूहे को धान्य अर्थात् अनाज का शत्रु माना जाता है और श्रीगणेश का उस नियंत्रण रहता है अत: श्रीगणेश का वाहन मूषक आपको यह संकेत देता है कि हमें भी हमारे अनाज, संपत्ति आदि को बचाकर रखने के लिए विनाशक जीव-जंतुओं पर नियंत्रण करना चाहिए-वहीं हमारे जीवन में जो लोग हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं उन पर भी पूर्ण नियंत्रण किया जाना चाहिए-ताकि जीवन की सभी समस्याएं समाप्त हो जाए और हम सफलताएं प्राप्त कर सके-इन सभी बातों को अपनाने से हमारे जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाएंगी-धन, संपत्ति और धर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं प्राप्त होंगी-घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलेगा-

चूहा बिल में छिपकर रहने वाला अंधकार प्रिय प्राणी है-इस वजह से यह नकारात्मक और अज्ञानी शक्तियों का प्रतीक भी है ये शक्तियां ज्ञान और प्रकाश से डरती हैं और अंधेरे में अन्य लोगों को हानि पहुंचाती हैं जो व्यक्ति गणेशजी की कृपा प्राप्त करना चाहता है उसे इन सभी नकारात्मक शक्तियों और भावनाओं का त्याग करना होगा तभी वह व्यक्ति ज्ञान और बुद्धि प्राप्त कर सकता है अंधकार और नकारात्मक विचारों को छोडऩे के बाद व्यक्ति को जीवन के हर कदम पर सफलता ही प्राप्त होती है जिस प्रकार चूहा हमेशा ही सर्तक और जागरुक रहता है उसी प्रकार हमें भी हर प्रकार की परिस्थितियों का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए और समस्याओं को तुरंत सुलझा लेना चाहिए-

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क्या आप दुबलेपन(Debility)से परेसान है तो वजन बढ़ाये

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अक्सर आपने लोगों को वजन घटाने या वजन प्रबंधन के बारे में बात करते हुए सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वजन बढ़ाने की बात करते हैं दरअसल वे उस वर्ग के लोग हैं जिन्हे या तो भूख बहुत कम लगती है और उनका वजन कम है या फिर जो लोग जरूरत से ज्यादा Debility हैं वजन बढ़ाने के लिए कई दवाईयां आती हैं लेकिन वजन बढ़ाने के लिए किसी दवाई का प्रयोग न करके बल्कि प्राक़तिक या आयुर्वेदिक प्रणाली का ही इस्तेमाल करना चाहिए और वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाने से किसी तरह को कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है-

क्या आप दुबलेपन(Debility)से परेसान है तो वजन बढ़ाये

आयुर्वेद के अनुसार अत्यंत मोटे तथा अत्यंत दुबले शरीर वाले व्यक्तियों को निंदित व्यक्तियों की श्रेणी में माना गया है दुबलापन(debility)एक रोग न होकर मिथ्या आहार-विहार एवं असंयम का परिणाम मात्र है-

दुबलापन(debility)रोग होने का सबसे प्रमुख कारण मनुष्य के शरीर में स्थित कुछ कीटाणुओं की रासायनिक क्रिया का प्रभाव होना है जिसकी गति थायरायइड ग्रंथि(thayrayid gland) पर निर्भर करती हैं यह गले के पास शरीर की गर्मी बढ़ाती है तथा अस्थियों की वृद्धि करने में मदद करती है तथा यह ग्रंथि जिस मनुष्य में जितनी ही अधिक कमजोर और छोटी होगी वह मनुष्य उतना ही कमजोर और पतला होता है तथा ठीक इसके विपरीत जिस मनुष्य में यह थायरायइड ग्रंथि स्वस्थ और मोटी होगी वह मनुष्य उतना ही सबल और मोटा होगा-

वैसे देखा जाए तो 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति का वजन यदि उसके शरीर और उम्र के अनुपात सामान्य से कम है तो वह दुबला व्यक्ति कहलाता है तथा जो व्यक्ति अधिक दुबला होता है वह किसी भी कार्य को करने में थक जाता है तथा उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता(Immunity)कम हो जाती है ऐसे व्यक्ति को कोई भी रोग जैसे- सांस का रोग, क्षय रोग, हृदय रोग, गुर्दें के रोग, टायफाइड, कैंसर बहुत जल्दी हो जाते हैं ऐसे व्यक्ति को अगर इस प्रकार के रोग होने के लक्षण दिखे तो जल्दी ही इनका उपचार कर लेना चाहिए नहीं तो उसका रोग आसाध्य हो सकता है और उसे ठीक होने में बहुत दिक्कत आ सकती है अधिक दुबली स्त्री गर्भवती होने के समय में कुपोषण(Malnutrition)का शिकार हो सकती है-

