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11 मार्च 2017

होली का वैज्ञानिक महत्व और रिश्तों की प्रथा

प्रत्येक वर्ष हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा होली का त्यौहार आनन्द और उत्साह के साथ मनाया जाता है होली(Holi)का त्यौहार केवल मन को ही तरोताजा नहीं करता है बल्कि इस त्यौहार को लोग परिवार के सदस्यो और रिश्तेदारों के साथ प्यार और स्नेह वितरित करके मनातें हैं जो आपसी रिश्तों(Relations)को भी मजबूती प्रदान करता हैं-

होली का वैज्ञानिक महत्व और रिश्तों की प्रथा

होली का त्यौहार आपके जीवन मे बहुत सारी खुशियॉ और रंग भरता है आपस में रंगों के जीवन को रंगीन बनाने के कारण इसे आमतौर पर 'रंग महोत्सव' कहा गया है यह लोगो के बीच एकता और प्यार भी लाता है आप इसे "प्यार का त्यौहार" भी कह सकते है इसमें लोग अपने पुराने बुरे व्यवहार को भुला कर होली के दिन आपस में प्यार के रिश्तों में बंधने का प्रयास भी करते है होली का रंग केवल लोगों को बाहर से ही नहीं रंगता हैं बल्कि उनकी आत्मा को भी विभिन्न रंगों मे रंग देता हैं-

आज वर्तमान में धीरे-धीरे इस त्यौहार से भी लोग दूर होते जा रहे है लोगों की मानसिकता बदल रही है अब तो पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी वर्ग इसे एक गंदे त्यौहार का नाम देने में भी हिचक नहीं करते है काफी हद तक सोचा जाए तो उनकी बातों में भी सत्यता दिखती है इसका कारण शायद यही है कि इसे लोगों ने शालीनता की जगह हुड्दंग का त्यौहार बना दिया है बिना किसी की मर्जी के किसी व्यक्ति को गंदे और कीचड़ युक्त चीजों से सराबोर कर देना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता है त्यौहार की भी अपनी मर्यादाएं होती है आजकल लोग इन मर्यादाओं की सीमा से भी आगे चले जाते है यही कारण है जो कुछ लोग अब इस त्यौहार से दूर होते नजर आने लगें है-

होली रिश्तों का त्यौहार है-


होली महोत्सव फाल्गुन पूर्णिमा में मनाया जाता है होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का भी संकेत है यह ऐसा त्यौहार है जब लोग एक दूसरे से मिलते हैं हँसते हैं अपनी समस्याओं को भूल कर तथा एक दूसरे को माफ करके रिश्तों बिगड़े हुए रिश्तों को नया जीवन देने का काम करते है-

होली बहुत सारी मस्ती और उल्लास की गतिविधियों का त्यौहार है जो सभी लोगों को एक ही स्थान पर बाँधता है हर किसी के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान होती है आनंद विभोर होकर एक दूसरे को रंगों से सराबोर करके गले लग कर आपसी प्रेम को बढाने का प्रयास करते है तथा अपनी खुशी को दिखाने के लिए वे नए कपड़े पहनते हैं-

आज लोगों में दिनों-दिन इर्ष्या व कटुता की हीन भावना प्रबल रूप से देखने को मिलने लगी है अब आज मुझे चालीस वर्ष पीछे का होली त्यौहार याद करके रोमांच हो जाता है जब इस दिन का बड़ी बेसब्री से इन्तजार हुआ करता था-सुबह से ही रंग घोलने का कार्यक्रम चलता था बड़े-बूढ़े की अपनी ही एक अलग टोली हुआ करती थी जहाँ भांग की घुटाई का कार्यक्रम होता था-सभी एक ही मस्ती में होली फाग में मस्त हो जाते थे-महिलाए भी अपनी टोली द्वार-द्वार ले जाकर गायन और संगीत से रंगों का आदान-प्रदान किया करती थी -बच्चों की टोली का उल्लास तो देखते ही बनता था-

होली के रंगों से सराबोर हो जाना ही मूलत: इसी बात का प्रतीक है कि हम अपने परिवार में, परिचितों में और दोस्तों में इस तरह घुलमिल जाएं कि चेहरे हमारी पहचान नहीं हो बस अगर पहचान हो तो केवल हमारी भावनाएं ही हमारी पहचान बन जायें-

