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29 जून 2015

Refined oil-रिफाइंड तेल से ह्रदय रोग-मधुमेह व कैंसर भी

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Refined oil-रिफाइंड आयल के बारे में शायद आप नहीं जानते है इसलिये बे-झिझक आप इसका प्रयोग करते है लेकिन क्या आपको पता है कि आपके स्वास्थ के लिए ये रिफाइंड तेल(Refined oil) हानिकारक है रिफाइनिग हेतु तिलहन को 200-500 डिग्री सेल्सेयस के बीच कई बार गरम किया जाता है और घातक पैट्रोलियम उत्पाद हेग्जेन का प्रयोग बीजों से 100% तेल निकालने के लिए किया जाता है तथा कई घातक रसायन कास्टिक सोड़ा, फोसफेरिक एसीड, ब्लीचिंग क्लेंज आदि मिलाए जाते है ताकि निर्माता हानिकारक व खराब बीजों से भी तेल निकाले तो उपभोक्ता को उसको पता न चले-इसलिए रिफाइंड तेलों(Refined oil)को गन्ध-रहित, स्वाद-रहित व पारदर्शी बनाया जाता है-

Refined oil-रिफाइंड तेल से ह्रदय रोग-मधुमेह व कैंसर भी


क्या होता है-

रिफाइंड, ब्लीच्ड एवं डिओडोराइन्ड की प्रक्रिया में तेल के अच्छे तत्व समाप्त हो जाते है व घातक जहर घुल जाते है तभी तो ऐसे तेल को तकनीकी भाषा में चीप कामर्शियल आर बी डी ऑॅयल कहते हैं।

शोध के अनुसार तेल को 200 डिग्री से 225 डिग्री पर आधे घंटे तक गर्म करने से उसमें एच एन ई नामक बहुत ही टोक्सिक पदार्थ बनता है यह लिनोलिक एसिड के ऑक्सीकरण से बनता है और उत्तकों में प्रोटीन और अन्य आवश्यक तत्वों को क्षति पहुँचाता है यह ऐथेरास्क्लिरोसिस, स्ट्रोक, पार्किसन, एल्जाइमर रोग, यकृत रोग आदि का जनक माना जाता है-

संतृप्त वसा को गर्म करने पर ऑक्सीकृत नहीं होते हैं और इसलिए गर्म करने पर उनमें एच एन ई भी नहीं बनते हैं इसलिए घी, मक्खन और नारियल का तेल कई दशकों से मानव स्वास्थ्य को रोगग्रस्त करने की बदनामी झेलने के बाद आज कल पुनः आहार शास्त्रियों के चेहते बने हुए हैं-

अब तो मुख्य धारा के बड़े-बड़े चिकित्सक भी स्वीकार कर चुकें हैं कि शरीर में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 का अनुपात सामान्य (1:1 या 1:2) रखना आवश्यक है-

गृहणियों को खाना बनाने के लिए रिफाइंड तेल(Refined oil)का प्रयोग नहीं करना चाहिए-कच्ची घाणी से निकला तेल ही अच्छा माना जाता है-हमें कच्ची घाणी से निकला नारियल तेल, सरसों या तिल का तेल काम में लेना चाहिए-ये तेल स्वास्थ के लिए हानिकारक नहीं होते है-

जैतून का तेल भी बढि़या होता है जो हमारे यहाँ बहुत मंहगा मिलता है-मूंगफली का तेल अच्छा माना जाता है-

Upcharऔर प्रयोग-

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