अत्यंत दुबले व्यक्ति के नितम्ब, पेट और ग्रीवा शुष्क होते हैं तथा अंगुलियों के पर्व मोटे तथा शरीर पर शिराओं का जाल फैला होता है जो स्पष्ट दिखता है तथा शरीर पर ऊपरी त्वचा और अस्थियाँ(Bones)ही शेष दिखाई देती हैं-

इसमें अग्निमांद्य या जठराग्नि का मंद होना ही अतिकृशता का प्रमुख कारण है अग्नि के मंद होने से व्यक्ति अल्प मात्रा में भोजन करता है जिससे आहार रस या ‘रस’ धातु का निर्माण भी अल्प मात्रा में होता है इस कारण आगे बनने वाले अन्य धातु(रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्रधातु)भी पोषणाभाव(denutrition)से अत्यंत अल्प मात्रा में रह जाते हैं जिसके फलस्वरूप व्यक्ति निरंतर कृश से अतिकृश होता जाता है इसके अतिरिक्त लंघन, अल्प मात्रा में भोजन तथा रूखे अन्नपान का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से भी शरीर की धातुओं का पोषण नहीं होता है-

वजन बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो आपका फिट रहना जरूरी है यदि आप वजन बढ़ाना चाहते हैं इसका ये अर्थ नहीं कि आप फिजीकली बिल्कुल भी सक्रिय नहीं होंगे आपको व्यायाम(exercise)करना तब भी जरूरी होगा-

वजन बढ़ाने(Weight Increase)के लिए सबसे बढि़या उपाय है आप हाई कैलोरी का खाना खाएं तथा उन खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करें जिनमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि आप जंकफूड(junk food)भारी मात्रा में खाने लगे बल्कि आपको हेल्दी और हाई कैलोरी भोजन को प्राथमिकता देनी हैं अगर आप Weight Increase हेल्दी रूप से बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सुबह का नाश्ता हेवी करना होगा- 

च्यवनप्राश भी वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधी है और यह लगभग सभी के लिए आमतौर पर भी हेल्दी रहता है इससे न सिर्फ शारीरिक उर्जा बढ़ती है बल्कि मेटाबोलिज्म(metabolism)भी मजबूत रहता है शतावरी कल्पा लेने से न सिर्फ आंखें और मसल्स अच्छी रहती है बल्कि इससे वजन भी बढ़ता है वसंतकुसुमकर रस शरीर को न सिर्फ आंतरिक उर्जा देता है बल्कि वजन को जल्दी बढ़ाने में भी लाभकारी है-

दुबलापन(Debility)होने के कारण ये है-


पाचन शक्ति में गड़बड़ी के कारण भी व्यक्ति अधिक दुबला हो सकता है-

मानसिक, भावनात्मक तनाव, चिंता की वजह से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है-

यदि शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो जाए तो व्यक्ति दुबला हो सकता है-

चयापचयी क्रिया में गड़बड़ी हो जाने के कारण व्यक्ति दुबला हो सकता है-

बहुत अधिक या बहुत ही कम व्यायाम करने से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है-

आंतों में टेपवोर्म या अन्य प्रकार के कीड़े हो जाने के कारण भी व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो सकता है-

मधुमेह, क्षय, अनिद्रा, जिगर, पुराने दस्त या कब्ज आदि रोग हो जाने के कारण व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो जाता है-

शरीर में खून की कमी हो जाने के कारण भी दुबलेपन का रोग हो सकता है-


आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपके बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के हिसाब से यह जानने कि कोशिश करें कि आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से आपका वजन क‌ितना होना चाहिए-इसका फार्मूला ये है-

बीएमआई = वजन (किलोग्राम) / (ऊंचाई X ऊंचाई (मीटर में)

आमतौर पर 18.5 से 24.9 तक बीएमआई आदर्श स्थिति है इसलिए वजन बढ़ाने के क्रम में ध्यान रखें कि आप इसके बीच में ही रहें-

दुबलापन(Debility)घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय-


1- आप अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं अध‌िक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट,राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं तथा दिन में कम से कम पांच बार थोड़ी-थोड़ी डाइट लें-

2- नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा-

3- भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं तथा दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं-बादाम,काजू का नियमित सेवन करें-

4- च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें-

5- आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी  के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है आप 3-3 ग्राम  दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें तथा वसंतकुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार  दवा है-

6- रोज सुबह 3-4  किलोमीटर  घूमने का नियम बनाएं इससे आपको ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म  भी ठीक रह्र्गा और भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये-दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है- दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें-