यही हमारे रिश्ते ही हमें जीने की ऊर्जा और आत्मिक बल देते हैं बाकी सारे त्योहारों पर मुख्यत: पूजा-पाठ, कर्मकांड, दर्शन और भक्ति प्रमुख होते हैं लेकिन होली पर हम मंदिर नहीं जाते है सिर्फ अपनों के घर जाते हैं और उन्हें अपने घर पर बुलाते हैं तथा रंगों में भिगोते हैं-होली पर पूजा-पाठ से ज्यादा हंसी-ठिठौली का महत्व है लेकिन आधुनिक समय में यही रिश्ते अपने अर्थ खोते जा रहे हैं व्यस्तता के दौर में हम अपनों से दूर हो रहे हैं ऐसे में होली जैसे त्योहार हमें फिर से अपनों के नजदीक आने का मौका देते हैं-आज युवा स्मार्ट तरीके से होली का आनंद लेने लगा है जिसमे शिस्टाचार कम और हुडदंग जादा नजर आने लगा है-

होली का तात्पर्य क्या है-


होली शब्द "होला" शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है नई और अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए भगवान की पूजा करना-होली के त्योहार पर होलिका दहन ये इंगित करता है कि जो भगवान के प्रिय लोग है उन्हे पौराणिक चरित्र प्रहलाद की तरह बचा लिया जाएगा और जो भगवान के लोगों से तंग आ चुके है उन्हे एक दिन पौराणिक चरित्र होलिका की तरह दंडित किया जाएगा-

ब्रज की होली-


होली महोत्सव मथुरा और वृंदावन में एक बहुत प्रसिद्ध त्यौहार है अति उत्साही लोग मथुरा और वृंदावन में विशेष रूप से होली उत्सव को देखने के लिए इकट्ठा होते हैं माना जाता है कि होली का त्यौहार राधा और कृष्ण के समय से शुरू किया गया था-मथुरा में लोग मजाक-उल्लास की बहुत सारी गतिविधियों के साथ होली का जश्न मनाते है उनके लिए होली का त्योहार प्रेम और भक्ति का महत्व रखता है जहां अनुभव करने और देखने के लिए बहुत सारी प्रेम लीलाऍ मिलती है-

मथुरा के पास होली का जश्न मनाने के लिए एक और जगह है गुलाल-कुंड-जो की ब्रज में है यह गोवर्धन पर्वत के पास एक झील है जहाँ होली के त्यौहार का आनंद लेने के लिये बड़े स्तर पर एक कृष्ण-लीला नाटक का भी आयोजन किया जाता है-ब्रज क्षेत्र में होली के त्यौहार को मनाने के पीछे राधा और कृष्ण का दिव्य प्रेम है ब्रज में लोग होली दिव्य प्रेम के उपलक्ष्य में को प्यार के एक त्योहार के रूप में मनाते हैं-

होली का सामजिक महत्व-


मान्यता है कि लोगों को अपने सभी पापों और समस्याओं को जलाने के लिए होलिका दहन के दौरान होलिका की पूजा करते हैं और बदले में बहुत खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं होली महोत्सव मनाने के पीछे गाँव के लोगों में आज भी एक सांस्कृतिक धारणा है जब लोग अपने घर के लिए खेतों से नई फसल लाते है तो अपनी खुशी और आनन्द को व्यक्त करने के लिए होली का त्यौहार मनाते हैं-

होली के त्यौहार का अपने आप में सामाजिक महत्व है यह समाज में रहने वाले लोगों के लिए बहुत खुशी लाता है यह सभी समस्याओं को दूर करके लोगों को बहुत करीब लाता है उनके बंधन को मजबूती प्रदान करता है तथा यह त्यौहार दुश्मनों को आजीवन दोस्तों के रूप में बदलता है साथ ही उम्र, जाति और धर्म के सभी भेदभावो को हटा देता है।

एक दूसरे के लिए अपने प्यार और स्नेह दिखाने के लिए, वे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए उपहार, मिठाई और बधाई कार्ड देते है जिससे यह त्यौहार संबंधों को पुन: जीवित करने और मजबूती के टॉनिक के रूप में कार्य करता है जो एक दूसरे को महान भावनात्मक बंधन में बांधता है-

होली का वैज्ञानिक महत्व- 


होली के त्यौहार पर होलिका दहन की परंपरा है वैज्ञानिक रूप से यह वातावरण को सुरक्षित और स्वच्छ बनाती है क्योंकि सर्दियॉ और वसंत का मौसम के बैक्टीरियाओं के विकास के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान करता है इसलिए पूरे देश में समाज के विभिन्न स्थानों पर होलिका दहन की प्रक्रिया से वातावरण का तापमान 145 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ जाता है जो बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक कीटों को मारता है होलिका की आग को घर में लाने की परम्परा भी है जो घर के वातावरण में कुछ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करने और साथ ही मकड़ियों, मच्छरों को या दूसरों को कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए घरों को साफ और स्वच्छ में बनाने की एक परंपरा है-

होली की आप सभी को हार्दिक शुभ-कामनाएं ...!


Satyan Srivastava
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Upcharऔर प्रयोग-

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’होली के रंगों में सराबोर ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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    1. धन्यवाद प्रस्तुती को ब्लॉग बुलेटिन में सम्मलित करने के लिए आभार

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