7- 50 ग्राम किशमिश रात को पानी में भिगो दे  सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं- दो-तीन  माह के प्रयोग से वजन बढेगा-किशमिश में अनाज की 99 % कैलोरी पायी जाती है और फाइबर भी बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है- ये शरीर के फैट को हटा के स्वस्थ कैलोरी में परिवर्तित करता है-

8- मलाई- मिल्क क्रीम में आवश्यकता से ज्यादा फैटी एसिड होता है- और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी की मात्रा होती है-मिल्क क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से Weight Increase होगा-

9- अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से प्राप्त होगा-

10- तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये-रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा आप केले को दूध में फेट के भी ले सकते है -

11- आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है-ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है-

12- नारियल का तेल को प्रयोग में लें यह आहार तेलों का समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना जाता है तथा नारियल के तेल में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी जिससे आपके वजन में वृधि होगी-

13- जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है-बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है-यह सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदद नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है-

14- मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी पाई जाती है- मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है-

15- ब्राउन राइस कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है भूरे रंग के चावल कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल होगा-

16- काजू स्वस्थ काया पाने का आसान तरीका है काजू के तेल में न केवल वजन बढ़ाने बल्कि काजू रोज़ खाने से आपकी त्वचा कोमल और बाल चमकदार दिखने लगेने-

17- जैतून के तेल में आवश्यक कैलोरी बहुत बड़ी मात्रा में पाई जाती है और यह हृदय रोग से लड़ने में भी बहुत मदद करता है-

18- अश्वगंघा अवलेह को पानी और दूध से लेने से जल्दी असर करता है और वजन प्रबंधन में भी मदद करता है इसका चूर्ण दूध, घी या शहद से लेने में भी असरकारक है-द्रकशरिष्ठा को लगातार एक महीने को गर्म और ठंडे पानी में शहद मिलाकर लेने से अच्छा रहता है इन आयुर्वेदिक औषधियों को लेने से कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा और आप आराम से अपना वजन भी बढा़ सकते हैं-

19- आप 2 चम्मच असली शहद एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट पियें  दोनो टाइम खाना खाने के आधा घँटे बाद आधा चम्मच पाचक चूर्ण पानी के साथ लें-

इसे आप बनाये इस प्रकार-


छोटी हरड, बहेडा, आँवला, सोंठ, पीपर, कालीमिर्च, कालानमक ये सब 20-20 ग्राम असली हींग दो ग्राम सब कूट पीस कर रख लें पाचक चूर्ण तैयार है ये रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले अवश्य खालें और रात को सोते समय 2 छोटी हरड का चूर्ण थोडे गुनगुने पानी से लें तथा बसा और ज्यादा मिर्च मसाले युक्त भोजन न करें-

Upcharऔर प्रयोग-

16 जुलाई 2017

आयुर्वेदिक से शारीरिक दुर्बलता(Physical weakness)दूर करें

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जो लोग शारीरिक कमजोर(Physical Weakness)रहते है उन्हें कुछ देर काम करने पर ही थकान और नींद घेर लेती है सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए जरुरी है कि व्यक्ति शारीरिक रूप से शक्तिशाली बना रहे किसी भी प्रकार की कमजोरी होने से जीवन में दुख और समस्याओं को बढ़ावा ही मिलता है यदि किसी पुरुष में कमजोरी हो तो उसका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रह सकता है-

शारीरिक दुर्बलता(Physical weakness)

शरीर में ऊर्जा की कमी के कारण दैनिक कार्य करने भी असमर्थता महसूस होती है लोग बिना परिश्रम करे भी थकान महसूस करते है अक्सर पसीना ज़्यादा निकलने तथा डिहाइड्रेशन की वजह से भी कमज़ोरी आ जाती है और यह कमजोरी दिन की शुरुआत से ही महसूस होने लगती है लेकिन जब ये समस्या हद से अधिक हो जाए तो शारीरिक कमजोरी उत्पन्न होने लगती है ये कमजोरी अनेक अन्य कारणों से भी होती है लेकिन शरीरिक रूप से और मानसिक रूप से कमजोर होना भी चिंता की बात है-

यौन कमजोरी के लिए क्या करें-


1- 100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के ही रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें और रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास दूध पी लें इसका सेवन करने से आपकी यौन शक्ति में आई दुर्बलता दूर हो जायेगी-

2- 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली आपस में लेकर चूर्ण बना लें फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और किसी कांच की शीशी में भरकर रख दें तथा 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे आपकी यौन दुर्बलता दूर होती है-

3- कच्चा गाजर या इसका जूस भी आपकी यौन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है इसलिए गाजर के मौसम में आप गाजर का नियमित प्रयोग खाने व जूस पीने में करें मौसम में सेवन गाजर आपको पूरे सालभर शक्ति देता है तथा आँखों की रोशनी के लिए भी लाभदायक है-

4- सफेद मूसली मात्रा 15 ग्राम लेकर एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से आप खुद को ज्यादा शक्तिशाली महसूस करेंगे-

आयुर्वेद योग-


वसंत मालती-

स्त्री और पुरूष् दोनों में शारीरिक क्षमता और दुर्बलता के लिए फिर वह चाहे किसी कारण भी हो आप प्रयोग कर सकते है ये स्वर्ण तथा मोती युक्त औषिधि है ये ज्वरों के पश्चात के दौर्बल्य में भी आपके लिए अत्यंत उपयोगी है-

वसंत कुसुमाकर-

वसंत कुसुमाकर बलवर्घक, कामोत्तेजक, मधुमेह नियंत्रक के रूप में प्रयुक्त होता है इसमें सोना, मोती, कस्तूरी, चांदी आदि प्रयुक्त होते हैं-

वसंत तिलकरस-

ये विशेष् रूप से पुरूष् द्वारा उपयुक्त बलवर्घक वाजीकरण तथा कामोद्दीपक, स्वर्णमुक्ता आदि प्रधान औषिधियां हैं वृहऊंगेश्वस, वंगेश्वर दोनों ही मूल्यवान दवाइयां हैं स्त्रियों  के जननांगों के रोगों, श्वेत प्रदर, कामशीतलता आदि तथा पुरुषों  के दुर्बलता शीघ्रपतन, शुक्रमेह आदि में लाभदायक दवाएं हैं-

शक्रवल्लभ रस-

पुरुषों  द्वारा अधिक सेवनीय बलवर्घक पौष्टिक उत्तेजक वाजीकर औषिधियां हैं इसमें भी सोना, मोती आदि मूल्यवान दवाएं डाली जाती हैं जो शुक्र की कमी को बढाने का कार्य भी करती है-

शतावरी मोदक-

ये प्रमुख रूप से स्त्रियों  द्वारा सेवन की जाने वाली औषिधि है यह औषधि शक्तिवर्घक स्तन रोग नाशक जननांगों के प्रदरों व गर्भाशय शिथिलता नाशक है-

शिलाजीत शुद्ध-

स्त्रियों व पुरुषों के सभी रोगों में अति उपयोगी है इसके निरंतर प्रयोग से सभी रोग होने से रोकता है तथा आने वाला बुढ़ापा भी रोकता है और आपको दीर्घजीवन देता है-

शुक्रमातृकावटी व शिवा गुटिका-

अधिकतर पुरुषों को वीर्यविकारों, मूत्ररोगों, वायुविकारों, प्रोस्टेट वृद्धि आदि में दिया जाता है शिव गुटिका स्त्रियों के कमरदर्द, थकान और मूत्र रोगों में उपयोगी है-

अन्य यौन-शक्तिवर्धक-


मदनानंद मोदक, नारी गुटिका, कौंचपाक, मूसलीपाक, मदनमोदक ये दवाइयां पुरुषों द्वारा विशेष कर यौन शक्ति वृद्धि बनाए रखने व पूरे वर्ष के लिए पुष्टि प्रदान के लिए प्रयुक्त होती है इनमें कुछ नशीले पदार्थ भांग, अफीम आदि में प्रयुक्त किए जाते हैं- 

कामेश्वर, कामचूड़ामणि, मन्मथ रस ये स्त्री व पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है शक्ति, बल सामथ्र्य तथा कार्यक्षमता वर्घक बलवर्घक दवाइयां हैं ये सामान्यत: नीम-हकीम तथा बिना चिकित्सक के परामर्श से इनका प्रयोग नौजवान लड़के ज्यादा करते हैं-

रतिवल्लभ मूंगपाक, सौभाग्यशुंठी ये दोनों दवाइयां मुख्यत: स्त्रियों  के सेवनार्थ बनी हैं प्रथम ये दवाये जननांगों को शक्ति, पुष्टि संकोच, गर्भाधान योग्य बनाती हैं- 

सोहाग सोंठ प्रसव के बाद की दुर्बलता, पीड़ा कमरदर्द, थकान, ज्वर को मिटाती है आयुर्वेद में कामोत्तेजक, स्तंभक, वाजीकरण शक्तिवर्घक तथा स्त्री के स्त्रीत्व को पुष्पित और प्रशस्त रखने वाली दवाओं की कमी नहीं है-

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